ऑस्कर वाइल्ड: कला की वेदी पर पहली बलि!

‘द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे’ ('The Picture of Dorian Gray') को समीक्षक 'विषैली किताब' ('poisonous book') कहते थे. ऑस्कर वाइल्ड आलोचकों से झगड़ते थे कि किसी कलाकृति को नैतिक दृष्टिकोण से नहीं परखना चाहिए.

Source: News18Hindi Last updated on: September 16, 2020, 10:14 AM IST
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ऑस्कर वाइल्ड: कला की वेदी पर पहली बलि!
रिया चक्रवर्ती पर चलता मीडिया मुक़दमा देख ऑस्कर वाइल्ड लगे आरोपों और उन पर हुए मुक़दमे की याद आती है.
रिया चक्रवर्ती पर चलता मीडिया मुक़दमा (Media lawsuit) देख ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) लगे आरोपों और उन पर हुए मुक़दमे की याद आती है. ठीक 130 वर्ष पहले, 1890 में उनका महान उपन्यास ‘द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे’ ('The Picture of Dorian Gray') प्रकाशित हुआ था. जिसके बाद इंग्लैंड का मीडिया उन पर अश्लीलता का आरोप लगाने लगा था.

1895 में वाइल्ड ने एक व्यक्ति पर इन्हीं कारणों से मानहानि का मुक़दमा दायर किया लेकिन सुनवाई के दौरान मामला ऐसा पलटा कि वह गिरफ़्तार हो गए और उन पर पुरुषों के साथ 'ग्रॉस इंडीसेन्सी' के आरोप में मुक़दमा शुरु हो गया. उन्हें दो साल की सजा हुई, उनका चमकदार लेखकीय जीवन तबाह हो गया. जेल जाने के बाद ऑस्कर कभी अपने बच्चों से नहीं मिल पाए, उन्हें चुपचाप पेरिस निकलना पड़ा. उनकी पत्नी ने अपने बच्चों का नाम तक बदल दिया था, उन्हें समझा दिया था कि उनका वाइल्ड से कभी कोई संबंध नहीं था. पेरिस में खुद वाइल्ड नाम बदल कर, ‘सेबेस्टियन मेलमोथ’ के नाम से रहते थे.

इन दिनों अख़बार पढ़ते वक़्त वाइल्ड की लगातार याद आती रही है. दिलचस्प यह कि उन्हें 'ग्रॉस इंडीसेन्सी' के लिए सजा मिली थी, क्योंकि तब तक समलैंगिक शब्द प्रचलन में लगभग नहीं था. अंग्रेजी भाषा में ‘होमोसेक्सुअल’ शब्द का पहला प्रयोग 1892 में मिलता है, वह भी बतौर विशेषण. कई साल बाद 1912 में यह बतौर संज्ञा इस्तेमाल होता है.


यह सही है कि वाइल्ड के अनेक युवकों से प्रेम-सम्बंध रहे थे. 1881 में वाइल्ड जॉन ग्रे नामक एक युवा कवि से मिले. जो उनसे बारह साल छोटा था. उन दोनों की अंतरंगता 1892 तक चली, जब ग्रे ने कैथोलिक धर्म में शरण ली, ऑस्कर को छोड़ दिया. कहा जाता है कि यही जॉन ग्रे ‘द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे’ की प्रेरणा बने थे. ग्रे ने ऑस्कर को एक ख़त भी लिखा था जिसका अंत इन शब्दों से किया --- 'योर्स एवर, डोरियन.'
वाइल्ड का अल्फ्रेड डगलस के साथ भी प्रेम हुआ था. जो बाद में उन पर चले मुक़दमे की वजह बने. डगलस को ‘द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे’ बहुत पसंद आया था. वह इसके लेखक से मिलना चाहते थे. वाइल्ड से मिलने से पहले इसे नौ बार पढ़ चुके थे.


‘द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे’ को समीक्षक 'विषैली किताब' कहते थे. वाइल्ड आलोचकों से झगड़ते थे कि किसी कलाकृति को नैतिक दृष्टिकोण से नहीं परखना चाहिए. वाइल्ड ‘कला सिर्फ़ कला के लिए’ के प्रणेता थे. लेकिन इसका अर्थ ऐंद्रिय सुख न था. यह उपन्यास कला, सौंदर्य और प्रेम पर विलक्षण आख्यान है. अगर इसे वाइल्ड के सन्दर्भ से हटाकर आज पढ़ें तो शायद प्रश्न उठेगा कि इसमें समलैंगिकता आख़िर है कहाँ?

