प्रधानमंत्री का जम्मू-कश्मीर दौरा: सपनों को हकीकत में बदलने की रफ्तार पर निगाह डालेंगे मोदी!

जम्मू–कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति के करीब पौने तीन साल बाद पीएम मोदी आज पहली बार प्रदेश के दौरे पर हैं. इस दौरान जम्मू-कश्मीर के लिए देखे गए उनके सपनों को धरातल पर उतारने का काम कितनी तेजी से हुआ है, इसका जायजा लेंगे वो खुद, साथ में विकास की गति को धार देने की कोशिश करेंगे बड़ी परियोजनों को लॉन्च कर.

Source: News18Hindi Last updated on: April 24, 2022, 10:06 am IST
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जम्मू-कश्मीर: सपनों को हकीकत में बदलने की रफ्तार पर निगाह डालेंगे मोदी!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धारा 370 हटने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर दौरे पर जा रहे हैं. (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज यहां राजकीय दौरा हो रहा है. बीच में एक बार वो आए भी थे, 4 नवंबर 2021 को, लेकिन वो मुलाकात राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में सैन्य जवानों के साथ दीपावली की खुशियां बांटने के लिए थी, कोई राजनीतिक प्रयोजन नहीं था और न ही कोई सरकारी कार्यक्रम.


जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति की अधिसूचना 6 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति ने जारी की थी. उस समय राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था. जून 2018 में महबूबा मुफ्ती की सरकार से बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया था, उसके बाद से ही जम्मू-कश्मीर का प्रशासन राज्यपाल के सीधे हाथों में गया. आर्टिकल 370 की समाप्ति के साथ ही संसद में संशोधन विधेयक पास करा मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिए.


आर्टिकल 370 की समाप्ति और जम्मू-कश्मीर के राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद हो रही पीएम मोदी की पहली राजकीय यात्रा कई मायनों में खास रहने वाली है. प्रधानमंत्री मोदी पंचायती राज दिवस के मौके पर जम्मू डिविजन के सांबा जिले के पल्ली गांव आ रहे हैं. पल्ली में वो न सिर्फ जम्मू-कश्मीर के तमाम हिस्सों से आए तीस हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों की सभा को संबोधित करेंगे, बल्कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वो देश भर के पंचायतों के प्रतिनिधि के सामने भी अपनी बात रखेंगे.

जिस प्रदेश से पीएम मोदी देश भर के पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे, उस जम्मू-कश्मीर ने पंचायती राज व्यवस्था के मामले में पिछले दो वर्षों में काफी प्रगति की है. त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था पूरी मजबूती से लागू हो चुकी है, पंचायत, ब्लॉक और डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कमिटि यानी डीडीसी के चुनाव सफलतापूर्वक हुए हैं, बड़े पैमाने पर लोगों ने उसमें भाग लिया है. 2018 तक पंचायती व्यवस्था महज रस्म अदायगी जैसी थी. लेकिन आज ये असरदार हो चुकी है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन की उप राज्यपाल के तौर पर अगस्त 2020 से ही अगुआई करने वाले मनोज सिन्हा ने सुनिश्चित किया है कि राज्य के सभी जिलों में पंचायत से लेकर डीडीसी तक के बजट पंचायत प्रतिनिधि ही जिलाधिकारी के साथ मिलकर बनाएं. पिछले साल हुआ भी ऐसा ही.


पंचायतों की ये व्यवस्था जम्मू-कश्मीर में कितनी सुदृढ हुई है, इसका क्या लाभ हुआ है, विकास की रफ्तार कितनी तेज हुई है, तकनीक का इस्तेमाल कितना बढ़ा है, इसका जायजा खुद पीएम मोदी लेंगे, जब वो आज दोपहर सांबा जिले के पल्ली गांव में होंगे. उनके साथ मौजूद होंगे खुद उपराज्यपाल सिन्हा, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह और पीएमओ में ही राज्य मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह, जो खुद जम्मू के इलाके से ही हैं.


पल्ली देश का पहला ऐसा गांव है, जो कार्बन न्यूट्रल होगा.


पल्ली देश का पहला ऐसा गांव है, जो कार्बन न्यूट्रल होगा.



