अलविदा, सायरा के साहब

सायरा बानो दिलीप साहब का साया बनकर उनके साथ रहीं. ना जाने कितनी दफ़े दिलीप साहब गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हुए और उनके साथ साए की तरह रहीं सायरा. वो बार-बार लौटा लाईं अपनी साहब को और दुनिया से शुक्रिया कहती रही बेशुमार मोहब्बत और दुआओं के लिए.

Source: News18Hindi Last updated on: July 7, 2021, 12:31 PM IST
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अलविदा, सायरा के साहब
वो इश्क़ की मिसाल बने,ऐसा इश्क़ जो जिस्म नहीं रूह से बावस्ता हुआ. उनका साथ मुस्कुराहटों का था, उदासी का था, तन्हाई का था. आज वो साथ छूट गया. जी हां आज सायरा के साहब इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह गए. सायरा बानो और युसूफ़ खान यानि दिलीप कुमार का साथ यहीं तक का था.दिलीप साहब को अपने आगे का सफ़र सायरा के बिना ही तय करना है.

एक साथ नज़र आने वाली ये जोड़ी दुनिया के लिए भले अलग हो गई लेकिन इश्क़ की मिसाल बनी. सायरा बानो दिलीप साहब का साया बनकर उनके साथ रहीं. ना जाने कितनी दफ़े दिलीप साहब गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हुए और उनके साथ साए की तरह रहीं सायरा. वो बार-बार लौटा लाईं अपनी साहब को और दुनिया से शुक्रिया कहती रही बेशुमार मोहब्बत और दुआओं के लिए.

सायरा बानो और दिलीप कुमार की जोड़ी फिल्म जगत ही नहीं, दुनिया के लिए मिसाल बनी. दोनों के बीच उम्र का लंबा फ़ासला रिश्ते में कोई बाल बराबर दरार नहीं ला पाया. सायरा प्रेमिका बनी, पत्नी बनी और आख़िर में मां की तरह अपने साहब की देखभाल करती रहीं. सायरा बानो और दिलीप कुमार को कभी जुदा करके नहीं देखा जा सकता है.

फिल्म अभिनय में दिलीप साहब का कोई तोड़ नहीं और मोहब्बत में सायरा बानो का. वो एक दूसरे के लिए बने और तमाम उम्र एक साथ रहे. आज सायरा बानो के साहब चले गए हैं. उनके आलीशान घर में सायरा बानो अपने साहब के लिए एक पैर पर खड़ी रहीं. मोहब्बत की, खिदमत की और आख़िरी सांस तक उनका हाथ थामें रही.
सायरा समझती थी साहेब की खामोशी का मतलब
बीमारी और बुढापे से जूझते दिलीप साहब की बाते, जब किसी को समझ नहीं आती थीं, तो सायरा बानो उनकी ख़ामोशी उनके इशारे समझती रहीं. कई प्रोग्राम में सायरा बानो को दिलीप साहब की ज़ुबान बने हुए देखा गया. उनकी मोहब्बत सिर्फ़ दुनियावी नहीं रही इनका रिश्ता रूह का भी रहा. दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी मिसाल बनी मोहब्बत की.

दिलीप साहब का जाना फिल्मी दुनिया नहीं पूरी दुनिया का नुकसान है लेकिन जो खाली और तन्हा रह गया वो हैं सायरा बानो. वो अब किसका ख़्याल रखेंगी किसकी सलामती की दुआ मांगेगी. आज के बाद से सायरा बानों के हाथ में दिलीप साहब का हाथ नहीं होगा. उनकी ये दुनिया मानो तो खाली हो गई, उनकी ज़िंदगी का मकसद चला गया है. दुनिया दिलीप साहब को उनके अभिनय, कला के लिए याद कर रही है और मैं सायरा बानो की गीली आंखें मेहसूस कर रही हूं.
1944 में जन्मीं सायरा भारत-पाक विभाजन के बाद लंदन जा बसीं. सायरा की शिक्षा-दीक्षा लंदन में हुई है. छुट्टियां मनाने सायरा जब भारत आतीं, तो दिलीप कुमार की फिल्मों की शूटिंग देखने घंटों स्टूडियो में बैठी रहती थीं. सायरा बानो ने एक इंटरव्यू में ये माना है कि जब वो 12 साल की थीं तभी से वह दुआ करती थीं कि काश उनकी शादी दिलीप कुमार के साथ हो जाए.


