नाओमी ओसाका को डिप्रेशन के लंबे दौरे आते हैं, यह जानकर भी असंवेदनशील क्यों हैं हम?

नाओमी ओसाका ने डिप्रेशन के कारण फ्रेंच ओपन बीच में ही छोड़ दिया है. यह पहला मौका नहीं है जब किसी खिलाड़ी ने अपने डिप्रेशन को लेकर खुलकर बात की हो. विराट कोहली, माइकल फेल्प्स, सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ी भी डिप्रेशन के अपने अनुभव शेयर कर चुके हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: June 2, 2021, 9:45 PM IST
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नाओमी ओसाका को डिप्रेशन के लंबे दौरे आते हैं, यह जानकर भी असंवेदनशील क्यों हैं हम?
नाओमी ओसाका ने फ्रेंच ओपन से बाहर होने का फैसला किया है. (AP)
वो दुनिया फतह करने के लिए निकली है, उसने पूरी दुनिया में अपने नाम का परचम भी लहराया, वो दुनिया की बेहतरीन खिलाड़ी भी बनी. लेकिन उसे कभी-कभी डर लगता है, वो दुनिया के चकाचौंध से घबराती है. वो मीडिया के सवालों से बचने की कोशिश करती और खुद को छुपा लेना चाहती है, खुद को अपने आप में भी. ये सब उसका दिल नहीं कहता, बल्कि वो परेशान है. वो निकलना चाहती है अपनी हड़बड़ाहट से, घबराहट और बेचैनी से. दरअसल वो डिप्रेशन से जूझ रही है लेकिन दुनिया इसे समझने को तैयार नहीं, ना ही उसे. मजबून वो एक दिन टूर्नामेंट से बाहर होने का फैसला करती है. हम यहां बात कर रहे हैं टेनिस की दुनिया का चमकता सितारा नाओमी ओसाका की. जापान की नाओमी ओसाका सिंगल्स में पहली रैंक हासिल करने वाली पहली एशियाई महिला हैं. फिलहाल उनकी रैंकिंग दूसरी है.

चार ग्रैंड स्लैम अपने नाम कर चुकी नाओमी ने फ्रेंच ओपन टूर्नामेंट से बाहर होने का फैसला किया है. नाओमी ने कहा है कि वो मानसिक परेशानियों से जूझ रही हैं, उनसे डील करने के लिए उन्हें समय चाहिए. उन्होंने यह भी लिखा कि इस टूर्नामेंट से उनका हटना उनके, टूर्नामेंट के और बाकी खिलाड़ियों के हित में है. टूर्नामेंट से हटने का फैसला अचानक नहीं लिया गया है. उन्होंने फ्रेंच ओपन शुरू होने से पहले कहा था कि वह मैच के बाद होने वाले प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं जाएंगी. पहले दौर का मुकाबला जीतने के बाद उन्होंने ऐसा ही किया. उनकी इस हरकत पर करीब 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए भविष्य में ऐसा करने पर कड़ी सजा भुगतने की चेतावनी दी गई.

