भगवान ही पार लगाएंगे नगरीय निकाय के चुनाव की नैया

कमलनाथ वोटरों को कांग्रेस की ओर मोड़ने के लिए वही फॉर्मूला अपनाते हुए नजर आ रहे हैं, जो शिवराज सिंह चौहान अपनाया करते थे. फॉर्मूला धार्मिक कार्यक्रमों से वोटर को रिझाने का है.

Source: News18 Madhya Pradesh Last updated on: March 3, 2020, 8:09 PM IST
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भगवान ही पार लगाएंगे नगरीय निकाय के चुनाव की नैया
निकाय चुनाव कांग्रेस और सीएम कमलनाथ के लिए चुनौती की तरह है.
दिनेश गुप्ता

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय के चुनाव के रूप में मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हुई है. चुनौती को स्वीकार करने के लिए चुनाव आगे खिसकाए जा चुके हैं. कमलनाथ वोटरों को कांग्रेस की ओर मोड़ने के लिए वही फॉर्मूला अपनाते हुए नजर आ रहे हैं, जो शिवराज सिंह चौहान अपनाया करते थे. फॉर्मूला धार्मिक कार्यक्रमों से वोटर को रिझाने का है. इंदौर में इसी तरह के फार्मूले पर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी काम कर रहे हैं. शहर के पितृपर्वत पर स्थापित की कई हनुमानजी की प्रतिमा के भव्य कार्यक्रम को इसी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. तीन मार्च को इंदौर की सड़कों पर नगर भोज भी आयोजित किया गया है. एक साथ 10 लाख लोगों को भोज कराने का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की जा रही है.

जबलपुर में नर्मदा गो-कुंभ से कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद
जबलपुर में पहली बार नर्मदा गो-कुंभ का आयोजन बड़े पैमाने पर किया गया है. इसका समापन 3 मार्च को होना है. 24 फरवरी से शुरू हुए इस आयोजन के जरिए कांग्रेस नर्मदा किनारे रहने वाले वोटर को अपनी और आकर्षित करने में लगी हुई है. जबलपुर राज्य के वित्त मंत्री तरुण भनोट का गृह नगर है. सरकार ने पहली बार नर्मदा गो-कुंभ के आयोजन के लिए दो करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई है. महाकौशल क्षेत्र का जबलपुर सबसे बड़ा शहर है. नर्मदा गो-कुंभ में सवा करोड़ नर्मदेश्वर से बना नौ फीट ऊंचा विशाल एवं भव्य शिवलिंग लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना रहा. वित्त मंत्री तरुण भनोट कहते हैं कि यह शिवलिंग धार्मिक जातिगत सद्भावना का प्रतीक है. अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए भनोट यह जोड़ने से नहीं चूकते कि शिवलिंग का डिजाइन मुस्लिम समाज के शेख असर अहमद आसू ने तैयार किया है. जबकि निर्माण संतोष सोनकर ने किया है. सोनकर अनुसूचित जाति वर्ग के हैं.
नर्मदा नदी के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि इससे निकलने वाला हर कंकर भगवान शंकर का ही रूप होता है. शिवलिंग के निर्माण में नदी के कंकरों का उपयोग किया गया है. शिवलिंग की ऊंचाई 11 फीट है. कांग्रेस सरकार ने कुंभ को आकर्षक बनाने के लिए वे सारे उपाए किए जो सिंहस्थ में किए जाते हैं. साधु-संतों की पेशवाई भी निकाली गई. महाकौशल में कांग्रेस काफी कमजोर मानी जा रही है. कांग्रेस जबलपुर से लोकसभा का आखिरी चुनाव 1984 में जीती थी. भारतीय जनता पार्टी ने इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए ही राकेश सिंह को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया था. पार्टी के नए अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा हालांकि खजुराहो से सांसद हैं, लेकिन इस संसदीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा महाकौशल में आता है. कांग्रेस के पास महाकौशल में केवल कमलनाथ का ही चेहरा है.

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कांग्रेस वही रणनीति अपना रही है जिस पर भाजपा ने अमल किया.


