दमोह उपचुनाव: भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्य भूमिका में क्यों नहीं रखा?

मध्‍य प्रदेश की दमोह विधानसभा के उपचुनावी रण में राज्‍यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) आम भूमिका में दिख रहे हैं. जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) मुख्य भूमिका में हैं.

Source: News18 Madhya Pradesh Last updated on: April 4, 2021, 3:02 PM IST
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दमोह उपचुनाव: भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्य भूमिका में क्यों नहीं रखा?
क्‍या बुंदेलखंड की राजनीति में सिंधिया का दखल कम है? (File)
छह माह पहले मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव में मुख्य भूमिका में रहने वाले राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) दमोह के चुनावी रण में आम भूमिका में ही दिखाई दे रहे हैं. दमोह सीट को वापस भाजपा के खाते में लाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) मुख्य भूमिका में हैं. चुनाव की रणनीति भी मुख्यमंत्री चौहान खुद ही बना रहे हैं. राज्य भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा तो रणनीति पर अमल भर कर रहे हैं.

बुंदेलखंड का टीकमगढ़ जिला वह स्थान हैं जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए गए एक बयान के कारण मध्यप्रदेश की पूरी राजनीति बदल गई. पिछले साल तेरह फरवरी में टीकमगढ़ जिले के ग्राम कुडीला में संत रविदास जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में सिंधिया ने अतिथि शिक्षकों से उनकी मांग के बारे में संबोधित करते हुए कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र में जो वादा किया है, वह पूरा न हुआ तो वे भी समर्थन में सड़क पर उतर जाएंगे. बात सामान्य ढंग से कही गई थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के जवाब ने दोनों नेताओं के बीच के कटु रिश्तों को उजागर कर दिया. कमलनाथ ने जवाब में कहा कि सिंधिया को सड़क पर उतरना है तो उतर जाएं. इस जवाब के कुछ दिन बाद ही सिंधिया ने अपने समर्थक विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी. विधानसभा में कांग्रेस का संख्या बल कम हो जाने के कारण कमलनाथ सरकार का पतन हो गया था.

बुंदेलखंड की राजनीति में सिंधिया का दखल कम
सिंधिया राज परिवार का राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र ग्वालियर-चंबल अंचल के अलावा मालवा, मध्य भारत के कुछ इलाकों तक सीमित रहा है. यद्यपि उनकी छवि अन्य कद्दावर राजनेताओं की तुलना में ज्यादा चमकदार हैं. जनता के बीच भी उनके नाम का ग्लैमर है. ज्योतिरादित्य सिंधिया भी परिवार की परंपरा के अनुसार ही राजनीति करते आ रहे हैं. राज्य के परिवहन एवं राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत बुंदेलखंड में सिंधिया का चेहरा माने जाते हैं. राजपूत उन 22 विधायकों में थे, जिन्होंने पिछले साल मार्च में सिंधिया के साथ कांग्रेस पार्टी छोड़ी थी. छह माह पूर्व हुए विधानसभा के उपचुनाव में सिंधिया प्रचार का सबसे बड़ा चेहरा थे. कांग्रेस के आरोपों के केन्द्र में भी सिंधिया ही थे, जिन 28 सीटों पर उपचुनाव हुए थे उनमें गोविंद राजपूत के निर्वाचन क्षेत्र सुरखी के अलावा छतरपुर जिले का बड़ा मलहरा विधानसभा क्षेत्र भी था. दमोह में उप चुनाव कांग्रेस विधायक राहुल लोधी के इस्तीफे के कारण हो रहे हैं. राहुल लोधी ने अक्टूबर में इस्तीफा दिया था.
बुंदेलखंड के है भाजपा के कई कद्दावर चेहरे
दमोह विधानसभा की सीट पर उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की ओर से स्टार प्रचारकों की सूची में ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी है. दमोह में 17 अप्रैल को वोट डाले जाने हैं. कांग्रेस छोड़ने वाले विधायक राहुल लोधी भाजपा उम्मीदवार हैं. उनके समर्थन में भारतीय जनता पार्टी ने बुंदेलखंड के हर छोटे-बड़े दिग्गज नेता को प्रचार में उतार दिया है. राज्य के लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव को चुनाव क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है. दमोह केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल का निर्वाचन क्षेत्र है. पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का असर भी इस सीट पर है. दमोह पार्टी के कद्दावर नेता पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया का निर्वाचन क्षेत्र रहा है. तीन दशक से इस सीट पर वे लगातार चुनाव जीत रहे हैं. वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में मलैया, राहुल लोधी से लगभग आठ सौ वोटों से चुनाव हार गए थे. भाजपा इस उपचुनाव में हार का कोई खतरा उठाना नहीं चाहती है. इस कारण हर उस नेता का उपयोग कर रही है, जो चुनाव जिताने में सहायक हो सकते हैं. भाजपा प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी कहते हैं कि सिंधिया को प्रचार के लिए कब भेजना है, यह पार्टी को तय करना है.

सिंधिया को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करती कांग्रेसदमोह विधानसभा के उपचुनाव को लेकर कांग्रेस की कोई खास रणनीति अब तक सामने नहीं आई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रचार के लिए जिन नेताओं की सूची जारी की है उसमें भी खुद की पसंद का खास ख्याल रखा है. दिग्विजय सिंह समर्थक नेताओं को अलग रखने की कोशिश की गई है. कमलनाथ की रणनीति ऐसे लोगों को आगे रखने की है जो कि सिंधिया के लिए कटु से कटु शब्दों का उपयोग कर छवि खराब कर सकें. कांग्रेस लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भाजपा में जाने के बाद सिंधिया की पूछ-परख कम हो गई है. कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा कहते हैं कि भाजपा के लिए अब सिंधिया महत्वपूर्ण नहीं रहे हैं. ( नोट- यह लेखक के निजी विचार हैं)
ब्लॉगर के बारे में
दिनेश गुप्ता

दिनेश गुप्ता

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. देश के तमाम बड़े संस्थानों के साथ आपका जुड़ाव रहा है.

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First published: April 4, 2021, 2:53 PM IST
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