पल्ली गांव अपने नाम इस मौके पर अनोखा रिकॉर्ड भी बनाने जा रहा है. ये देश का पहला ऐसा गांव है, जो कार्बन न्यूट्रल होगा. खुद पीएम मोदी पल्ली गांव में स्थापित किए गए पांच सौ किलोवाट के सोलर पावर प्लांट का उद्घाटन करेंगे. पल्ली अपनी उर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से सौर उर्जा पर निर्भर रहने वाला है, चाहे पंचायत भवन का कामकाज हो या फिर स्कूली बच्चों के कंप्यूटर, घरों की बिजली से लेकर पानी की सप्लाई तक, सभी कुछ सौर उर्जा से.


गांव कैसे आदर्श स्मार्ट विलेज बन सकते हैं, ये भी पीएम मोदी पल्ली में देखेंगे, जिसका ढांचा नोकिया ने तैयार किया है. स्मार्टपुर नाम दिया गया है, उस मॉडल को, जो आदर्श ग्राम की कल्पना को जमीन पर उतारने का तरीका बताता है. इसके तहत गांव को डिजिटल विलेज बनाने की तैयारी है, जिससे गांव में ही लोग तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से रोजगार के साधन बढ़ा सकें, शहरों की तरफ उनका माइग्रेशन रुके, स्वास्थ्य, सड़क, सफाई हर स्तर पर गांव भी शहरों जैसे चमकदार बनें. ये गांव उस डिजिटल डिवाइड को भी खत्म करेंगे, जिसकी वजह से लोग गांव छोड़कर शहरों की तरफ भागते हैं. स्मार्टपुर परियोजना के छह प्रमुख स्तंभ होंगे- स्वास्थ्य, शिक्षा, आमदनी, मनोरंजन, रोजगार और प्रशासन. इन सभी छह पहलुओं पर ध्यान देकर ही गांव को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है.


पल्ली के अपने दौरे के शुरुआती आधे घंटे में पीएम मोदी इस ग्राम पंचायत के सदस्यों के साथ इन तमाम पहलुओं पर चर्चा करेंगे, साथ में वो प्रदर्शनी भी देखेंगे, जो रूरल हेरिटेज ऑफ सांबा के नाम से इंटैक ने लगाई है. गांवों का सदियों पुराना रीति-रिवाज रहा है, संस्कृति से लेकर संस्कार तक, इसकी झलक यहां दिखलाई गई है. पल्ली जैसे ही आदर्श ग्राम पूरे देश में विकसित हो सकें, पीएम मोदी की यही कल्पना है और इसीलिए पल्ली से ही पंचायती राज दिवस के मौके पर पूरे देश के पंचायत प्रतिनिधियों से वो मुखातिब भी होने वाले हैं, अपनी बात रखने के लिए.


पल्ली पीएम मोदी के उस नए जम्मू- कश्मीर के सपने की एक झांकी हो सकती है, जिसकी बात की थी उन्होंने धारा 370 की समाप्ति के बाद. पीएम मोदी का साफ तौर पर मानना रहा है कि धारा 370 ही जम्मू-कश्मीर के विकास में सबसे बड़ा बाधक रहा, क्योंकि इसी का सहारा लेकर यहां की पार्टियों ने जम्मू-कश्मीर की आम जनता के विकास के लिए काम करने की जगह भ्रष्टाचार करते हुए अपना घर भरने पर जोर दिया.

नया कश्मीर का नारा हकीकत की धरातल पर पिछले दो वर्षों में कितने असरदार ढंग से उतरा है, उसकी भी समीक्षा का समय होगा ये पीएम मोदी के लिए. जम्मू-कश्मीर के लिए अपने सपने को साकार करने के लिए ही उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रशासन की अगुआई ऐसे व्यक्ति को दी, जिनके काम को उन्होंने खुद करीब से देखा था अपनी सरकार के मंत्री के तौर पर. अमूमन होता ये रहा था कि जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक प्रमुख का दायित्व लंबे समय तक सैन्य अधिकारियों, नौकरशाहों और प्रमुख पुलिस अधिकारियों को ही मिलता रहा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की गंभीर समस्या को देखते हुए.


