यूं ही नहीं खेती में बड़े राज्यों से बहुत आगे है हरियाणा, यहां का कल्चर है एग्रीकल्चर

जलसंकट से निपटने के लिए किसानों को जोड़ने वाला पहला प्रदेश बना हरियाणा, 1 लाख की बजाय 1,18,128 हेक्टेयर में छोड़ दी धान की खेती, मनोहरलाल की एक आवाज पर इस तरह एकत्र हुए किसान

Source: News18Hindi Last updated on: August 25, 2020, 12:21 PM IST
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यूं ही नहीं खेती में बड़े राज्यों से बहुत आगे है हरियाणा, यहां का कल्चर है एग्रीकल्चर
हरियाणा ने की यूपी, राजस्थान जैसे राज्यों से अधिक गेहूं की खरीद
नई दिल्ली. याद कीजिए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू से पहले के देशव्यापापी माहौल को. लोग राशन और सब्जी की दुकानों पर टूट पड़े थे. हर एक को सबसे ज्यादा चिंता आटा, चावल, दाल और सब्जियों की थी. कोई भी व्यक्ति फ्रिज, टीवी, मोबाइल और गाड़ी लेने के लिए नहीं दौड़ा. दौड़ा तो अन्न लेने के लिए. अगर इसी अन्न को उपजाने वालों की अनदेखी की गई तो सोचिए हमारा भविष्य कैसा होगा?

बढ़ती जनसंख्या के बीच खाद्यान्न और पानी से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ रही है. घरों में बंटवारे के साथ सिकुड़ती खेती और सरकारी नौकरियों के लिए युवाओं की अंधी दौड़ के बीच अब दिनोंदिन कृषि पर संकट बढ़ रहा है. बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों को कई फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तक नहीं मिल पा रहा. ऐसे में अगर खेत-खलिहान और जल से जुड़ी समस्याओं को लेकर हम पहले ही नहीं चेते तो स्थितियां बहुत भयावह हो सकती हैं. हमें फिर से खाद्यान्न के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ सकता है. क्योंकि साल 2050 में भारत की आबादी (India Population) 160 करोड़ तक पहुंच जाने की संभावना है.

तो सवाल यह उठता है कि आखिर यह सब कैसे होगा. खेती तो लोग तब करेंगे जब वो लाभकारी होगी. जब सरकार उनके लिए सहारा बनेगी. जिन राज्यों में खेती उपेक्षित है वहां के हालात बुरे हैं. यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल की बात करें तो यहां किसान खुशहाल नहीं है. इसकी तस्दीक किसानों की आय करती है. ये तीनों सूबे क्षेत्रफल में बड़ा होने के बावजूद एंटी फार्मर माइंडसेट की वजह से खेती से आय के मामले में सबसे निचले पायदान पर खड़े मिलते हैं.

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यूपी-बिहार के मुकाबले यहां कितनी है किसानों की इनकम
राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है किसानों की आय

तो फिर सवाल यह उठता है कि कहां के किसान सबसे ज्यादा खुशहाल हैं? जवाब में हम पाते हैं कि हरियाणा इसमें सबसे अच्छी पोजीशन पर है. यह छोटा सा प्रदेश खेती से जुड़े कई मामलों में बड़े प्रदेशों को मात देता नजर आता है. देश में कृषि परिवारों की मासिक औसत आय 6,426 रुपये है. जबकि यहां पर मासिक औसत आय 14,434 रुपये है. बिहार में यह महज 3558 रुपये प्रति माह है. यूपी में यह 4923 रुपये ही है.

खेती से ही जुड़ा है पशुपालन. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के मुताबिक हरियाणा में प्रति व्यक्ति प्रति दिन दूध की उपलब्धता 1087 ग्राम है. जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 394 ग्राम है.इसी खुशहाली का नतीजा है कि जब पूरे देश में किसान लॉकडाउन के असर से परेशान थे. वे सरकार से आर्थिक मदद मांग रहे थे तो हरियाणा के किसान इसके उलट एक नई इबारत लिखते हुए कोरोना रिलीफ फंड में दान दे रहे थे.

