Tokyo Olympics: भारत के पास हॉकी में मेडल जीतने का गोल्डन चांस, पूरा होगा 41 साल का इंतजार!

Tokyo Olympics: ओलंपिक में इस साल भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team) को पदक का दावेदार माना जा रहा है. भारत ने अब तक के ओलंपिक इतिहास में सबसे अधिक मेडल जीते हैं. भारत ने हॉकी में 11 मेडल जीते हैं, जिसमें 8 गोल्ड शामिल हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: July 17, 2021, 7:27 PM IST
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Tokyo Olympics: भारत के पास हॉकी में मेडल जीतने का गोल्डन चांस, पूरा होगा 41 साल का इंतजार!
Tokyo Olympics 2020: भारतीय हॉकी टीम शनिवार को टोक्यो रवाना हुई. (PTI)
टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) का काउंटडाउन अब खत्म होने को है. खेलों का यह महाकुंभ 23 जुलाई से टोक्यो में होना है. टोक्यो (Tokyo 2020) में अपने खेल-कौशल दिखाने के लिए भारतीय खिलाड़ी भी कमर कसकर पूरी तरह तैयार है. भारत की ओर से इस साल 126 खिलाड़ियों का दल ओलंपिक में जा रहा है. इस बार ओलंपिक (Olympics) में भाग लेने वाला भारत का यह अब तक का सबसे बड़ा दल है. भारत इस बार 18 खेलों की 69 प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेगा. ये भी पहला मौका होगा, जब भारत इतनी बड़ी संख्या में खेलों की अलग-अलग प्रतिस्पर्धा में अपनी चुनौती पेश करेगा. भारतीय खिलाड़ियों का पहला दल 17 जुलाई को टोक्यो के लिए रवाना हो चुका है.

इस साल भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team) को पदक की प्रबल दावेदार माना जा रहा है. खेलों के महाकुंभ ओलंपिक गेम्स में भारतीय हॉकी टीम का स्वर्णिम इतिहास रहा है. भारत ने अब तक के ओलंपिक इतिहास में सबसे अधिक  मेडल जीते हैं तो वह हॉकी में ही. भारत ने हॉकी में 11 मेडल जीते हैं, जिसमें आठ गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है. यह बात अलग है कि लगातार छः बार की ओलंपिक चैंपियन और आठ बार की ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम 1980 मास्को ओलंपिक के बाद से अब तक कोई पदक नहीं जीत सकी है. बावजूद इसके आज भी ओलंपिक में सर्वाधिक आठ बार स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड भारत के नाम ही है. साल 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में हॉकी टीम ने भारत को उसका पहला गोल्ड मेडल दिलाया. इसके बाद भारत ने लॉस एंजेलिस (1932), बर्लिन (1936), लंदन (1948), हेलसिंकी (1952) और मेलबर्न (1956) के ओलंपिक खेलों में लगातार स्वर्ण पदक जीते. यह  समय भारतीय हॉकी का स्वर्णिम दौर था.

क्या इस बार अनुभवी मनप्रीत सिंह के नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम एक नया इतिहास रचने में कामयाब होगी. मनप्रीत की खासियत यही है कि वे प्रतिकूल प्रतिस्थियों में भी दबाव में नहीं आते हैं और यही धैर्य व सयंम उन्हें ओलंपिक में भी दिखाना होगा, जिसके लिए वे दक्ष हैं. अपने करियर का तीसरा ओलंपिक खेलने जा रहे मनप्रीत सिंह का कप्तान के तौर पर यह पहला ओलंपिक होगा. उनकी अगुआई में क्या भारतीय टीम एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर 41 सालों का सूखा समाप्त करने में सफल होगी. मनप्रीत सिंह ने 2017 में भारतीय टीम की कमान संभाली थी. पिछले कुछ वर्षो में बतौर कप्तान उनका सफर शानदार रहा है और वे टीम की मुख्य कड़ी भी साबित हुए हैं. मनप्रीत की कप्तानी में टीम 2017 का एशिया कप, 2018 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, 2019 में एफआईएच सीरीज फाइनल और 2018 विश्व कप के क्वॉर्टर फाइनल में स्थान बनाने में कामयाब हुई थी. मनप्रीत 2014 में एशिया खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे. विश्व में चैथे नंबर की भारतीय हॉकी टीम के कोच ग्राहम रीड हैं. विश्व कप का जनवरी 2023 में होना है जिसमें  अभी काफी समय बाकी है, लेकिन मनप्रीत का सपना होगा वे टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम को यादगार जीत दिलाकर एक नई इबारत लिख सकें. वैसे जिस तरह का पिछले एक-दो वर्षों में भारतीय टीम का प्रदर्शन रहा है उसे देखते हुए, हॉकी एक्सपर्ट्स भी इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि  टोक्यो ओलंपिक में भारत के पास मेडल जीतकर एक  नया अध्याय लिखने का सुनहरा अवसर है.