भाजपा के तौर-तरीके अपना रहे हैं कांग्रेसीजबलपुर में नर्मदा गो-कुंभ के आयोजन से पहले रामायण यात्रा भी निकाली गई थी. आयोजन में भाजपाई कहीं भी दिखाई नहीं दिए. डिंडोरी में शबरी जयंती का आयोजन आदिवासी वोट बैंक को कांग्रेस की ओर वापस लाने की रणनीति के तहत किया गया. महाकौशल में गोंड आदिवासी हैं. इस क्षेत्र में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सक्रियता से कांग्रेस को वोटों का लगातार नुकसान हो रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में कमलनाथ ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की मदद लेकर भाजपा को करारी चोट दी थी. राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कमलनाथ की कोशिश इस वोट बैंक को बचाने की है. कमलनाथ सरकार आदिवासियों के धार्मिक स्थलों के विकास की योजना भी बना रही है. गोंड आदिवासियों को हिन्दू धर्म से जोड़ने की कोशिश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कई सालों से कर रहा है. गोंड आदिवासियों के आराध्य बड़ा देव को भगवान शंकर का रूप बताने का अभियान स्वयंसेवक चलाते रहते हैं. शबरी जयंती के जरिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आदिवासियों को भगवान राम से जोड़ने की कोशिश की है. कमलनाथ सरकार राम वनगमन पथ पर पहले से ही काम कर रही है. कमलनाथ खुद को हनुमान भक्त के तौर पर पहले ही प्रोजेक्ट कर चुके हैं. नर्मदा गो-कुंभ के जरिए भगवान शंकर भी धार्मिक राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं. रामराजा की नगरी ओरछा में दो दिन का 'नमस्ते ओरछा' के नाम से भव्य आयोजन भी किया जा रहा है. ओरछा बुंदेलखंड क्षेत्र का हिस्सा है.

मालवा में कैलाश विजयवर्गीय दिखाई दे रहे हैं हनुमान भक्त
सत्ता जाने के बाद से भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई बड़ा धार्मिक या राजनीतिक आयोजन नहीं किया गया है. भारतीय जनता पार्टी के नेता अपने-अपने स्तर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते दिखाई दे रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की धार्मिक सक्रियता कम हुई है. नर्मदा नदी उनके गृह ग्राम से होकर ही मालवा की ओर बढ़ती है. मालवा में नर्मदा भक्ति के बजाए हनुमान भक्ति चल रही है. भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की पहल पर इंदौर के पितृ पर्वत पर हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित की गई है. प्रतिमा का वजन 108 टन का है. प्रतिमा स्थापना का कार्यक्रम 24 फरवरी से शुरू हुआ. 3 मार्च को इसका समापन होगा. इसी दिन होने वाले नगर भोज में 10 लाख श्रद्धालुओं के हिस्सा लेने की संभावना है. मालवा-निमाड़ की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय सबसे ताकतवर नेता माने जाते हैं. कमलनाथ सरकार से उनका टकराव भी लगातार हो रहा है. विजयवर्गीय के विधायक पुत्र आकाश विजयवर्गीय अपनी गतिविधियों के कारण लगातार चर्चा में बने रहते हैं. इंदौर नगर निगम प्रदेश की सबसे धनी नगर निगम मानी जाती है. कांग्रेस इस पर कब्जा करने की लगातार कोशिश भी कर रही है. अब तक सफलता मिली नहीं है. परिषद पर भाजपा का कब्जा रहा है.

मुख्यमंत्री कमलनाथ इस तथ्य से वाकिफ हैं कि नगरीय निकाय के चुनाव में भाजपा को पटखनी देना मुश्किल भरा है. यही कारण है कि उन्होंने नगरीय निकाय के चुनाव टाल दिए हैं. चुनाव मई-जून में होने की संभावना बनी हुई है. इससे पहले कमलनाथ सरकारी तंत्र के जरिए कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. प्रदेश के सभी  नगरीय निकायों में उन्होंने अफसरों को प्रशासक नियुक्त किया है. महापौर के सीधे चुने जाने की व्यवस्था को भी बदल दिया है. नई व्यवस्था में पार्षद अपना महापौर चुनेंगे. पहले सीधे जनता महापौर का चुनाव करती थी. मध्य प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि देश जानता है कि कांग्रेस दिल्ली में किस धर्म के वोटों की राजनीति कर रही है.

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First published: March 3, 2020, 8:09 PM IST
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