तुम शेरनियां हो, जूझना और जीतना जानती हो

संघर्ष कभी ज़ाया नहीं जाता है. तुम सबकी संघर्ष की कहानियां किसी परी की कहानियां नहीं हैं, बल्कि वो बताती हैं कि कितनी मुश्किलों को पार करते हुए तुम सब यहां तक पहुंची हो. तुम्हारे किस्से तैर रहे हैं सोशल मीडिया पर, तुम्हारी ज़िंदगी का संघर्ष घर-घर में बताया जा रहा है. हम अपने बच्चों को सुना रहे हैं तुम्हारी दास्तानें, कि कैसे तुम मुश्किलों से जूझते हुए, ज़माने और गरीबी से भिड़ते हुए यहां तक पहुंची हो.

Source: News18Hindi Last updated on: August 6, 2021, 4:04 pm IST
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तुम शेरनियां हो, जूझना और जीतना जानती हो


प्यारी,


रानी, सविता, दीप ग्रेस, निक्की, गुरजीत, उदिता, निशा, नेहा, सुशीला चानू , मोनिका, नवजोत, सलीमा, नवनीत कौर, लालरेमसियामी, वंदना, शर्मिला . तुम सबको खूब दुआएं और प्यार. तुमने सब ने वो कर दिखाया है जो किसी ख़्वाब के हक़ीकत होने जैसा है. तुमने पूरे देश को तुम्हारा खेल देखने के लिए मजबूर कर दिया यही तुम्हारी कामयाबी है. देश नहीं बल्कि पूरी दुनिया तुम्हारी कामयाबी के कसीदे पढ़ रही है.


तुम सब मोम की गुड़िया नहीं हो, बल्कि सख़्त लोहे के इरादों वाली लड़कियां हो, जो अपने बूते पर सपने देखती हैं और उनमें रंग भी भरती हैं. तुम भले टोक्यो ओलंपिक में कोई पदक ना ले पाई हो, लेकिन तुम्हारों हौसलों ने हॉकी को सोने सी चमक दी है. तुम एक हार से निराश ना हो, ना ही नाउम्मीद होना, क्योंकि तुमने पूरे देश को गर्व और उम्मीद से भर दिया है. हम सब तुम्हारी चमक देख पा रहे हैं.


देख पा रहे हैं कि संघर्ष कभी ज़ाया नहीं जाता है. तुम सबकी संघर्ष की कहानियां किसी परी की कहानियां नहीं हैं, बल्कि वो बताती हैं कि कितनी मुश्किलों को पार करते हुए तुम सब यहां तक पहुंची हो. तुम्हारे किस्से तैर रहे हैं सोशल मीडिया पर, तुम्हारी ज़िंदगी का संघर्ष घर-घर में बताया जा रहा है. हम अपने बच्चों को सुना रहे हैं तुम्हारी दास्तानें, कि कैसे तुम मुश्किलों से जूझते हुए, ज़माने और गरीबी से भिड़ते हुए यहां तक पहुंची हो.


रानी तुमने साबित किया हिम्‍मत और हौसलों की हार नहीं होती

रानी तुमने जादू नहीं किया है, बल्कि तुमने साबित किया है कि हिम्मत और हौसलों की कभी हार नहीं होती है. हरियाणा के शाहबाद से टोक्यो तक पहुंचने का रास्ता फूलों से भरा तो नहीं था, ना तुम सुख सुविधाओं में पहली बढ़ी हुईं. तुमने कहा कि तुम अपनी गरीबी से भागना चाहती थीं, लेकिन खिलाड़ी बन गईं. तुम अपनी जिंदगी से भागना चाहती थी. बिजली की कटौती से, कान में मच्छरों का भिनभिनाना से, दो रोटी का मुश्किल से जुगाड़ हो पाने से. तुम्हारे घर में पानी भर जाना तुम्हें परेशान करता था, तुम इससे भी भागना चाहती थीं.



