गृहिणी से दबंग और ताकतवर विधायक कैसे बनीं रामबाई?

कमलनाथ सरकार में रामबाई की तूती बोला कर थी.उनके बोल रोज नया विवाद पैदा करने वाले होते हैं.जब तक कमलनाथ सरकार रही,उनके मन में मंत्री बनने की चाहत जोर मारती रही.

Source: News18 Madhya Pradesh Last updated on: February 24, 2021, 5:16 PM IST
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गृहिणी से दबंग और ताकतवर विधायक कैसे बनीं रामबाई?
रामबाई दमोह की पथरिया सीट से बीएसपी के टिकट पर विधायक चुनी गयी हैं.
रामबाई मध्यप्रदेश की सबसे ताकतवर विधायक मानी जाती हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर पथरिया से चुनाव जीतीं रामबाई के रसूख का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि हत्या के आरोपी उनके पति पर हाथ डालने का साहस पुलिस नहीं कर पा रही है. हटा के द्वितीय अपर न्यायधीश आरपी सोनकर की ऑर्डरशीट इस बात की ओर साफ इशारा कर रही है कि हत्याकांड के आरोपियों को पुलिस का संरक्षण है. हत्या के आरोपी रामबाई के पति गोविंद सिंह परिहार फरारी काट रहे हैं.

रामबाई विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा ले रही हैं.न्यायाधीश सोनकर ने सुप्रीम कोर्ट को जो स्टेटस रिपोर्ट भेजी है,उसमें यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि पुलिस उन्हें किसी मामले में फंसा सकती है. उन पर गलत ढंग से दबाव बनाया जा रहा है. पुलिस असहयोग कर रही है.वैसे इस मामले में महिला पुलिस अफसर ने द्वितीय सत्र न्यायाधीश पर कोर्ट में अपमानित करने का आरोप लगाते हुए विभिन्न स्तरों पर एक शिकायत भी भेजी है.

रामबाई के समर्थन से चली कमलनाथ सरकार
वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी बहुमत से चूक गई थी.कांग्रेस को सबसे ज्यादा 114 सीटें मिली थीं. भाजपा के खाते में 109 सीटें आई थीं.सबसे बड़े राजनीतिक दल के कारण कांग्रेस ने सरकार बनाई.कमलनाथ ने सरकार बनाने के लिए बहुजन समाज पार्टी,समाजवादी पार्टी और निर्दलीय विधायकों का समर्थन लिया था. चुनाव में बसपा दो सीटें जीती थी. दमोह जिले की पथरिया सीट पर रामबाई चुनाव जीती थीं.
दबाव में थे 'सरकार'
अल्पमत की सरकार होने के कारण कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ रामबाई के दबाव में रहते थे. रामबाई के दबाव के कारण ही उनके पति पर लगे हत्या के आरोप के मामले की जांच नहीं हो पाई. हत्या, बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए देवेन्द्र चौरसिया की हुई थी. हत्या का आरोप रामबाई के पति गोविंद सिंह समेत 7 लोगों पर लगा था.कांग्रेस नेता चौरसिया के परिजनों ने पथरिया विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के पुत्र इंद्रपाल पर हत्या का आरोप लगाया.परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने रामबाई के पति गोविंद सिंह, देवर कौशलेंद्र सिंह, भतीजा गोलू सिंह, श्रीराम शर्मा, अमजद पठान, लोकेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के बेटे इंद्रपाल पटेल के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की की थी. मामले में विधायक के कुछ रिश्तेदार अभी जेल में हैं.

रामबाई पर अफसरों को धमकाने के आरोपरामबाई,जिला पंचायत दमोह की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं.उनकी छवि दबंग महिला की है.आठवीं पास हैं.दसवीं की परीक्षा ओपन स्कूल से थी.एक विषय में फेल हो गईं.उन्हें अनुकंपा अंकों के साथ उत्तीर्ण किया.रामबाई दमोह में छात्रावास के वार्डन द्वारा छात्राओं से की जाने वाली अवैध वसूल रोकने के कारण वे सुर्खियों में रही हैं. कुर्मी,ठाकुर,दलित और मुस्लिम समाज का उन्हें समर्थन भी हासिल है.विधायक पहली बार बनीं.रामबाई अपने बयानों और कार्यशैली के कारण सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही हैं.कांग्रेस की सरकार को समर्थन देने के साथ ही उन्होंने कई कर्मचारियों की पिटाई तक कर दी थी.दमोह जिला कोषालय अधिकारी ने जिले के पथरिया विधानसभा क्षेत्र से बसपा की विधायक रामबाई के खिलाफ जिला कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की शिकायत कलेक्टर से की थी. सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें कथित तौर पर विधायक रामबाई कोषालय अधिकारी विवेक घारु को विधायक निधि की राशि एक पंचायत को जारी नहीं करने पर हड़का रहीं है और कार्रवाई किये जाने की चेतावनी दे रही हैं.

