आखिर क्यों त्याग की प्रतिमूर्ति हैं राम...

वनवास के बाद लौटकर राजा बनने के बाद राम ने जो त्याग किए, वह त्याग राम के जीवन के पहले किए गए दोनों त्याग से बड़े थे. पहला परित्याग पत्नी सीता का और दूसरा अपने सबसे प्रिय भाई लक्ष्मण का.

Source: News18Hindi Last updated on: May 3, 2020, 10:43 AM IST
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आखिर क्यों त्याग की प्रतिमूर्ति हैं राम...
भगवान राम की एक बहन भी थीं.
मर्यादा पुरुषोत्तम राम (Lord Ram) त्याग की प्रतिमूर्ति हैं. जीवन के हर पड़ाव पर उन्होंने त्याग किया है. बचपन में ही गुरु विश्वामित्र के यज्ञ को पूरा कराने के लिए महलों का त्यागकर वन-वन भटके. उसके बाद जब राज संभालने का मौका आया, तो पिता का वचन पूरा करने के लिए पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण समेत 14 वर्षों के वनवास पर निकल पड़े. इसी कारण उन्हें आदर्श पुत्र कहा जाता है, लेकिन इस वनवास के बाद लौटकर राजा बनने के बाद राम ने जो त्याग किए, मेरी नजर में वह त्याग राम के जीवन के पहले किए गए दोनों त्याग से बड़े थे. पहला परित्याग पत्नी सीता का और दूसरा अपने सबसे प्रिय भाई लक्ष्मण का.

राजा के लिए त्याग कितना जरूरी
राम ने राजा बनने के बाद जो 2 त्याग किए, उनसे एक राजा की मजबूरी को समझा जा सकता है. अपनी प्राणों से प्रिय अर्द्धांगिनी सीता का त्याग भगवान राम ने सिर्फ अयोध्या की जनता को ये विश्वास दिलाने के लिए किया कि राजा को प्रजा की हर बात पर भरोसा है. भगवान राम ने केवल राजधर्म के पालन के लिए जीवन का सबसे बड़ा त्याग कर दिया. रामायण के प्रसंग को देखें, तो भगवान राम से पहले माता सीता ने ही राम के राजधर्म को बचाने के लिए खुद ही वन जाने का फैसला कर लिया था. और जब सीता जैसी स्त्री कोई फैसला कर ले तो उसे कौन रोक सकता है.

जनता का हित और जनता से किए वादे ही हैं राजा के जीवन का आधार
कुछ इसी तरह की परिस्थितियों में भगवान राम को अपने सबसे प्रिय छोटे भाई लक्ष्मण का त्याग करना पड़ा. महर्षि दुर्वाशा के श्राप से अयोध्या को बचाने के लिए लक्ष्मण ने राम और काल की वार्ता के बीच में जाने का फैसला कर लिया. इसका परिणाम यह हुआ कि राजा राम ने उन्हें त्यागने का फैसला कर लिया. जिसके बाद लक्ष्मण ने अपने प्राण त्याग दिए. इन दोनों प्रसंगों से साफ है कि राजा के लिए परिवार से ज्यादा जनता और खुद से ज्यादा अपना वचन अर्थात वादे की मर्यादा का पालन करना जरूरी है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार) 
ब्लॉगर के बारे में
अनिल राय

अनिल रायएडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट)

अनिल राय भारत के प्रतिष्ठित युवा पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 18 साल से ज्यादा का अनुभव है. अनिल राय ने ब्रॉडकास्ट मीडिया और डिजिटल मीडिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया है. अनिल राय ने अपना करियर हिंदुस्तान समाचार पत्र से शुरू किया था और उसके बाद 2004 में वह सहारा इंडिया से जुड़ गए थे. सहारा में आपने करीब 10 वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य किया और फिर समय उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में चैनल प्रमुख नियुक्त हुए. इसके साथ ही वह न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में तीन वर्ष तक मैनेजिंग एडिटर रहे हैं. फिलहाल आप न्यूज़ 18 हिंदी में एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट) के तौर पर कार्य कर रहे हैं.

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First published: May 3, 2020, 1:32 AM IST
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