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अगर बिहार में कानून है, तो अपराधियों में खौफ क्यों नहीं?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अच्छी तरह जानते हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था अगर ठीक रहा तभी निवेश की बात सोची जा सकती है. तभी लोग बिहार का रुख करेंगे. अभी देर नहीं हुई है, जरूरत है सरकार को इच्छाशक्ति दिखाने की

Source: News18Hindi Last updated on: January 19, 2021, 10:13 PM IST
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अगर बिहार में कानून है, तो अपराधियों में खौफ क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास गृह मंत्रालय का भी प्रभार है, इसलिए उनपर कानून व्यवस्था विफल रहने को लेकर आऱोप लगाए जा रहे हैं (फाइल फोटो)
वर्ष 2021 में कानून व्यवस्था नीतीश सरकार (Nitish Government) के लिए अचानक ही सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है. पिछले वर्ष बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से लोग किसी बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे थे लेकिन हाल में ही इंडिगो के स्टेशन मैनेजर रूपेश सिंह की सनसनीखेज हत्या (Rupesh Singh Murder) ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है. रूपेश की हत्या के पीछे वजह चाहे जो हो लेकिन इस हत्या ने बिहार के शहरी मध्य वर्ग को चिंता में डाल दिया है कि अगर राज्य की राजधानी में ऐसा हो सकता है तो कहीं भी हो सकता है, फिर आम जन सुरक्षित कैसे रहेंगे?

आपने देखा होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सार्वजनिक तौर पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को फोन लगाकर हिदायत देनी पड़ी, आम तौर पर ऐसा होता नहीं है कि किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री डीजीपी को हिदायत दे कि आप फोन क्यों नहीं उठाते हैं. आखिर इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी! जाहिर है मुख्यमंत्री दबाव में हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि उनकी 'सुशासन बाबू' की छवि में कहीं भी दरार पड़े. नीतीश को जानने वाले कहते हैं कि वो अपनी छवि को लेकर हमेशा ही काफी संवेदनशील रहते हैं. वर्षों से बनाई गई छवि को वो धूमिल होते नहीं देख सकते.

विपक्षी और सहयोगी बीजेपी भी CM नीतीश पर सवाल उठा रहे

इन दिनों मुख्यमंत्री के ऊपर दबाव न सिर्फ विपक्षी आरजेडी से है बल्कि सहयोगी बीजेपी के अंदर भी बहुत से लोग दबी जुबान में बोलने लगे हैं कि उनसे गृह विभाग संभल नहीं रहा, इसलिए गुंडे-बदमाशों का मनोबल बढ़ता है. कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि बीजेपी के लोग नहीं चाहते कि गृह विभाग नीतीश के पास रहे. लेकिन सीएम नीतीश के बीजेपी शीर्ष नेतृत्व से अच्छे संबंध हैं इसलिए ऐसा होता फिलहाल मुमकिन नहीं लगता. वैसे रवायत भी यही है कि गृह विभाग हमेशा ही मुख्यमंत्री के पास ही रहे.
पटना एयरपोर्ट पर इंडिगो के स्टेशन मैनेजर रहे रूपेश कुमार सिंह की अपराधियों ने 12 जनवरी की रात उसके अपार्टमेंट के गेट पर गोली मारकर हत्या कर दी थी (फाइल फोटो)


मुख्यमंत्री और डीजीपी दोनों इस तर्क के पीछे छुपना चाहते हैं कि हालिया घटनाओं को सनसनी बनाकर पेश किया गया है. सच्चाई यह कि बिहार अपराध के मामले में देश में 23वें नंबर पर है. लेकिन इससे न तो विपक्ष संतुष्ट है और न ही मीडिया और न आम जनता. अखबारों और टीवी चैनलों पर हत्या और लूट की वारदात का बोलबाला रहता है ऐसे में अपराध के फॉलोअप, घटना घट जाने के बाद अपराधियों की गिरफ्तारी से ज्यादा जरूरी होता है कि कैसे अपराध को होने से रोका जाए. इसमें ज्यादा बड़ी भूमिका होती है पुलिसिंग और कानून व्यवस्था को बनाए रखने में जन सहभागिता की, इस समय यह काफी हद तक नदारद है.

अपराधियों के बीच सरकार और पुलिस का खौफ दिखना चाहिएअगर आप न्याय कर रहे हैं तो न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए. अगर आप सरकार में हैं तो सरकार और पुलिस का अपराधियों के बीच खौफ दिखना भी चाहिए.

प्रदेश भर से हर दिन शराब पकड़े जाने की खबरें मिलती रहती हैं, पुलिस अपना काम कर देती है. सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के बयान आ जाते हैं और मुस्तैदी से काम करने का संकल्प दोहरा दिया जाता है. लेकिन क्या इससे वाकई अवैध शराब की तस्करी रुक सकती है? शायद नहीं. राजधानी पटना में शराब माफिया के बीच किसी तरह का खौफ नहीं रह गया है. ऐसा कारोबार क्या पुलिस के संरक्षण के बिना चल सकता है, इसका जवाब आला अधिकारी बेहतर दे सकते हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मंशा चाहे लाख पाक-साफ हो लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रदेश में शराब कारोबार की एक समानांतर अर्थव्यवस्था तैयार हो गई है, जिसमें तस्कर भी शामिल हैं, पुलिस भी शामिल हैं. बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब बेचने वाला भी उपलब्ध है और शराब खरीदने वाला भी मौजूद है. यह कोई ऐसी जानकारी नहीं है जिससे लोग अवगत नहीं हैं. बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. इसी वजह से पिछले पंद्रह दिनों में पुलिस अधिकारियों के खूब तबादले हो रहे हैं, जिससे प्रशासन में गतिशीलता आए और अपराधियों के साथ मिली-भगत खत्म हो. लेकिन कहीं न कहीं पुलिस बल के अंदर भी तालमेल की कमी दिख रही है.

अभी देर नहीं हुई है, सरकार को इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत

बेसिक पुलिसिंग को दुरुस्त करना छोड़ अगर डीजीपी अपराध के आंकड़ों का हवाला देने लगे तो उससे न तो प्रदेश की जनता का भला होगा और न ही पुलिस का उससे आत्मबल बढ़ेगा. मुख्यमंत्री नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था अगर ठीक रहा तभी निवेश की बात सोची जा सकती है. तभी लोग बिहार का रुख करेंगे. अभी देर नहीं हुई है, जरूरत है सरकार को इच्छाशक्ति दिखाने की.

बिहार को अब जंगल राज बर्दाश्त नहीं. अब बिहार के लोगों को यह भी मंजूर नहीं कि घर का कमाने वाला घर से बाहर निकले और परिवारवाले उनकी सकुशल घर लौटने की दुआ करें. ( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)
ब्लॉगर के बारे में
ब्रज मोहन सिंह

ब्रज मोहन सिंहएडिटर, इनपुट, न्यूज 18 बिहार-झारखंड

पत्रकारिता में 22 वर्ष का अनुभव. राष्ट्रीय राजधानी, पंजाब , हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में रिपोर्टिंग की.एनडीटीवी, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और पीटीसी न्यूज में संपादकीय पदों पर रहे. न्यूज़ 18 से पहले इटीवी भारत में रीजनल एडिटर थे. कृषि, ग्रामीण विकास और पब्लिक पॉलिसी में दिलचस्पी.

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First published: January 19, 2021, 7:43 PM IST
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