गाड़ी खींचते पिता और घरों में काम करती मां के पास ना इतने पैसे थे कि वो अपनी बेटी के सपनों में रंग भर पाएं. लेकिन, तुम्हारी आंखें चमकती थी, घर के पास की हॉकी अकेडमी को देखकर. तुम कहती हो कि तुमने घंटों इंतज़ार किया खिलाड़ियों को देखते हुए. दिन के 80 रुपए कमाने वाले पिता की इतनी हैसियत नहीं कि वो अपनी बेटी को एक हॉकी स्टिक तक दिला पाएं. लेकिन तुम बुलंद हौसले वाले रानी हो. तुमने वो सब किया जो तुम चाहती थी.


सुख-सुविधाओं की कमी ने तुम्हारे हौसले पस्त नहीं किए और आज पूरा देश तुम्हारी चमक देख रहा है. सलाम है तुम्हारे हौसले को सलाम है तुम्हारी हिम्मत को और सौ सलाम तुम्हारी जुझारू मुस्कराहट को.


वंदना तुमने हैट्रिक माकर इतिहास रच दिया…

टोक्यो ऑलपिक में इतिहास रचने वाली वंदना तुम पर गर्व है हमें. तुमने हैट्रिक माकर इतिहास रच दिया. ओलंपिक में हैट-ट्रिक जमाने वाली भारत की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनी हो तुम. तुम्हारे हौसले भी कम नहीं है. दो दिन पहले ही तुम्हारे घर की ख़बर मीडिया में तैर रही थी, जो बता रही था कि तुम्हारी राहें कितनी मुश्किलों से भरी हुई थीं और आज भी मुश्किलें भेदभाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है.


तुम वहां टोक्यो में कामयाबी के झंड़े गाड़ रही थी, तो यहां तुम्हारे गांव में घर पर कुछ लोग तुम्हारे माता-पिता को नीचा दिखा रहे थे, उन्हें जाति सूचक गालियां दे रहे थे. वो हार से नहीं बौखलाए थे, बल्कि उनका दंभ उनकी कायरता थी, जो बेटी को आगे बढ़ता हुआ नहीं देख पाए. हम शर्मिंदा हैं कि तुम्हारे परिवार के साथ ये घटना हुई. सोशल मीडिया पर तुम्हारे लिए खूब दुआएं हुई और तुमने माफी भी मांगी गई.



पत्रकार उर्मिलेश जी लिखते हैं कि “वंदना कटारिया जिंदाबाद! भारतीय हॉकी जिंदाबाद! वह दिन दूर नहीं, जब शोषण, उत्पीड़न और नफ़रत के कारोबारियों के गढ़ उखड़ जायेंगे!” अशोक कुमार पांडे ने लिखा कि “अगर वंदना कटारिया के घर बदतमीज़ी करने वाले कथित सवर्ण गुंडों को राज्य सज़ा नहीं दिला पाता, तो इसे ओलंपिक की सफ़लताओं पर सेलिब्रेट करने का कोई अधिकार नहीं.”


ये वो आवाज़ें हैं जो तुम्हारे साथ खड़ी हुई हैं, तुम्हें इंसाफ़ मिलना चाहिए वरना हमें वाकई कोई हक़ नहीं है जश्न मनाने का. तुम्हारे संघर्ष को सलाम और तुम्हें बहुत दुआएं.


तुमने लिखी कामयाबी और हिम्मत की नई मिसाल…

प्यारी निशा, जहां लड़कियों को ख़्बाव देखने की इजाज़त नहीं वहां तुमने और तुम्हारे परिवार ने कामयाबी और हिम्मत की नई मिसाल लिखी है. 25 गज के मकान में रहने वाले सोहराब वारसी ने अपनी बेटी के ख़्बावों को पर लगाए और उसे आसमान में उड़ने दिया.


