जयंती विशेष : 'असद' को तुम नहीं पहचानते तअज्जुब है...

खुद असद भोपाली ने अपने परिचय में कहा है कि वे फिल्‍मी जुबां में गीतकार थे और उर्दू जुबां में शायर. जिनका काम उनके नाम से अधिक पहचाना गया ऐसे मकबूल शायर असद भोपाली की 10 जुलाई को जयंती है.

Source: News18Hindi Last updated on: July 10, 2021, 12:37 PM IST
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जयंती विशेष : 'असद' को तुम नहीं पहचानते तअज्जुब है...
जिस साल ‘मैंने प्यार किया’ फिल्‍म रिलीज हुई, उसी साल 9 जून, 1990 को असद भोपाली का इंतकाल हो गया.
क्‍या आप असद भोपाली को जानते हैं? यह सवाल सुन कर जवाब के लिए शायद आपको अपने  दिमाग पर जोर देना पड़े. मगर यदि कहा जाए कि ‘वो जब याद आए, बहुत याद आए’, ‘हंसता हुआ नूरानी चेहरा’, ‘हम तुमसे जुदा हो के, मर जायेंगे रो-रो के’, ‘दिल का सूना साज तराना ढ़ूंढेगा, मुझको मेरे बाद जमाना ढूंढेगा’, ‘दिल की बातें दिल ही जाने’, ‘इना मीना डीका दाई डम नीका’, ‘दिल दीवाना बिन सजना के माने ना’ और ‘कबूतर जा जा जा’ गीतों के लेखक कौन हैं तो हर सवाल का जवाब एक ही होगा - असद भोपाली.

खुद असद भोपाली ने अपने परिचय में कहा है कि वे फिल्‍मी जुबां में गीतकार थे और उर्दू जुबां में शायर. जिनका काम उनके नाम से अधिक पहचाना गया, ऐसे मकबूल शायर असद भोपाली की 10 जुलाई को जयंती है. दादामुनि अशोक कुमार से लेकर सुपर स्‍टार सलमान खान तक की फिल्‍मों में गीत लिखने वाले असद भोपाली का जन्म 10 जुलाई 1921 को भोपाल में हुआ था. मुंशी अहमद खान था की पहली संतान असद भोपाली का जन्म नाम असदुल्लाह खान था. शायरी में रूचि के चलते उनका नाम असद भोपाली हुआ.

असद के गीतकार बनने के पीछे की रोचक कहानी
आजादी के समय अपनी शायरी से मशहूर हो रहे असद भोपाली के गीतकार बनने के पीछे भी रोचक घटना है. मशहूर फिल्म निर्माता फजली ब्रदर्स की फिल्म ’दुनिया’ के गीत शायर आरजू लखनवी लिख रहे थे. दो गीत लिखने के बाद वे पाकिस्तान चले गए. इस फिल्म के लिए फजली ब्रदर्स और निर्देशक एसएफ हसनैन एक नया गीतकार चाहते थे. उनकी तलाश भोपाल में पूरी हुई. यहां 5 मई, 1949 को भोपाल टॉकीज में आयोजित मुशायरे में फजली ब्रदर्स और निर्देशक हसनैन की मौजूदगी में असद भोपाली ने अपना कलाम पढ़ा.
फजली बंधु ने मुशायरे के एक रोज बाद ही असद भोपाली को अपनी फिल्म ’दुनिया‘ के लिए बतौर गीतकार साइन कर लिया. वे 28 साल की उम्र में 1949 में बम्बई (मुंबई) पहुंचे. उपलब्‍ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने पहले फिल्म "दुनिया" के लिए दो गीत लिखे, जिन्हे मोहम्मद रफी (रोना है तो चुपके चुपके रो) और सुरैया (अरमान लूटे दिल टूट गया) की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था. फिल्मी दुनिया में उन्हें असली पहचान और शोहरत निर्देशक बीआर चोपड़ा की फिल्म ‘अफसाना’ से मिली. फिल्म के सभी गाने चर्चित हुए.


अपने समकालीन कई बड़े और सफल गीतकारों के कारण असद भोपाली शीर्ष नायकों और संगीतकारों वाली फिल्‍मों में काम नहीं पा सके. मुंबई पहुंचने के 13 साल बाद, उन्हें संगीतकार लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल की पहली फिल्‍म के गीत लिखने का मौका मिला. 1963 में जब फिल्म ‘पारसमणि’ प्रदर्शित हुई तो इसकी सफलता में असद भोपाली के लिखे गानों का बड़ा योगदान था. खास तौर से ‘हंसना हुआ नूरानी चेहरा…’ और ‘वो जब याद आये, बहुत याद आये…’. अब भी याद किए जाते हैं. इन गीतों के कारण असद भोपाली फिर चर्चा में आ गए.

