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हिंदी पत्रकारिता: कोरोना काल की उम्मीद

May 19, 2021, 12:34 PM IST

अंतहीन सी दिखाई देती इस महामारी के दरमियान एक उम्मीद बतौर हिंदी अख़बारों में गहरा परिवर्तन देखने को मिला है. पिछले दशकों से अनेक हिंदी अख़बार सत्ताधारी पार्टी के समक्ष समर्पण करते आए हैं. हालांकि अब अंग्रेजी का अख़बार भी अक्सर आँगन लीप रहा है, लेकिन अख़बार का पतन राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान शुरु हुआ था जब कई प्रमुख हिंदी अख़बार विकट साम्प्रदायिक हो गए थे.पिछले डेढ़ महीने में लेकिन हिंदी अख़बारों की नई रंगत चमक कर आई है. इन अख़बारों ने डंके की चोट पर सत्ता पर प्रहार किया है, इनकी ज़मीनी ख़बरों ने कई अवसरों पर अंग्रेजी पत्रकारिता को पीछे छोड़ दिया है. कई हिंदी अख़बारों ने अपनी रिपोर्टिंग से चकित कर दिया है. इनकी कई खबरें ऐसी हैं जो किसी एक संवाददाता के बजाय बीसेक़ कलमों से उपजी हैं, यानी अचूक सम्पादकीय दृष्टि को बतलाती हैं. मसलन गंगा में बहती लाशों पर ‘दैनिक भास्कर की सत्ताईस ज़िलों से एकत्र की गई खबर. भोपाल के श्मसान घाट, लखनऊ में मृत्यु प्रमाणपत्र की बढ़ती मांग, छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले में रातों रात कम दिखाए गए कोरोना पीड़ित, उत्तर प्रदेश और बिहार की ग्रामीण स्थिति - पिछले डेढ़ महीने में हिंदी प्रदेश से आ रही लगभग हरेक प्रमुख ज़मीनी खबर हिंदी पत्रकार की है. अंग्रेजी की पत्रकारिता अक्सर इन्हीं ख़बरों को अपना आधार बना रही है. अंग्रेजी पत्रकार इन ख़बरों को बेहिसाब उद्धृत कर रहे हैं।हिंदी अख़बार की यही पहुंच उसे अंग्रेजी अख़बार पर अविजित बढ़त दिला देती है. तीस ज़िलों से खबर एकत्र करने के लिए हिंदी अख़बारों को सिर्फ़ एकदो दिन चाहिए क्योंकि उनके संवाददाता प्रायः हरेक ज़िले में मौजूद हैं, जबकि इतनी सामग्री जुटाने के लिए राजधानी में केंद्रित अंग्रेजी के पत्रकार को कई दिनों तक घूमना पड़ेगा.यह परिवर्तन पत्रकारिता के साथ समूचे हिंदी समाज के लिए भी आश्वस्तिदायक है. अगर हिंदी मीडिया अपने दर्प और गरिमा के साथ दमकेगी, हिंदी प्रदेश की राजनीति को चुनौती देगी, हिंदी समाज के भीतर पैठी जड़ता दूर होगी. अंग्रेजी के प्रति मोह मिटेगा। हिंदी-भाषी पत्रकार को वह व्यापक सम्मान वापस मिल सकेगा जो उसे कभी ‘धर्मयुग, ‘दिनमान और ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान के समय मिला करता था.