क्या गांधी परिवार के राजनीतिक प्रभाव से मुक्त हो पाएगा गैर-गांधी परिवार का कांग्रेस अध्यक्ष?

गैर गांधी अध्यक्ष बना तो भी कांग्रेस का सिर्फ किरदार बदलेगा, कलेवर नहीं, आजादी के बाद गैर गांधी परिवार से आने वाले 13 अध्यक्षों ने 35 साल तक संभाली कांग्रेस पार्टी, लेकिन परोक्ष रूप से कमान किसी और के हाथ में ही रही

Source: News18Hindi Last updated on: September 9, 2020, 7:56 PM IST
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क्या गांधी परिवार के राजनीतिक प्रभाव से मुक्त हो पाएगा गैर-गांधी परिवार का कांग्रेस अध्यक्ष?
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री ने सोनिया गांधी का समर्थन किया है.
नई दिल्ली. इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) में एक बार फिर गैर-गांधी परिवार के अध्यक्ष की मांग तेज हो गई है. खुद पार्टी महासचिव एवं मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) तक ने कह दिया है कि अब किसी गैर-गांधी को पार्टी का नेतृत्व संभालना चाहिए. गांधी परिवार (Gandhi family) के बाहर से आने वाले आखिरी अध्यक्ष सीताराम केसरी थे. वो 1996 से 1998 तक अध्यक्ष रहे थे. तब से 22 साल का वक्त बीत गया लेकिन कांग्रेस से गांधी परिवार का मोह बराबर कायम रहा.

कांग्रेस का सबसे बुरा दौर

साल 1885 में बनी देश की सबसे पुरानी पार्टी इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. ऊपर से नीचे तक उसके नेता हतोत्साहित हो चुके हैं. नेतृत्व की दुविधा से लोगों का पार्टी में विश्वास नहीं बन पा रहा. राज्यों में पार्टी नेताओं के बीच सिर फुटव्वल जारी है. मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते ही 2014 में कांग्रेस का सबसे बुरा प्रदर्शन देखने को मिला था. तब से लगातार पार्टी का पतन जारी है.

गांधी परिवार के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो पाएगी कांग्रेस?
इस बीच पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को ही पत्र लिखकर  पार्टी के भीतर ऊपर से नीचे तक बड़े बदलाव की मांग कर डाली. बताया गया है कि इनमें पांच पूर्व सीएम, मौजूदा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कई सदस्य शामिल हैं.

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इन नेताओं के बिना कौन चलाएगा कांग्रेस को?


ऐसे में अब सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने का संकेत दे दिया है. हालांकि, कुछ नेता उन्हें पद पर बने रहने के लिए मना रहे हैं. लेकिन असली सवाल अब भी यही है कि क्या कांग्रेस गांधी परिवार के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो पाएगी? अध्यक्ष बदल भी जाता है तो क्या कांग्रेस का कलेवर भी बदलेगा या फिर सिर्फ किरदार बदलकर परदे के पीछे इसकी कमान गांधी परिवार अपने पास ही रखेगा.इसे भी पढ़ें: पार्टी हाशिए पर, अपने हितों को साधने की लड़ाई लड़ रहे कांग्रेस के कई नेता

आजादी के बाद से अब तक 73 साल में गैर गांधी परिवार से आने वाले 13 अध्यक्षों ने 35 साल तक कांग्रेस की कमान संभाली है. जबकि 38 साल गांधी परिवार से ही आने वाले नेता अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहे. फिलहाल, जानते हैं कि गैर गांधी परिवार के अध्यक्षों की  परफार्मेंस कैसी थी और इस परिवार से उनके संबंध कैसे थे?

गांधी और गैर गांधी अध्यक्षों की परफार्मेंस

>>चुनाव आयोग (Election commission) के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ लोकसभा चुनावों को आधार बनाकर बात करें तो कांग्रेस को सबसे गहरी चोट 2014 और 2019 में मिली. जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में कांग्रेस को सिर्फ 44 और 52 सीटों पर लाकर खड़ा कर दिया.

