लॉकडाउन में ढील: आया असली परीक्षा का समय, आत्मसंयम होगा हमारा प्रमुख अस्त्र!

सरकार ने लॉकडाउन-3 (Lockdown 3.0) का ऐलान कर दिया है और ये 17 मई तक चलेगा. ये उतना सख्त नहीं होगा, जितना लॉकडाउन-1 और लॉकडाउन-2 थे. ऐसे में अब जिम्मेदारी देश के आम लोगों पर ज्यादा बढ़ जाती है.

Source: News18Hindi Last updated on: May 3, 2020, 12:57 PM IST
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लॉकडाउन में ढील: आया असली परीक्षा का समय, आत्मसंयम होगा हमारा प्रमुख अस्त्र!
(AP Photo/Ajit Solanki)
कोरोना संकट (Coronavirus) के इस दौर में अर्थव्यवस्था के दबाव में सरकार ने रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में कई छूट का ऐलान किया है. केंद्र सरकार के आदेश को देखें, तो ग्रीन जोन तो करीब-करीब पूरा ही खोल दिया गया है. ऐसे में अब सरकार के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी अब असली परीक्षा का समय आ गया है. पहले दो लॉकडाउन के दौरान हम संक्रमण की रफ्तार को काफी हद तक धीमा रखने में कामयाब रहे, लेकिन देश के बड़े शहरों में ये रफ्तार उतनी काबू में नहीं आई, जितनी होनी चाहिए. अब जब फैक्ट्रियां, दुकानें और बाजार खुलने लगेंगे, तो संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा और इन हालात में संक्रमण को कैसे रोका जाए, यही अग्निपरीक्षा होगी.

लॉकडाउन का पालन करने में कई देशों से आगे
सरकार ने लॉकडाउन-3 का ऐलान कर दिया है और ये 17 मई तक चलेगा. ये उतना सख्त नहीं होगा, जितना लॉकडाउन-1 और लॉकडाउन-2 थे. ऐसे में अब जिम्मेदारी देश के आम लोगों पर ज्यादा बढ़ जाती है. लॉकडाउन-1 और लॉकडाउन-2 में नियमों का पालन करने में हम दुनिया के और देशों से बेहतर रहे हैं. एक अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच लोगों की फोन लोकेशन के हिसाब से गूगल ने एक रिसर्च में पाया है कि भारत के लोग जापान, अमेरिका, स्पेन, ब्रिटेन और फ्रांस के लोगों से ज्यादा घरों में रहे. अन्य देशों की तुलना में भारत में करीब 22 फीसदी ज्यादा लोग घर में रहे. इस मामले में भारत से ज्यादा सिंगापुर में 28 फीसदी लोग घर में रहे.

भारत में इस दौरान रेस्टोरेंट जाने वालों की संख्या में 86 फीसदी की कमी आई, जबकि किराना की दुकान पर जाने वाले 51 फीसदी से ज्यादा कम हुए, पार्क जाने वाले 68 फीसदी घटे, जबकि यात्रा में 66 फीसदी की गिरावट आई. इस दौरान दफ्तर जाने वालों की संख्या 42 फीसदी कम हुई यानि कोरोना के संकट में भारत के लोगों ने दुनिया के ज्यादातर देशों के नागरिकों से ज्यादा संयम से काम लिया.
...लेकिन बिहार बना चिंता का कारण
देशभर में देखें तो बिहार के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. देश में जहां आम समय की तुलना में 22 फीसदी ज्यादा लोग घर में रहे, वहीं बिहार में सिर्फ 13 फीसदी लोग घर में रुके. इस दौरान बिहार में रेस्टोरेंट जाने वालों की संख्या पहले के मुकाबले 29 फीसदी कम हुई, जबकि किराना दुकान जाने वालों की संख्या 22 फीसदी ही कम हुई. यात्रा पर जाने वालों की संख्या 57 फीसदी कम हुई. ऑफिस जाने वालों की संख्या 24 फीसदी ही कम हुई, जबकि देश मे इससे कहीं ज्यादा रही. पार्क जाने वालों की संख्या सिर्फ 23 फीसदी ही कम हुई, जबकि देश में इसका औसत 68 फीसदी रहा. ऐसे में जब देश के अलग-अलग हिस्सों से मजदूर अब बिहार पहुंच रहे हैं, तो नियमों का सख्ती से पालन कराना ही होगा, क्योंकि इन सबकी जांच होने तक खतरा टला नहीं है.

