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Agnipath Scheme: ग्रामीण महिलाओं के लिए गेम चेंजर है अग्निपथ योजना

अग्निपथ योजना लड़कियों के लिए बहुत बड़ा अवसर है. सरकार ने युवा पीढ़ी को सैनिक वर्दी पहनने का मौका दिया है. यह योजना भारत की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मानसिकता को बदल सकती है. यह समझना आवश्‍यक है कि यह योजना कैसे इन ग्रामीण महिलाओं के लिए खेल बदलनेवाला (गेम चेंजर) साबित होगी.

Source: News18Hindi Last updated on: June 28, 2022, 3:21 PM IST
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Agnipath Scheme: ग्रामीण महिलाओं के लिए गेम चेंजर है अग्निपथ योजना
women empowerment by agnipath yojana

हाल ही में हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्निपथ भर्ती योजना की शुरुआत की. इसे भारतीय सशस्त्र सेना के लिए “सुधार योजना” के रूप में देखा जा रहा है. इस नई योजना के तहत प्रथम चरण में करीब 46,000 सैनिकों की भर्ती होगी जिसमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल होंगे और इनमें से 25 प्रतिशत  सैनिकों को उनकी सेवाओं में 15 साल के लिए दुबारा बहाल कर लिया जाएगा. बचे हुए 75 प्रतिशत को प्रशिक्षित और कुशल बनाया जाएगा और सेवा निधि के साथ उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाएगा. ये लोग समाज में दूसरी सेवाओं में अपना योगदान देंगे जहां विभिन्न सेवाओं में अग्निवीरों के लिए आरक्षण किए गए हैं. इसलिए विभिन्न राज्यों की महिलाओं को चाहिए कि वे इस योजना को एक अवसर के रूप में लें जो उन्हें अग्निवीर नारी के रूप में तैयार करेगा.


यह आलेख इस बात पर गौर करेगा कि कैसे अग्निपथ योजना भारत की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मानसिकता को बदल सकती है और किस तरह से यह इन ग्रामीण महिलाओं के लिए खेल बदलनेवाला (गेम चेंजर) साबित होगी.


पहले इसकी पृष्ठभूमि को देखें. ‘पिछले कुछ दशकों में दुनिया भर में ‘जेंडर के प्रति संवेदनशीलता’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ जैसे मुद्दे काफी चर्चित रहे हैं. इन बातों से ज़्यादा से ज़्यादा वाकिफ होने से ऐसी बहुत सी विचारधाराओं में थोड़ा सुधार देखने को मिला है जो पहले सामाजिक संरचनाओं में महिलाओं के साथ असमानता को सही ठहराता था. ‘सशक्तिकरण’ की परिकल्पना के इर्द गिर्द जो बहस उभरकर सामने आई है उसका समाज में मज़बूती से स्थापित उन संस्थाओं पर काफ़ी प्रभाव पड़ा है जो वर्तमान शक्ति संरचना जैसे परिवार, राज्य आदि को ताकत देते हैं.


कम उम्र में शादी और उन्हें बच्चा पैदा करनेवाली के रूप में मान लेने की प्रवृत्ति को गलत साबित करने की जरूरत है और इसके लिए उन्हें सम्मान, उनके महत्व और जीवन में उन्हें सुरक्षा देने की ज़रूरत है.


किसी एक भू-भाग में इतने सालों से सीमित रहने के बावजूद, महिलाएं अपनी सीमाओं के प्रति सजग होने लगी हैं. अब वह अपने शरीर पर अपना अधिकार होने की मांग करने लगी हैं, सामाजिक संस्थाओं में बराबर जगह दिए जाने की मांग वह उठाने लगी हैं और अपने पहचान की स्वीकृति की मांग करने लगी हैं. पिछले कुछ वर्षों में देश में महिला विकास की रणनीतियों में भारी वृद्धि देखने को मिली है ताकि कार्यस्थल, राजनीतिक भागीदारी, स्वास्थ्य सुविधाओं और संसाधनों के वितरण में जेंडर असमानता को दूर किया जा सके.


इतिहास पर नज़र दौड़ाने के बाद अब हम इसके आर्थिक लाभ पर दृष्टिपात करें. भारत में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कुशल नहीं होने, दूसरों पर निर्भर रहने, कई संस्थाओं द्वारा महिलाओं से संबंधित कार्यों में नौकरी देने, शहरी क्षेत्रों में उनको जगह देने आदि जैसी बातों के नहीं होने के कारण उन्हें कई तरह की हिंसा का सामना करना पड़ता है. और अगर महिलाएं अग्निपथ योजना में शामिल होती हैं तो इस स्थिति को बदला जा सकता है और इससे उन्हें ₹11.71 की सेवा निधि और एक करोड़ का जीवन बीमा भी मिलेगा. सरकार ऐसे अग्निवीरों के पुनर्वास में मदद करेगी जो चार साल की सेवा के बाद सेवा से बाहर होंगे. उन्हें कुशल होने का प्रमाणपत्र मिलेगा और नागरिक सेवाओं में भर्ती के लिए उन्हें ब्रिज कोर्स की सुविधा दी जाएगी.