12 साल की उम्र से शायरा दुआ करती थीं कि काश उनकी शादी दिलीप कुमार के साथ हो जाए.
12 साल की उम्र से शायरा दुआ करती थीं कि काश उनकी शादी दिलीप कुमार के साथ हो जाए.


सायरा के ख्‍वाब की ताबीर
फिल्मी दुनिया में सायरा बानो की एंट्री उनके ख़्बाव की ताबीर थी. सायरा बानो फिल्मी दुनिया का चमकता सितारा बनी और कहा जाता है कि उन्हें अपने को स्टार राजेंद्र कुमार से मोहब्बत हो गई, लेकिन राजेंद्र कुमार शादीशुदा थे, इसलिए सायरा बानो की मां को इस रिश्ते पर एतराज था. कहा ये भी जाता है कि इस बारे में दिलीप साहब ने ख़ुद सायरा बानो से बात की थी. शायद यहीं से दोनो की मोहब्बत परवान चढ़ी थी.

एक बार दिलीप कुमार, सायरा बानो के घर गए थे. तब सायरा, साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही थीं. दिलीप उन्हें देखकर फिदा हो गए थे और उन्होंने सायरा को कहा कि वह काफी प्यारी लग रही हैं. इसके बाद अगले दिन फिर दिलीप कुमार ने उन्हें फोन करके कहा कि खाना बहुत अच्छा बना था. इसके बाद दिलीप कुमार लगातार सायरा से मिलने लगे और साथ में डिनर करने लगे.

इसके बाद दिलीप कुमार ने सायरा बानो को प्रपोज कर दिया था. दिलीप कुमार ने फिर साल 1966 में सायरा से शादी कर ली थी. दोनों की शादी की खबर सुनकर सभी चौंक गए थे.

 दोनों के रिश्ते में कभी नहीं आया उम्र का फ़ासला
शादी के वक्त सायरा की उम्र 22 और दिलीप कुमार की 44 थी. उम्र का ये फ़ासला लोगों के लिए भले हैरानगी भरा रहा हो लेकिन दोनों के रिश्ते में कभी कोई फ़ासला नहीं आया. दिलीप साहब और सायरा बानो एक दूसरे का साया बनकर साथ रहे. जवानी की दहलीज़ से लेकर उम्र के आख़िरी पड़ाव तक दोनों एक साथ मोहब्बत में खोए हुए नज़र आए. अपनी रिश्ते की डिग्निटी इन्होंने बनाकर रखी.

ऐसा नहीं कि दोनों ने ज़िंदगी मुश्किल वक्त़ नहीं देखा. दिलीप कुमार ने ऑटोबायोग्राफी द सबस्टांस एंड द शैडो में बताया था कि एक बार सायरा प्रेग्नेंट थीं, लेकिन उनका मिसकैरेज हो गया था. इस घटना के बाद से दोनों का दिल टूट गया था, लेकिन फिर दोनों एक-दूसरे का सहारा बने और आज तक दोनों साथ हैं. उस हादसे के बाद सायरा बानो कभी मां नहीं बन पाईं. बच्चे की कमी दोनो के रिश्ते पर कभी हावी नहीं हुई. शादी के 55 साल की रिश्ते में मजाल है कभी कोई शिकन आई हो कहीं कोई शिकवा किसी से बयां किया हो.


सायरा बानो और दिलीप कुमार की जोड़ी दुनिया के लिए मोहब्बत की मिसाल रही. देवदास के किरदार में जान डालने वाले दिलीप साहब ने असल ज़िंदगी में भी टूटकर मोहब्बत की और उसको निभाया भी. सायरा और दिलीप की जोड़ी बेमिसाल रही. भले ही आज दिलीप साहब अपने नए सफ़र पर तन्हां निकले है लेकिन सायरा बानों के साथ उनका साथ ज़िंदगी के बाद भी रहेगा. जब भी मोहब्बत का ज़िक्र होगा तब सायरा और दिलीप कुमार की ज़िक्र हम पर फ़र्ज़ होगा. बस इतना ही कहना है अलविदा “सायरा के साहब”
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
निदा रहमान

निदा रहमानपत्रकार, लेखक

एक दशक तक राष्ट्रीय टीवी चैनल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी. सामाजिक ,राजनीतिक विषयों पर निरंतर संवाद. स्तंभकार और स्वतंत्र लेखक.

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First published: July 7, 2021, 12:31 PM IST
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