गोडसे की भक्ति करने वाले नेता को कांग्रेस में प्रवेश देना कमलनाथ के लिए क्यों जरूरी था?

हिन्दू महासभा के समर्थक रहे ग्वालियर के बाबूलाल चौरसिया को कांग्रेस में प्रवेश देकर कमलनाथ ने अपने विरोधियों को खुलकर बोलने का मौका दे दिया है.

Source: News18Hindi Last updated on: February 27, 2021, 5:55 PM IST
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गोडसे की भक्ति करने वाले नेता को कांग्रेस में प्रवेश देना कमलनाथ के लिए क्यों जरूरी था?
हिंदू महासभा के पार्षद बाबूलाल चौरसिया ने कांग्रेस में एंट्री को घर वापसी बताया है.
कांग्रेस के हाथ से मध्यप्रदेश की सत्ता निकल जाने को एक साल का समय होने जा रहा है. इस एक साल में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य की कांग्रेस पर अपनी पकड़ मजबूत की है. महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की पार्टी हिन्दू महासभा के समर्थक रहे ग्वालियर के बाबूलाल चौरसिया को कांग्रेस में प्रवेश देकर कमलनाथ ने अपने विरोधियों को खुलकर बोलने का मौका दे दिया है. बाबूलाल चौरसिया ने वर्ष 2014 के नगरीय निकाय के चुनाव में हिन्दू महासभा के समर्थन से पार्षद का चुनाव लड़ा था. कांग्रेस उम्मीदवार को पराजय का सामना करना पड़ा था. ग्वालियर में नाथूराम गोडसे का मंदिर हैं. चौरसिया यहां गोडसे की पूजा करने भी जाते थे.

कमलनाथ विरोधियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं चौरसिया?

बाबूलाल चौरसिया के कांग्रेस प्रवेश पर सबसे ज्यादा मुखर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अरूण यादव हैं. यादव ने गुरूवार को एक ट्वीट कर लिखा-बापू हम शर्मिंदा हैं... शुक्रवार को यादव खुलकर विरोध में आ गए. एक बयान जारी कर यादव ने कहा कि -मेरी आवाज़ कांग्रेस और गांधी विचारधारा को समर्पित सच्चे कांग्रेस कार्यकर्ता की आवाज़ है. यादव ने अपने बयान में यहां तक कहा दिया कि वे विचारधारा के लिए हर राजनीतिक क्षति सहने को तैयार हैं. यादव के बयान के बाद चौरसिया के विरोध और समर्थन में कांग्रेस के नेताओं की लाइन लग गई. विरोध में दिग्विजय सिंह समर्थक ज्यादा दिखाई दिए. विधायक लक्ष्मण सिह ने कहा-गोडसे के उपासकों के लिए सेंट्रल जेल उपयुक्त स्थान है, कांग्रेसपार्टी नहीं. पूर्व मंत्री सुभाष सोजतिया ने भी अरूण यादव के बयान का समर्थन कर दिया. बात आगे बढ़ती चली जा रही है.

दिग्विजय सिंह को नहीं पता चौरसिया कौन हैं?
चौरसिया का कांग्रेस पार्टी में प्रवेश ग्वालियर के विधायक प्रवीण पाठक ने कराया है. पाठक ने अपनी सफाई में कहा कि मुझे गर्व है कि मैं उस पार्टी का साधारण सिपाही हूं जिसके नेता ने अपने पिता के हत्यारे को भी माफ कर दिया है. प्रवीण पाठक का आशय राजीव गांधी के हत्यारों से था. लेकिन, इसके सुर ऐसे थे, जैसे कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी की हत्या करने वाले को माफ कर दिया. प्रवीण पाठक पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के समर्थक माने जाते हैं. कमलनाथ के समक्ष चौरसिया ने पार्टी की सदस्यता ली. चौरसिया के कांग्रेस प्रवेश पर उठे विवाद पर जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने पलट कर मीडिया से पूछा कौन है बाबूलाल चौरसिया?

राज्य की कांग्रेस राजनीति में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को एक दूसरे का पूरक माना जाता है. पिछले साल मार्च में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए. सिंधिया के भाजपा में चले जाने के बाद कांग्रेस की राजनीति पूरी तरह से कमलनाथ ने अपने हाथ में ले ली है. कमलनाथ, प्रदेश कांगे्रस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं और प्रतिपक्ष के नेता भी. सुरेश पचौरी,अजय सिंह और अरूण यादव जैसे नेता भी अलग-थलग पड़ते दिखाई दे रहे हैं. अजय सिंह और अरूण यादव दोनों ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के दावेदार हैं.

कमलनाथ की चिंता नगरीय निकाय चुनाव में उम्मीदवार जुटाने की है ?ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर हुई है. आने वाले महीनों में नगरीय निकायों के चुनाव भी होना है. कांग्रेस के सामने बड़ी समस्या जीताऊ चेहरों की है. यही वजह है कि पार्टी हर उस चेहरे पर दांव लगाने के लिए तैयार है, जो सिंधिया के गढ़ में कांग्रेस को सहारा दे सकता है. बाबूलाल चौरसिया के कांग्रेस में प्रवेश से यह संकेत स्पष्ट है कि कमलनाथ को उन चेहरों से भी कोई परहेज नहीं है जो सिंधिया का साथ छोड़कर वापस आना चाहते हैं. पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा कहते हैं कि सालों बाद ही सही गोडसे की विचारधारा अपनाने वालों को समझ  आ रहा है कि सिर्फ गाँधीवादी तरीके से ही देश का उद्धार संभव है. चौरसिया के कांग्रेस प्रवेश से भाजपा को सालों बाद गोडसे के मामले में कांग्रेस को  उलटा कटघरे में खड़ा करने का मौका मिला है. भाजपा इस मुद्दे को लगातार हवा भी दे रही है. राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा-गोडसे के पुजारी अब करेंगे कांग्रेस की सवारी. कमलनाथ के लिए चौरसिया के मामले से पल्ला झाड़ना आसान नहीं है. कमलनाथ जब मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने ही गोडसे की मूर्ति की पूजा करने पर चौरसिया के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. बात बढ़ी तो चौरसिया ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि वे जिस मूर्ति की पूजा कर रहे थे, वह गोडसे की थी. चौरसिया कांग्रेस प्रवेश को अपनी घर वापसी बता रहे हैं!

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है. ये उनके निजी विचार हैं)
ब्लॉगर के बारे में
दिनेश गुप्ता

दिनेश गुप्ता

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. देश के तमाम बड़े संस्थानों के साथ आपका जुड़ाव रहा है.

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First published: February 27, 2021, 5:52 PM IST
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