हंसता हुआ नूरानी चेहरा.. के पीछे की कहानी‘पारसमणि’ के गीत ‘हँसता हुआ नूरानी चेहरा…’ लिखे जाने की भी रोचक गाथा है. आकाशवाणी पर प्रसारित एक चर्चा में खुद असद भोपाली ने बताया था कि उन्‍हें राह चलते एक बुजुर्ग सफेद दाड़ी और नूरानी चेहरा नजर आए थे. कुछ और आगे बढ़ा तो एक हंसमुख हसीना भी नजर आ गई. शायर ने दोनों चेहरों को साथ देखा तो यह गीत बना.

हंसता हुआ नूरानी चेहरा,
काली जुल्फें रंग सुनेहरा,
तेरी जवानी तौबा रे तौबा रे
दिलरुबा दिलरुबा दिलरुबा दिलरुबा

पहले तेरी आंखों ने लूट लिया दूर से
फिर ये सितम तन तन के देखना गुरुर से
ओ दीवाने ओ दीवाने
तू क्या जाने, हां तू क्या जाने
दिल की बेक़रारियाँ है क्या.


इतने सफल गीतों के बाद भी असद भोपाली के हिस्‍से में छोटे बजट की फिल्‍में ही आईं. कम काम मिलने का एक कारण असद भोपाली का स्‍वाभिमान भी था. उन्‍होंने काम की तलाश में हाथ नहीं फैलाया. अपने परिवार के जीवनयापन के लिए वे हर तरह का काम करते रहे. चाहे फिल्‍म छोटी हो या नए कलाकारों वाली, बतौर गीतकार असद भोपाली पूरी ईमानदारी से कात करते रहे. हालांकि, आजीविका का संघर्ष कदम दर कदम उनके साथ चलता रहा.

प्रख्‍यात अभिनेत्री तबस्‍सुम अपने कार्यक्रम में जिक्र करती हैं कि असद भोपाली अपने हालात बयान करते हुए अक्‍सर कहा करते थे कि जिस चीज ने जिंदगी भर साथ निभाया वह थी गुर्बत यानि गरीबी.

गीतकार असद के गीतों से इनको मिली पहचान
संगीतकार जोड़ी लक्ष्‍मीकांत प्‍यारेलाल की पहली फिल्‍म में हिट गीत देने वाले गीतकार असद भोपाली ने आज के सुपर स्‍टार सलमान खान की बतौर स्‍टार पहली फिल्‍म में भी गीत लिखे. सलमान खान की पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के गीत सुपर-डुपर हिट रहे. इस फिल्म के गीत ‘कबूतर जा जा जा…’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला. फिल्मों में चार दशक की लंबी पारी के बाद जब एक बार फिर सफलता मिली तो असद भोपाली उसका जश्‍न मनाने की स्थिति में नहीं थे.

जिस साल ‘मैंने प्यार किया’ फिल्‍म रिलीज हुई उसी साल 9 जून, 1990 को असद भोपाली का इंतकाल हो गया. उनके चाहने वालों को हमेशा यह अफसोस रहेगा कि जिंदगी के आखिरी वक्त में उन्‍हें अवार्ड तो मिला लेकर वे उसे लेने न जा सके. एक तरफ जहां फिल्‍मों में असद भोपाली ने बेहद लोकप्रिय गीत लिखें वहीं नज्‍मों से बतौर शायर वे अधिक ख्‍यात हुए. उनके अशआर पाठकों को छू जाते हैं. जैसे :

इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले,
वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते.

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा,
अब के बरस बहार का मौसम न आए.

जब अपने पैरहन से ख़ुशबू तुम्हारी आई,
घबरा के भूल बैठे हम शिकवा-ए-जुदाई.

'असद' को तुम नहीं पहचानते तअज्जुब है,
उसे तो शहर का हर शख़्स जानता होगा.

जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए,
बारहा दिल ने ये महसूस किया तुम आए.

अपने आकाशवाणी के कार्यक्रम में असद भोपाली ने कहा था :
गुंचा औ गुल की कसम, चांद सितारों की कसम,

तुम बहारों से भी प्‍यारे हो, बहारों की कसम.
एक शायर आपके लिए इससे ज्‍यादा क्‍या कह सकता है?


सच है, हमें इतने बेहतरीन गीत देने वाला शायर इससे बेहतर और क्‍या दे सकता है? इतना प्रभावी लेखन की हम सर्जक के नाम को भूल केवल रचनाओं का आनंद लेते हैं. आज भले ही असद भोपाली के किरदार को कम लोग जानते हैं मगर गीतों की दुनिया कर हर प्रशंसक उनके लिखे गीतों को सुनता और मुग्‍धभाव से दाद देता है. आखिर, असद भोपाली ने ही लिखा है -

'असद' को तुम नहीं पहचानते तअज्जुब है, उसे तो शहर का हर शख़्स जानता होगा.



(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
पंकज शुक्‍ला

पंकज शुक्‍लापत्रकार, लेखक

(दो दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय हैं. समसामयिक विषयों, विशेषकर स्वास्थ्य, कला आदि विषयों पर लगातार लिखते रहे हैं.)

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First published: July 10, 2021, 12:37 PM IST
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