विलोम: कोरोना काल, वाया वियेना

हैप्सबर्ग साम्राज्य की राजधानी वियेना, जिसकी कथा दो विलक्षण किताबों ने कही है. लुडविग विटगेंसटाइन की सबसे प्रामाणिक जीवनी द ड्यूटी अव जीनियस, दूसरी विटगेंसटाइन्स वियेना. इन किताबों में हम अपने समय की इस भयावह कथा को पढ़ सकते हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: May 20, 2020, 6:46 PM IST
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विलोम: कोरोना काल, वाया वियेना
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कोरोना सिर्फ़ विषाणु नहीं मानव सभ्यता के लिए चुनौती है. हमारे काल का प्रतिनिधि रूपक है. जब तमाम सत्ताएं 'अन्य' के विभिन्न संस्करण गढ़ देने को आतुर हों, मनुष्य की निजी पहचान संकरी होती जा रही हो, वहां ऐसे रोग का जन्म तय था जो एक मनुष्य को दूसरे के अनिवार्य 'अन्य', एक ख़तरे में समेट देता है. इसलिए कोरोना को पिछली महामारियों के बजाय शायद एक शहर के आइने से बेहतर देखा जा सकता है. वह शहर जो मानव इतिहास के उत्कर्ष और पतन को एक साथ दर्ज कर रहा था. हैप्सबर्ग साम्राज्य की राजधानी वियेना, जिसकी कथा दो विलक्षण किताबों ने कही है. लुडविग विटगेंसटाइन की सबसे प्रामाणिक जीवनी द ड्यूटी अव जीनियस, दूसरी विटगेंसटाइन्स वियेना. इन किताबों में हम अपने समय की इस भयावह कथा को पढ़ सकते हैं.

ढलती हुई उन्नीसवीं सदी का वियेना आधुनिक सभ्यता का ध्वजवाहक था. सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और चिकित्सकीय अनुसंधानों का केंद्र. दिग्गजों की कर्मभूमि: जोहांस ब्राम्ज़, आर्नोल्ड शोन्बर्ग और जोहान स्ट्राउस जैसे महान संगीतकार, एंटीसेप्टिक के जनक इग्नाज़ सेमलवाइस, विटगेंसटाइन, आधुनिक स्थापत्य के पितामह अडोल्फ़ लूस, सिग्मंड फ्रायड, इत्यादि.

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इनके अलावा कार्ल क्राउस भी थे, वियेना के शायद सबसे अंतर्दृष्टि-संपन्न लेखक-पत्रकार जो समूची भव्यता के बीच दर्ज कर सकते थे कि विएना 'वैश्विक तबाही की प्रयोगशाला' बन रहा है. वह विचित्र समय था. यूरोप में यहूदियों के प्रति नफ़रत बढ़ रही थी, तो यहूदियों में मृत्यु-आकांक्षा भी उछाह लेने लगी थी. विटगेंसटाइन, फ्रायड और ब्राम्ज़ का वियेना आगामी दो विश्व युद्धों की जन्मकुंडली लिख रहा था. यहूदी राज्य के लिए आंदोलन इसी दौरान वियेना में शुरू हुआ और हिटलर की पढ़ाई भी यहीं हुई. हिटलर वियेना में मिली शिक्षा का अपने जीवन में बड़ा महत्व मानते थे.
मोहभंग भी चरम पर था. शायद अन्य किसी शहर के अभिजात्य ने एक साथ इतने कम समय में अपनी जान नहीं ली थी. सांख्यिकीय थर्मोडायनैमिक्स के पुरोधा लुडविग बोल्तज़मां, विलक्षण जीनियस फ़्रांट्ज वॉन उचटिस जिन्होंने बारूद के गोलों के साथ सिनेमा के प्रोजेक्टर का भी अविष्कार किया था, कवि ऑटो वाइनिंगर जिन्होंने तेइस की उम्र में उस घर में आत्महत्या की थी जहाँ बीथोवेन की मृत्यु हुई थी, विटगेंसटाइन के तीन बड़े भाई, इत्यादि, इत्यादि.


