ऑक्सीजन के साथ ही आर्थिक मदद की भी मुकम्मल व्यवस्था है जम्मू-कश्मीर में

देश के बाकी हिस्सों की तरह जम्मू-कश्मीर को भी कोरोना के संकट का सामना करना पड़ा है. लेकिन वहां के कोरोना पीड़ितों के लिए सिर्फ इलाज ही नहीं, स्थाई मदद पहुंचाने की भी व्यवस्था की है प्रशासन ने. इसमें न सिर्फ बेरोजगारों का ध्यान रखा गया है, बल्कि उन अनाथ बच्चों और बुजुर्गों के बारे में भी सोचा गया है, जिन्होंने घर की देखभाल करने वाले परिवार के सदस्य को खोया है. देश में जहां हर ज़िले में एक ऑक्सीजन प्लांट का सपना देखा जा रहा है, वहां जम्मू कश्मीर में 20 ज़िलों में 44 प्लांट हैं यानी औसत ढाई गुणे के क़रीब. इसमें से पहले से 17, जबकि पिछले छह महीने में 27 नए प्लांट लगे हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: May 11, 2021, 9:46 pm IST
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ऑक्सीजन के साथ ही आर्थिक मदद की भी मुकम्मल व्यवस्था है जम्मू-कश्मीर में
लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने कोरोना की दूसरी लहर आने के पहले ही जम्मू-कश्मीर में ऑक्सीजन के नए प्लांट शुरु करा दिए थे.
जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा न सिर्फ सधे हुए राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि ट्रेंड टेक्नोक्रेट भी हैं. यही वजह है कि जब देश के बाकी राज्य कोरोना की पहली लहर से मुक्ति पाने के बाद आराम करने की मुद्रा में आ गए थे, सिन्हा अपने तकनीकी मिशन पर आगे बढ़ रहे थे. काशी हिंदू विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में एमटेक करने वाले सिन्हा को पता था कि अगर कोरोना ने इस केंद्र शासित प्रदेश में दोबारा दस्तक दी, तो हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा. एक तो घाटियों और पहाड़ियों से आच्छादित प्रदेश, दूसरी ओर दुर्गम रास्तों और मौसम की चुनौती.



ऐसे में मनोज सिन्हा ने कोरोना की दूसरी लहर आने के पहले ही राज्य में तमाम जिलों में ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाले प्लांट लगाने शुरु कर दिए. इसकी वजह से राज्य में छह महीनों के अंदर 27 प्लांट लगाये गए. इन सभी को संबंधित जिलों के अस्पतालों के नजदीक ही लगाया गया, ताकि ऑक्सीजन की सप्लाई में कोई समस्या न हो. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में कुल 44 ऑक्सीजन प्लांट हो गए हैं. छह महीने पहले यहां सिर्फ 17 ऑक्सीजन प्लांट थे. कल्पना कीजिए, अगर इस प्रदेश में समय से प्लांट नहीं लगे होते, तो क्या हालात बनते. मैदानी इलाकों वाले यूपी, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान में ऑक्सीजन को पहुंचाने में जबरदस्त परेशानी हुई, कोहराम मच गया, भला श्रीनगर में कौन सी ऑक्सीजन एक्सप्रेस पहुंचती. सिन्हा की दूरदर्शिता काम आई, जिसकी वजह से पूरे जम्मू-कश्मीर ने एक दिन के लिए भी ऑक्सीजन की समस्या नहीं झेली.



लेकिन ऑक्सीजन की कमी नहीं होने के बावजूद कोरोना वायरस इतना खतरनाक है कि इलाज में अगर देरी हो जाए, अस्पताल पहुंचने में कोई कोताही कर ले या फिर शरीर में कोई और समस्या हो, तो जान चली जाती है. जम्मू-कश्मीर में भी पिछले साल कोरोना की शुरुआत से लेकर अभी तक इस महामारी के कारण कुल 2782 लोगों की जान जा चुकी है. इनमें से 1572 कश्मीर डिवीजन के हैं, तो 1210 जम्मू डिवीजन के. जाहिर है, इनमें से बड़े पैमाने पर वो लोग हैं, जो या तो अपने बुजुर्ग माता-पिता का एक मात्र सहारा थे या फिर जिन पर उनके छोटे बच्चों की परवरिश आश्रित थी. ऐसे लोगों की मौत के कारण वो तमाम परिवार बिखर रहे हैं, जिन्होंने अपने कमाऊ पूत खोये हैं.



ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण करते लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा.
ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण करते लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा.




कोरोना की वजह से लॉकडाउन भी करने की नौबत आई है. जम्मू-कश्मीर में तो कमाई का बड़ा साधन ही टूरिज्म रहा है. ऐसे में सैलानियों के नहीं आने के साथ-साथ लॉकडाउन ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. लोगों के लिए घर चलाने का संकट खड़ा हो गया है.



इसी को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कुछ ऐसे फैसले किए हैं, जो पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकते हैं. मसलन जिन बुजुर्गों ने अपने एक मात्र कमाऊ सदस्य को खोया है, उनके लिए आजीवन विशेष पेंशन की व्यवस्था की जा रही है. इसी तरह से वो बच्चे जो कोरोना की वजह से अनाथ हुए हैं यानी जिनके माता-पिता की मृत्यु हो गई है, उनके लिए भी विशेष छात्रवृति की व्यवस्था जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से की जा रही है. यही नहीं, कोरोना की वजह से अपने सदस्य खोने वाले परिवारों के लिए स्वरोजगार के साधन भी मुहैया कराए जा रहे हैं और इसके लिए आवश्यक आर्थिक मदद भी.




रोजाना मजदूरी कर अपना और परिवार का पेट भरने वाले लोगों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है. अगले दो महीने तक ऐसे लोग, जो निर्माण कार्यों से लेकर पालकी, पिट्ठू या फिर खच्चर और घोड़ों पर लोगों को बिठाकर अपनी आजीविका चलाते थे, उनके लिए अगले दो महीनों तक हजार रुपये प्रति महीने की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा समय पर राशन की व्यवस्था से लेकर तमाम कल्याणकारी योजनाओं, मसलन पेंशन से लेकर मनरेगा तक का लाभ लोगों को बिना किसी रुकावट के मिल सके, ये भी सुनिश्चित किया जा रहा है.



जाहिर है, कोरोना के दौर में सेहत के साथ ही लोगों को रोजगार और परिवार पालने की चिंता भी सता रही है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन की इन घोषणाओं और आर्थिक पैकेज से उन लोगों को काफी राहत महसूस होगी, जो लंबे समय से आतंकवाद की पीड़ा झेलते आए हैं और जिन्हें आर्टिकल 370 की आड़ में उनकी अगुआई करने वाले हुक्मरान लंबे समय तक कोई फायदा पहुंचाने की जगह अपनी सियासत चमकाते आए. ऐसे में नॉर्मल इंजीनियरिंग से लेकर सोशल इंजीनियरिंग की काफी आवश्यकता है इस प्रदेश में, जिसे चतुर राजनेता और ट्रेन्ड इंजीनियर मनोज सिन्हा भली भांति जानते हैं और इसी सोच के साथ चल रहे हैं. स्वाभाविक तौर पर इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों की जिंदगी कोरोना के इस दौर में थोड़ी राहत भरी हो सकती है, जिसकी कोशिश कर रहे हैं लेफ्टिनेंट गवर्नर की भूमिका में सिन्हा.

(डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
ब्रजेश कुमार सिंह

ब्रजेश कुमार सिंह

लेखक नेटवर्क18 समूह में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से 1995-96 में पत्रकारिता की ट्रेनिंग, बाद में मास कम्युनिकेशन में पीएचडी. अमर उजाला समूह, आजतक, स्टार न्यूज़, एबीपी न्यूज़ और ज़ी न्यूज़ में काम करने के बाद अप्रैल 2019 से नेटवर्क18 के साथ. इतिहास और राजनीति में गहरी रुचि रखने वाले पत्रकार, समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन, दो दशक तक देश-विदेश में रिपोर्टिंग का अनुभव.

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First published: May 11, 2021, 9:46 pm IST