ड्रग्स जेहाद का मुकाबला करने के लिए मोदी सरकार ने कसी कमर!

नरेंद्र मोदी सरकार ने 2023 तक भारत को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है, जिसे पूरा करने में जी-जान से जुट गई हैं सुरक्षा एजेंसियां. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके लिए रणनीति बनाई है और सुरक्षियां एजेंसियां इसे लागू करने में. यही वजह है कि पाकिस्तान से होने वाली नारकोटिक्स की तस्करी को रोकने के लिए सीमा पर न सिर्फ कड़ी चौकसी बरती जा रही है, बल्कि घुसपैठियों पर बेहिचक गोली भी दागी जा रही है.

Source: News18Hindi Last updated on: September 20, 2020, 4:48 PM IST
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ड्रग्स जेहाद का मुकाबला करने के लिए मोदी सरकार ने कसी कमर!
भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रग्स की खेप पहुंचाने के लिए बनाई गई सुरंग का निरीक्षण करते राकेश अस्थाना
सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के जवानों ने आज तड़के उन घुसपैठियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया, जो पाकिस्तान से हेरोइन और हथियार लेकर भारत में घुसने की ताक में थे. जम्मू सेक्टर में बीएसएफ की बुधवार चौकी के आसपास ये कोशिश की जा रही थी, जब हाथ में थर्मल इमेजिंग डिवाइस को लिये हुए जवानों को जीरोलाइन पर 4-5 घुसपैठिये दिखाई पड़े. बिना हिचक जवानों ने फायरिंग शुरु कर दी, जिसमें घुसपैठ की कोशिश करने वाले तस्करों को गोली भी लगी और वो पाकिस्तान की तरफ भाग गये. हड़बड़ी में वो 62 किलोग्राम हेरोइन का जत्था छोड़ गये, साथ में दो पिस्तौल भी. हेरोइन के इस जत्थे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत डेढ़ सौ करोड़ रुपये के आसपास बैठती है.

स्वाभाविक तौर पर बिना पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की मदद के इस तरह की तस्करी हो नहीं सकती, हेरोइन जैसे महंगे नशीले पदार्थ का इतना बड़ा जत्था सीमा तक नहीं पहुंच सकता. जम्मू सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से हमेशा फायरिंग भी की जाती है. मकसद होता है फायरिंग की आड़ में हथियार और नशीले पदार्थों के बड़े जत्थे को भारत में धकेला जाना. पहले पंजाब में सीमा पार से ड्रग्स की स्मगलिंग बड़े पैमाने पर होती थी, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में इस तरह की घटनाएं आए दिन हो रही हैं. कई मामलों में तो पाकिस्तान की तरफ से बड़े ड्रोन का सहारा लेकर हेरोइन और हथियारों की बड़ी खेप भारत में धकेली जाती है.

बीएसएफ के डीजी राकेश अस्थाना सीमा क्षेत्र में सुरक्षा का जायजा लेते हुए 


पाकिस्तान सोची-समझी साजिश के तहत ये कर रहा है. ये नये किस्म का जेहाद है, नये किस्म का आंतकवाद है. सुरक्षा एजेंसियां और विशेषज्ञ इसे नार्को टेरर या ड्रग्स जेहाद का नाम दे रहे हैं. आर्टिकल 370 की समाप्ति के बाद से जैसे ही भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान से हवाला के जरिये कश्मीर में आतंकियों को मिलने वाली आर्थिक मदद रोक दी है, तब से पाकिस्तान अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए नकदी रकम के बदले नशीले पदार्थों का सहारा ले रहा है.
सुरक्षा एजेंसियों ने जांच में पाया है कि आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान पहले जहां करोड़ों रुपये हवाला के जरिये भेजा करता था, उसकी जगह अब महज कुछ किलोग्राम हेरोइन के जत्थे से ये काम हो जाता है. मसलन पहले किसी आतंकी संगठन को आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार के साथ-साथ पांच करोड़ रुपये भेजे जाते थे, उसकी जगह अब हथियार और चार किलोग्राम हेरोइन भेज दी जाती है. हेरोइन की बड़ी कीमत आसानी से आतंकियों को हासिल हो जाती है.

