Opinion: ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना एक तीर से कई शिकार कर गए नीतीश कुमार

Bihar Politics: पार्टी के अंदर किए गए हालिया संगठनात्मक बदलाव के बाद ये तस्वीर उभर रही है कि पार्टी अब अपना विस्तार करने के मूड में है. इस क्रम में मुंगेर के सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की ताजपोशी को एक निर्णायक कदम माना जा रहा है.

Source: News18Hindi Last updated on: August 2, 2021, 4:10 PM IST
शेयर करें: Facebook Twitter Linked IN
Opinion: ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना एक तीर से कई शिकार कर गए नीतीश कुमार
सांसद ललन सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर नीतिश कुमार ने बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव किया है. (File)

बिहार विकास के हर पैमाने पर भले ही पिछलग्गू राज्य बन गया हो, लेकिन क्या मजाल कि यहां के नेता आपको कभी भी बोर होने देंगे. चुनाव हो या न हो, यहां सोशल  इंजीनियरिंग का काम अनवरत गति से चलता रहता है. एक जाति को खड़ा करने और दूसरे को उतारने की जुगत हर वक्त चलती रहती है. खाली समय में नेताओं का यही सबसे बड़ा शगल है, जिससे वो सालों-साल सत्ता में बने रहते हैं. पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी जेडीयू की बात कर लेते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिससे उनकी बेचैनी जाहिर होती है. बेचैनी इस बात की जेडीयू महज लव-कुश की पार्टी नहीं बनी रहे, जिसकी छाप पार्टी पर कई वर्षों तक देखी और महसूस की जाती रही.



पार्टी के अंदर किए गए हालिया संगठनात्मक बदलाव के बाद ये तस्वीर उभर रही है कि पार्टी अब अपना विस्तार करने के मूड में है. इस क्रम में मुंगेर के सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की ताजपोशी को एक निर्णायक कदम माना जा रहा है. उनकी ताजपोशी ने कई आशंकाओं को खत्म करते हुए कई संभावनाओं को भी जन्म दिया है. पहला कि ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने से इस सवाल का जवाब मिल गया है कि जेडीयू महज कुर्मी, कोइरी और अति पिछड़ों की पार्टी से आगे बढ़कर अगड़ों को भी साधने में लग गई है. ललन सिंह की नियुक्ति के साथ ही नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी के सामने भी एक चुनौती पेश करेंगे. भूमिहारों का एक बड़ा वर्ग बीजेपी से भी जुड़ा रहा है, अगला कदम बिहार में क्षत्रियों को लुभाने का भी हो सकता है, जिनकी आबादी पूरे प्रदेश में 6 फीसद से ज्यादा है. वैसे ये बता देना यहा जरूरी है कि ललन सिंह से पहले जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह सिंह थे, जो क्षत्रिय समाज से ताल्लुक रखते हैं.


सुमित कुमार सिंह को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी



आने वाले दिनों में मंत्री सुमित कुमार सिंह को भी पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. हालांकि ये बात सच है कि राजपूत समाज कभी एक पार्टी के पीछे खड़े नहीं रहते लेकिन पार्टी में मजबूत राजपूत नेताओं की मौजूदगी से समाज के अंदर व्याप्त असंतोष कम होगा, जो नीतीश के पीछे अभी तक खड़े होने से बचते रहे थे. चर्चा इस बात की भी सरेआम है कि अगड़ी जातियों में ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से ज्यादा इस बात की खुशी है कि आरसीपी सिंह को इस पद से मुक्त कर दिया गया. वैसे भी अगर “एक व्यक्ति और एक पद” के सिद्धान्त को मान लिया जाय तो आरसीपी सिंह का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ना उसी की एक तार्किक परिणति हो सकती है.


पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर आई गहराई



आरसीपी सिंह सिंह नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं, पर ललन सिंह को पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर लाने से पार्टी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर गहराई आई है.चुनाव के बाद जेडीयू बिखरती हुई दिख रही थी पर नीतीश कुमार नए सिरे से पार्टी को संजोने और संभालने में लग गए हैं, इसी क्रम में राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की ताजपोशी से महत्वपूर्ण कदम है.


छटपटा रहे बीजेपी के नेता


2015 में नीतीश कुमार से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लेकर बीजेपी “एकला चलो” की राह पर चल पड़ी थी, लेकिन उसका परिणाम ठीक नहीं रहा. आज भले ही बीजेपी एनडीए गठबंधन में जेडीयू से बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीत का सेहरा नीतीश कुमार के सर ही बांधा. स्थानीय बीजेपी नेताओं में इसकी छटपटाहट रह-रह कर महसूस भी की जाती है. कई बार बीजेपी के मंत्रियों ने खुलकर कहा है कि गठबंधन के अंदर रहकर बीजेपी अपना एजेंडे पर काम नहीं कर पा रही है. पिछले लगभग दो दशक से बीजेपी एक तरह से नीतीश कुमार की छाया में रहकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन सामाजिक समीकरण ने बीजेपी का साथ नहीं दिया है. अभी एनडीए सरकार को बिहार में बमुश्किल आठ महीने हुए हैं, ऐसे में न सिर्फ जदयू बल्कि बीजेपी भी अपने आप को पुनर्स्थापित करने के प्रयास में लग गई है. उत्तर प्रदेश चुनाव के पहले-पहले गठबंधन में अभी कई उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे. (ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं.)


(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
ब्रज मोहन सिंह

ब्रज मोहन सिंहएडिटर, इनपुट, न्यूज 18 बिहार-झारखंड

पत्रकारिता में 22 वर्ष का अनुभव. राष्ट्रीय राजधानी, पंजाब , हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में रिपोर्टिंग की.एनडीटीवी, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और पीटीसी न्यूज में संपादकीय पदों पर रहे. न्यूज़ 18 से पहले इटीवी भारत में रीजनल एडिटर थे. कृषि, ग्रामीण विकास और पब्लिक पॉलिसी में दिलचस्पी.

और भी पढ़ें

facebook Twitter whatsapp
First published: August 2, 2021, 3:31 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर