OPINION: कोरोना के बाद कैसी होगी हमारी दुनिया!

दुनियाभर से मॉल खुलने की तस्वीरें सामने आ रही हैं जहां लोग खरीदारी कर रहे हैं, दुनिया के उन हिस्सों में जहां मॉल खुले वहां लोग सोशल डिस्टेंसिंग का ठीक से पालन करते दिखे, लेकिन भारत में शराब की दुकान खुलने का अनुभव तो सरकार को उल्टा पड़ रहा है.

Source: News18Hindi Last updated on: May 8, 2020, 4:09 PM IST
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OPINION: कोरोना के बाद कैसी होगी हमारी दुनिया!
गृह मंत्रालय ने कंटेनमेंट जोन को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में धर्मस्थलों, मॉल, रेस्टोरेंट और होटल खोलने की अनुमति दी है (PTI)
एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria) के बयान के बाद ये चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में कोरोना हमारे जीवन पर प्रभाव डालता रहेगा. फिलहाल जो हालात हैं वो बताते हैं कि हमें कोरोना के साथ ही जीना सीखना पड़ेगा, क्योंकि कोरोना के संक्रमण की रफ्तार भले ही धीरे धीरे कम हो जाए और दवा की खोज के बाद कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भले ही कम हो जाए, लेकिन आने वाले समय में कोरोना पूरी तरह खत्म हो जाएगा इसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं है. ऐसे में यदि कोरोना के बाद बाजार, मॉल, दुकानें और हवाई यात्रा खुलेंगे, तो हमारी दुनिया कैसी होगी, यह सवाल सबके मन में है.

मॉल, मल्टीप्लेक्स खोलने के लिए कितने तैयार हैं हम
दरअसल जिस तरह केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने धीरे-धीरे ऑफिस दुकान और फैक्ट्री खोलने का आदेश दिया है उसके बाद यह उम्मीद जगी है कि मई के अंत में या जून के दूसरे सप्ताह तक मॉल, हवाई यात्रा, ट्रेन यात्राओं में कुछ छूट दी जा सकती है. सरकार स्कूल, कॉलेज, पूजा पाठ के स्थान और शादियों में आने वाली भीड़ पर भले ही कुछ समय तक रोक बनाए रखें, लेकिन सिनेमा देखने, मॉल जाने और यात्राएं करने से रोकना संभव नहीं है, क्योंकि जिस तरह उद्योग हमारी आर्थिक गतिविधि का हिस्सा है उसी तरह यात्रा और मनोरंजन देश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं.

सरकार पर धीरे-धीरे ही सही इन इलाकों में भी छूट देने का दबाव है, दुनियाभर से मॉल खुलने की तस्वीरें सामने आ रही हैं जहां लोग खरीदारी कर रहे हैं, दुनिया के उन हिस्सों में जहां मॉल खुले वहां लोग सोशल डिस्टेंसिंग का ठीक से पालन करते दिखे, लेकिन भारत में शराब की दुकान खुलने का अनुभव तो सरकार को उल्टा पड़ रहा है. भले ही आर्थिक मजबूरी में सरकार को शराब की दुकानों को खोलना पड़ा लेकिन शराब की दुकानों से जो तस्वीरें आ रही हैं वह बता रही हैं कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं, इसीलिए शराब की दुकानें खोलने का विरोध भी हो रहा है. अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार यात्राएं, मॉल, सिनेमा हॉल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट खोलती है तो क्या लोग इसी तरह का व्यवहार करेंगे जैसा कि शराब की दुकानों पर कर रहे हैं या कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करेंगे.