लेकिन पीएम मोदी ने नया कश्मीर के सपने को साकार करने के लिए यहां ऐसे व्यक्ति का चुनाव किया, जो खुद लोगों के बीच काम करता रहा हो, लोगों की उम्मीदों और समस्याओं की समझ हो और उसके लिए मेहनत करने को तैयार हो. इसी सोच के तहत मनोज सिन्हा को जम्मू-कश्मीर का उपराज्यपाल बनाकर उन्होंने पौने दो साल पहले भेजा. इरादा ये था कि राज्य की राजनीति महज दो-तीन परिवारों के हाथ से बाहर निकलकर समावेशी हो, प्रदेश की जनता की इसमें पूर्ण हिस्सेदारी हो, वो अपने भाग्य का निर्धारण खुद करे. जाहिर है, इसमें जो कामयाबी मिली है, उसी की निशानी तीस हजार से अधिक वो जन प्रतिनिधि हैं, जो इस केंद्र शासित प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था के हिस्सेदार के तौर पर उनके सामने आज होंगे.


जम्मू-कश्मीर में पंचायती व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही पानी-बिजली-सड़क पर खास ध्यान दिया गया है. किसी भी प्रदेश के विकास के बुनियादी मापदंड हैं ये. जम्मू-कश्मीर की एक करोड़ तीस लाख की आबादी को पहले अपने घरों में नल के जरिये पानी मुहैया नहीं होता था, लेकिन पिछले डेढ़-दो वर्षों में इस पर तेजी से काम हुआ है. उपराज्यपाल सिन्हा की अगुआई में हर घर नल जल योजना को तेजी से लागू किया गया है. इस साल दिसंबर के अंत तक राज्य के सभी 4290 पंचायतों में ये योजना पूरी तरह लागू हो जाएगी.


जम्मू-कश्मीर में बिजली के मामले में भी तेजी से काम हुआ है.


जम्मू-कश्मीर में बिजली के मामले में भी तेजी से काम हुआ है.



जम्मू-कश्मीर में बिजली के मामले में भी तेजी से काम हुआ है. न सिर्फ बिजली वितरण की व्यवस्था मजबूत की गई है, बल्कि बिजली उत्पादन और आपूर्ति को भी बढ़ाने की कोशिश की गई है. अगर आंकड़ों के लिहाज से देखें, तो 1947 से लेकर 2018 तक, जब जम्मू-कश्मीर की सियासत और तकदीर मोटे तौर पर स्थानीय दलों के नियंत्रण में थी, महज 8400 एमवीए की बिजली वितरण क्षमता थी, उसमें 2018 से 2022 आने तक 4000 एमवीए की बढोतरी की गई है. यानी पैंतीस साल में करीब 4000 एमवीए की क्षमता बढ़ी, तो पिछले डेढ़-दो वर्षों में ही उतनी वितरण क्षमता बढा ली गई. ये प्रशासन की कार्यकुशलता बढ़ने का एक बड़ा प्रमाण है, जिसके लिए जोर रहा है पीएम मोदी का.


जम्मू-कश्मीर में पनबिजली उत्पादन की काफी संभावनाएं रही हैं, लेकिन पहले इसका भी दोहन ढंग से नहीं किया गया. विशेषज्ञों का अनुमान है कि जम्मू-कश्मीर में करीब 20000 मेगावाट पनबिजली उत्पादन की संभावना है, लेकिन 1947 से लेकर 2018 तक महज 3500 मेगावाट ही पनबिजली पैदा की जा सकी. इसके उलट पिछले डेढ़ वर्षों में ही करीब 3500 मेगावाट की पनबिजली परियोनजाओं को मंजूरी दी गई है. पल्ली की अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी करीब 1400 मेगावाट पनबिजली पैदा करने वाली परियोजनाओं के लिए आधारशीला रखने वाले हैं.


जहां तक सड़क का सवाल है, उस पर भी हाल के डेढ़-दो वर्षों में तेजी से काम हुआ है. जब राज्य में आखिरी चुनी हुई सरकार महबूबा मुफ्ती की अगुआई में चल रही थी, उस वक्त औसतन सालाना 1500 किलोमीटर सड़क का निर्माण होता था. अब हर साल 3000 किलोमीटर सड़क बनती है. पीएम मोदी खुद आज के दिन दिल्ली-अमृतसर-कटरा को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करने वाले हैं.