मुक़दमे के दौरान वाइल्ड से डगलस की कविता ‘टू लव्ज़’ की एक पंक्ति 'प्रेम जो अपना नाम लेने का साहस नहीं करता' का अर्थ पूछा गया. वाइल्ड का भरी अदालत में दिया जवाब साहित्य की धरोहर है: '(यह पंक्ति) एक पुरुष के अपने से कहीं छोटे पुरुष से स्नेह को बतलाती है — स्नेह जो डेविड और जोनाथन के बीच था, जिसे प्लेटो ने अपने दर्शन का आधार बनाया था, जो आप शेक्सपियर और माइकलऐंजेलो के सोनेट में पाते हैं. यह सघन आध्यात्मिक स्नेह है जो जितना निष्पाप है, उतना ही पूर्ण भी… इसमें कुछ भी अप्राकृतिक नहीं है. यह बौद्धिक है, एक बड़ी और छोटी उम्र के पुरुष के बीच अक्सर उमड़ आता है. बुज़ुर्ग के पास बुद्धि है और युवक के पास जीवन के समूचे सुख, उम्मीद और सम्मोहन.'लेकिन अपने कलाकर्म पर इतनी आस्था रखने वाला रचनाकार समाज के आरोपों के सामने ढहता गया. सजा के बाद वह छुपते हुए पेरिस चले गए, वापस इंग्लैंड नहीं लौट पाए. कुछ वर्ष बाद महज़ 46 की उम्र में 1900 में उनकी मृत्यु हो गयी.

वाइल्ड के जीवनीकार रिचर्ड एलमन लिखते हैं कि वह सजा सुनाए जाने से बहुत पहले, 1886 के आसपास ही खुद को 'अपराधी समझने लगे थे, लोगों के बीच बड़े अपराध बोध के साथ रहते थे.' एलमन ने डोरियन ग्रे उपन्यास को 'कलावाद का पहला शहीद' का दर्जा दिया था. अरसा बाद किसी ने जोड़ा कि पहला शहीद वह उपन्यास नहीं, बल्कि वाइल्ड ख़ुद थे.

मुक़दमा शुरू होने से पहले वाइल्ड ने दोस्तों से कहा था कि भले विक्टोरियन समाज उनके लिखे को नहीं समझ पाया, आगामी पीढ़ियाँ उन्हें याद करेंगी लेकिन तब वह रॉयल्टी लेने के लिए नहीं रहेंगे. बहुत जल्द उनके शब्द सही साबित हुए.


पिछले बरस मैं पेरिस के प्रसिद्ध क़ब्रिस्तान गया था जहाँ बाल्ज़ाक, प्रूस्त जैसे अनेक लेखक-कलाकारों की क़ब्रें हैं. वाइल्ड की कब्र पर लिपस्टिक के अनगिनत निशान लगे हुए थे. मेरे फ़्रेंच दोस्तों ने बताया कि ये लाल होंठ बरसों पुराने हैं, वाइल्ड के दीवाने पाठकों के. जब लिपस्टिक के केमिकल से पत्थर को ख़तरा होने लगा, कब्र के चारों तरफ़ पारदर्शी काँच की दीवार लगा दी गयी. 1995 में फ़्रांस सरकार ने इस कब्र को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया. मैं उन लाल निशानों में पाठक के प्रतिकार को पढ़ सकता था.  (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)
ब्लॉगर के बारे में
आशुतोष भारद्वाज

आशुतोष भारद्वाजलेखक, पत्रकार

गद्य की अनेक विधाओं में लिख रहे गल्पकार -पत्रकार-आलोचक आशुतोष भारद्वाज का एक कहानी संग्रह, एक आलोचना पुस्तक, संस्मरण, डायरियां इत्यादि प्रकाशित हैं। चार बार रामनाथ गोयनका सम्मान से पुरस्कृत आशुतोष 2015 में रॉयटर्स के अंतर्राष्ट्रीय कर्ट शॉर्क सम्मान के लिए नामांकित हुए थे। उन्हें भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला, और प्राग के 'सिटी ऑफ़ लिटरेचर' समेत कई फेलोशिप मिली हैं. दंडकारण्य के माओवादियों पर उनकी उपन्यासनुमा किताब, द डैथ स्क्रिप्ट, हाल ही में प्रकाशित हुई है.

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First published: September 15, 2020, 12:14 PM IST
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