कोरोना, वैक्सीन और लाशें उगलती नदियां...

Coronavirus Vaccination: नदियों में मिलने वाली लाशों का सीधा संबंध ग्रामीण इलाकों और कोरोना से माना जा रहा है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में कोरोना पैर पसार चुका है.

Source: News18Hindi Last updated on: May 17, 2021, 2:27 PM IST
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कोरोना, वैक्सीन और लाशें उगलती नदियां...
नदी में तैरता कोरोना से मरे व्यक्ति का शव.
क्या गंगा, क्या यमुना, देश की नदियों में तैर रही हैं इंसानी लाशें. वो कौन लोग हैं जिन्हें मौत के बाद बहा दिया गया गंगा में, यमुना में या फिर किसी और नदी में. सवाल ये है कि ये हज़ारों लाशें आईं कहां से, क्या कोरोना है इनकी मौत की वजह, आखिर अचानक से इतनी लाशों कैसे उगलने लगीं ये देश की नदिया. ग्रामीण इलाकों में कोरोना ने ऐसे पैर पसारे हैं कि सरकार के हाथ-पैर फूल रहे हैं. गांवों में लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है, लेकिन वो ये मानने को राज़ी नहीं कि ये मौतें कोरोना से हो रही हैं. गाज़ीपुर से लेकर कानपुर, इलाहाबाद, हमीरपुर तक नदिया में लाशें तैरती आ रही हैं.

यूपी के हमीरपुर में यमुना नदी में कुछ दिन पहले कुछ लाशें तैरती मिलने से हड़कंप मच गया था. आनन-फानन में पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और मामले की तफ्तीश शुरु की. पुलिस प्रशासन का कहना है कि दूसरे इलाकों से ये लाशें यहां पहुंची हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में अलग तरह की दहशत है. लोग रोज़ाना निस्तार के लिए नदी किनारे जाने से डर रहे हैं. मध्यप्रदेश के पन्ना से निकलने वाली रुंज नदी में कुछ लाशों को देखा गया. गांव वालों में अफ़रा-तफरी मच गई. मौके पर पहुंची पुलिस प्रशासन ने पड़ताल की. नदी में लाशों का मामला मीडिया में आग की तरह फैला. बाद में गृहमंत्री ने सफ़ाई देते हुए कहा कि नदी से दो लाशें मिली है जो स्थानीय आदिवासियों की हैं जिनकी मौत लंबी बीमारी के बाद हुई थी. हालांकि स्थानीय लोग सिर्फ दो लाशों से इंकार करते हैं. खैर ये सिर्फ़ रुंज नदी का मामला नहीं है. लोगों में दहशत इस बात से फैल गई क्योंकि गंगा और यमुना जैसी बड़ी नदिया से लाशें उगलने का सिलसिला लगातार जारी है.

नदियों में मिलने वाली लाशों का सीधा संबंध ग्रामीण इलाकों और कोरोना से माना जा रहा है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में कोरोना पैर पसार चुका है, लेकिन वहां ना कोई टेस्टिंग हो रही है ना सही इलाज. गांववाले झोलाछाप डॉक्टरों के सहारे हैं और इस बीमारी को सिंपल सा सर्दी-जुखाम या टाइफाइड, मलेरिया मानकर इलाज करवा रहे हैं. मेरे ही गांव बसारी की बात करें, तो वहां लगभग हर घर में बुखार, सर्दी-जुकाम है, लेकिन किसी ने किसी भी तरह की कोई टेस्टिंग नहीं करवाई, सारे सिंपटम्स कोरोना के होने के बाद भी कोई जांच नहीं, ना ही कोई सावधानी. एक दिन में 5 मौतें हुईं, लेकिन गांव वालों की माने तो ये सारे लोग बुज़ुर्ग या बीमार थे जिन्हें दो-तीन दिन बुखार आया और वो चल बसे. ज़्यादातर ग्रामीण इलाकों में इस समय आप बात करेंगे, तो टाइफाइड और मलेरिया की बात सुनाई देगी. जिससे भी पूछा जाएगा वो कोरोना से इंकार कर देगा. मीडिया में लगातार खबरें आ रही है. स्पेशल रिपोर्ट्स बताती हैं कि कैसे उत्तर भारत के गावों के हालात खस्ता हो चुके हैं. घर-घर में इस बीमारी ने अपने पैर फैला लिए हैं, जिससे मौत के आंकड़े भी बढ़ गए हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में ये आंकड़े दर्ज नहीं हैं क्योंकि ना तो ग्रामीण इलाकों में कोरोना की कोई टेस्टिंग हो रही है ना ही ग्रामीण शहरों का रुख कर रहे हैं.

इतना ही नहीं कोरोना की जांच के अलावा यहाँ वैक्सीन को लेकर भी तरह-तरह की अफ़वाहें हैं. बुंदेलखंड इलाके के तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिनमें महिलाएं, पुरुष वैक्सीन लगवाने से इंकार कर रहे हैं. वैक्सीन को लेकर दहशत का माहौल है, ये लोग बीमार होने को तैयार हैं, लेकिन वैक्सीन लगवाने को राज़ी नहीं. वैक्सीन लगवाने का प्रतिशत गांवों में बहुत कम है. महिलाएं तो किसी कीमत पर वैक्सीन लगवालों को राज़ी नहीं हैं. फिर उन्हें सरकार से कोई सहूलियत मिले या ना मिले. वैक्सीन को लेकर सबसे बड़ी परेशानी जो आ रही है कि वो है जागरूकता की. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वो लोगों को वैक्सीन लगवाने की अपील कर रही हैं.
देश में पहले भी वैक्सीनेशन अभियान चले हैं जिसमें इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. सालों साल चले अभियानों में सफ़लता लंबे वक्त बाद मिली है. कोवैक्सीन या कोविशील्ड के लगाने के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत भी है. सरकार के पास भले इतना समय ना हो, लेकिन फिलहाल वैक्सीनेशन के साथ वैक्सीन के प्रति लोगों को बहुत ही रफ़्तार से जागरूक किया जाना चाहिए. वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की अफ़वाहें हैं उन्हें दूर करने की ज़रूरत है. ताकि लोग बेझिझक होकर वैक्सीन लगवाएं क्योंकि ग्रामीण इलाकों के हालात बेहद खराब हैं जिसका अंदाज़ा नदियों में तैरने वाली लाशों से लगाया जा सकता है. ये कोई आम से हालात नहीं हैं, बल्कि बेहद चिंता का विषय है. अगर हम अब भी नहीं चेते तो हालात हाथ से निकल जाएंगे. नदियों में तैरने वाली लाशें पानी को प्रदुषित करेंगी, साथ ही दूसरी बीमारियां भी फैलाएंगी.

(ये लेखक के निजी ़विचार हैं)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
निदा रहमान

निदा रहमानपत्रकार, लेखक

एक दशक तक राष्ट्रीय टीवी चैनल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी. सामाजिक ,राजनीतिक विषयों पर निरंतर संवाद. स्तंभकार और स्वतंत्र लेखक.

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First published: May 17, 2021, 2:25 PM IST
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