लेकिन मध्य-वर्ग इस त्रासदी से आँख मूँदे बैठा था. आम जन के लिए रहने को घर नहीं बचे थे. स्टेफ़न ज्वेग ने लिखा है कि जब वह और उनके मित्र अख़बार पढ़ते थे, बोअर युद्ध और बाल्कन संकट जैसी ख़बरों को बिना छुए निकल जाते थे. एस्थीट होना अपने में काफ़ी था. कला सिर्फ़ कला के लिए थी. वियेना का अभिजात्य वर्ग अपने ही समाज का विलोम बन चुका था. पत्रकारिता कीचड़ में लोट रही थी. 'ऐसी कोई नीचता नहीं थी जिसे मीडिया एक महान कर्म बतौर प्रस्तुत करने को आतुर न था.' पत्रकारिता में 'सफलता सिर्फ़ उन आत्ममुग्ध लोगों के लिए रह गयी थी जो अपने निजी भावों को शाश्वत मान दुनिया को प्रमाण-पत्र बाँटते थे.'

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क्राउस वियेना के अभिजात्य को संदेह से देखते थे. जिन दिनों फ्रायड धूम मचाए थे, क्राउस कहते थे कि फ्रायड ने सेक्स सम्बंधित पारम्परिक ईसाई बुर्जुआ अवधारणा को मनोविश्लेषण की एक दूसरी अवधारणा में तब्दील कर दिया है. सिर्फ़ क्राउस ही अपने प्रसिद्ध समकालीन को इन मारक शब्दों से बींध सकते थे: ' मनोविश्लेषण उस चीज़ का आध्यात्मिक रोग है जिसकी दवाई यह ख़ुद को मानता है.' हैप्सबर्ग राजशाही पतन की तरफ़ बढ़ रही थी. अडोल्फ़ लूस को नाबालिग़ लड़कियों के यौन शोषण के लिए सज़ा हो गयी थी. सेमलवाइस की पागलखाने में मृत्यु हो गयी थी- इन्फ़ेक्शन पर अपनी विलक्षण खोज के पंद्रह साल बाद, तमाम जिंदगियों को बचाने के बाद सेमलवाइस ख़ुद अपनी चोट का घाव न भर पाने से मारे गए थे.

कोरोना-काल में सिर्फ़ संज्ञाओं को बदलना है. यहूदियों के प्रति अब नफ़रत इस्लाम-केंद्रित हो गयी है. यूरोप के यहूदी की मृत्यु-आकांक्षा अब इस्लाम के एक बड़े वर्ग में दिखने लगी है. मध्य-वर्ग निर्लज्ज आत्ममुग्धता की गिरफ्त में है. सोशल मीडिया ने तमाम लेखक और पत्रकारों को दंभ में डुबो दिया है. मनुष्य प्रजाति अपना ही अन्य, विलोम बन रही है. लेकिन मानव सभ्यता अपनी पतन-कामना से अनजान रहना चाहती है.


पृथ्वी सभी आसान विकल्पों के नकार से ही बचाई जा सकती है. वर्तमान उपकरण, औज़ार, विधियाँ और प्रविधियाँ जड़ हो चुकी हैं. नए समाज के निर्माण के लिए राजनीति, मीडिया, साहित्य कला, शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण शास्त्र इत्यादि की पुनर्रचना करनी होगी. याद करें क्राउस अपनी बौद्धिक निष्ठा के साथ कोई समझौता करने को तैयार न थे: 'अगर मुझे दो बुराइयों के बीच किसी कमतर को चुनना ही होगा तो मैं किसी को नहीं चुनूँगा. नहीं तो जैसा ये किताबें बहुत पहले कह गयीं हैं- पृथ्वी वियेना की नियति की तरफ अग्रसर है.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
आशुतोष भारद्वाज

आशुतोष भारद्वाजलेखक, पत्रकार

गद्य की अनेक विधाओं में लिख रहे गल्पकार -पत्रकार-आलोचक आशुतोष भारद्वाज का एक कहानी संग्रह, एक आलोचना पुस्तक, संस्मरण, डायरियां इत्यादि प्रकाशित हैं। चार बार रामनाथ गोयनका सम्मान से पुरस्कृत आशुतोष 2015 में रॉयटर्स के अंतर्राष्ट्रीय कर्ट शॉर्क सम्मान के लिए नामांकित हुए थे। उन्हें भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला, और प्राग के 'सिटी ऑफ़ लिटरेचर' समेत कई फेलोशिप मिली हैं. दंडकारण्य के माओवादियों पर उनकी उपन्यासनुमा किताब, द डैथ स्क्रिप्ट, हाल ही में प्रकाशित हुई है.

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First published: May 20, 2020, 6:06 PM IST
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