OPINION: सांसों को बचाने में केंद्र बनाम राज्य की राजनीति क्यों? एकजुटता से ही हारेगा कोरोना

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच दलगत राजनीति केंद्र बनाम राज्य का खेल खेलने में लगी है. लोगों के गले में सांसे अटकी हैं और ऑक्सीज़न आपूर्ति से लेकर दवाओं की कमी के मामलों में केंद्र-राज्य की रस्साकशी के बीच कोर्ट को दखल देना पड़ा है. वैक्सीन के दामों पर भी तकरार मची है.

Source: News18Hindi Last updated on: April 23, 2021, 10:30 AM IST
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OPINION: सांसों को बचाने में केंद्र बनाम राज्य की राजनीति क्यों? एकजुटता से ही हारेगा कोरोना
सांकेतिक फोटो. (File pic)
देश में जिस तेजी से कोरोना के संक्रमित केसों में इजाफा हो रहा है, उतनी ही तेजी से दलगत राजनीति केंद्र बनाम राज्य का खेल खेलने में लगी है. कोरोना से प्रभावित लोगों के गले में सांसे अटकी हैं और ऑक्सीज़न आपूर्ति से लेकर केंद्र-राज्य की रस्साकशी के बीच कोर्ट तक को दखल देना पड़ा है. अभी देश की दस फीसदी आबादी का भी वैक्सीनेशन नहीं हो पाया है और टीके के दामों पर तकरार मची है. ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि एक्टिव रोगियों की दिन-प्रतिदिन बढ़ती संख्या के बावजूद रेमडेसिविर इंजेक्शन भाजपा शासित राज्यों को ज्यादा मिल रहा है. राजनेताओं को कोरोना से प्रभावितों का हाहाकार सुनाई नहीं दे रहा है.

मरीजों को बचाने के बजाय शह-मात का खेल
राजस्थान की बात करें तो कोरोना की दूसरी लहर यहाँ कहर बरपा रही है. संक्रमित रोगी दस गुना तेजी से बढ़े हैं और एक्टिव रोगी पहली बार एक लाख से पार हुए हैं. ऐसे हालात में तड़पते मरीजों को तेजी से जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के बजाए केंद्र वर्सेज राज्य का शह-मात का खेल हो रहा है, क्योंकि दोनों जगह अलग-अलग दलों की सरकारें हैं.

एक्टिव रोगी ज्यादा रेमडेसिविर इंजेक्शन कम क्यों
पहले बात रेमडेसिविर इंजेक्शन की. देश में एक्टिव रोगियों में राजस्थान का छटा नम्बर होने के बावजूद केंद्र ने प्रदेश को रेमडेसिविर इंजेक्शन देने के मामले के 17वें पायदान पर पटक रखा है. हरियाणा, गुजरात में राजस्थान की तुलना में कम एक्टिव रोगी होने के बावजूद वह रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई लेने में हमसे कहीं आगे है. गुजरात में तो छह गुना ज्यादा इंजेक्शन दिए गए हैं. कोढ़ में खाज यह है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की बढ़ती मांग के चलते जयपुर और उदयपुर में डॉक्टर, एमबीबीएस छात्र, नर्सिंग कर्मी, मेडिकल दुकानदार रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाज़ारी पर उतर आये हैं. जिन रेमडेसिविर इंजेक्शन की सरकारी दर 5600 रूपए है, उनको ये सांसों के लालची और धूर्त कारोबारी 25-25 हज़ार में जरूरतमंदों को बेच रहे थे. शुक्र है पुलिस के डिकोय ऑपरेशन में इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ. वरना ये गिरोहबाज न जाने कितने मजबूरों को लूट रहे होते !!

ऑक्सीजन : उनको तो घी घणा, हमें मुट्ठीभर चना
अब बात करें जीवन के लिए सबसे जरूरीरी ऑक्सीज़न की. ऑक्सीजन की कमी के चलते प्रदेश में अलग-अलग जिलों में चार मरीज़ जान गंवा चुके हैं. इसके बावजूद ऑक्सीजन की आपूर्ति पर राजनीतिक शबाब पर है. गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश जैसे कुछ प्रदेशों में ऑक्सीज़न की आपूर्ति ज्यादा हो रही है. राजस्थान की तुलना में गुजरात में दस गुनी, मध्यप्रदेश में पांच गुनी और हरियाणा में लगभग दोगुनी आपूर्ति मिल रही है. जबकि इन तीनों ही राज्यों में एक्टिव केस राजस्थान से कम हैं. इस बाबत हेल्थ मिनिस्टर डॉ रघु शर्मा ने केंद्र को चिट्टी भी भेजी. तब जाकर सांसों को कुछ आस मिली और 250 मीट्रिक टन प्रतिदिन ऑक्सीजन मिलना शुरू हो पाया है.एक देश, एक वैक्सीन तो एक दाम क्यों नहीं
केंद्र ने ऐलान किया है कि 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन एक मई से दी जाएगी. लेकिन केंद्र ने वैक्सीन की तीन दरें तय कर न सिर्फ बखेड़ा खड़ा किया है, बल्कि वैक्सीनेशन का भार भी राज्यों पर डाला है. सवाल उठना लाज़िमी है की एक देश में एक वैक्सीन का दाम एक क्यों नहीं है ? दूसरे, जब केंद्र न बजट में 35,000 करोड़ रूपए सिर्फ वैक्सीन के लिए रखे थे तो अब राज्यों पर भार क्यों डाला जा रहा है ? वैक्सीन को लेकर राजनितिक रोटियां सेंकना भी शुरू हो गया है.

कांग्रेस शासित राज्यों की नीति भी अलग
केंद्र की घोषणा में बाद योगी सरकार ने तत्काल ऐलान कर दिया के उत्तरप्रदेश में 18 साल से ऊपर के लोगों को निशुल्क वैक्सीन लगेगी. राजस्थान सरकार का तर्क है की केंद्र को वैक्सीन राज्यों को मुफ्त देनी चाहिए. कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने भी कहा है कि कोरोनाकाल में राज्य वैक्सीन के लिए करोड़ों का बोझ उठाने में सक्षम नहीं हैं. इसी बीच छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने 18 साल से ऊपर के लोगों को मुफ्त डोज़ देने का ऐलान कर दिया है. इससे तो कांग्रेस शासित राज्यों की वैक्सीनेशन को लेकर नीति ही अलग हो गई है. बहरहाल, यह तय है कि कोरोना रूपी महामारी के लिए महा-राजनीति से कुछ होने वाला नहीं है. इसे हमें-आपको और सब राजनीतिक पार्टियों को मिलकर हराना होगा. इसके लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सिर्फ और सिर्फ कोरोना के खात्मे के बारे में सोचना, रणनीति बनाना और उनपर अक्षरशः अमल करना लाज़िमी है. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)  
ब्लॉगर के बारे में
हरीश मलिक

हरीश मलिक पत्रकार और लेखक

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक. कई वर्षों से वरिष्ठ संपादक के तौर पर काम करते आए हैं. टीवी और अखबारी पत्रकारिता से लंबा सरोकार है.

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First published: April 23, 2021, 10:30 AM IST
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