नाओमी ओसाका ने 27 मई को ट्विटर पर एक नोट शेयर किया. इसमें लिखा कि वो फ्रेंच ओपन के दौरान एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगी. उन्होंने लिखा, ‘मैंने कई बार महसूस किया है कि लोग खिलाड़ियों की मेंटल हेल्थ की रिस्पेक्ट नहीं करते. जब भी मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस देखती हूं या उसमें शामिल होती हूं, ये सच साबित हो जाता है. हम वहां बैठते हैं. हमसे सवाल पूछे जाते हैं, वो सवाल जो हमसे कई बार पूछे जा चुके हैं. वो सवाल पूछे जाते हैं जिनसे हमें खुद पर संदेह होने लगता है. और मैं खुद को ऐसे लोगों के सामने नहीं लाना चाहती जिन्हें मुझ पर भरोसा नहीं है. मैंने हार के बाद कई खिलाड़ियों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में टूटते देखा है, मुझे पता है कि आपने भी देखा होगा. मुझे लगता है कि एक व्यक्ति जब बुरा महसूस कर रहा है तब ऐसे लम्हे उसे और चोट देते हैं. मुझे इसके पीछे की वजह समझ नहीं आती. मेरा प्रेस कॉन्फ्रेंस न करना टूर्नामेंट या पत्रकारों के खिलाफ उठाया कदम नहीं है. कई पत्रकार तो मेरा तब से इंटरव्यू कर रहे हैं जब मैं बहुत छोटी थी. ज्यादातर के साथ मेरे अच्छे रिश्ते हैं. लेकिन अगर संस्थाएं ये कहती रहें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करो नहीं तो फाइन लगेगा और खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को इग्नोर करती रहें तो मुझे हंसी आती है. खैर, मैं उम्मीद करती हूं कि मुझ पर जो फाइन लगाया जाएगा, उसका ठीक-ठाक अमाउंट मेंटल हेल्थ चैरिटी की तरफ जाएगा.’

इसके कुछ दिन बाद नाओमी ओसाका ने टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया. ट्विटर पर नाओमी ने लिखा, ‘मेरे, टूर्नामेंट और बाकी खिलाड़ियों के लिए यही सही होगा कि मैं टूर्नामेंट छोड़ दूं, ताकि बाकी लोग इस मामले से ध्यान हटाकर अपने गेम पर फोकस कर सकें… मैं कभी भी डिस्ट्रैक्शन नहीं बनना चाहती थी… सच यह है कि 2018 के यूएस ओपन के समय से ही मुझे डिप्रेशन के लंबे दौरे आते हैं और उससे जूझने में मुझे बहुत मुश्किल हो रही है. टेनिस मीडिया मेरे प्रति हमेशा दयालु रहा है, अगर मेरे पिछले पोस्ट से किन्हीं को तकलीफ हुई हो तो मैं माफी मांगती हूं. मैं बताना चाहती हूं कि मैं एक इंट्रोवर्ट हूं. मीडिया से बात करने से पहले मुझे बहुत ज्यादा एंग्जायटी होती है. पेरिस में मैं बेहद वल्नरेबल और एंग्शियस महसूस कर रही थी. इसलिए मुझे लगा कि अपना ख्याल रखना ज़रूरी है और इसलिए मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ने का फैसला किया. मैंने इसकी घोषणा की, क्योंकि मुझे लगता है कि कई नियम बहुत पुराने और अतार्किक हैं और मैं ये बात हाईलाइट करना चाहती थी.'
ओसाका आगे लिखती हैं, 'मैंने इसे लेकर टूर्नामेंट के आयोजकों को भी लिखा था. मैंने माफी मांगी थी और ये भी कहा था कि टूर्नामेंट खत्म होने के बाद मैं खुशी-खुशी मीडिया से बात कर लूंगी. क्योंकि उनकी आलोचना बहुत तीखी होती है. मैं कोर्ट से कुछ वक्त के लिए अलग रहूंगी. पर जब समय सही रहेगा तब मैं टूर्नामेंट से इस बारे में चर्चा करके कोई बेहतर रास्ता निकालने की कोशिश ज़रूर करूंगी. ऐसा रास्ता जो खिलाड़ियों, प्रेस और फैन्स तीनों के लिए सही हो.’


ओसाका ने इसके बाद टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया. दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने कहा कि ओसाका के इस फ़ैसले को लेकर पूरी दुनिया में फिर से अलग तरह की बहस छिड़ गई है. ज़्यादातर दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों ने ओसाका के फैसले को उनकी हिम्मत बताया है. सेरेना विलियम्स कहती हैं, ‘हर कोई चीजों को अपने नजरिये से देखता है. ऐसे में उसे जो अच्छा लगता है वह करना चाहिए. मैं नाओमी के लिए चिंतित हूं. हर कोई एक जैसा नहीं होता. मैं मोटी हूं तो दूसरे लोग पतले हैं. हर कोई अलग है और हर कोई चीजों को अलग तरह से संभालता है. आपको बस वह उससे जिस तरह से निपटना चाहती है उसे वह करने देना चाहिए. मैं केवल यही कह सकती हूं, मुझे लगता है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ कर रही है.’

