झारखंड पब्लिक सर्विस करप्शन में तब्दील होता जेपीएससी

झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) ने सिविल सेवा की पीटी में 57 कैंडिडेट को पहले पास किया और बाद में उन्हें फेल बता दिया. इतना ही नहीं, उनमें 49 की ओएमआर शीट भी गायब है, जिसकी कस्टोडियन जेपीएससी ही है. सड़क पर अभ्यर्थी तो असेंबली में विपक्षी विधायक हंगामा मचा रहे.

Source: News18Hindi Last updated on: December 23, 2021, 8:12 PM IST
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झारखंड पब्लिक सर्विस करप्शन में तब्दील होता जेपीएससी


रकारी पदों पर नियुक्तियों के लिए अब से 21 साल पहले बने झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) ने सिविल सेवाओं की अब तक 10 परीक्षाएं आयोजित की हैं. ये परीक्षाएं कायदे से हर साल होनी चाहिए. अगर सालान परीक्षाएं होतीं तो अब तक 20 परीक्षाएं हो चुकी होंती. इस बार 7वीं से लेकर 10वीं तक यानी 4 पीटी एक साथ हुई.


14 साल पहले लेक्चरर की बहाली भी जेपीएससी के माध्यम से हुई थी. दुर्भाग्य है कि हर बार जेपीएससी की नियुक्तियां हाईकोर्ट, निगरानी विभाग और सीबीआई की जांच में उलझती रही हैं. यह अलग बात है कि एक तरफ जांच-सुनवाई की प्रक्रिया चलती रहती है और दूसरी तरफ चयनित उम्मीदवार आराम से नौकरियां करते रहे हैं.


इससे जेपीएससी की छवि झारखंड पब्लिक सर्विस करप्शन की बन गयी है. सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षाएं (पीटी) एक साथ आयोजित कर जेपीएससी ने रिकार्ड बनाने की कोशिश तो की, लेकिन जिस तरह की गड़बड़ियां उजागर हुई हैं, उन्हें देखते हुए इसकी पुरानी कार्यशैली की पुनरावृत्ति ही दिखायी देती है.


जेपीएससी में ताजा विवाद की क्या हैं वजहें

जेपीएससी ने एक साथ 7वीं से 10वीं सिविल सेवा परीक्षा के तहत प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) का आयोजन किया था. उसके परिणाम आये तो पहले ही दिन से गड़बड़बड़ियां उजागर होने लगीं. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने ऐसे-ऐसे तथ्य खोज निकाले, जिससे जेपीएससी कठघरे में आ गया. कई परीक्षा केंद्रों में सीरीज में अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में पास कर दिये गये थे.


कम अंक पाने वालों को पास कर दिया गया था, जबकि उनसे अधिक अंक लाने वाले फेल थे. हद तो तब हो गयी, जब जेपीएसी द्वारा पास घोषित 57 उम्मीदवारों को विवाद गहराने पर फेल कर दिया गया. इतना ही नहीं, जेपीएससी की मानें को उनमें 49 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट गायब हो गई है, इसलिए उन्हें फेल किया गया है. 8 अन्य उम्मीदवारों को दूसरे कारण बता कर फेल कर दिया गया.


इन गड़बड़ियों पर परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने हंगामा खड़ा कर दिया. वे राज्यपाल रमेश बैस से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में उनकी दलील है कि साहिबगंज में उत्क्रमित उच्च विद्यालय, लोहरदगा में मनोहरलाल इंटर कॉलेज और लातेहार के एक केंद्र पर परीक्षा देने वालों में लगातार सीरियल नंबर वाले अभ्यर्थी पास हो गये हैं.


क्या ऐसा संभव है कि सारे मेधावी अभ्यर्थियों ने इन्हीं केंद्रों का चयन किया होगा. उनका यह भी आरोप है कि कई केंद्रों पर वैसे अभ्यर्थियों को भी पास कर दिया गया, जो परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए थे.


सड़क पर अभ्यर्थियों तो सदन में विधायकों का हंगामा

7वीं से 10वीं जेपीएससी सिविल सेवा पीटी परीक्षा 19 सितंबर को हुई थी. परिणाम 1 नवंबर को जारी हुआ. मुख्य परीक्षा की तैयारी चल रही है. प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम घोषित होने बाद से ही अभ्यर्थियों का हंगामा जारी है. वे सड़कों पर लगातार धरना-प्रदर्शन और जेपीएससी का पुतला दहन कर रहे हैं. विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मुख्य विपक्षी दल भाजपा इस मुद्दे पर लगातार हंगामा कर रही है.


बीजेपी सांसद दीपक प्रकाश अभ्यर्थियों के साथ खड़े हैं. आंदोलनकारी अभ्यर्थियों पर पुलिस बर्बरता भी हुई. विपक्ष का आरोप है कि कई जिलों के परीक्षा केंद्रों पर तकरीबन 300 अभ्यर्थी सीरिज में पास हुए हैं. इनमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का गृह जिला साहिबगंज का परीक्षा केंद्र उत्क्रमित उच्च विद्यालय भी शामिल है. वहां एक कमरे में 20 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था थी. 17 शामिल हुए, जबकि 3 अनुपस्थित थे. आश्चर्यजनक ढंग से सभी 17 अभ्यर्थी पास हो गए हैं. मांग है कि परीक्षा रद कर मामले की सीबीआई जांच कराई जाये.


