OPINION: मोहन भागवत के 'एक समान डीएनए' के मुद्दे को सीएम नीतीश के मंत्री जमा खान की नजर से समझें, बहुत खास हैं मायने

आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) के सभी भारतीयों के एक ही डीएनए होने के बयान के बाद पूरे देश में घमासान मचा हुआ है. कुछ इसे हिन्‍दू और मुस्लिम को जोड़ने, तो कुछ इसे तोड़ने वाला बता रहे हैं. इस बीच बिहार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री जमा खान (Zama Khan) ने स्वीकार किया कि उनके पूर्वज पहले हिन्दू राजपूत थे. हालांकि इस मामले को समझने के लिए ये लेख आपके लिए बेहद जरूरी है.

Source: News18Hindi Last updated on: July 13, 2021, 9:12 AM IST
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OPINION: मोहन भागवत के 'एक समान डीएनए' के मुद्दे को सीएम नीतीश के मंत्री जमा खान की नजर से समझें, बहुत खास हैं मायने
संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से भूचाल आया हुआ है.
पटना. आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) के एक समान डीएनए (DNA) वाले बयान पर अब तक जितनी प्रीतिक्रियाएं आनी थीं, आ चुकी हैं. इस दौरान कुछ लोग इसके समर्थन में, तो कुछ विरोध में दिखे. यही नहीं, संघ को जानने और समझने वाले इस बात का समर्थन करेंगे कि आरएसएस ने पहली बार इस तरह का बयान नहीं दिया है. मौलिक तौर पर संघ की ये धारणा है कि भारत में जन्म लेने वाले सभी लोग की एक समान पृष्टभूमि से हैं, भले ही कालांतर में, विभिन्न कारणों से लोगों ने अलग-अलग मतों और मजहबों को अंगीकार कर लिया.

बहरहाल, अभी उन ऐतिहासिक कारकों पर नहीं जाते हैं, लेकिन इस बात के प्रमाण हैं ही कि मुगलकाल में हिंदुओं का विभिन्न कारणों से बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ. बिहार ही क्यों, भारत के उन सभी राज्यों में जहां बहुसंख्यक हिन्दू आबादी के सामने हथियार डालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रहा होगा. बहुत सारे ऐसे भी उदाहरण मिलेंगे, जहां लोगों ने प्रलोभन में इस्लाम स्वीकार किया.

जमा खान की बात में है दम
अभी आप सबके सामने बिहार का एक उदाहरण रखते हैं जिससे मोहन भागवत के मंतव्य को समझने में मदद मिलेगी. संघ प्रमुख के बयान के बाद ही बिहार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री जमा खान ने स्वीकार किया कि उनके पूर्वज पहले हिन्दू राजपूत थे और आज भी वो अपने पुराने परिवार के लोगों के शादी ब्याह में जाते हैं. सामाजिक तौर पर ये एक दूसरे के रस्म में हिस्सेदार होते हैं. जमा खान ने इस बात को काफी फख्र के साथ स्वीकार किया कि वो राजपूत खानदान से संबंध रखते हैं.
ऐसा नहीं है कि मंत्री ने ये बयान किन्हीं राजनीतिक वजहों से दे दिया है. जमा खान बीएसपी से जीत कर आए हैं और जेडीयू का दामन थामने के बाद उनकी आस्था मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति है. गांव वालों ने जमा खान के इस दावे की पुष्टि की है कि वो राजस्थान के बांसवाड़ा के राजा महिमन नारायण सिंह के दो पुत्र भगवान सिंह और जय राम सिंह के परिवार ताल्लुक रखते हैं.

अलाउदीन खिलजी के कहने पर इनके परिवार वाले कैमूर के चैनपुर आए और यहां के राजा शालिवाहन से युद्ध किया. युद्ध में राजा शालिवाहन की हार हुई जिसमें उसकी मौत हो गई. भगवान सिंह के परिवार वालों ने मुस्लिम धर्म अपनाया और जय राम सिंह हिन्दू धर्म में ही रह गए. वर्षों से दोनों परिवारों का एक दूसरे यहां आना जाना होता है.

वर्षों तक होती रही हिन्दू रीति रिवाज से शादीमुस्लिम धर्म अपनाने के बाद भी जमा खान के खानदान में वर्षों तक हिन्दू रीति रिवाज से शादी होती रही और फिर बाद में निकाह भी पढ़ाए जाने का रिवाज रहा. जबकि मुस्लिम धर्म गुरुओं का कहना है कि राजस्थान के बांसवाड़ा के राजा महिमन सिंह के पुत्र भगवान सिंह और जयराम सिंह को शेर शाह ने बख्तियार खान के साथ कैमूर के चैनपुर में राजा शालिवाहन से युद्ध करने भेजा था. उस युद्ध में राजा शालिवाहन मारा गया जिसके बाद उसके छह कोर्ट को दोनों भाइयों में बांट दिया गया.

एक भाई बना मुसलमान, दूसरा रहा हिन्‍दू
भगवान सिंह ने सूफी संतों के साथ रहने के कारण मुस्लिम धर्म ग्रहण कर लिया, जिससे उनका नाम पहाड़ खान हो गया. उनके वंशज आज भी नौघरा सहित कई गांव में है, उन्‍हीं भगवान सिंह के वंशज मंत्री जमा खान हैं. यही नहीं, भगवान सिंह की मजार चैनपुर के नुनिया टोला में है, तो जयराम सिंह की स्मृति जयरामपुर में है.

कहानियों से पटा पटा पड़ा है बिहार
ये तो सिर्फ एक परिवार की कहानी है. बिहार में गांव के गांव ऐसे हैं जहां हिन्दू और मुसलमान एक दूसरे के शादी-ब्याह में जाते रहे हैं. इसके पीछे वजह ये रही कि लोगों ने अपने पुराने सम्बन्धों को अभी तक नहीं छोड़ा है. भले ही धर्म दीवार बीच में आ गई, लेकिन पारिवारिक रिश्ते बने रहे. वहीं,
उस वक्‍त जब पूरे देश में धर्म परिवर्तन को लेकर बहस तेज है, इस बात को समझना जरूरी है कि धर्म परिवर्तन सिर्फ तलवार की ताकत के जोर से नहीं हुआ, अलग-अलग समाज में अलग-अलग वजहें रही हैं. यकीनन, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वही बात कही जो राजनीतिक दल नहीं कह सकते. लोगों को जोड़ने की बात, लोगों को एक साथ लाने की बात और सह-अस्तित्व की बात.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
ब्रज मोहन सिंह

ब्रज मोहन सिंहएडिटर, इनपुट, न्यूज 18 बिहार-झारखंड

पत्रकारिता में 22 वर्ष का अनुभव. राष्ट्रीय राजधानी, पंजाब , हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में रिपोर्टिंग की.एनडीटीवी, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और पीटीसी न्यूज में संपादकीय पदों पर रहे. न्यूज़ 18 से पहले इटीवी भारत में रीजनल एडिटर थे. कृषि, ग्रामीण विकास और पब्लिक पॉलिसी में दिलचस्पी.

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First published: July 13, 2021, 9:09 AM IST
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