बस्तर में मृत्यु मुझे ऐसा कोई अवसर नहीं याद आता जब किसी की पिता और बेटे दोनों से दोस्ती रही हो, कुछ बरसों के अंतराल में उसने पिता और बेटे दोनों को जाते देखा हो और पिता के बाद अब बेटे पर लिख रहा हो. एक ऐसा पिता जिसे गए ठीक आठ साल हुए लेकिन जिसका साया आज भी बस्तर के आकाश मंडराता है, जिसके बग़ैर बस्तर के नक्सल आंदोलन की कथा अधूरी रहेगी. एक ऐसा बेटा जो अपने पिता जितना सामर्थ्यवान और मशहूर तो क़तई नहीं था, लेकिन निर्भीक शायद उतना ही था. अपने कुटुम्ब के कई अन्य सदस्यों की तरह मृत्यु का भय जन्म लेने से पहले ही कहीं दफ़ना आया था.मेरी दीपक कर्मा से दोस्ती उनके पिता महेंद्र कर्मा की नक्सलियों के हाथों हत्या के बाद शुरु हुई थीं. महेंद्र कर्मा नब्बे के दशक से बस्तर में नक्सलियों से लड़ रहे थे. वे बस्तर से नक्सलियों को हटाना चाहते थे, सलवा जुड़ुम आंदोलन चलाया था, लड़कों को बंदूक़ें थमा दी थीं और न जाने कितने आदिवासियों की हत्या में भागीदार हुए थे. उन पर कई बार हमले हुए थे, और आख़िर में मई दो हज़ार तेरह में नक्सलियों ने अपने सबसे बड़े शत्रु को मिटा दिया.ठीक आठ साल बाद इस मई के महीने में उनका बड़ा बेटा दीपक कर्मा कोरोना वायरस से हार गया. अपने लड़कपन से बन्दूकों और राइफ़लों के साथ जीता आया दीपक कर्मा, अपने परिवार का शायद सबसे सयाना सदस्य, कर्मा परिवार का एकमात्र सदस्य जिसने मुझसे कई बार कहा कि सलवा जुड़ुम ठीक रास्ते पर नहीं गया, उस युवक को कोरोना ने मिटा दिया.मृत्यु का यह दौर मानव इतिहास में शायद अतुलनीय है. आप परिवार जोड़ते हैं, अपना जीवन इस परिवार के लिए समर्पित करते हैं कि अकेले न मरना पड़े. लेकिन आज हम एक क्रूर और निर्वासित एकांत में मर रहे हैं, अपने मृतक के पास जा भी नहीं सकते. यह अस्पृश्य मृत्यु है, जिसके साथ पछतावे भी बेशुमार जुड़ जाते हैं.पंद्रह दिन पहले मेरे पास ट्विटर पर सुबह छह बजे करीब किसी अनजान व्यक्ति का मैसेज आता है कि उनके रिश्तेदार बहुत बीमार हैं, क्या ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था हो सकती है. मैं इस मैसेज को क़रीब पौने नौ पर देख पाता हूं. उनसे मरीज़ का नाम, पता इत्यादि पूछता हूं. उनका तुरंत जवाब आता है कि वे अब नहीं रहे. ग्लानि से भरा मैं तुरंत माफ़ी मांगता हूँ कि उनका मैसेज देर से देख पाया.इसी तरह ग्यारह मई की रात किसी का वाट्स एप्प मैसेज आता है कि एक वृद्ध महिला कोविड अस्पताल में भर्ती हैं, डॉक्टर ने कहा है कि उन्हें आईसीयू में भर्ती करना है - क्या हो पाएगा? मैं कुछ फ़ोन घुमाता हूं।एक जगह से जवाब आता है कि मरीज़ का विवरण भेजें. मैं मरीज़ के रिश्तेदार को फ़ोन करता हूं. उनका जवाब आता है कि तुरंत विवरण भेज रहे हैं. पांच मिनट बाद उनका मैसेज आता है - वह नहीं रहीं. इस मृत्युकाल के बाद बचे रह जाना एक पछतावे जैसा एहसास बन जाएगा. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.) ... और भी पढ़ें

