नोटबंदी : अब इस मुसीबत से कैसे निपटेगी प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम..?

नोटबंदी : अब इस मुसीबत से कैसे निपटेगी प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम..?
एक नई उम्मीद और सपना इस देश की हर आंख में पल रहा है कि "मेरा देश बदल रहा है।...

एक नई उम्मीद और सपना इस देश की हर आंख में पल रहा है कि "मेरा देश बदल रहा है। 'सपना टूटा, आंख खुली, हर दिल को समझने में जरा देर लगी' कि लोग हैं कि बदल नहीं रहे हैं। आम आदमी जो पहले अपनी परिस्थिति बदलने का इंतजार करता था, आज देश की परिस्थितियों के बदलने का इंतजार कर रहा है। हां इंतजार के अलावा वो सवाल कर सकता है कि हर बार उम्मीद टूट क्यों जाती है?  इंतजार इतना लंबा क्यों होता है?  नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स को तो इस देश का हर नागरिक जानता है, लेकिन बैंक के अधिकारी!  आप से तो यह अपेक्षा देश ने नहीं की थी?

प्रधानमंत्री जी ने आपके कंधों पर इस देश को बदलने की नींव रखी थी, और आप ही नींव खोदने में लग गए? आम आदमी लाइन में खड़ा 2000 रुपए बदलने का इंतजार करता रहा और आपने करोड़ों बदल दिए? और इतने बदले कि बैंक नए नोटों से खाली हो गए, लेकिन आप रुके नहीं। आज हर रोज़ छापेमारी में जो नोट जब्त हो रहे हैं, वो किसी के हक के थे। किसी के भोग विलासिता के लिए किसी की जरूरत का आपने गला घोंट दिया। वो करोड़ों की रकम जो मुठ्ठी भर लोगों से जब्त हुई, वो करोड़ों की आवश्यकताएं पूरी कर सकती थी। यही इस देश का दुर्भाग्य है, जब वो लोग जो जिनके कंधों पर देश को बदलने की जिम्मेदारी है, वो ही नहीं बदल रहे तो देश कैसे बदलेगा?

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खबर है कि कई प्राइवेट बैंक कालेधन को सफेद करने के कार्य में लिप्त पाए गए। प्रवर्तन निदेशालय ने एक बैंक के दिल्ली के कश्मीरी गेट ब्रांच से दो मैनेजरों को गिरफ्तार किया था, जिन पर तकरीबन 40 करोड़ रुपए के कालेधन को सफेद करने का आरोप है, जिसके बाद उस बैंक अपने 19 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। ऐसे ही मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक बैंक मैनेजर और क्लर्क को कुछ विशिष्ट लोगों के कालेधन को सफेद करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है, वहीं एक सहकारी बैंक में 12 करोड़ 32 लाख से अधिक के कालेधन को सफेद करने का मामला प्रकाश में आया है।

इसी तरह देश के अनेक हिस्सों से बैंकों द्वारा इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त होने की सूचना के बाद ईडी द्वारा मनी लांन्ड्रिग के शक में देश के 50 बैंकों की ब्रांच में छापेमारी की कार्यवाही की जा रही है। यही नहीं पीएमओ ने देश के तकरीबन 500 बैंकों का स्‍टिंग ऑपरेशन भी कराया है, और इसकी सीडी वित्‍त मंत्रालय को भेज दी गई है। बहरहाल, इस प्रकार की खबरें आजकल हर रोज़ अखबारों की सुर्खियां बनी हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने नोटबंदी का कदम भ्रष्टाचार रोकने के लिए उठाया था, लेकिन 10 नवंबर से लेकर आज तक इस एक महीने में जितना भ्रष्टाचार हुआ है, उतना तो देश के इतिहास में शायद आज तक नहीं हुआ होगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 14.5 करोड़ के 1000 और 500 के नोट प्रचलन में थे, जबकि आज की तारीख तक लगभग 12 करोड़ के प्रतिबंधित नोट बैंकों में जमा हो चुके हैं, जबकि 30 दिसंबर तक का समय अभी शेष हैं और ऐसी उम्मीद है कि अभी बैंकों में और धन जमा होगा। अगर आंकड़े सही हैं, तो इसका अर्थ यह है कि हमारी अर्थव्यवस्था का सारा काला धन सफेद हो चुका है इसे क्या कहा जाए?