सलीमा तुमने जादू की पुड़िया हो, सिमडेगा के बड़की छापर गांव से तुमने टोक्यो तक का सफ़र किया, तुमने कामयाबी देखी, लेकिन तुम्हारे घर की हालत बताती रही कि इस कामयाबी का सिला तुम्हें वो नहीं मिला, जिसकी हक़दार तुम हो. पिता की रग़ों से होती हुई हॉकी तुम तक पहुंची, लेकिन गरीबी ने पीछा नहीं छोड़ा. मां सुभानी टेटे और पिता सुलक्षण टेटे ने तुम्हें हॉकी के लिए प्रोत्साहित किया और तुमने उन्हें निराश नहीं किया.



बेटी देश-विदेश में कामयाबी के झंड़े गाड़ रही थी, लेकिन परिवार की हालत ऐसी कि उसका मैच देखने के लिए टीवी तक नहीं था. ओलंपिक में जब सलीमा के चर्चे हुए तो प्रशासन के अधिकारियों ने घर में टीवी लगवाया.


हरियाणा की बेटियां तुम हॉकी की आन बान शान हो, खेल तुम्हारी रग़ो में बहता है, हॉकी तुम्हारा जुनून है, तुम पर इनामों की बौझार हो रही है, आज सब तुम्हारी कामयाबी पर गौरांवित है. लेकिन, तुम सबके संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता है, जहां बेटियों को कोख से ही ज़िंदा रहने का संघर्ष करना पड़े, ऐसे में तुम्हें और तुम्हारे माता-पिता को सलाम!


हर खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी

ये सिर्फ़ रानी, निशा, सलीमा की कहानी नहीं है, बल्कि हर खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी है, कैसे छोटे-छोटे गांव कस्बों से निकलकर तुम शेरनियां यहां तक पहुंची हो. तुमने अपना लोहा मनवा लिया है, तुम अब सब गर्व कर रहे हैं. लेकिन, भारत में बेटियों के लिए कामयाबी का रास्ता इतना आसान तो नहीं होता है. कितनी मुश्किलें कितनी बाधाएं पार करनी होती हैं, कभी परिवार साथ नहीं देता है और कभी परिवार साथ दे तो समाज पैर पकड़कर घसीटने की पूरी कोशिश में जुट जाता है.



तुम छोरों से कम नहीं हो, तुमने साबित किया है कि तुम्हारे बुलंद इरादे किसी से कम नहीं हैं. तुमने देश की हॉकी को नई बुलंदियां दी हैं, उसमें ऑक्सीजन भरा है, तुम्हारा लोहा पड़ोसी मुल्क भी मान रहा है, वहां से भी दुआएं मिली हैं. तुम खूब कामयाबी हासिल करो और अगली बार के लिए जुट जाओ तैयारी में. तुम सोने, चांदी से ज़्यादा कीमती हो. तुम आज यहां तक पहुंची हो, आगे कामयाबी तुम्हारे इंतज़ार में खड़ी है.


आओ देश तुम्हारे लिए पलकें बिछाए बैठा है. तुम्हें सर माथे पर रखा जाएगा कि तुमने देश की बेटियों को नई उम्मीद दी है, उनके लिए रास्ते खोले हैं. तुम्हारे इरादे हॉकी स्टिक से मज़बूत हैं. तुम तमाम बंदिशें बाधाएं पार कर सकती हो और तुम्हें देखकर हज़ारों करोड़ों बेटियां अपने ख्बावों में रंग भरने का हौसला ले आएंगीं. तुम सबको खूब प्यार और दुआएं.


तुम्हारे इंतज़ार में…एक हिंदुस्तानी




(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
निदा रहमान

निदा रहमानपत्रकार, लेखक

एक दशक तक राष्ट्रीय टीवी चैनल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी. सामाजिक ,राजनीतिक विषयों पर निरंतर संवाद. स्तंभकार और स्वतंत्र लेखक.

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First published: August 6, 2021, 4:04 pm IST