पदक जीत सकती है टीम इंडिया: अशोक कुमार
भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के बेटे व पूर्व ओलंपियन अर्जुन अवॉर्डी अशोक कुमार को टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है. दो बार ओलंपिक, तीन बार विश्वकप खेलने  वाले और 1975 का विश्वकप जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे अशोक कुमार का कहना है कि जिस तरह से पिछले दो-तीन वर्षों में भारतीय टीम का प्रदर्शन रहा है, उसे देखते हुए यह लगता है कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम पदक जीतेगी. उल्लेखनीय है कि अशोक कुमार दो बार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. पहली बार 1972 में म्यूनिख में भारत ने कांस्य पदक जीता और 1976 में मॉन्ट्रियल में भारत सातवें स्थान पर रहा.

हॉकी टीम इंडिया अच्छी फॉर्म में: शिवेंद्र सिंह
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन को लेकर टीम के सहायक कोच शिवेंद्र सिंह पूरी तरह से आश्वस्त हैं. गौरतलब है कि 2007 में एशिया कप और 2010 में सुल्तान अजलन शाह कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे तेज़-तर्रार पूर्व सेंटर फॉरवर्ड शिवेंद्र सिंह ऑस्ट्रेलियाई ग्राहम रीड की अगुआई वाले भारतीय कोचिंग स्टाफ का अहम हिस्सा हैं और पिछले लगभग दो वर्षों से वे टीम के साथ जुड़े हुए हैं. 2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे सहायक कोच शिवेंद्र सिंह टीम की तैयारी से पूरी तरह संतुष्ट हैं. उनका कहना है कि टीम की बहुत अच्छी तैयारी है और भारतीय टीम अच्छे फॉर्म में है. कोविड के चलते हम साथ रहे. टीम के खिलाड़ियों का काफी समय से एक साथ रहने से एक-दूसरे अच्छा जुड़ाव हो गया है. हमें करीब डेढ़ साल हो गए साथ प्रैक्टिस करते हुए.भारतीय टीम का डिफेंस मजबूत और अटैक तीखा
टीम में युवा खिलाड़ियों का भी अच्छा समन्वय रहने टीम को लाभ मिलेगा. शिवेंद्र सिंह इस बात से खुश हैं कि पिछले दिनों भारतीय टीम का अच्छा प्रदर्शन रहा है और विश्व की टॉप टीमों को हराया है, जिससे टीम का मनोबल बढ़ा हुआ है. यहां तक कि भारतीय टीम ने गोल्ड मेडलिस्ट टीम को भी शिकस्त दी है. टीम काफी संतुलित है और चाहे डिफेंस हो या फिर अटैकिंग, हर दृष्टिकोण से टीम काफी मज़बूत है. कौन सी टीम अधिक चुनौतीपूर्ण होगी, किससे अधिक चुनौती मिल सकती है, इस बारे में शिवेंद्र सिंह का मानना है कि ओलंपिक में सभी टीमों से चुनौती मिलने वाली है, सभी टीमें पूरी तैयारी करके आती हैं. आप किसी टीम को कम नहीं आंक सकते. फिलहाल खेलप्रमियों की निगाहें लगातार टोक्यो ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी. इस बार टीम से ज़बरदस्त व शानदार प्रदर्शन की न सिर्फ उम्मीद है बल्कि विश्वास है भरोसा है कि भारतीय टीम एक बार फिर से भारतीय हॉकी के स्वर्णिम दौर को दोहराने में कामयाब होगी.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
नवीन श्रीवास्तव

नवीन श्रीवास्तवपत्रकार और कॉमेंटेटर

पत्रकारिता का 20 साल से अधिक का अनुभव. दूरदर्शन समेत कई चैनलों के लिए कॉमेंट्री करते हैं.

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First published: July 17, 2021, 7:27 PM IST
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