मॉल और मल्टीप्लेक्स ने बनाई रणनीति, बढ़ जाएंगे टिकट के दाम
दुकानें और फैक्ट्रियां खुलने के बाद मॉल और मल्टीप्लेक्स भी जल्दी खुलने की तैयारी में हैं और उसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. देश के एक बड़े मल्टीप्लेक्स से जुड़े अधिकारी का दावा है कि सिनेमा हॉल या मल्टीप्लेक्स फिलहाल कोरोना के बाद खुलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. हालांकि वो किसी बड़े बदलाव से इनकार करते हैं उनका कहना है कि इतने मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल में फिलहाल सीटों की सेटिंग बदलना तो संभव नहीं है क्योंकि इसमें समय के साथ-साथ एक बड़ी पूंजी का निवेश होगा और आने वाले समय में देश का आम नागरिक मनोरंजन पर अपनी कमाई का कितना हिस्सा खर्च करेगा इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. ऐसे में मल्टीप्लेक्स फिलहाल अपनी पुरानी सिटिंग अरेंजमेंट के साथ खोलने की तैयारी में हैं. नाम न छापने की शर्त पर उस अधिकारी का दावा है कि अगर सरकार से इजाजत मिलेगी तो हम तीन सीटें या 4 सीटों के बाद एक सीट अपनी टिकट की बुकिंग करेंगे, हालांकि इस तरह से सिनेमा हॉल चलाने में मल्टीप्लेक्स मालिकों की लागत बढ़ जाएगी. आने वाले समय में सिनेमा के टिकट में भारी बढ़त देखने को मिलेगी. साथ ही कमाई से फिल्म बनाने वाले का हिस्सा भी कम किया जाएगास्कूलों ने भी शुरू की तैयारी, ये होगा फार्मूला
कुछ यही हाल स्कूलों का भी होना है नोएडा के एक स्कूल संचालक का कहना है कि फिलहाल सरकार की कोई गाइडलाइन नहीं आई है इसलिए हम स्कूल खोलने के बारे में कोई वक्तव्य नहीं दे सकते हैं लेकिन आने वाले समय में यदि कोरोना रहता है और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ स्कूल खोलना पड़ेगा तो हम एक क्लास में छात्रों की संख्या कम करेंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की बजाय हम स्कूल को दो शिफ्ट में चलाएंगे और एक क्लास के आधे बच्चों को एक शिफ्ट में बुलाया जा सकता है और उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए दूर दूर बैठाया जा सकता है इससे ट्रांसपोर्ट का खर्चा बढ़ेगा, वर्तमान में जब सरकार ने स्कूल की फीस बढ़ाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है. स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक भी पैसा खर्च करने को तैयार नहीं हैं. स्कूल संचालकों का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करने के लिए स्कूलों, बच्चों के पढ़ाई के घंटे कम किए जा सकते हैं. जरूरत पड़ी तो कुछ क्लास ऑनलाइन चल सकती हैं. उत्तर भारत में स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं ऐसे में स्कूल के पास पर्याप्त समय है और वह अपनी अंतिम रणनीति जून के अंत में या सरकार के स्कूल खुलने के आदेश के बाद बना सकते हैं

 

सभी तैयारियों के बाद सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
कोरोना संकट के बाद सबसे बड़ी चुनौती एयरपोर्ट, मेट्रो, मॉल और भीड़ वाली जगहों पर सुरक्षा को लेकर होगी. देश में आमतौर पर एयरपोर्ट से लेकर मेट्रो मॉल और हर भीड़ वाली जगह पर सुरक्षा के लिए मेटल डिटेक्टर और बॉडी फ्रिसकिंग का ही प्रयोग होता है. दुनिया के विकसित देश बॉडी फ्रिसकिंग की जगह बॉडी स्कैनर का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन भारत में इसका प्रयोग न के बराबर है. मुम्बई एयरपोर्ट पर इसका प्रयोग किया जा रहा है ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोरोना के बाद हर जगह सिर्फ सुरक्षा के लिए बॉडी स्कैनर का प्रयोग किया जाएगा, लेकिन जानकार फिलहाल इसे उपयोगी नहीं मानते. नाम न छापने की शर्त पर मॉल से जुड़े एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि महिलाओं को बॉडी स्कैनर से गुजरने से मजबूर नहीं कर सकते.

दूसरा मंदी के बाद की स्थिति नहीं है कि वो बॉडी स्कैनर लगा सकें. 3 महीने बाद मॉल खुलेंगे तो आने वाली भीड़ के बाद तय होगा कि मॉल अपने इंफ़्रास्ट्रक्चर पर कितना खर्च कर सकते हैं क्योंकि बाजार में एक बॉडी स्कैनर की कीमत 1 करोड़ से ज्यादा होती है और हर मॉल में 10 से 12 गेट होते हैं और हर मॉल पर 2 स्कैनर लगाने पर 20 से 25 करोड़ का खर्च आएगा. बात करें एयरपोर्ट की, तो देशभर में सिर्फ दिल्ली एयरपोर्ट पर अभी तक ट्रायल के आधार पर बॉडी स्कैनर लगाया गया है. मेट्रो और भारतीय रेल में फिलहाल कहीं भी स्कैनर नहीं है. ऐसे में सुरक्षा बलों के सामने आने वाले समय में लोगों की तलाशी लेना और लोगों पर नजर रखना बड़ी चुनौती होगी क्योंकि भारत जैसे बड़े और बड़ी जनसंख्या वाले देश में अपराध के साथ साथ हमेशा आतंकी घटनाओं की आशंका बनी रहती है.

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अनिल राय

अनिल रायएडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट)

अनिल राय भारत के प्रतिष्ठित युवा पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 18 साल से ज्यादा का अनुभव है. अनिल राय ने ब्रॉडकास्ट मीडिया और डिजिटल मीडिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया है. अनिल राय ने अपना करियर हिंदुस्तान समाचार पत्र से शुरू किया था और उसके बाद 2004 में वह सहारा इंडिया से जुड़ गए थे. सहारा में आपने करीब 10 वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य किया और फिर समय उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में चैनल प्रमुख नियुक्त हुए. इसके साथ ही वह न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में तीन वर्ष तक मैनेजिंग एडिटर रहे हैं. फिलहाल आप न्यूज़ 18 हिंदी में एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट) के तौर पर कार्य कर रहे हैं.

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First published: May 8, 2020, 4:01 PM IST
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