जानिए हिंदपीढ़ी की पूरी कहानी जो झारखंड में बन गई कोरोना की पहचान

झारखंड में बुधवार की शाम तक कोरोना वायरस (COVID-19) के कुल 28 पॉजिटिव केस मिले हैं, जिसमें 14 मरीज हिंदपीढ़ी के हैं.

Source: News18 Jharkhand Last updated on: April 16, 2020, 3:23 PM IST
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जानिए हिंदपीढ़ी की पूरी कहानी जो झारखंड में बन गई कोरोना की पहचान
रांची के हिंदपीढ़ी इलाके को अब पुलिस ने सील कर दिया है.
जैसे दिल्ली का दिल कनॉट प्लेस को माना जाता है, ठीक वैसे ही रांची में फिरायालाल चौक (अब अलबर्ट एक्का चौक) इस शहर का दिल है. कनॉट प्लेस के बगल में बसा है मंडी हाउस, कुछ इसी स्थिति में अलबर्ट एक्का चौक के पास है हिंदपीढ़ी. शहर की सबसे पुरानी बस्तियों में से एक. मुस्लिम बहुल इलाका. इसके एक तरफ बड़ा तालाब है तो उसके दूसरे हिस्से में हिंदू, बंगालियों और पंजाबियों की मिली-जुली बस्ती. हिंदपीढ़ी में ढेर सारी संकरी गलियां हैं. पतली-पतली इन गलियों के रास्ते शहर के अलग-अलग हिस्सों में खुलते हैं. कूड़े-कचरे का अंबार लगा हुआ दिखता है. गंदगी इस इलाके में पसरी हुई है.

रांची का सबसे घनी आबादी वाला इलाका

शहर के पुराने बाशिंदे बताते हैं कि हिंदपीढ़ी का नाम कभी हिंदूपीढ़ी हुआ करता था. उस वक्त यहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की थी. पर धीरे-धीरे वक्त बदला, इलाके का नाम भी बदला और बदल गया यहां रहने वालों का आंकड़ा. एक अनुमान के मुताबिक अब हिंदपीढ़ी इलाके में लगभग 80 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग बसे हैं. इस इलाके में शिक्षा के स्तर की बात करें तो यूनिवर्सिटी के कई लेक्चरर और प्रोफेसर की रिहाइश इस इलाके में है. स्कूली शिक्षक, वकील और पत्रकारों का ठिकाना भी यहां है. पर साथ ही मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा तबका है, जो मेनरोड के डेली मार्केट में फल-सब्जियों की दुकान लगाता है. मीट-मुर्गा और मछली की सप्लाई करता है. मोटर गैरेजों में काम करता है. लेथ मशीनों के बेहतर कारीगर यहां मिल जाएंगे, पर शिक्षा के स्तर पर इनकी दृष्टि अब भी अवैज्ञानिक है.
रांची की सबसे घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में लगभग आधा दर्जन मस्जिदें हैं और उनमें लगातार इस्लामिक धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं.
तबलीगी जमात का एक केंद्र भी हिंदपीढ़ी में

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात का भी एक केंद्र रांची के हिंदपीढ़ी में चलता है. दिल्ली से जो तबलीगी पूरे देश में इस्लाम के प्रचार के नाम पर गए, उनमें से पांच विदेशी और कुछ स्थानीय मुसलमान हिंदपीढ़ी पहुंचे. लॉकडाउन के दौरान वे हिंदपीढ़ी में ही थे. जब देश के कई हिस्सों में ऐसे विदेशी जमाती पॉजिटिव निकलने लगे, तब जिला प्रशासन ने भी यहां रह रहे विदेशी नागरिकों को हिंदपीढ़ी से निकालकर खेलगांव में बने क्वारंटाइन सेंटर में रखकर उनकी जांच करवाई. इसमें एक मलेशियाई युवती पॉजिटिव निकली. जांच में पता चला कि वह लॉकडाउन व उसके पहले पांच अलग-अलग घरों में रह चुकी थी. जब उनकी जांच होने लगी, तो एक-एक कर अबतक कुल 14 कोरोना पॉजिटिव मरीज हिंदपीढ़ी से निकल चुके हैं.

covid-19-how-hindpiri-of-ranchi-became-identity-of-coronavirus-in-jharkhand | जानिए हिंदपीढ़ी की पूरी कहानी जो झारखंड में बन गई कोरोना की पहचानबुधवार शाम तक की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में कुल 28 पॉजिटिव केस मिले हैं, जिसमें 14 मरीज हिंदपीढ़ी के हैं. बोकारो में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या अब तक 9 है. हजारीबाग में कोरोना के 2 मरीज मिले हैं, जबकि कोडरमा, गिरिडीह और सिमडेगा में 1-1 मरीजों की पुष्टि की गई है. सिमडेगा में मिले कोरोना के मरीज का तार भी हिंदपीढ़ी से जुड़ा हुआ बताया जाता है. इन 28 मरीजों में से 2 की मौत हो चुकी है.

कैसे बन गया कोरोना का हॉटस्पॉट

सवाल उठता है कि आखिर कैसे हिंदपीढ़ी का इलाका कोरोना का हॉटस्पॉट बन गया. इसका सीधा और एकमात्र जवाब है कि मुस्लिम संप्रदाय के लोगों ने अपने यहां विदेशियों के होने की सूचना छुपाए रखी. पुलिस-प्रशासन की जांच में इलाके के लोगों ने पूरी तरह सहयोग नहीं किया. लॉकडाउन के पालन को उन्होंने हंसी-मजाक की तरह लिया. लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहे और लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाईं. जब एक-एक कर कोरोना के संदिग्ध केस वहां से मिलने लगे तो इस इलाके के कुछ धार्मिक नेताओं को लगा कि यह मुस्लिम संप्रदाय के खिलाफ साजिश है और अपने इसी अनुमान के आधार पर उन्होंने स्थानीय सीधे-सादे मुसलमानों को भड़काया और पुलिस-प्रशासन का विरोध करवाया.

पर अब प्रशासन ने हिंदपीढ़ी इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है. हिंदपीढ़ी को सुरक्षा की दृष्टि से 8 जोन में बांटा गया है. पास के गुरुनानक स्कूल में कंट्रोल रूम बनाया गया है. हरमू कॉलोनी की ओर जाने वाले हिंदपीढ़ी के सभी छह रास्ते सील कर दिए गए हैं, जो अब तक खुले थे. हर गली में पुलिस पेट्रोलिंग जारी है. जरूरत के सामान घर-घर पहुंचाने में जुटे हैं पुलिसकर्मी. पुलिस-प्रशासन के सहयोगी रवैये के कारण इलाके के लोगों का मन अब बदल रहा है. वे कोरोना वॉरियर्स का सहयोग कर रहे हैं.

(डिस्क्लेमरः लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं.)
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First published: April 16, 2020, 3:23 PM IST
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