दरअसल, 8 नवंबर के बाद से 16.48 लाख नए खाते बैंकों में खोले गए,  4.54 लाख जीरो बैलेंस वाले जनधन खातों में नगदी जमा हुई, 150 मनरेगा खातों से खाताधारकों की जानकारी के बिना लेन-देन करने का मामला पंजाब में सामने आया। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और चोर ही कोतवाल बन जाए तो? आम आदमी केवल इसका शिकार है, लेकिन कुर्सी पर बैठा राजनेता अथवा सरकारी अधिकारी इसका जन्मदाता है, जिसके पास अधिकार है वह अपनी सत्ता अपनी शक्ति का उपयोग नहीं दुरुपयोग करता है।

दरअसल, आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई भ्रष्टाचार के दानव की भेंट चढ़ाता है, इस सिस्टम से हार जाता है और लड़ नहीं पाता तो प्रतिशोध से भर जाता है। अपने ही देश में अपने ही देशवासियों से लुटे जाने की बेबसी। कभी हमारी सरकार ने सोचा है कि भारत के जिस आम आदमी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में देश के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया था, औरतों ने अपने गहने कपड़े ही नहीं, अपने बच्चों तक को न्यौछावर कर दिया था, वो आम आदमी जो मन्दिरों में दान करने में सबसे आगे होता है, वो आम आदमी आज टैक्स की चोरी क्यों करता है? वो आम आदमी जो अपनी मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा भ्रष्टाचार के दानव को सौंपने के बाद अगर अपनी कमाई का कुछ हिस्सा छुपाकर अपने नुकसान की भरपाई करके अपने बच्चों का भविष्य संवारने लिए लगाता है, तो कालेधन और भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में भी सबसे पहले वह ही क्यों पिस रहा है?

दूसरी ओर वह जिन्होंने सरकार से हर महीने काम करने की तनख्वाह लेने के बावजूद आम आदमी की मेहनत की कमाई में से मोटी रकम घूस में लेकर कालाधन बनाया था, वो आज भी अपना कालाधन सफेद करके तनाव मुक्त होकर घूम रहे हैं। यह सभी न सिर्फ देश के क़ानून बल्की प्रधानमंत्री को खुली चुनौती देने से भी बाज़ नहीं आ रहें हैं।

प्रधानमंत्री जी को देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कालेधन का तो  पता था, लेकिन शायद वे अपनी ही सरकार में काले धन के संरक्षकों की संख्या और उनकी 'योग्यता' का शायद अंदाजा नहीं लगा पाए। वे इस बात को भूल गए कि जिन लोगों के सहारे वे भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध का आग़ाज़ कर रहे हैं वे स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं , जिनके हाथों में तिजोरी की चाभी है, वे ही तिजोरी खाली करने के शुरू से आदी हैं। परिणामस्वरूप जो आम आदमी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में सरकार के साथ खड़ा था आज उस आम आदमी के सब्र का बांध अब टूटने लगा है।

अगर सरकार भ्रष्टाचार और कालाधन खत्म करना ही चाहती है, तो सबसे पहले सरकार को आम आदमी को यह भरोसा दिलाना होगा कि  देश के साथ गद्दारी करने वाले किसी भी कीमत पर बक्शे नहीं जाएंगे और यह काम केवल कागजों  तक सीमित नहीं रहना चाहिए  बैंकों के उन अधिकारियों को सज़ा मिलनी  चाहिए जिनकी वजह से बैंकों में पर्याप्त मात्रा में नई मुद्रा होने के बावजूद देश में आम आदमी के लिए नई मुद्राओं की कमी एक महीना बीत जाने के बाद आज भी बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था में से कालाधन बैंकों में काफी हद तक आ चुका है, तो अब सरकार को चाहिए कि जिन लोगों ने कुछ पैसों के लालच में अमानत में खयानत की है उन्हें ऐसे सजा दी जाए कि "सब चलता है" वाली भारतीय मानसिकता पर प्रहार हो। आम आदमी तो देश के बदलने का इन्तजार कर रहा है, लेकिन ‘ख़ास’ लोगों को समझा दिया जाना चाहिए कि देश बदल चुका है और सरकारी पद पर बैठे अधिकारी को यह बात समझ में आ जानी चाहिए कि देश के क़ानून केवल हमारे संविधान में लिखे कुछ शब्द नहीं हैं, जिनका उपयोग वे अपनी मनमर्जी से करते थे, बल्कि अब वे उस क़ानून के शिकंजे में फंस भी सकते हैं, जहां अब सूद के चक्कर में उनका मूल भी चला जाएगा।

(फोटो : Getty Images)

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