51 दिनों से जारी है अभ्यर्थियों का आंदोलन

जेपीएससी से फेल घोषित अभ्यर्थी 1 नवंबर को परिणाम घोषित होने के बाद से आंदोलनरत हैं. इस बीच जिन 57 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट जेपीएससी गायब बता रहा है, उनमें पहले 49 पास थे. अब वे भी आंदोलन में शामिल हो गये हैं. अभ्यर्थियों की मांग है कि पीटी के परिणाम में बड़े पैमाने पर घोटाले की आशंका को देखते हुए इसे रद किया जाए. अभ्यर्थी इसके लिए 12 दिनों से अनशन भी कर रहे हैं. जेपीएससी की शवयात्रा भी निकाली, जिसे पुलिस ने रोक दिया. बाद में सड़क पर ही पुतला दहन कर अभ्यर्थियों ने अपने मन की खीझ निकाली.


हेमंत सोरेन ने कहा- आंदोलन प्रायोजित है





सड़क से सदन तक हो रहे हंगामे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान आया है. उन्होंने कहा कि पहली बार चार परीक्षाएं एक साथ कराई गई. बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए. झारखंड के आदिवासी और मूलवासी जब बड़ी संख्या में पास हुए हैं तो मनुवादियों के पेट में मरोड़ उठ रही है. दरअसल जो सड़क पर हंगामा कर रहे हैं, वे अभ्यर्थी नहीं, बल्कि विश्व हिन्दू परिषद के भाड़े पर जुटाये गये कार्यकर्ता हैं.


जेपीएससी और विवाद का पुराना रिश्ता रहा है

जेपीएससी और विवाद का रिश्ता कोई नया नहीं है. पहले भी विवाद होता रहा है. मामले निगरानी विभाग, हाईकोर्ट और सीबीआई तक जाते रहे हैं. कुछ मामलों में सीबीआई ने चार्जशीट भी सौंपी है. जेपीएससी द्वारा आयोजित शायद ही कोई ऐसी परीक्षा हो, जिस पर उंगली न उठी हो. वर्ष 2007 में जेपीएससी ने लेक्चरर के लिए 750 उम्मीदवारों का चयन किया था.


आरोप लगा कि सभी पदों पर आयोग के सदस्यों ने अपने चहेतों की या पैसे लेकर दूसरे उम्मीदवारों की नियुक्तियां कीं. यह मामला हाईकोर्ट में गया. हाईकोर्ट ने इसकी जांच का जिम्मा विजिलेंस डिपार्टमेंट को सौंपा. विजिलेंस जांच की प्रगति से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया. 9 जून 2010 को जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन दिलीप प्रसाद समेत 32 लोगों के खिलाफ विजिलेस डिपार्टमेंट में एफआईआर दर्ज करायी गई थी. साल भर तक विजिलेंस ने कुछ नहीं किया तो हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंप दिया.


अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का लगता रहा है आरोप

जेपीएससी सदस्यों पर अपने लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगता रहा है. विजिलेंस में जो एफआईआर दर्ज करायी गई थी, उसमें इस बात का जिक्र था. जेपीएससी के तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह ने तो हद ही कर दी थी. उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए अपने लोगों को परीक्षक बनवाया.


मूल्यांकन का काम जेपीएससी ऑफिस के बजाय गोपाल प्रसाद के गोड्डा और दुमका स्थित आवास पर हुआ. चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए नंबरों की हेरफेरी की गयी. विजिलेंस की जांच में इस बात का पता चला कि लेक्चरर बहाली में गोपाल प्रसाद सिंह, शांति देवी और एलिस उषा रानी समेत दिलीप प्रसाद ने अपने बेटे और रिश्तेदारों को तरजीह दी थी.


इतना ही नहीं, गोपाल प्रसाद ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने बेटों कुंदन कुमार सिंह और रजनीश कुमार को दूसरी जेपीएससी परीक्षा में पास करा दिया. दोनों बीडीओ नियुक्त हुए. बाद में दोनों को सस्पेंड कर दिया गया था. उन्होंने अपने 8 रिश्तेदारों को गलत तरीके से लेक्चरर भी नियुक्त करा लिया था. गोपाल प्रसाद ने बाद में सरेंडर कर दिया था. जेपीएससी के इन घोटालेबाजों के सारे कुनबे को जेल की हवा खानी पड़ी.


(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
ओमप्रकाश अश्क

ओमप्रकाश अश्क

प्रभात खबर, हिंदुस्तान और राष्ट्रीय सहारा में संपादक रहे. खांटी भोजपुरी अंचल सीवान के मूल निवासी अश्क जी को बिहार, बंगाल, असम और झारखंड के अखबारों में चार दशक तक हिंदी पत्रकारिता के बाद भी भोजपुरी के मिठास ने बांधे रखा. अब रांची में रह कर लेखन सृजन कर रहे हैं.

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First published: December 23, 2021, 8:02 PM IST
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