नीतीश का मन फिर फिसला, बन सकती है बिहार में फिर से गठबंधन की सरकार!

'खबर है नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल एक दूसरे के बेहद करीब आ गए हैं नज़दीकियां तो इफ़तार के दौरान ही बढ़ चुकी थी जब नीतीश अपने आवास 1 अन्ने मार्ग से पैदल ही लालू के 10 सर्क्युलर आवास चले गए थे. पिछले दिनों सोनिया गांधी ने भी नीतीश का हाल चाल पूछा. हालांकि बीजेपी ने अभी तक गठबंधन के भविष्य पर अपना मुंह नहीं खोला है.'

Source: News18Hindi Last updated on: August 8, 2022, 4:45 pm IST
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नीतीश का मन फिर फिसला, बन सकती है बिहार में फिर से गठबंधन की सरकार!
बिहार में यह यह चर्चा आम है कि नीतीश कुमार आरजेडी के करीब चले गए हैं. (फाइल फोटो)

बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) की संयुक्त सरकार एक बार फिर टूट के कगार पर खड़ी है. पर्दे के पीछे रणनीतियाँ बनाई जा रही है, काफी समय से एक दूसरे के खिलाफ कभी दबे स्वर में, कभी मुखर स्वर में आवाज़ उठ रही है. षड्यंत्र की बात की जा रही है, एक दूसरे नीचे दिखाने की चाल चली जा रही है. सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार की जनता दल( यू)-बीजेपी की गठबंधन सरकार अब कुछ दिनों की मेहमान रह गई है?


पता नहीं कब तक चले बीजेपी-जद (यू) सरकार?

बीजेपी के अलावा राष्ट्रीय जनता दल, काँग्रेस और जनता दल (यू) ने अपने सांसदों और विधायकों की बैठक बुला ली है, क्या पता कल क्या हो. अगर ऐसा होता है तो पहली बार ऐसा नहीं होगा, 2015 में भी नीतीश कुमार एनडीए को छोड़ महागठबंधन के पाले में जा चुके थे. हालांकि ये मधुर मिलन ज़्यादा दिन चल नहीं सका.


पिछले काफी समय से चर्चा आम है कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय जनता दल के करीब चले गए हैं. खिचड़ी इफ़तार पार्टी के बाद से ही पक रही है- जानकार बताते हैं कि नज़दीकियाँ इफ़तार के दौरान ही बढ़नी शुरू हो गई थी. जब मुख्यमंत्री अपने आवास 1 अन्ने मार्ग से निकलकर पैदल ही 10 सर्क्युलर आवास चले गए थे, जो लालू यादव और रबड़ी देवी का सरकारी आवास है. जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने उनकी पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र किए जाने की बात कह रहे हैं. बातों में बातों में ललन सिंह चिराग पासवान का भी ज़िक्र करते हैं और कहते हैं कि वो दूसरा “चिराग” नहीं पैदा होने देंगे, जिसकी वजह से जद (यू) को 2020 के विधान चुनाव में “नुकसान” उठाना पड़ा था. उनका इशारा आरसीपी सिंह की तरफ था, जिनहोने पिछले दिनों जनता दल( यू) द्वारा “अकूत” संपत्ति बनाए जाने के आरोपों के बाद पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.


राष्ट्रीय जनता दल हुआ है नीतीश के प्रति नरम

जनता दल( यू) और राष्ट्रीय जनता दल के बीच अब राजनीतिक संबंध उतने तीखे नहीं रहे, जो 2021 के शुरुआती दिनों में देखे जा रहे थे. एलजेपी (पासवान) नेता चिराग पासवान पलटवार करते हुए कहते हैं कि सरकार बनने के बाद से ही नीतीश कुमार सत्ता में बने रहने की लगातार जुगत करते रहे हैं. उन्हें बिहार की बिलकुल भी फिक्र नहीं है. चिराग मॉडल पर बात करते हुए चिराग कहते हैं कि उनका मकसद तो “बिहार फ़र्स्ट और बिहारी फ़र्स्ट” है. नीतीश बताएं उनका विकास का क्या मॉडल है, जहां जहरीली शराब पीने से मौत हो रही है, लोग पलायन कर रहे हैं. वो उफ़्फ़ तक नहीं करते. जनता दल( यू) के नेता भले ही बीजेपी के खिलाफ खुल के मैदान में हैं लेकिन बीजेपी ने अभी तक ऐसे कोई भी सिग्नल नहीं दिए हैं जिससे उनकी बेचैनी नज़र आए. पार्टी आलकमान की तरफ से बीजेपी के प्रवक्ताओं को कह दिया गया है कि वो गठबंधन पर ज़्यादा बात न करें.


नीतीश ने बना ली है बीजेपी से दूरी

सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों पटना में हुई बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर जनता दल( यू) समेत सभी पार्टियों में कहीं न कहीं तनाव देखने को मिला. ये ऐसा अवसर था जब गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पटना में थे, उनकी मुलाक़ात नीतीश कुमार से नहीं हो सकी. वजह बताई गई कि नीतीश कुमार कोरोना पॉज़िटिव हैं.


इसके पहले भी नीतीश कुमार राष्ट्रपति द्रौपदी के शपथ समारोह में शामिल नहीं हुए, वो आउटगोइंग राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के विदाई समारोह में भी शामिल नहीं हुए. रविवार 7 अगस्त को हुए नीति आयोग की बैठक में भी नीतीश कुमार नहीं शामिल हुए, बताया गया कि उनकी तबीयत कोरोना की वजह से अब भी नासाज़ है लेकिन वो पटना में कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए दिखाए दिये.


जनता दल( यू) के करीबी सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी सरकार के पतन के बाद लगातार ये चर्चा चल रही है कि कहीं बिहार का अगला नंबर न हो. हालांकि ऐसे ही अटकल उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले भी लगाए जा रहे थे, हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ. बीजेपी के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि जनता दल (यू) और राजद क्षेत्रीय पार्टी हैं, शायद कहीं न कहीं बीजेपी के बढ़ते प्रभाव से ये संदेश जा रहा है कि आने वाले समय में बीजेपी बिहार में अपने बूते पर सरकार बनाने का मन बना चुकी है, बेचैनी की वजह यही है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
ब्रज मोहन सिंह

ब्रज मोहन सिंहएडिटर, इनपुट, न्यूज 18 बिहार-झारखंड

पत्रकारिता में 22 वर्ष का अनुभव. राष्ट्रीय राजधानी, पंजाब , हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में रिपोर्टिंग की.एनडीटीवी, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और पीटीसी न्यूज में संपादकीय पदों पर रहे. न्यूज़ 18 से पहले इटीवी भारत में रीजनल एडिटर थे. कृषि, ग्रामीण विकास और पब्लिक पॉलिसी में दिलचस्पी.

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First published: August 8, 2022, 4:45 pm IST