Opinion: नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल सिमुलतला क्या नेतरहाट की बराबरी कर पाएगा?

क्या सिमुतला स्कूल सच में नम्बर एक है? बिहार का सिमुलतला आवासीय विद्यालय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल है. इसकी स्थापना गौरवशाली शिक्षण संस्थान, नेतहाट स्कूल (झारखंड) के तर्ज पर की गई थी. सिमुलतला स्कूल के शुरू हुए ग्यारह साल हो गए लेकिन यह अभी तक यह नेतरहाट की पुरानी प्रतिष्ठा के आसपास भी नहीं पहुंच सका है.

Source: News18Hindi Last updated on: April 6, 2021, 12:55 AM IST
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Opinion: नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल सिमुलतला क्या नेतरहाट की बराबरी कर पाएगा?
सिमुलतला स्कूल के शुरू हुए ग्यारह साल हो गए लेकिन यह अभी तक यह नेतरहाट की पुरानी प्रतिष्ठा के आसपास भी नहीं पहुंच सका है.
बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा के रिजल्ट पर हमें खुश होना चाहिए या इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. करीब सात महीना तक स्कूल बंद रहे. क्लास रूम में पढ़ाई नहीं हुई फिर भी बिहार के मैट्रिक टॉपर्स ने रिकॉर्ड मार्क्स के आसपास प्रदर्शन किया. 2021 के मैट्रिक टॉपर (तीन) को 484 अंक मिले हैं.
बिना स्कूली पढ़ाई के इतने अंक लाना किसी चमत्कार से कम नहीं है. ये मार्क्स पिछले सात साल के रिकॉर्ड (487) के नजदीक है. 2015 की मैट्रिक परीक्षा में सिमुलतला स्कूल के कुणाल जिज्ञाषु और नीरज रंजन को 487 अंक मिले थे. क्या देशभर में सबसे पहले परीक्षा लेने और रिजल्ट निकालने की आपाधापी
कोई कसर तो नहीं रह गयी? क्या गुणवत्ता से कोई समझौता तो नहीं किया गया? सिमुलतला स्कूल और बिहार के दूसरे हाईस्कूलों के बीच इतनी लंबी खाई क्यों है? इतनी कोशिशों के बाद भी सिमुलतला स्कूल, नेतरहाट स्कूल के आसपास क्यों नहीं पहुंच सका?

क्या सिमुतला स्कूल सच में नम्बर एक है?
बिहार का सिमुलतला आवासीय विद्यालय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल है. इसकी स्थापना गौरवशाली शिक्षण संस्थान, नेतहाट स्कूल (झारखंड) के तर्ज पर की गई थी. सिमुलतला स्कूल के शुरू हुए ग्यारह साल हो गए लेकिन यह अभी तक यह नेतरहाट की पुरानी प्रतिष्ठा के आसपास भी नहीं पहुंच सका है. हां, यह बिहार के मौजूदा स्कूलों में सबसे बेहतर प्रदर्शन जरूर कर रहा है. इस साल मैट्रिक में पहले स्थान पर आने वाले तीन छात्रों में दो सिमुलतला के हैं. टॉप टेन में यहां के 13 छात्र हैं. पहली नजर में देखने से तो यह लगता है कि सिमुलतला स्कूल अगर बिहार में पढ़ाई का राजमहल है तो उसके सामने बाकी स्कूल गरीब की झोपड़ी की तरह हैं. लेकिन हकीकत कुछ और है.

सिमुलतला स्कूल में भी समस्याएं

सिमुलतला स्कूल भी बिहार के अन्य स्कूलों की तरह ही समस्याओं से ग्रस्त है. सिमुलतला को टॉपर्स की फैक्ट्री कहना अतिशयोक्ति है. बिहार के इस नंबर एक स्कूल में भी योग्य शिक्षकों की कमी है. दो साल पहले इस स्कूल का इंटर साइंस में रिजल्ट इस लिए खराब हो गया कि क्योंकि यहां एक साल से केमिस्ट्री के शिक्षक ही नहीं थे. बॉयोलॉजी और केमिस्ट्री की पढ़ाई गेस्ट टीचर के भरोसे थी. इतना ही नहीं, यहां पढ़ाने वाले शिक्षक अनुबंध पर काम करते हैं जिन्हें कई सरकारी सुविधाएं नहीं मिलतीं. इससे पढ़ाई प्रभावित होती रही है. चूंकि राज्यभर से प्रतिभाशाली बच्चे यहां चुनकर आते हैं इसलिए उनका रिजल्ट तमाम कमियों के बाद भी बेहतर होता है. अब मार्च 2021 में बिहार सरकार ने सिमुलतला स्कूल में लिखित परीक्षा के आधार पर शिक्षकों और प्राचार्य की नियुक्ति होगी. ये सभी शिक्षक पूर्णकालिक होंगे.नेतरहाट और सिमुलतला में अंतर