इस्लाम में शराब हराम है, लेकिन अफीम या हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ नहीं. यही वजह है कि लंबे समय तक तालिबान के सीधे नियंत्रण में रहे अफगानिस्तान में दुनिया की 90 फीसदी हेरोइन बनती है. यही नहीं, पाकिस्तान भी अफगानिस्तान में पैदा होने वाली अफीम की अपने यहां प्रोसेसिंग कर हेरोइन बना लेता है. इस हेरोइन को ही आतंकी गतिविधियों के लिए नई नकदी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.


पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से पहले पंजाब में ड्रग्स जेहाद को अंजाम दिया. पंजाब के जो किसान जबरदस्त खेती के लिए मशहूर थे, उस पंजाब में जब पाकिस्तान प्रायोजित खालिस्तान आंदोलन को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस ने 90 के दशक में पूरी तरह खत्म कर दिया, तो पाकिस्तान ने ड्रग्स जेहाद का सहारा लिया. हट्टे-कट्टे किसानों और युवाओं के बीच ड्रग्स की सप्लाई सीमा पार से की जाने लगी और देखते-देखते पूरा पंजाब नशे की गिरफ्त में आ गया. आज हालत ये है कि पंजाब के गांवों में खेती करने के लिए मजदूर बिहार और उत्तर प्रदेश के गांवों से आते हैं, पंजाब के किसान और युवा नशे की गिरफ्त में हैं. इस तरह पाकिस्तान ने पंजाब की कई पीढ़ियों को बर्बाद करने में कामयाबी हासिल की है. जिस पंजाब से भारतीय सेना में जवानों का बड़ा हिस्सा आता रहा है, वहां के युवक पाकिस्तान प्रायोजित ड्रग्स जेहाद के कारण अपनी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा चुके हैं.
बीएसएफ अधिकारियों के साथ राकेश अस्थाना


पंजाब के बाद जम्मू-कश्मीर में भी पाकिस्तान यही करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन यहां उसकी मंशा आतंकी गतिविधियों को लगातार बढ़ाने की है ड्रग्स के जरिये टेरर फाइनेंसिंग कर. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के मंसूबों पर पिछले कुछ वर्षों में काफी पानी फेर दिया है. न सिर्फ बड़े पैमाने पर आंतकी मारे गये हैं, बल्कि हवाला का पूरा रैकेट तोड़ दिया गया है, जिसकी वजह से आतंकियों और उनके हुर्रियत जैसे समर्थकों को आर्थिक मदद मिलनी बंद हो गई है और आतंकी घटनाओं का सिलसिला काफी हद तक रुक गया है. ऐसे में भन्नाये पाकिस्तान ने अब ड्रग्स जेहाद का रास्ता अख्तियार किया है.

मोदी सरकार को पाकिस्तान की इस मैली मुराद का पूरा अंदाजा है. इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को न सिर्फ एलर्ट रहने को कहा गया है, बल्कि इसके लिए एक विस्तृत योजना भी बनाई गई है. खुफिया एजेंसियां और सीमा सुरक्षा के काम में लगी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं ड्रग्स जेहाद से मुकाबले के लिए. यही वजह है कि हाल के महीनों में बीएसएफ ने पाकिस्तान से घुसपैठ की कोशिश करने वाले लोगों पर जहां गोली बरसाने में कोई देरी नहीं की है, वही बड़े पैमाने पर हेरोइन की खेप भी जब्त की है. पिछले एक महीने में ही आधे दर्जन ऐसे वाकये हुए हैं, जहां बीएसएफ के जवानों ने कड़ी चौकसी बरतते हुए घुसपैठियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं के इरादों को नाकाम किया है.

डीजी कॉन्फ्रेंस में राकेश अस्थाना


पाकिस्तान के गंदे मंसूबों को देखते हुए ही बीएसएफ के नवनियुक्त डीजीपी राकेश अस्थाना ने सीमा क्षेत्रों के अपने दौरे की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से की. चार से दस सितंबर के अपने जम्मू-कश्मीर दौरे में अस्थाना हर अग्रिम मोर्चे पर गये और बीएसएफ के अधिकारियों और जवानों के साथ अपनी बैठक के दौरान ड्रग्स जेहाद के खिलाफ मोदी सरकार की रणनीति को साझा किया. इसके तहत न सिर्फ सीमा पर चौकसी के लिए आधुनिक उपकरण और हथियार दिये जाने की तैयारी है, बल्कि ड्रोन के जरिये ड्रग्स और हथियार भेजने की पाकिस्तान की साजिश को देखते हुए एंटी ड्रोन सिस्टम को लागू करने की योजना बनी है. इसके तहत अगर कोई ड्रोन पाकिस्तान की तरफ से ड्रग्स और हथियार लेकर भारतीय सीमा में आता है, तो उसे अचूक तौर पर ध्वस्त किया जा सकता है.