सीएए के समर्थन के कारण मायावती कर चुकी हैं पार्टी से निलंबित
मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से पहले रामबाई को नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन के कारण बसपा सुप्रीमो मायावती पार्टी से निलंबित भी कर चुकी थीं.रामबाई ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी.मोदी कैबिनेट के मंत्री प्रह्लाद पटेल दमोह संसदीय सीट से सांसद हैं. पथरिया सीट दमोह लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है. रामबाई ने जब सीएए का समर्थन किया तो केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने उनके बयान का समर्थन किया.प्रह्लाद पटेल ने कहा- रामबाई बधाई की पात्र हैं. देश की दोनों सदनों ने जिस कानून को पास किया हो और राष्ट्रपति ने जिस पर हस्ताक्षर किए हों देश के हर जागरूक व्यक्ति को उसका समर्थन करना चाहिए.रामबाई ने सीएए का समर्थन किया है इसके लिए वे बधाई की पात्र हैं.

भोपाल में सरकारी बंगले पर कब्जा कर चुकी हैं रामबाई
कमलनाथ सरकार में रामबाई की तूती बोला कर थी.उनके बोल रोज नया विवाद पैदा करने वाले होते हैं.जब तक कमलनाथ सरकार रही,उनके मन में मंत्री बनने की चाहत जोर मारती रही.पिछले साल मार्च में जब कमलनाथ की सरकार गिरी थी,उस वक्त पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मानेसर की होटल से रामबाई को निकाल कर लाए थे.अल्पमत वाली कमलनाथ की सरकार को समर्थन देने के बाद रामबाई ने भोपाल के चौहत्तर बंगला क्षेत्र में एक सरकारी बंगले पर कब्जा कर लिया था.यह मंत्रियों वाला बंगला था. रामबाई के ताले को हटवाने के लिए खुद कमलनाथ को हस्तक्षेप करना पड़ा था.

पति के खिलाफ चालान नहीं
कमलनाथ सरकार में ही पुलिस ने आरोपी पति गोविंद सिंह की भूमिका को संदिग्ध माना और उन पर आरोप सिद्ध प्रतीत नहीं होने पर पुलिस ने उनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश नहीं किया. इसके अलावा 25 हजार रुपए का इनाम भी निरस्त कर दिया. अब इस मामले की नए सिरे से जांच की जा रही है. गोविंद सिंह पर दमोह जिल के 4 थानों में 16 और जबलपुर में एक आपराधिक मामला दर्ज है.इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, महिलाओं को बहला-फुसलाकर ले जाना, लूट और डकैती की योजना से लेकर अवैध हथियार रखने के गंभीर मामले हैं.शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को भी रामबाई समर्थन दे रही हैं.मंत्री बनने की इच्छा अभी भी पाले हुए हैं.

जज पर लगा चुके हैं आरोपी पक्षपात का आरोप
दमोह के बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में रामबाई के पति गोविंद सिंह परिहार और परिवार के अन्य हत्या के आरोपी सदस्य द्वितीय सत्र न्यायाधीश पर पक्षपात किए जाने के आरोप भी लगा चुके हैं. इस बारे में दिए गए दो आवेदनों को पीठासीन अधिकारी ने पिछले माह निरस्त कर दिया था.जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुराधा शुक्ला ने दोनों मामलों की अलग-अलग सुनवाई करते हुए पीठासीन अधिकारी पर लगाए गए आरोपों, प्रस्तुत साक्ष्य एवं कार्यवाई का अवलोकन कर आरोप निराधार पाते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था.

अभियुक्त चंदू उर्फ कौशलेंद्र पुत्र रब्बी सिंह, संदीप पुत्र समुद्र तोमर, आकाश पुत्र आजाद परिहार, भानसिंह पुत्र अरवल परिहार की तरफ से एक आवेदन जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.उसमें उन्होंने पीठासीन अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 409 के तहत मामला अन्य न्यायालय में अंतरित किए जाने का आग्रह किया था.इसी प्रकरण में एक अन्य आवेदन गोलू उर्फ दीपेंद्र पुत्र वीरेंद्र परिहार तथा बलवीर पुत्र बहादुर ठाकुर ने भी जिला सत्र न्यायालय में देकर पीठासीन अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए थे.

ये था आरोप
दोनों ही आवेदन में पीठासीन अधिकारी पर आरोप लगाए गए कि वह कार्रवाई को प्रभावित करते हैं.अभियोजन पक्ष के साक्षी महेश चौरसिया के कथनों में जो बातें समर्थन नहीं करतीं उनका भी समर्थन करते हैं.उन्हें सिखाते हैं.एक अन्य आरोप में कहा गया कि 26 नवंबर 2020 को अभियोजन पक्ष के चार-पांच अधिवक्ताओं को सुनवाई के दौरान न्यायालय कक्ष में प्रवेश दिया गया,जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को बाहर कर दिया गया.(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)
ब्लॉगर के बारे में
दिनेश गुप्ता

दिनेश गुप्ता

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. देश के तमाम बड़े संस्थानों के साथ आपका जुड़ाव रहा है.

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First published: February 24, 2021, 5:09 PM IST
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