जम्मू-कश्मीर में अब हर साल 3000 किलोमीटर सड़क बनती है.


जम्मू-कश्मीर में अब हर साल 3000 किलोमीटर सड़क बनती है.



प्रदेश के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है, इसकी झलक कई आंकड़ों से मिलती है. मसलन राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति बिजली खपत का आंकड़ा 1208 यूनिट का है, जो जम्मू-कश्मीर में पिछले दो वर्षों में बढ़कर 1384 यूनिट हो गया है. यही नहीं जहां राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिक स्कूलों में 32 छात्रों पर एक शिक्षक की उपलब्धता है, वही जम्मू- कश्मीर में महज चौदह छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है.


जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. 2018 तक जहां प्रदेश में महज तीन मेडिकल कॉलेज मौजूद थे, वो संख्या अब बढ़कर दस हो चुकी है, सात नए मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं. पिछले दो वर्षों में राज्य में 1230 नए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाए गए हैं. यहां की सेहत नामक स्वास्थ्य सुरक्षा स्कीम तो पूरे देश में अनोखी है, जहां प्रोफेसर से लेकर आम श्रमिक तक, बिना किसी भेदभाव के सबको इलाज की सुविधा बीमा योजना के तहत उपलब्ध है.

इन सब आधारभूत सुविधाओं के बढ़ने और आतंकी घटनाओं में कमी आने का असर यहां तेजी से बढ़ते औद्योगिक निवेश के आंकड़ों में भी झलक रहा है. पिछले एक साल में 52000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल हो चुके हैं. खुद पीएम मोदी की मौजूदगी में बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की निवेश परियोजनाएं लांच होंगी.


राज्य में आतंकी संगठनों और भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई कार्रवाई ने अलगाववादी तत्वों की कमर तोड़ डाली है. चाहे हुर्रियत से जुड़े अलगाववादी नेता हों, या फिर बड़े आतंकी, सबको प्रदेश के बाहर की जेलों में भेजा गया है. अकेले तिहाड़ में ही यासीन मल्लिक से लेकर सज्जाद शाह और मशरत आलम जैसे बड़े अलगाववादी अपनी एड़ियां घिस रहे हैं, जिन्होंने खुद जम्मू-कश्मीर को आतंक की आग में धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई थी. इनको मिल रही आर्थिक मदद के हवाला नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है. रौशनी एक्ट से लेकर जम्मू-कश्मीर बैंक से जुड़े घोटालों में असरदार कार्रवाई हुई है. प्रशासन के अंदर घुसे आतंकवादियों के रिश्तेदारों और मददगारों को बाहर किया गया है. इन सबकी वजह से प्रशासन की कार्यकुशलता बढ़ी है.


ऐसे में एक तरफ जहां विकास कार्यों की रफ्तार तेज हुई है, तो दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों का आना बढ़ा है. पिछले छह महीने में ही अस्सी लाख पर्यटक जम्मू-कश्मीर आ चुके हैं, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है. अमरनाथ की यात्रा जून के महीने में फिर से शुरू होने जा रही है. जाहिर है, पीएम मोदी ने नया कश्मीर का जो सपना देखा था, उसको हकीकत में बदलने का काम पिछले डेढ़-दो वर्षों में तेजी से हुआ है, लेकिन सफर अभी लंबा है, जिसका अंदाजा खुद मोदी को भी है और जम्मू- कश्मीर में उनके लेफ्टिनेंट सिन्हा को भी.


(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
ब्रजेश कुमार सिंह

ब्रजेश कुमार सिंह

लेखक नेटवर्क18 समूह में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से 1995-96 में पत्रकारिता की ट्रेनिंग, बाद में मास कम्युनिकेशन में पीएचडी. अमर उजाला समूह, आजतक, स्टार न्यूज़, एबीपी न्यूज़ और ज़ी न्यूज़ में काम करने के बाद अप्रैल 2019 से नेटवर्क18 के साथ. इतिहास और राजनीति में गहरी रुचि रखने वाले पत्रकार, समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन, दो दशक तक देश-विदेश में रिपोर्टिंग का अनुभव.

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First published: April 24, 2022, 10:06 am IST
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