39 ग्रैंड स्लैम टाइटल जीतने वाली अमेरिका की टेनिस वेटरन बिली जीन किंग ने भी नाओमी के समर्थन में ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ‘यह बहुत हिम्मत की बात है कि नाओमी ओसाका ने डिप्रेशन के साथ अपने स्ट्रगल के बारे में खुलकर बात की. इस वक्त सबसे ज़रूरी है कि हम उन्हें वो टाइम और स्पेस दें, जिसकी उन्हें ज़रूरत है.’
पूर्व दिग्गज मार्टिना नवरातिलोवा ने खिलाड़ियों के लिए मानसिक मुद्दों को जरूरी करार देते हुए कहा, ‘मैं नाओमी ओसाका के लिए बहुत दुखी हूं. मुझे पूरी उम्मीद है कि वह ठीक होगी. एथलीटों के रूप में हमें अपने शरीर की देखभाल करना सिखाया जाता है. ऐसे में शायद मानसिक और भावनात्मक पहलू कम हो जाता है. यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने या न करने से कुछ ज्यादा है.’

भारत के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने ट्वीट कर कहा, ‘अब समय आ गया है कि जब हम खेलों में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को स्वीकार करें. व्यक्तिगत खेलों में तो और अधिक. क्रिकेट में एक कोच या एक वरिष्ठ खिलाड़ी एक कप्तान के लिए एक बैकअप होता है, लेकिन टेनिस में नहीं. हमें संवेदनशील होना होगा. खिलाड़ियों को उसके कमजोर समय में मीडिया से बचने की अनुमति दी जानी चाहिए.’

यह पहला मौका नहीं है जब किसी खिलाड़ी ने अपने डिप्रेशन को लेकर खुलकर बात की हो. क्रिकेटर विराट कोहली, स्विमर माइकल फेल्प्स, क्रिकेटर प्रवीण कुमार, गोल्फर अनीशा पदुकोण, फुटबॉलर सुनील छेत्री. सभी डिप्रेशन के अपने अनुभव शेयर कर चुके हैं.


नाओमी के बहाने एक बार फिर चमकती दुनिया के पीछे छाए अंधेरे पर बहस शुरु हो गई है. किसी बीमार के साथ हम जबरदस्ती नहीं कर सकते हैं. फिर अवसाद ग्रस्त इंसान के साथ हम क्यों इतने बेदिल हो जाते हैं. सबसे बड़ी परेशानी है कि डिप्रेशन को लेकर हम ज़रा भी संजीदा नहीं है. क्या नाओमी की बात सम्मान नहीं होना चाहिए था, अगर उसने कुछ वक्त मांगा था तो क्यों उन्हें सिर्फ़ खेलने नहीं दिया गया. क्या किसी खिलाड़ी का वजूद उसकी कामयाबी के बाद सिर्फ़ इतना रह जाता है कि वो एक सेलिब्रिटी है, क्या उसे उसका स्पेस नहीं दिया जाना चाहिए. क्या एक खिलाड़ी जो आलोचना से डरता है, सवालों से डरता है उसे खुद को मानसिक रूप से तैयार करने का समय नहीं देना चाहिए. अगर आयोजक नाओमी की बात को समझते और इस मामले को संवेदनशीलता से हैंडल करते तो एक खिलाड़ी को अपने बेहतरीन समय में एक बेहतरीन टूर्नामेंट से अलग नहीं होना पड़ता.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
निदा रहमान

निदा रहमानपत्रकार, लेखक

एक दशक तक राष्ट्रीय टीवी चैनल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी. सामाजिक ,राजनीतिक विषयों पर निरंतर संवाद. स्तंभकार और स्वतंत्र लेखक.

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First published: June 2, 2021, 9:45 PM IST
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