चौकसी हर जगह बढ़ाई जा रही है. जमीन से लेकर जल तक. पंजाब और जम्मू-कश्मीर में बीएसएफ की चौकसी को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान अरब सागर के जरिये सीधे गुजरात के तटों पर ड्रग्स और हथियार की खेप उतारने की साजिश रच रहा है और वहां से आईएसआई के नेटवर्क के जरिये पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक इस खेप को पहुंचाने की कोशिश. इसे देखते हुए कोस्टगार्ड और गुजरात पुलिस ने अपना अभियान तेज कर दिया है. हाल के महीनों में कई बार न सिर्फ बीच समंदर में कोस्ट गार्ड और गुजरात पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी एटीएस ने हेरोइन की बड़ी खेप पकड़ी है, बल्कि कई स्मगलरों को भी पकड़ा है.

भारत के सामने खतरा पश्चिम से ही नहीं है, बल्कि पूरब से भी है. पश्चिम में अफगानिस्तान और पाकिस्तान की चुनौती तो पूर्व में म्यांमार से स्मगल होने वाले ड्रग्स की चुनौती, जिसके पीछे चीन का हाथ है. म्यांमार के शान कस्बे में विद्रोही गुटों का दबदबा है और उनके पीछे है चीन का हाथ. चीन भी इन गुटों को समर्थन देकर पूर्वोत्तर के राज्यों में ड्रग्स के इस्तेमाल को फैला रहा है. हालात ये हैं कि मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर लोग नशे की चपेट में आ रहे हैं. अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन पहले से ही अपनी घिनौनी चाल में लगा हुआ है, अब वहां के लोगों को भी नशे में झोंक रहा है, ताकि लोग सोचने-समझने के काबिल भी नहीं रहें.

भारत के लिए चुनौती बड़ी है, मोदी सरकार को इसका अंदाजा भी है. इसलिए पिछले कुछ वर्षों से लगातार मित्र पड़ोसी देशों के साथ मिलकर ड्रग्स जेहाद का मुकाबला करने की तैयारी की जा रही है. हाल के वर्षों में मालदीव, श्रीलंका और बांग्लादेश के सहयोग से ड्रग्स की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं. ड्रग्स का ये अंतरराष्ट्रीय कारोबार तोड़ा जाए, इसके लिए पड़ोसी देशों के साथ समन्यव आवश्यक है. इसी कोशिश के तहत नारकोटिक्स पर नियंत्रण को लकर इसी साल फरवरी में भारत में एक बड़ा सम्मेलन भी हुआ, जिसमें खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए. शाह ने देश-विदेश से जुटे तमाम अधिकारियों और प्रतिनिधियों के सामने मोदी सरकार की प्राथमिकता और दृढ निश्चय को सामने रखा इस नये किस्म की चुनौती से निबटने के लिए, जो अपनी तरह का भयावह आतंकवाद है, जिसमें बड़े-बड़े बम ही नहीं फूटते, बल्कि पूरी की पूरी पीढ़ी खत्म कर दी जाती है. भारत के लिए चिंता ये है कि आबादी में युवाओं की तादाद सबसे अधिक है, लेकिन अगर युवा ही नशे की गिरफ्त में आ जाएं तो देश का क्या होगा.

भारत में ड्रग्स की समस्या कितनी गंभीर है, ज्यादातर लोगों को इसका अंदाजा नहीं. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में रोजाना एक हजार किलोग्राम यानी एक टन हेरोइन की खपत होती है. अगर साल की बात करें, तो करीब 365 टन. तीन सौ पैंसठ टन हेरोइन की कीमत करीब एक लाख चौवालीस हजार करोड़ रुपये. जिस देश में हेरोइन की इतनी बड़ी खपत होती है, उस पर काबू पाने की चुनौती उतनी ही बड़ी. 2019 में महज ढाई टन हेरोइन पकड़ी गई थी यानी कुल खपत का महज सात फीसदी. सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसको रोकना, वो भी कम समय के अंदर, चुनौती कितनी बड़ी है मोदी सरकार और उसकी एजेंसियों के लिए.