बीजेपी प्रवक्ता राजीव जेटली कहते हैं कि यह सब यूं ही नहीं होता. संघ प्रचारक से सीएम बने मनोहरलाल किसानों के बीच से आते हैं. किसानों के कल्याण से जुड़े फैसलों पर वो हमेशा सकारात्मक रहे हैं. चाहे फसल खरीद का मामला हो या फिर मुआवाजे का. मोदी सरकार ने 2022 तक जो किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा हुआ है उसके लिए वो मेहनत कर रहे हैं.

कृषि क्षेत्र की 95 फीसदी घोषणा पूरी

2014 से 2020 तक उन्होंने सीएम के तौर पर जितनी घोषणाएं की हैं उनमें से सबसे ज्यादा काम कृषि क्षेत्र में ही हुआ है और इससे संबंधित 95 प्रतिशत घोषणाएं पूरी हो गईं हैं. सरकार बनने के बाद से ही मनोहरलाल ने किसानों के मुद्दों को सबसे ऊपर रखा. उनकी कोशिशों से किसान (Farmers) लगातार बहस के केंद्र में है. उन्होंने किसानों को सहयोग, उनके सम्मान और फसल के दाम, तीन बातों पर जोर देकर योजनाएं बनाई हैं.

देश के 62 किसान संगठनों की संस्था राष्ट्रीय किसान महासंघ (Rashtriya Kisan Mahasangh) के संस्थापक सदस्य बिनोद आनंद कहते हैं कि छोटा प्रदेश होते हुए भी हरियाणा बड़े प्रदेशों से कृषि में इसलिए आगे है क्योंकि यहां पॉलिसी ऐसी बनाई गईं हैं. यहां का कल्चर एग्रीकल्चर है. आज कैथल मंडी बासमती चावल की सबसे बड़ी मंडी के रूप में जानी जाती है. यहां की मिट्टी वर्सिटाइल है जिसमें आप हर तरह की फसल उगा सकते हैं. हरियाणा की तरह से अन्य राज्यों में भी काम हो तो किसान काफी आगे बढ़ सकते हैं.

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धान की फसल छोड़ने के लिए किसानों को 7000 रुपये एकड़ दिया गया


एक आह्वान पर मान गए किसान

आमतौर पर जब कोई नेता किसानों से कोई आह्वान करता है तो वह पूरा नहीं होता. क्योंकि उस नेता पर किसानों का विश्वास नहीं होता. लेकिन मनोहरलाल सरकार के मामले में किस्सा अलग हुआ है. इसका बाकायदा रिकॉर्ड है. उन्होंने ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ नाम की एक योजना शुरू की. जिसका लक्ष्य था 1 लाख हेक्टेयर में धान की खेती को रोकना. ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना न करना पड़े.

आपको बता दें कि धान की खेती सबसे ज्यादा पानी की खपत करने वाली फसलों में शामिल है, जिसमें प्रति किलो चावल पैदा करने में करीब 5000 लीटर तक पानी की खपत होती है. बिना इसके नेक लक्ष्य को समझे इस स्कीम का कांग्रेस विरोध करने लगी. कुछ किसान संगठन भी खुलकर विरोध में आ गए. लेकिन यकीन मानिए सरकार के एक लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान के स्थान पर अन्य कम पानी वाली फसलों की बुआई करने के लक्ष्य से कहीं ज्यादा क्षेत्र इसमें कवर हो गया.

वरना सूख जाएगी धरती, भावी पीढ़ियां क्या कहेंगी?

किसानों (farmers) ने योजना के महत्व को समझा और 1,18,128 हैक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल न लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया. लगभग एक लाख किसान इस मुहिम में जुड़े. यह अपने आप में रिकॉर्ड है. वरना धान की फसल में लगने वाला बेतहाशा पानी यहां की धरती को बंजर बना देगा.