>>आजादी के बाद अब तक हुए 17 लोकसभा चुनावों (Lok Sabha Election) में कांग्रेस 4 बार गांधी परिवार का अध्यक्ष रहते हुए हारी. जबकि 3 बार गैर गांधी अध्यक्ष रहने पर उसे चुनाव में मुंह की खानी पड़ी.

>>कांग्रेस को 1989 में राजीव गांधी के अध्यक्ष रहते हुए हार मिली. तब जनता दल (नेशनल फ्रंट) की ओर से वीपी सिंह प्रधानमंत्री बनाए गए.

>>साल 1999 और 2014 के चुनाव के दौरान सोनिया गांधी अध्यक्ष थीं. 1999 में पार्टी सिर्फ 114 सीट पर सिमट गई. जबकि 2014 में उसे सिर्फ 44 सीटों पर संतोष करना पड़ा. यह इतिहास में कांग्रेस की सबसे बड़ी हार है. तब कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी सबसे कम सिर्फ 19 फीसदी था.

>>2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी अध्यक्ष थे. उनके नेतृत्व में कांग्रेस को 20 फीसदी वोट के साथ 52 सीटें मिलीं. राहुल गांधी को अपनी पारंपरिक सीट अमेठी से भी हार मिली.

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>>आजादी के बाद पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुए थे. तब से लेकर अब तक 17 बार आम चुनाव हो चुके हैं. इनमें से 10  चुनावों के दौरान पार्टी के अध्यक्ष पद पर गांधी परिवार के लोग कायम थे. जबकि 7 बार गैर गांधी लोग. गैर गांधी परिवार वालों के अध्यक्ष रहते कांग्रेस ने तीन चुनाव हारे.  जबकि गांधी परिवार से अध्यक्ष रहते पार्टी चार चुनाव हारी.

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सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते कांग्रेस ने देखा सबसे बुरा दौर


क्या कहते हैं कांग्रेस के जानकार

‘24 अकबर रोड’ के लेखक रशीद किदवई का मानना है कि मौजूदा हालात में गैर-गांधी परिवार का अध्यक्ष होना मुश्किल दिख रहा है. हो सकता है कि राहुल गांधी को फिर से पार्टी की कमान मिल जाए. हां, राहुल गांधी वीटो कर दें तो कोई नया आ सकता है. सोनिया गांधी राहुल की जगह प्रियंका गांधी को कमान नहीं देना चाहेंगी.




किदवई कहते हैं कि कोई दूसरा भी अध्यक्ष होगा तो वो राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी की छाया से उबर नहीं सकता. हर राज्य में इन्हीं तीनों लोगों के नियुक्त किए गए लोग हैं. ऐसे लोग कैसे किसी दूसरे की बात मानेंगे. भले ही वो अशोक गहलोत या फिर मनमोहन सिंह ही क्यों न हों. पहले का भी इतिहास ऐसा ही है. हाल ही में राजस्थान कांग्रेस में जो ‘बागी-बागी’ का खेल हुआ था क्या उसका डैमेज कंट्रोल कोई गैर-गांधी अध्यक्ष कर पाता? मेरे ख्याल से नहीं.

लंबे समय से कांग्रेस को कवर करने वाले पत्रकार किदवई कहते हैं कि अध्यक्ष भले ही कोई गैर-गांधी रहा हो लेकिन राजनीतिक लीडरशिप अपने-अपने समय में नेहरू, इंदिरा और सोनिया गांधी के पास ही रही है. जहां तक संबंधों की बात है तो कोई भी गैर-गांधी परिवार का अध्यक्ष रहा हो, इस परिवार से अच्छे संबंध बनाकर ही चलता था.
ब्लॉगर के बारे में
ओम प्रकाश

ओम प्रकाश

लगभग दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय. इस समय नेटवर्क-18 में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. खेती-किसानी और राजनीतिक खबरों पर पकड़ है. दैनिक भास्कर से कॅरियर की शुरुआत. अमर उजाला में फरीदाबाद और गुरुग्राम के ब्यूरो चीफ का पद संभाल चुके हैं.

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First published: August 24, 2020, 1:01 PM IST
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