अग्निवीर नारियों को भी पहले साल इस योजना एक तहत 30,000 का पैकेज मिलेगा. इसके बाद, इसमें 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी जिसका अर्थ यह हुआ कि दूसरे साल इनको ₹ 33,000, तीसरे साल ₹ 36,500 और चौथे साल ₹ 40,000 का पैकेज मिलेगा. सेवा निधि में योगदान के लिए उनके वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा काटा जाएगा और सेवा की समाप्ति यानी चार साल के बाद सरकार इसमें उतनी ही राशि जोड़कर उन्हें ₹ 11.71 लाख की राशि देगी. सभी अग्निवीर नारी को भी यही राशि दी जाएगी.


सरकारी नौकरियों में श्रम बल में बढ़ती गिरावट चिंता का कारण है. इसलिए यह योजना अग्निपथ में महिलाओं की भागीदारी में भारी बदलाव लाएगा और आर्थिक रूप से यह समाज में भी कई अर्थों में बदलाव का वाहक होगा.  सामाजिक संदर्भ की बात करें तो महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज के कारण हत्या, उच्च शिक्षा की कमी, परिवार में दूसरा दर्जा और परिवार में उनकी बात को महत्व नहीं दिए जाने जैसी बातों का सामना करना पड़ता है. अगर महिलाएं इस योजना में शामिल होती हैं, तो उनकी सामाजिक स्थिति में बदलाव आएगा और वित्तीय सुरक्षा भी उन्हें प्राप्त होगी. चार साल की सेवा के बाद जो राशि उन्हें प्राप्त होगी उसका प्रयोग वह अपनी उच्च शिक्षा और कोई व्यवसाय, स्टार्टअप शुरू करने, परिवार के लिए घर बनाने और अपनी गरीबी दूर करने के साथ साथ अपनी शादी पर कर सकती हैं.


हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में महिलाओं को पुरुषों से कमजोर मानने की जो समस्या है उसका भी निदान इससे हो जाएगा. इसके अलावा जवान होती लड़कियों के कारण मां-बाप के मन में जो डर पैदा होता है जिसके कारण उनमें कई तरह की मानसिक परेशानियां पैदा होती हैं, उसका भी इस योजना से समाधान हो जाएगा. लड़कियों के लिए अग्निवीर योजना ग्रामीण इलाक़ों में भी लड़कियों और उनके मां-बाप को चिंतामुक्त जीवन जीने का मौक़ा देगा. इसलिए हम कह सकते हैं कि अग्निपथ योजना लड़कियों और महिलाओं के लिए सामाजिक समस्याओं को काफ़ी हद तक दूर कर सकता है.


अब हम इस सांस्कृतिक संदर्भ में इसके प्रभाव को देखें. भारत कई संस्कृतियों को मानने वालों का देश है जहां कई परिवार महिलाओं को सशस्त्र बल में काम करने की इजाज़त नहीं देते. उनकी सोच है कि ऐसा करना उनकी संस्कृति के ख़िलाफ़ है और महिलाओं का काम सिर्फ अपने पतियों की सेवा करना है. लेकिन यह अग्निपथ योजना अग्निवीर नारी शक्ति तैयार करता है जो किसी भी लड़की को 17.5 से 21 वर्ष (जिसे कोविड के कारण अभी बढ़ाकर 23 वर्ष कर दिया गया है) की उम्र में सेना में शामिल होने का अवसर देता है. अगर वह कठिन परिश्रम करती है तो सेना में उसकी नौकरी जारी रह सकती है नहीं तो चार साल बाद सेवा से बाहर आने पर वह अपने गाँवों की लड़कियों और महिलाओं के लिए रोल मॉडल के रूप में गेम चेंजर साबित होंगी.


यह योजना लड़कियों के लिए बहुत बड़ा अवसर है. सरकार ने युवा पीढ़ी को सैनिक वर्दी पहनने का मौक़ा दिया है और यह एक ऐसी स्वतंत्रता है जिसका अनुभव सब नहीं कर सकते हैं.


सफल ऑनलाइन पंजीकरण के बाद अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में देश भर में अग्निपथ योजना के तहत भर्तियां की जाएंगी.  पहला बैच, जिसमें 25,000 सैनिक होंगे, दिसंबर के दूसरे सप्ताह में सेना प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होगा. दूसरा बैच 23 फरवरी के आसपास प्रशिक्षण शिविर में शामिल होगा. देश भर में कुल 83 भर्ती अभियान आयोजित होंगे जिनके द्वारा लगभग 40,000 हज़ार सैनिकों की भर्ती की जाएगी. इसी तरह, वायु सेना और नौसेना के लिए भी भर्तियाँ होंगी जिसके लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण होगा और उसके बाद शारीरिक और लिखित परीक्षा होगी.


