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कोरोना वायरस से कितनी बदलेगी देश की राजनीति की तस्वीर

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वर्तमान हालात में देश में जो सकारात्मक राजनीति की शुरुआत हुई है वो आगे जारी रहेगी. सवाल लाजमी है क्योंकि जैसे ही कोराना का सकंट खत्म होगा देश में चुनावी राजनीति शुरू हो जाएगी.

Last updated on: April 14, 2020, 5:13 PM IST
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कोरोना वायरस से कितनी बदलेगी देश की राजनीति की तस्वीर
संसद की स्थायी समिति की बैठक टाल दी गयी है.
दुनिया भर में कोरोना का कहर जारी है. कोरोना से लड़ने के लिए देश भर में 3 मई तक के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है, क्योंकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री ये मानते हैं कि कोरोना से लड़ने को लॉकडाउन को छोड़ दूसरा कोई रास्ता नहीं है. कोरोना से जंग के दौरान देश की राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव भी दिखा रहा है. साल के 365 दिनों एक दूसरे की आलोचना करने वाले राजनीतिक दल इस बार संयम से काम ले रहे हैं.

कोरोना से जंग के दौरान एक-दो मौके को छोड़ दे तों हर मौके पर राजनीतिक दल प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े नजर आए. यहां तक कि कांग्रेस समेत अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के मुख्यमंत्रियों ने पार्टी लाइन से आगे बढ़कर केन्द्र सरकार की हर बात मानी और वह प्रधानमंत्री के साथ संकट की इस घड़ी में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने भी अलग-अलग मौके पर पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर मुख्यमंत्रियों की प्रशंसा की

क्या देश में शुरू होगा सकारात्मक राजनीति का दौर
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वर्तमान हालात में देश में जो सकारात्मक राजनीति की शुरुआत हुई है वो आगे जारी रहेगी. सवाल लाजमी है क्योंकि जैसे ही कोराना का सकंट खत्म होगा देश में चुनावी राजनीति शुरू हो जाएगी. सबसे पहले बिहार और उसके बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पक्ष-विपक्ष आमने सामने होंगे. पश्चिम बंगाल का राजनीतिक तापमान तो हमेशा सामान्य से काफी ऊपर रहता है. साफ है जैसे-जैसे देश कोरोना संकट से बाहर निकलकर चुनाव की ओर जाएगा देश में सकारात्मक राजनीतिक का जो माहौल बना है धीरे-धीरे खत्म होने लगेगा.
आखिर देश में क्यों नहीं हो रही है सकारात्मक राजनीति
दरअसल इस देश में राजनीतिक दलों और नेताओं के लगातार आमने सामने आने के कई कारण हैं. देश की राजनीतिक हालात को देखें तो हर साल कोई न कोई चुनाव जरूर होता है. 2018 के शुरुआत में जहां कर्नाटक विधानसभा का चुनाव हुए वहीं साल के अंत में जहां तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए. 2019 में लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनाव हुए. 2020 में दिल्ली का चुनाव हो चुका है और बिहार विधानसभा का चुनाव होना है. 2021 में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, 2022 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं यानी हर साल कोई न कोई महत्वपूर्ण चुनाव होना है. ये कैलेंडर सिर्फ महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनाव का है, अगर सभी छोटे राज्यों और देश भर में होने वाले पंचायत और नगर निकाय के चुनावो को जोड़ दें तो हर वक्त देश के किसी हिस्से में कोई न कोई चुनाव चलता रहता है. बात जब चुनाव की होगी तो राजनीतिक दल आमने-सामने होंगे ही और आरोप-प्रत्यारोप लगेंगे ही. ऐसे माहौल में हम सकारात्मक राजनीतिक की बात कैसे कर सकते हैं.

कैसे होगी इस देश में सकारात्मक राजनीतिराजनीति में जिस तरह सत्ता पक्ष का होना जरूरी है उसी तरह विपक्ष का भी होना जरूरी है. विपक्ष को सरकार की आलोचना का भी पूरा अधिकार है और इस आलोचना को ही लोकतंत्र की धुरी माना जाता है लेकिन कभी कभी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार और आलोचना की भाषा इतनी खराब हो जाती है कि उसको सही नहीं कहा जा सकता. चुनावों के दौरान तो अक्सर ऐसा होता है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी लगातार राज्य के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ कराने की वकालत करते रहते हैं, एक देश और एक चुनाव राजनीति में सकारात्मक सोच आगे बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत पहल हो सकती है. क्योंकि जिस तरह वर्तमान दौर में राजनीतिक दल या ये कहा जाय कि राज्यों की सत्ता में स्थापित अलग-अलग पार्टियां देश हित में एकजुटता दिखा रही हैं अगर ये एक जुटता 5 साल के सरकार के कार्यकाल में कम से कम 4 साल देखने को मिले तो संसद को फैसले लेने में आसानी होगी जिसका असर देश के विकास के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की स्थिति को मजबूत करने में पड़ेगा.

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अनिल राय

अनिल रायएडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट)

अनिल राय भारत के प्रतिष्ठित युवा पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 18 साल से ज्यादा का अनुभव है. अनिल राय ने ब्रॉडकास्ट मीडिया और डिजिटल मीडिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया है. अनिल राय ने अपना करियर हिंदुस्तान समाचार पत्र से शुरू किया था और उसके बाद 2004 में वह सहारा इंडिया से जुड़ गए थे. सहारा में आपने करीब 10 वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य किया और फिर समय उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में चैनल प्रमुख नियुक्त हुए. इसके साथ ही वह न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में तीन वर्ष तक मैनेजिंग एडिटर रहे हैं. फिलहाल आप न्यूज़ 18 हिंदी में एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट) के तौर पर कार्य कर रहे हैं.

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First published: April 14, 2020, 5:13 PM IST
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