Opinion: कोरोना से जीतना चाहते हैं तो गांव में बंद पड़े अस्पताल दोबारा खोलिए

May 19, 2021, 10:28 AM IST

कोरोना संकट ने इस बार जहां शहरों और महानगरों को प्रभावित किया वहीं गांव के गांव भी इस बार महामारी के चपेट में आए हैं. ग्रामीण स्तर पर चिकित्सा सेवाओं की कमी से लेकर सरकारों की उदासीनता भी इसके पीछे एक बड़ी वजह रही है. कई दशकों से  केंद्र और ... और भी पढ़ें

भगवान नहीं झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे बिहार के 45 हजार गांव

May 18, 2021, 09:23 PM IST

हमारे गांव के हाईस्कूल में विज्ञान के एक शिक्षक हुआ करते थे जो बहुत अच्छा पढ़ाते थे. सरजी को आज भी उनके छात्र बड़ी शिद्दत से याद करते हैं, लेकिन उनका एक और परिचय भी है. उनके पिता जाने माने चिकित्सक थे और वो खुद भी डॉक्टर बनना चाहते थे. ... और भी पढ़ें

संघ प्रमुख की सीख, सत्ता और विज्ञान का सत्य

May 18, 2021, 02:59 PM IST

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने `असीमित सकारात्मकता वाली व्याख्यान श्रृंखला में जो बातें कही हैं वे सत्ता और समाज दोनों के लिए काबिले गौर हैं. अब देखना यह है कि सत्ता में बैठे राजनेता और समाज में फैले साठ लाख स्वयंसेवक किस तरह इस बात ... और भी पढ़ें

मानव संग्रहालय; घने शहर के बीचों बीच बसा एक दिलचस्‍प गांव

May 18, 2021, 01:37 PM IST

‘एक मंजि़ला लकड़ी का एक मकान, जिसमें एक बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर की मंजि़ल है. इसकी विशेषता सिर्फ यह नहीं है कि ये पूरा मकान लकड़ी का बना हुआ है, खास बात ये है कि ये पूरा मकान फोल्डिंग भी है. इसे एक जगह से उठाकर दूसरी जगह, ले ... और भी पढ़ें

West Bengal: ममता को बंगाल में ही उलझाए रखने की रणनीति

May 17, 2021, 03:56 PM IST

पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में कई घटनाएं ऐसी हुईं जो पहली बार देखने को मिलीं. लंबे समय बाद वहां सरकार के सामने मजबूत विपक्ष खड़ा हुआ है. भारत के इतिहास में पहली बार सभी विपक्षी जन प्रतिनिधियों को केंद्रीय बलों की सुरक्षा मुहैया कराई गई है. इसके अलावा ... और भी पढ़ें

Opinion: मध्‍यप्रदेश में कोरोना इलाज में झोलाछाप डॉक्‍टरों की हिमायत

May 17, 2021, 02:56 PM IST

कोरोना महामारी के दूसरे दौर में आए रेमडेसिविर और ऑक्‍सीजन के महासंकट से थोड़ा-थोड़ा उबरने के साथ ही मध्‍यप्रदेश एक नए संकट में फंसता नजर आ रहा है. ये संकट पुराने वाले संकट से और ज्‍यादा गंभीर, और ज्‍यादा व्‍यापक असर वाला है. चिंता की बात ये है कि सबकुछ ... और भी पढ़ें

कोरोना, वैक्सीन और लाशें उगलती नदियां...

May 17, 2021, 02:25 PM IST

क्या गंगा, क्या यमुना, देश की नदियों में तैर रही हैं इंसानी लाशें. वो कौन लोग हैं जिन्हें मौत के बाद बहा दिया गया गंगा में, यमुना में या फिर किसी और नदी में. सवाल ये है कि ये हज़ारों लाशें आईं कहां से, क्या कोरोना है इनकी मौत की ... और भी पढ़ें

ये शिक्षक सिस्टम से बाहर हुए बिना यूं थाम रहे दिल्लीवासियों के हाथ

May 17, 2021, 01:16 PM IST

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के घातक कहर से बचने के लिए एक ओर कई लोग अपने घरों में कैद हैं और उन्हें लगता है कि इस महामारी से निजात पाने के लिए समाज से दूरी अत्यावश्यक है. वहीं दूसरी ओर देश के दिल कहे जाने वाले दिल्ली में कुछ ... और भी पढ़ें

कामायनी का पुनर्पाठ

May 16, 2021, 01:06 PM IST

इतिहास गवाह है कि जब-जब भी जीवन और प्रकृति की लय टूटी , हाहाकार मचा, लेकिन महाविनाश के बाद नवनिर्माण की कहानियां भी मनुष्य के महाविजय की तस्दीक करती हैं. इस दौरान प्रसाद की 'कामायनी' पढ़ते हुए दो समयों की समान्तर यात्रा से गुजरने का अनुभव हुआ. घटनाओं ... और भी पढ़ें

शानी न होते तो अल्‍पसंख्यकों का असुरक्षित होना कौन बताता?