ध्यान रहे कि भारत में सिर्फ हेरोइन का ही इस्तेमाल नहीं होता नशे के लिए. सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद बॉलीवुड में ड्रग्स के इस्तेमाल की जो कहानियां सामने आ रही हैं और अभी तक जो जांच एनसीबी की तरफ से हुई है, उससे साफ पता चलता है कि हाई सोसायटी में हेरोइन के साथ कोकेन और मेथेम्प्टमीन का भी इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है, जो एक केमिकल ड्रग है. मेथेम्प्टमीन का चलन तो पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ बांग्लादेश में भी बड़े पैमाने पर है, जहां इसके टेब्लेट याबा के तौर पर जाने जाते हैं और काफी इस्तेमाल होते हैं फटाफट नशे की आगोश में जाने के लिए. इस साल अभी तक साढ़े छह लाख ऐसे टेब्लेट जब्त किये जा चुके हैं भारत में. बांग्लादेश भी इसके खिलाफ अभियान चलाए हुए है.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में डीजी कॉन्फ्रेंस में भाग लेने गए बीएसएफ के महानिदेशक राकेश अस्थाना


दो दिन पहले ही भारत और बांग्लादेश के अधिकारियों की बैठक जो ढाका में हुई, वहां याबा सहित तमाम किस्म के ड्रग्स के प्रसार को रोकने के लिए नई रणनीति पर सहमति बनी है. इस बैठक में बीएसएफ के महानिदेशक राकेश अस्थाना भी गये थे, जिनके पास नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का भी चार्ज है. मोदी सरकार ने सीमा पार से होने वाली ड्रग्स की तस्करी पर काबू पाने और इसके लिए बेहतर समन्यव के लिए ही बीएसएफ और एनसीबी दोनों की कमान अस्थाना को सौंप रखी है.

मोदी सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को लक्ष्य भी दे रखा है. वर्ष 2023 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करना है. ये आसान नहीं होगा, खास तौर तब जब भारत के दो पड़ोसी, लेकिन दुश्मन देश, पाकिस्तान और चीन, लगातार भारत में ड्रग्स को झोंकने में लगे हैं, न सिर्फ भारत की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के लिए, बल्कि ड्रग्स के जरिये टेरर फाइनेंसिंग करने के लिए. भारतीय एजेंसियों को भी इसका भली-भांति अंदाजा है. इसलिए न सिर्फ जमीन और समंदर की सीमा पर, बल्कि देश के अंदर भी ड्रग्स के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है. यही वजह है कि एक ही दिन जहां जम्मू सीमा पर 58 किलोग्राम हेरोइन सीज की जा रही है, तो भारत-नेपाल सीमा पर भी हेरोइन की खेप पकड़ी जा रही है. जरूरत है ऐसी ही सख्त निगरानी और कड़ी कार्रवाई की, ताकि भारत ड्रग्स जेहाद और नार्को टेरर की चुनौती से निबट सके. मोदी सरकार और उसकी एजेंसियों के इरादे भी यही हैं, देश के दुश्मनों को इस लड़ाई में भी मात देने की.
ब्लॉगर के बारे में
ब्रजेश कुमार सिंह

ब्रजेश कुमार सिंहGroup Consulting Editor

लेखक नेटवर्क18 समूह में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से 1995-96 में पत्रकारिता की ट्रेनिंग, बाद में मास कम्युनिकेशन में पीएचडी. अमर उजाला समूह, आजतक, स्टार न्यूज़, एबीपी न्यूज़ और ज़ी न्यूज़ में काम करने के बाद अप्रैल 2019 से नेटवर्क18 के साथ. इतिहास और राजनीति में गहरी रुचि रखने वाले पत्रकार, समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन, दो दशक तक देश-विदेश में रिपोर्टिंग का अनुभव.

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First published: September 20, 2020, 2:01 PM IST
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