पिछले वर्ष भी यह योजना चलाई गई थी और बाकायदा जल संकट से निपटने के लिए इस अनोखी मुहिम की संसद तक में तारीफ हुई थी. दरअसल, हरियाणा में भू-जल स्तर (Ground water level) रिकॉर्ड 81 मीटर (265.748 फुट) से नीचे चला गया ‌है. प्रदेश में ज्यादा जल संकट वाले 19 ब्लॉक हैं. लेकिन इनमें से 11 ऐसे हैं जिसमें धान की फसल नहीं होती.

प्रदेश के वो 8 ब्लॉक इसके लिए चयनित किए गए हैं जिनमें भूजल संकट ज्यादा है. इनमें रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा शामिल हैं. इन क्षेत्रों में धान की बिजाई होती है. इनमें किसानों को बागवानी अपनाने के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देने का इंतजाम किया गया. जबकि धान की जगह दूसरी फसल अपनाने के लिए 7000 रुपये एकड़ मुआवजा दिया गया.

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देश में जल संकट बढ़ रहा है


तीन ब्लॉक में विशेष छूट

रतिया, इस्माइलाबाद और गुहला ब्लॉक घग्गर नदी के पास पड़ते हैं. ये बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में आते हैं. इसलिए सरकार ने ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ में खुद रजिस्ट्रेशन करवाने वालों को विशेष छूट दी. ऐसे किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम भी सरकार ने भरा.

मेरी फसल मेरा ब्योरा: कई समस्याओं का समाधान


इसकी शुरुआत 5 जुलाई 2019 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी. इस पोर्टल पर किसान अपना फसल संबंधी डिटेल अपलोड कर खेती-किसानी से जुड़ी राज्य की सभी सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं.

यह जमीन के रिकॉर्ड के साथ इंटीग्रेटेड है. इसमें किसान अपनी निजी जमीन पर बोई गई फसल का ब्यौरा देता है. इसी आधार पर उसकी फसल उपज की खरीद तय होती है.

लॉकडाउन के दौरान ही अप्रैल में जब गेहूं और सरसों की खरीद शुरू हुई तब हमने इसका फायदा देखा था. किसान सरसों और गेहूं की फसल (wheat crop) इसी पोर्टल के जरिए बेचने में कामयाब हुए.

इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों को सरकार बारी-बारी से एसएमएस भेजकर मंडी में बुलाया गया. इससे किसान को पता था कि उसे कब मंडी में जाना है. वरना मंडी में भीड़ लग जाती. इस तरह कोरोना लॉकडाउन (coronavirus lockdown) के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग बनाने में यह काफी कारगर साबित हुआ है.

क्या है फायदा?

जो लोग इस पर रजिस्टर्ड हैं उन्हें-खाद, बीज, ऋण एवं कृषि उपकरणों की सब्सिडी समय पर मिल सकेगी. फसल की बिजाई-कटाई का समय और मंडी संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी. प्राकृतिक आपदा-विपदा के दौरान सही समय पर सहायता दिलाने में भी यह पोर्टल मदद करेगा. पराली न जलाने वाले किसानों को भी इसी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किया गया पैसा उसे मिलेगा.

किसानों को पेंशन की सुविधा

हरियाणा कृषि की दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है. जहां के लगभग 65% लोगों की जीविका कृषि पर निर्भर है. प्रदेश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान 14 फीसदी है. यह पहला राज्य है जहां पर लघु एवं सीमांत किसानों को सालाना 6000 रुपये पेंशन का प्रावधान किया गया है.

किसान मित्र के जरिए बढ़ सकती है इनकम

हरियाणा में लगभग 17 लाख किसान परिवार हैं. सीएम ने हर 100 किसान पर एक किसान मित्र बनाने का एलान किया है. यानी 17 हजार किसान मित्र कृषि विभाग की ओर से चलाई जाने वाली योजनाओं की जानकारी सीधे किसान मित्र क्लबों के जरिए किसानों तक पहुंचाएंगे. यह कदम 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के विजऩ को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है.

