बिहार में नया समीकरण: राजद-जदयू फिर साथ-साथ, क्या पुरानी गलतियां से सीखेंगे नए पाठ

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जनमत का अपमान किया है. बीजेपी के बहुत से मंत्रियों ने यह भी कहा कि वे नीतीश कुमार को बड़े भाई के तौर पर देखकर चल रहे थे, लेकिन उन्होंने धोखा दिया है. बीजेपी और जदयू के बीच पिछले काफी समय से कई मुद्दों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी. हालांकि गठबंधन को लेकर दोनों ओर से 'ऑल इज वेल' के बयान लगातार दिए जा रहे थे.

Source: News18Hindi Last updated on: August 9, 2022, 7:57 pm IST
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बिहार में नया समीकरण: राजद-जदयू साथ-साथ,क्या पुरानी गलतियां से सीखेंगे नए पाठ?
यह आनेवाला समय बताएगा कि दोनों पार्टियों ने अपनी पुरानी गलतियों से कितना सीखा.

पटना. बिहार में दूसरी बार राजद और जदयू की सरकार बनने जा रही है. उम्मीद करनी चाहिए कि इस बार दोनों  वे गलतियां नहीं दोहराएंगे, जो पिछली बार उन्होंने की थी. बता दें कि इस बार राजद और जदयू के पक्ष में 164 विधायकों का समर्थन है. नीतीश कुमार ने राज्यपाल को इन विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपी है.


पिछले काफी समय से बीजेपी और जदयू गठबंधन के बीच खटपट चल रही थी, जिसके बाद नीतीश कुमार ने बिहार एनडीए से बाहर जाने का फैसला कर लिया. हालांकि नीतीश कुमार ने यह नहीं बताया कि उन्हें बीजेपी से क्या-क्या गिले-शिकवे थे. लेकिन आनेवाले दिनों में ये एक-दूसरे के खिलाफ हमलावर होंगे, इसमें कोई संदेह नहीं.


भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जनमत का अपमान किया है. बीजेपी के बहुत से मंत्रियों ने यह भी कहा कि वे नीतीश कुमार को बड़े भाई के तौर पर देखकर चल रहे थे, लेकिन उन्होंने धोखा दिया है. बीजेपी और जदयू के बीच पिछले काफी समय से कई मुद्दों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी. हालांकि गठबंधन को लेकर दोनों ओर से ‘ऑल इज वेल’ के बयान लगातार दिए जा रहे थे.


पिछले काफी समय से बीजेपी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर आक्रामक हो रही थी. इसके साथ ही राज्य में बढ़ते अपराध को लेकर बीजेपी लगातार नीतीश सरकार पर हमलावर हो रही थी. पिछले कुछ समय से PFI की मौजूदगी और गतिविधियों को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई थी.


हालांकि नीतीश कुमार ने एनडीए गठबंधन की कठिनाइयों का जिक्र नहीं किया, लेकिन यह कहा कि पार्टी के लोगों की राय थी कि हम अलग राह पर चलें और हम निकल पड़े. तेजस्वी के सामने भी चुनौती होगी कि सरकार गठन के बाद वे 10 लाख रोजगार देने का वादा पूरा करें.


तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी हमेशा अपनी साथी पार्टियों का सफाया कर देती है. इसलिए क्षेत्रीय दलों के सामने विकल्प क्या बचता है? क्या बिहार देश के सामने 2024 से पहले एक विकल्प की राजनीति पेश करेगा, इस पर अब विमर्श शुरू हो गया है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
ब्रज मोहन सिंह

ब्रज मोहन सिंहएडिटर, इनपुट, न्यूज 18 बिहार-झारखंड

पत्रकारिता में 22 वर्ष का अनुभव. राष्ट्रीय राजधानी, पंजाब , हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में रिपोर्टिंग की.एनडीटीवी, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और पीटीसी न्यूज में संपादकीय पदों पर रहे. न्यूज़ 18 से पहले इटीवी भारत में रीजनल एडिटर थे. कृषि, ग्रामीण विकास और पब्लिक पॉलिसी में दिलचस्पी.

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First published: August 9, 2022, 7:57 pm IST