इस नई योजना में भर्ती होने के लिए आयु सीमा की जहां तक बात है, तो 17.5 वर्ष से 21 साल के लड़के-लड़कियां इसमें भर्ती हो सकते हैं. रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि जो लड़के-लड़कियाँ 2020 में 21 साल के थे जब भर्ती की प्रक्रिया रोक दी गयी थी, वह भी सिर्फ़ इस साल सेना में भर्ती हो सकते हैं. रक्षा मंत्रालय ने कहा, “अग्निपथ योजना के तहत 2022 में भर्ती होने की ऊपरी आयु सीमा को बढ़ाकर 23 साल कर दिया गया है.”


रक्षा बल धीरे धीरे अग्निवीरों और अग्निवीर नारियों के प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सुविधा की व्यवस्था करने जा रहा है. प्रशिक्षकों के प्रोविज़न, होस्टल या बैरक और अनुसाशनात्मक सावधानियां शुरुआत में और इसके आगे की भर्ती के लिए सफल प्रशिक्षण देने की दृष्टि से जरूरी है.


यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि लड़कियां शारीरिक रूप से मज़बूत होने के साथ साथ परिवार में स्वतंत्र हों. इस योजना के माध्यम से यह एक अतिरिक्त लाभ होगा कि लड़की के परिवार वाले उसके महत्व को समझेंगे. यह सही में अवसर का लाभ उठानेवाली हर लड़की के लिए यह एक गेम चेंजर साबित होगा. अगर इस योजना के तहत इन लड़कियों को 17.5  और 18 साल की उम्र में मौक़ा मिलता है तो इससे उन्हें अपना महत्व समझने में मदद मिलेगी. अपने परिवार की चिंता करने की योग्यता, देर से शादी, अपने आसपास की दुनिया की समझ और सशक्तिकरण से देश, परिवार और खुद उस लड़की और उसके दोस्तों को काफ़ी फ़ायदा होगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी.


हर लड़की को अपना महत्व समझना चाहिए ताकि जीवन के हर क्षेत्र में वह खुद को साबित कर सके और अपने परिवार के लिए रोल मॉडल होने के साथ साथ उनके लिए आजीविका का प्रबंध कर सके.


सबको मिलाकर अगर देखा जाए तो यह योजना युवाओं और युवतियों के लिए एक स्वर्णिम अवसर है जिसके माध्यम से वे रक्षा बल में अपने करियर का चुनाव कर सकते हैं, अगर वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का उनके अंदर जज़्बा है.


फिर, इसके कुछ और फायदे भी हैं. जैसे कि ऐसा माना जाता है कि महिलाएं पुरुषों की तरह ताकतवर नहीं होतीं और इसे देखते हुए महिलाएं किसी और बात के अलावा अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर ज़्यादा ध्यान दे सकती हैं. रक्षा बलों में नौकरी करने का मतलब है अच्छा शरीर और बेहतर शारीरिक तंदुरुस्ती जो कि इसमें भर्ती के लिए जरूरी योग्यता है.


अगर कोई लड़की पढ़ाकू है तो वह सेना में भर्ती हो सकती है और सेवा से निकलने के बाद वह उच्च शिक्षा भी ले सकती है. जब वह सेवा से बाहर होगी, तो उसके अंदर ज़्यादा लगाव होगा. महिला होने का यहां कोई विशेष अर्थ नहीं है क्योंकि इसमें शामिल होनेवाले हर व्यक्ति को बराबर समझा जाता है और उन्हें समान प्रशिक्षण दिया जाता है और उनका सशक्तिकरण उनको सफलता के मार्ग पर आगे ले जाएगा. अगर चार साल के बाद वह सेवा से बाहर भी होती हैं तो इसके बाद भी उनके पास करियर के कई विकल्प होंगे. यूनिफ़ॉर्म पहनने से लड़कियों का व्यक्तित्व निखरेगा. यूपीएससी और अन्य परीक्षाओं में सफल होना चार साल की सेवा के बाद इससे निकलनेवाली लड़कियों के लिए आसान हो जाता है अगर सरकार उन्हें इसमें कुछ प्रतिशत आरक्षण देने के साथ उनका दिशानिर्देश कर दे तो.


वर्दी पहनने से जिस अभिमान का आभास होता है उसका कोई सानी नहीं है. अंततः, इस सेवा में होने के कारण लड़कियों को अपने परिवार और अपने गांव में आनेवाले दिनों में जो इज्जत मिलेगी वह सच्चे अर्थों में चिरस्थायी होगी. यह एक वास्तव में “गेम चेंजर” योजना है जो ग्रामीण भारत का भाग्य बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्योंकि यह लड़कियों में खुद के सशक्तिकरण का भाव भरेगी.


(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
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लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक किनी (रिटायर्ड)

लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक किनी (रिटायर्ड)

लेखक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति भवन के पूर्व नियंत्रक व रक्षा राज्यमंत्री के सलाहकार भी रह चुके हैं.

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First published: June 28, 2022, 3:21 PM IST
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