पशु किसान क्रेडिट कार्ड बनाने वाला पहला राज्य

केंद्र सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड योजना की तरह ही हरियाणा ने पशु किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम शुरू की है. जिसके तहत गाय, भैंस, भेंड और बकरी पालन के लिए 3 लाख रुपये तक का लोन सिर्फ 4 फीसदी ब्याज पर मिलेगा. इसमें 1.60 लाख रुपये की रकम बिना किसी गारंटी के मिलेगी. प्रदेश में 8 लाख पशु किसान क्रेडिट कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

अनाज में बड़ा योगदान

हरियाणा ने लॉकडाउन के बावजूद किसानों से 74 लाख मिट्रिक टन गेहूं की खरीद की, तमाम संकटों के बावजूद इसके भुगतान का पैसा कोविड काल भी रिजर्व रखा. जबकि यूपी जैसे बड़े सूबे में इस साल महज 32 लाख टन गेहूं की ही खरीद सकी है. राजस्थान में सिर्फ 19 लाख टन की खरीद हुई.

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सीएम ने पशुपालन के लिए शुरू करवाया पशु किसान क्रेडिट कार्ड (File Photo)


पराली प्रबंधन पर सबसे पहले एक्शन

प्रदूषण की वजह से पराली एक सियासी मुद्दा बना हुआ है. हर साल नवंबर-दिसंबर में जब समस्या सर पर आ खड़ी होती है तब दिल्ली, यूपी, हरियाणा और पंजाब सब इस पर लड़ने लगते हैं. इस साल हरियाणा सरकार ने अगस्त में ही इस पर काम शुरू कर दिया है. जबकि अभी दिल्ली, यूपी और पंजाब का पता नहीं है. पराली प्रबंधन के लिए अगस्त के पहले सप्ताह में ही हरियाणा सरकार ने 1,305 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना को स्वीकृति प्रदान की है.

यूं ही नहीं आगे बढ़ती है खेती

>>सीएम ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में 13-14 हजार कृषि नलकूपों के बिजली कनैक्शन (Electricity connection) जारी किए गए हैं. दस हॉर्सपावर की मोटर किसान अपनी मर्जी से खरीद सकता है. अगर किसान ने बिजली निगमों के पास सिक्योरिटी जमा करवा दी है तो उसे ब्याज सहित लौटाया जाएगा.

>>प्रदेश के किसान अनुबंध खेती (Contract farming) के तहत अपनी उपज पर किसी भी व्यक्ति या बैंक (Bank) के साथ ई-अनुबंध कर सकते हैं. अब उसे फसली कर्ज (Loan) के लिए बैंक के पास जमीन रेहन पर रखने की आवश्यकता नहीं होगी.

>>हरियाणा ने भावांतर भरपाई योजना में आलू, प्याज, टमाटर और गोभी के अतिरिक्त अब गाजर, मटर, किन्नू, अमरूद, शिमला मिर्च और बैंगन को भी शामिल कर दिया है.

>> हरियाणा में गन्ने की अगेती किस्म का रेट 340 रुपये प्रति क्विंटल है. यह देश में सबसे अधिक है. जबकि इससे लगते यूपी में सिर्फ 315 और 325 रुपये दाम है.
ब्लॉगर के बारे में
ओम प्रकाश

ओम प्रकाश

लगभग दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय. इस समय नेटवर्क-18 में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. खेती-किसानी और राजनीतिक खबरों पर पकड़ है. दैनिक भास्कर से कॅरियर की शुरुआत. अमर उजाला में फरीदाबाद और गुरुग्राम के ब्यूरो चीफ का पद संभाल चुके हैं.

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First published: August 14, 2020, 2:44 PM IST
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