Opinion: विवादित सियासी बोलों से गरमा रही 'महाराणा प्र​ताप की धरती' राजस्थान

राजस्थान में उपचुनाव से पहले विवादित बोल छाए हुए हैं. 'नाथी का बाड़ा' से शुरू होकर 'खालाजी का बाड़ा' होते हुए विवादित बोल वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप तक जा पहुंचे है. ताजा मामला नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया का है. कटारिया के बयान पर कांग्रेस ने न सिर्फ हमला बोला है.

Source: News18Hindi Last updated on: April 14, 2021, 5:32 PM IST
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Opinion: विवादित सियासी बोलों से गरमा रही 'महाराणा प्र​ताप की धरती' राजस्थान
राजस्थान में उपचुनाव से पहले नेताओं के विवादित बयानों से सियासत गरम.
राजस्थान में उपचुनाव से पहले नेताओं के विवादित बोलों से सियासत और गरमा गई है. 'नाथी का बाड़ा' से शुरू होकर 'खालाजी का बाड़ा' होते हुए विवादित बोल वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप तक जा पहुंचे है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अपने आवास पर स्कूल टाइम में ज्ञापन देने पहुंचे शिक्षकों के
प्रतिनिधिमंडल को 'नाथी का बाड़ा' समझ रखा है क्या, कहकर चेता चुके हैं. भाजपा ने इस मुद्दा बनाया ताकि कांग्रेस को उपचुनाव में वोटों का नुकसान हो सके. इस बीच उपनेता राजेंद्र सिंह राठौड़ कूद पड़े. सुजानगढ़ की एक सभा में वे कांग्रेसी पर बिफर गए कि उनके नेता को सुजानगढ़ सीट नहीं निकालने देंगे. यह कोई 'खालाजी का बाड़ा' नहीं है. 'नाथी का बाड़ा' पर जहां सोशल मीडिया में जमकर मीम्स बने, वहीं 'खालाजी का बाड़ा' को राजस्थान में असम विधानसभा चुनाव के कांग्रेस नेताओं की बाड़ाबंदी से जोड़ा गया.

बहरहाल, जुबान फिसलने का ताजा मामला नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया का है. वैसे यह कोई पहली बार नहीं है कि कटारिया की जुबान फिसली हो. उन्होंने अपने ही पार्टी को मुश्किल में डालने के बाद माफी मांगी हो. अपने विवादित बोलों के लिए पहले भी कई बार विवादों में आ चुके हैं. ऐसा लगता है कि विवादित होकर सुर्खियां बटोरने में उन्हें मजा आता है.

कटारिया इससे पहले 'लव जिहाद' पर बोलते हुए कह चुके हैं कि 'हमारी बेटिया पंचर वालों के साथ भाग रही हैं.' वे मुस्लिमों की बढ़ती आबादी पर विवादित बयान दे चुके हैं. वे कह चुके हैं कि "अगर यही गति रही तो हर शहर में पाकिस्तान बन जाएगा." यही नहीं बलबोड़े कटारिया ने उदयपुर की एक धन्यवाद सभा में भगवान तक को भी नहीं बख्शा. इस बार ऐन उपचुनाव से पहले राजपूतों को नाराज करने वाले बयान ने उन्हें पिछले पांवों पर ला दिया है. नौबत दो बार माफी मांगने तक पहुंच गई, लेकिन राजपूत समाज की नाराजगी कम नहीं हुई और प्रदेश में कई जगह उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं.
दरअसल, राजसमंद की जनसभा में कटारिया ने कहा, "हमारे पूर्वज 1000 साल तक लड़े हैं. यह महाराणा प्रताप अभी गया ना. उसे क्या पागल कुत्ते ने काटा था. जो अपनी राजधानी और अपना घर छोड़कर डूंगर-डूंगर रोता फिरा. किसके लिए गया था. कुछ समझ में आता है या नहीं. क्या तुम उस पार्टी के साथ जाओगे?" कटारिया के बयान का वीडियो वायरल होते ही प्रदेशभर में राजपूत उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. कटारिया ने अपने कथन के लिए दो बार माफी भी मांग ली है, लेकिन नाराजगी थम नहीं रही. कांग्रेस इस आक्रोश को थमने भी नहीं देना चाहती. उसे उम्मीद है कि इससे नाराज राजपूत भाजपा को वोट नहीं देंगे.

प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा के बयान को मुद्दा बनाने के कारण जली-भुनी कांग्रेस अब पराई आग पर रोटी सेंक रही है. कटारिया के बयान पर कांग्रेस ने न सिर्फ हमला बोला है, बल्कि आग में घी डालते हुए कहा है कि यह जुबान फिसलना नहीं है, बल्कि कटारिया ने जानबूझकर महाराणा प्रताप के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है, ताकि राजसमंद उपचुनाव में उनके प्रत्याशी की हार हो. डोटासरा ने कहा कि यह जगजाहिर है कि कटारिया और किरण में बनती नहीं थी. राजसमंद से किरण की बेटी दीप्ती ही चुनाव लड़ रही हैं. राजपूत वोट खिसकने का नुक़सान उनको ही होगा. राजसमंद में राजपूत वोट करीब 17 हजार हैं और किरण माहेश्वरी पिछला चुनाव 24623 वोटों से ही जीतीं थीं. यहां दो दिन बाद ही उप चुनाव है, ऐसे में राजपूतों की नाराजगी दूर करना भाजपा की पहली प्राथमिकता बन गई है.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
ब्लॉगर के बारे में
हरीश मलिक

हरीश मलिक पत्रकार और लेखक

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक. कई वर्षों से वरिष्ठ संपादक के तौर पर काम करते आए हैं. टीवी और अखबारी पत्रकारिता से लंबा सरोकार है.

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First published: April 14, 2021, 5:28 PM IST
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