शादी ज़िंदगी का हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं

अच्छी से अच्छी पढ़ी लिखी समझदार लड़कियां शादी के नाम पर सबकुछ भूल जाती हैं. उन्हें कोई मर्द झांसा दे सकता है. आख़िर ऐसा क्यों है कि शादी के नाम पर लड़की सोचना समझना छोड़ देती है. ये लड़की की परवरिश और समाज के नज़रिए का कुसूर है. लड़कियों को अब इस शादी के झांसे से निकलना होगा.

Source: News18Hindi Last updated on: May 26, 2022, 1:46 pm IST
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शादी ज़िंदगी का हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं
ज़िंदगी का आख़िरी मक़सद नहीं है शादी

शादी, शादी और शादी… होश संभालने के साथ ही लड़कियों के ज़हन में ये बात भर दी जाती है कि ज़िंदगी का आख़िरी मक़सद शादी ही है. मां बाप बेटियों के पैदा होते ही उनकी शादी के लिए दहेज जमा करने लगते हैं, उनकी शादी के अरमान पालने लगते हैं. हम ऐसे शादी करेंगे, वैसे शादी करेंगे. बस, इसी शादी ने एक लड़की की जान ले ली वो भी इसलिए क्योंकि लड़की के चेहरे पर मुहासे थे जिसकी वजह से उसकी शादी की बात कई जगह से टूट चुकी थी.


शादी के रिश्ते टूटने से लड़की इस क़दर डिप्रेशन में गई कि उसने अपनी जान ही दे दी. ऐसा नहीं कि लड़की में कोई कमी थी. पढ़ाई में होशियार एमए पास लड़की अपने दिमाग में शायद ये घर कर कर बैठी कि उसकी शादी नहीं होगी तो ज़िंदगी बेकार है वो अपने माता –पिता के लिए बोझ बनी रहेगी. लेकिन अफ़सोस ये कि हमने मिलकर उसे मौत के मुहाने तक धकेला है. इसके लिए समाज ज़िम्मेदार है. क्या शादी वाकई इतनी ज़रूरी है कि उसके ना होने से जीवन बेकार बेमकसद हो जाए.


रोज़ाना सुनने को मिलता है, अख़बारों, मीडिया में सुर्खियां बनती है कि लड़के ने लड़की को शादी का लालच या झांसा देकर दैहिक शोषण किया, बलात्कार किया. यहां भी समस्या की जड़ शादी ही है. अच्छी से अच्छी पढ़ी लिखी समझदार लड़कियां शादी के नाम पर सबकुछ भूल जाती हैं. उन्हें कोई मर्द झांसा दे सकता है. आख़िर ऐसा क्यों है कि शादी के नाम पर लड़की सोचना समझना छोड़ देती है. ये लड़की की परवरिश और समाज के नज़रिए का कुसूर है.


लड़कियों को अब इस शादी के झांसे से निकलना होगा. अगर आप किसी के साथ रिश्ते में हैं तो उसकी शर्त कम से कम शादी तो ना हो. वरना कल को कोई आपको बेवकूफ़ बनाकर चला जाएगा और आप लड़ाई लड़ती रहेंगी कि शादी के नाम पर झांसा दिया.


ये बात लड़कियों के ज़हन में ठूंस ठूंसकर भर दी गई है सफ़ल वैवाहिक जीवन या शादी ही जीवन का आधार है. जबकि शादी ज़िंदगी का हिस्सा हो सकती है लेकिन शादी ही ज़िंदगी नहीं हो सकती है. शादी से ज़रूरी भी ज़िंदगी में बहुत कुछ हो सकता है. आपकी पढ़ाई, आपका कॅरियर, आपके सपने.


ज़िम्मेदारी हमारी आपकी, माता पिता सबकी है. हम बेटियों के लिए सिर्फ़ अच्छे लड़के का ख्बाव ना देंखे बल्कि बेटियों को उनके खुद के सपने देखने दें, उन्हें पूरा करने का हौसला दें. समाज को भी अपना नज़रिया बदलना होगा कि अगर कोई शादी नहीं करना चाहता या उसकी शादी नहीं होती तो वो ताने का हक़दार नहीं है. शादी करना या ना करना लड़का लड़की का अधिकार होना चाहिए.


वर्ल्ड बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली निकहत ज़रीन आज दुनिया में अपना लोहा मनवा रही हैं. जब उन्होंने बॉक्सिंग शुरु की तो उनकी मां ने निकहत के चेहरे पर चोट के निशान देखे और कहा कि तुमने शादी कौन करेगा. निकहत का जबाव था कि मुझे कामयाब होने दीजिए लड़कों की लाइन लग जाएगी. निकहत ने अपना कैरियर चुना. वो चाहती तो घर बैठकर अच्छे लड़के का इंतजार करती और शादी करके घर बैठती लेकिन आज निकहत लाखो, करोड़ों दिलों पर राज कर रहीं हैं.


यहीं यकीन, कॉन्फिडेंस तो बेटियों में पैदा करना होगा कि ज़रूरी है अपने पैरों पर खड़ा होना, ज़रूरी है कि अपने वजूद को पहचानना. आप एक पत्नी के अलावा भी अपनी पहचान बना सकती हैं. निकहत की इस कामयाबी में परिवार का सबसे बड़ा सहयोग है. यही सहयोग यही भरोसा हर बेटी के मां बाप को देना होगा.


शादी के लिए खूबसूरती ही पैमाना है. काबिल से काबिल लड़कियों की शादी इसलिए देर से होती है क्योंकि वो समाज के बनाए खूबसूरती के पैमाने पर खरा नहीं उतरती हैं. सभी को तो सुंदर, सुशील, गृह कार्य में दक्ष कन्या जाए. फिर उन लड़कियों का क्या होगा जो इन पैरा मीटर के मुताबिक नहीं. शादी को लेकर एक सोच बदलने की ज़रूरत है.


सच ये है कि समाज के बदलने की प्रोसेस बहुत स्लो है. सैंकड़ों सालों में समाज की सोच और नज़रिए में हल्का बदलाव आता है. हमें चाहिए कि हम लड़कियों में यक़ीन पैदा करें. उन्हें उनकी पढ़ाई और कैरियर के बारे में सोचने दें उन्हें आगे बढ़ने दें. बेटियों की शादी करके अपने फ़र्ज़ से मुक्ति पाने की सोच को भी बदलना होगा. बेटियां पराया धन होती हैं, बेटियां अपने घरों में ही अच्छी लगती हैं इन बातों से आगे निकलना होगा. लड़कियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाइए ताकि वो कभी किसी का मुंह ना ताके, ताकि वो कभी किसी की मोहताज ना हों फिर उनकी शादी हो या ना हो.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
निदा रहमान

निदा रहमानपत्रकार, लेखक

एक दशक तक राष्ट्रीय टीवी चैनल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी. सामाजिक ,राजनीतिक विषयों पर निरंतर संवाद. स्तंभकार और स्वतंत्र लेखक.

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First published: May 26, 2022, 1:46 pm IST
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