यूपी में पालन तो हुआ लेकिन चुनौती बाकी हैबात करें उत्तर प्रदेश की, तो यहां 1 अप्रैल से 26 अप्रैल तक रेस्टोरेंट जाने वाले 84 फीसदी घटे हैं, तो किराना दुकान पर जाने वालों के आंकड़े में 42 फीसदी की कमी आई है. उत्तर प्रदेश में पार्क जाने वालो की संख्या राष्ट्रीय औसत के मुकाबले 4 फीसदी कम यानि 64 फीसदी रही. यात्रा पर जाने वालों में 72 फीसदी की कमी देखी गई, तो ऑफिस जाने वाले 39 फीसदी कम हुए. हालांकि घर पर रहले वाले पहले के मुकाबले सिर्फ 20 फीसदी बढ़े हैं. उत्तर प्रदेश में काफी जिले ग्रीन जोन में हैं. ऐसे में उन जिलों में छूट भी दी गई है और जिले में अप्रवासी मजदूर भी आए हैं. साफ है भले ही उत्तर प्रदेश के लोग लॉकडाउन के नियमों का ठीक से पालन कर रहे हैं, लेकिन यहां भी खतरा कम नहीं है. भले ही सरकार ने छूट दी हो, लेकिन ये समय आत्मनियंत्रण का है.

दिल्ली लॉकडाउन में अव्वल, कोरोना रोकने में फेल
बात करें दिल्ली की, तो दिल्ली में इस दौरान करीब 91 फीसदी कम लोग रेस्टोरेंट गए, जबकि किराना की दुकान जाने वालों में 70 फीसदी की कमी आई. पार्क जाना तो करीब-करीब लोगों ने बंद ही कर दिया. पार्क जाने वालों के आंकड़े में 98 फीसदी की गिरावट आई. इसी तरह 82 फीसदी कम लोग यात्रा पर गए. 68 फीसदी कम लोग दफ्तर गए. घरों पर आम दिनों से 25 फीसदी ज्यादा लोग रहे, लेकिन दिल्ली में जिस तरह का जनसंख्या घनत्व है और जिस तेजी से कोरोना का संक्रमण बढ़ा है, फिलहाल दिल्ली रेड जोन से बाहर नहीं निकल पा रही है. ऐसे में इन आंकड़ों को 100 फीसदी के आस-पास लाने की जरूरत है.

आत्मसंयम ही है कोरोना से लड़ने का हथियार
आंकड़े बता रहे हैं कि दोनों लॉकडाउन में लोग घरों में रहे, लेकिन जब सरकार ने देश के एक तिहाई इलाके में छूट दे दी है, तो आम नागरिकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, क्योंकि अब कोरोना से कोई बचा सकता है, तो वह है आत्मसंयम. क्योंकि हमारे पास बाहर जाने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन अब हमें घर रहने के कारण तलाशने होंगे. अगर बाहर जाना मजबूरी हुई, तो सरकार के सभी आदेशों का पालन करने के साथ-साथ मास्क लगाने, हाथ धोने और सैनेटाइजर का इस्तेमाल करने, दो गज की दूरी जैसे एहतियात के उपाय जरूर अपनाने होंगे.

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ब्लॉगर के बारे में
अनिल राय

अनिल रायएडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट)

अनिल राय भारत के प्रतिष्ठित युवा पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 18 साल से ज्यादा का अनुभव है. अनिल राय ने ब्रॉडकास्ट मीडिया और डिजिटल मीडिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया है. अनिल राय ने अपना करियर हिंदुस्तान समाचार पत्र से शुरू किया था और उसके बाद 2004 में वह सहारा इंडिया से जुड़ गए थे. सहारा में आपने करीब 10 वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य किया और फिर समय उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में चैनल प्रमुख नियुक्त हुए. इसके साथ ही वह न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में तीन वर्ष तक मैनेजिंग एडिटर रहे हैं. फिलहाल आप न्यूज़ 18 हिंदी में एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट) के तौर पर कार्य कर रहे हैं.

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First published: May 3, 2020, 12:46 PM IST
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