जब बिहार और झारखंड एक था तब नेतरहाट स्कूल देश का एक गौरवशाली शिक्षण संस्थान था. इस स्कूल में बिहार ही नहीं देश भर के सबसे प्रतिभावान शिक्षक आकर्षक वेतनमान पर नियुक्त किए जाते थे. कठिन प्रतियोगिता परीक्षा से गुजरने का बाद जिस छात्र को यहां नामांकन मिलता था उसकी किस्मत चमकनी तय मानी जाती थी. यहां से पढ़ने वाले विशिष्ठ छात्रों की एक लंबी फेहरिस्त है जिन्होंने देश और दुनिया में ऊंचा मुकाम बनाया. भारत के महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह ने नेतरहाट स्कूल से ही पढ़ाई की थी. सीबीआइ के पूर्व निदेशक त्रिनाथ मिश्र यहीं से पासआउट थे. बीएसएफ के महानिदेशक और पूर्व सीबीआई के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना नेतरहाट स्कूल के पासआउट थे. राकेश अस्थाना ने सीबीआई अफसर के रूप में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव से चारा घोटाला मामले में छह घंटे तक लगातार पूछताछ की थी. तब उनकी उम्र केवल 35 साल थी. चीफ विजिलेंस कमिश्नर रहे प्रत्युष सिन्हा यहीं के छात्र रहे. झारखंड के पूर्व गृह सचिव जेबी तुबिद, झारखंड के पूर्व डीजीपी और मौजूदा सांसद बीडी राम नेतरहाट में पढ़े थे. बेगूसराय के रहने वाले अजय कुमार नेतरहाट स्कूल में पढ़ते हुए मैट्रिक के टॉपर बने थे. बाद में उनका चयन आइपीएस के लिए हुआ. जब वे लोहरदगा के एसपी थे तब नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे. नेतरहाट स्कूल ने इतनी प्रतिष्ठा इस लिए अर्जित की क्योंकि वहां के शिक्षक योग्यता के ऊंचे मानदंड पूरा करते थे. जबकि सिमुलतला की पढ़ाई आज भी कॉन्ट्रैक्ट वाले टीचरों के भरोसे चल रही है.

सिमुलतला का रिजल्ट क्यों बेहतर?

अंधों के देश में अगर कोई काना राजा हो तो उसे जरूर राजा माना जाएगा. सिमुलतला स्कूल बिहार के अन्य प्लस टू स्कूलों के बेहतर है, इसमें कोई दो राय नहीं. कुछ तो ऐसी बात है जो इसे दूसरे स्कूलों से अलग करती है. चूंकि यह एक आवासीय विद्यालय है इसलिए यहां छात्र और शिक्षक 24 घंटे एक दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं. स्कूल से सभी छात्र और शिक्षक कैंपस में ही रहते हैं. यहां शिक्षकों को पढ़ाने और छात्रों को पढ़ने के सिवा कोई दूसरा काम नहीं होता. ग्रुप स्टडी और स्कूल की कठिन आंतरिक परीक्षा से छात्रों की योग्यता निखरती है. यहां के छात्र पूरे सिलेबस की ध्यान पढ़ाई करते हैं. शॉर्टकट सफलता के लिए किसी गेस पेपर या गाइड का सहारा नहीं लेते. स्कूल के बाद भी शिक्षक छात्रों की पढ़ाई का पूरा ख्याल रखते हैं. छात्रों को मोबाइल से दूर रखा जाता है. चूंकि प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर यहां छात्रों का चयन होता है इसलिए सटिक मार्गदर्शन उनके रिजल्ट को बेहतर बना देता है. लेकिन बिहार के दूसरे हाईस्कूलों में ऐसी स्थिति नहीं है.

बजट का 20 फीसदी शिक्षा पर खर्च लेकिन हासिल क्या?

बिहार शिक्षा परियोजना ने 2018 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि कक्षा 6 से 8 तक के 40% बच्चे गणित में बेहद कमजोर हैं. 2018 में नेशनल अचीवमेंट सर्वे के तहत बिहार के अरवल जिले के दसवीं के बच्चों के विषयवार ज्ञान का आंकलन किया गया था. यह सर्वे केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, एनसीईआरटी और सर्वशिक्षा अभियान के सौजन्य से किया गया था. जिले के 49 हाईस्कूलों के बच्चों के ज्ञान की परीक्षा ली गई थी जिसमें से 67% छात्र गणित में बहुत कमजोर पाए गए. विज्ञान में 68% बच्चे कमजोर पाए गए. अंग्रेजी में तो और हालत खराब रही. 79% का प्रदर्शन निम्नस्तरीय रहा. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिहार में अन्य हाईस्कूलों में पढ़ाई की क्या हालत है. नियोजित और अनुबंध वाले शिक्षकों की व्यवस्था ने माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता को रसातल में पहुंचा दिया है. यह हालत तब है जब बिहार अपने बजट का 20 फीसदी शिक्षा पर खर्च करता है.

नीतीश कुमार के सपनों का स्कूल!

सिमुलतला स्कूल नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है. राज्य सरकार ने अपनी तरफ से इसे सर्वश्रेष्ठ स्कूल बनाने की भरपूर कोशिश की है. लेकिन इसके बावजूद सिमुलतला स्कूल के प्रदर्शन में एकरुपता नहीं रही है. जैसे 2020 और 2017 में इस स्कूल को पछाड़ कर बिहार के ग्रामीण क्षेत्र के हाईस्कूलों ने बाजी मार ली थी. 2017 में लखीसराय के गोविंद हाईस्कूल के छात्र प्रेम कुमार ने मैट्रिक परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया था. 2020 में भी रोहतास जिसे के तेनौज जनता हाईस्कूल के छात्र हिमांशु राज ने 481 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया था. पिछले साल सिमुलतला के छात्र राज रंजन को टॉपर लिस्ट में सातवां स्थान ही मिल पाया था. 2021 में भी रोहतास जिले के बलदेव हाईस्कूल के छात्र संदीप कुमार ने 484 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया है. अब सवाल ये है कि क्या सिमुलतला स्कूल भविष्य़ में नेतरहाट की तरह गौरव हासिल कर पाएगा?
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
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First published: April 6, 2021, 12:46 AM IST
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