May 16, 2021, 11:39 AM IST

साहित्‍य के गलियारों में अकसर यह बहस होती है कि दलित साहित्‍य, महिला साहित्‍य, मुस्लिम साहित्‍य की प्रतिनिधि रचना क्‍या इसी वर्ग के लोग कर सकते हैं या कोई ‘बाहरी भी अपनी अनुभूति के स्‍तर से इन वर्गों के हालात को समझकर लिख सकता है? इस बहस से इतर मूल ... और भी पढ़ें

Opinion : किसानों के खाते में सीधा जा रहा पैसा, अब दिक्कत किसको है?

May 15, 2021, 04:51 PM IST

रबी फसल की खरीद के पहले किसानों के मन में दुविधा थी कि उनके एकाउंट में फसल बेचने के बाद पैसा पहुंचेगा या नहीं. संशय उन सरकारी बाबुओं के मन में भी था कि लाखों किसानों को इसके लिए कैसे मनाया जाए लेकिन नतीजों से किसान तो खुश हैं ही, ... और भी पढ़ें

OPINION: जेलों के खेल रोकने में सभी फेल! सरकारें बदलती रहीं, नहीं बदली तो..

May 15, 2021, 10:12 AM IST

दुर्दांत अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों की दुरभिसंधि का लम्बे काले अतीत को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली उत्तर प्रदेश की जेलों के खेल आज एक बार जेरे बहस हैं. करीब पौने तीन साल पहले जब बागपत की जेल में माफिया डॉन और विधायक मुख्तार अंसारी का दाहिना हाथ समझे ... और भी पढ़ें

बावरा मन : ये तेरा घर, ये मेरा घर… Coexistence!

May 15, 2021, 10:09 AM IST

आज के इस दौर में जब कोई खबर सुकून और दिलासा नहीं देती तो राजकपूर की कही एक बात याद आती है, "The show must go on" ... परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हों, आगे बढ़ने के अलावा दूसरा कोई भी ऑप्शन इंसान के पास नहीं होता है. हर आपदा में एक अवसर ... और भी पढ़ें

Covid-19: महामारी में लड़ती हमारी सरकारें और मदद की आस निहारती जनता

May 14, 2021, 10:15 PM IST

देश में कोविड केस ढाई करोड़ तक पहुंचने वाले हैं, ढाई लाख से ज्यादा घोषित मौतें हो चुकी हैं, महामारी अभी थमी नहीं है. ताज्जुब है कि हम एक देश होकर नहीं लड़ रहे हैं! राजनीतिक दलों पर महामारी को हराने से ज्यादा अपने विचार या कहें स्वार्थ हावी हैं. ... और भी पढ़ें

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    चिंता के विचार आपकी ख़ुशी को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसा न होने दें, क्योंकि इनमें अच्छी चीज़ों को ख़त्म करने की और समझदारी में निराशा का ज़हरीला बीज बोने की क्षमता होती है। ख़ुद को हमेशा अच्छा परिणाम पाने के लिए प्रोत्साहित करें और ख़राब हालात में भी कुछ-न-कुछ अच्छा देखने का गुण विकसित करें। ख़ास लोग ऐसी किसी भी योजना में रुपये लगाने के लिए तैयार होंगे, जिसमें संभावना नज़र आए और विशेष हो। भूमि से जुड़ा विवाद लड़ाई में बदल सकता है। मामले को सुलझाने के लिए अपने माता-पिता की मदद लें। उनकी सलाह से काम करें, तो आप निश्चित तौर पर मुश्किल का हल ढूंढने में क़ामयाब रहेंगे। किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। काम के लिए समर्पित पेशेवर लोग रुपये-पैसे और करिअर के मोर्चे पर फ़ायदे में रहेंगे। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है। स्वयंसेवी कार्य या किसी की मदद करना आपकी मानसिक शांति के लिए अच्छे टॉनिक का काम कर सकता है। परेशान? आप पंडित जी से प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
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