प्याज़: अभी तो भाव बढ़ना शुरू हुआ है रोता है क्या, आगे-आगे देखना होता है क्या!

Onion Price: देश के अधिकतर हिस्सों में खुदरा प्याज़ की क़ीमतें 70 से 100 रुपये प्रति किलो पहुंच गई हैं. जानकारों के मुताबिक दीपावली तक ये 120-150 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच सकती हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: October 21, 2020, 8:27 PM IST
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प्याज़: अभी तो भाव बढ़ना शुरू हुआ है रोता है क्या, आगे-आगे देखना होता है क्या!
प्याज की कीमत 120 रुपये किलो तक बढ़ सकती है
‘जिस सरकार का कीमत पर जोर नहीं, उसे देश चलाने का अधिकार नहीं’ ये वो नारा है जिसने जनता पार्टी से सत्ता छीन ली. साल था 1980 का और केंद्र में जनता पार्टी की सरकार थी. कांग्रेस विपक्ष में थी. देश में प्याज़ की क़ीमतें आसमान छू रही थीं. इंदिरा गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान प्याज़ की माला पहनकर पूरे देश में प्रचार किया और इसी नारे के साथ जनता से वोट मांगा.

ये भारतीय लोकतंत्र में पहली बार था जब प्याज़ चुनावी मुद्दा बना. संसदीय चुनाव में जनता पार्टी की हार हुई और एक बार फिर कांग्रेस सत्ता में आई. इसके बाद कई ऐसे मौके आये जब प्याज ने सत्ता के केंद्र में बैठे नेताओं को हार के आंसू रुला दिये.

साल 1998 में जब एक बार फिर प्याज़ की क़ीमतों ने आसमान छुआ तब बीजेपी ने एक के बाद एक तीन मुख्यमंत्री बदले लेकिन सत्ता नहीं बचा पाई. मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और फिर सुषमा स्वराज को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन दाम कम नहीं हुए और बीजेपी को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.

राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके भैरोसिंह शेखावत ने भी चुनाव हारने के बाद कहा था कि प्याज़ हमारे पीछे पड़ा था. अब एक बार फिर देश के एक बड़े राज्य बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और प्याज की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. सवाल ये है कि क्या प्याज की बढ़ती कीमतों का असर चुनाव पर पड़ेगा.
देश के अधिकतर हिस्सों में खुदरा प्याज़ की क़ीमतें 70 से 100 रुपये प्रति किलो पहुंच गई हैं. जानकारों के मुताबिक दीपावली तक ये 120-150 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच सकती हैं. वैसे तो अब सामान्य दिनों में भी 30-40 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदने की हमें अब आदत लग चुकी है, एक हफ्ते पहले तक खुदरा बाजार में इसी रेट पर प्याज बिक रही थी लेकिन अचानक एक ही दिन में मंडी में थोक भाव 2000 रुपये क्विंटल की दर से बढ़ गया. जिसके बाद खुदरा बाजार में भी भाव बढ़ गये.

बीते सोमवार को प्याज की सबसे बड़ी मंडी नासिक के लासलगांव में प्याज का भाव 7100 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया. लासलगांव में भाव बढ़ने का मतलब है कि पूरे देश में खुदरा दाम बढ़ेगा.

प्याज के दाम क्यों बढ़ेकिसी भी चीज के दाम तभी बढ़ते हैं जब या तो उत्पादन कम हो जाये या फिर मांग में तेजी आ जाये. प्याज के साथ ये दोनों चीजें हुई हैं.

प्याज के दाम क्यों बढ़ रहे हैं यह समझने के लिए हमें पहले ये जानना होगा कि प्याज की खेती देश के किन इलाकों में ज्यादा होती है. प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय के मुताबिक देश में प्याज का सबसे अधिक उत्पादन महाराष्ट्र में होता है. महाराष्ट्र में नासिक, अहमदनगर, पुणे, धुले, सोलापुर में प्याज की खेती होती है. महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक, गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में प्याज की खेती ज्यादा होती है.

इनमें से महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश वो राज्य हैं जहां भारी बारिश की वजह से इस साल लाखों एकड़ की फसल बर्बाद हो गई है. महाराष्ट्र के जिन इलाकों में प्याज की पैदावार होती है वहां सितंबर के महीने में सामान्य से अधिक बारिश हुई. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अक्टूबर महीने में पिछले 100 सालों की दूसरी सबसे बड़ी बारिश हुई है. कर्नाटक के कई इलाकों में अब भी बाढ़ की स्थिति है.

लगातार हो रही बारिश और बाढ़ की वजह से कई राज्यों में लगी प्याज की नर्सरी बर्बाद हो गई है. प्याज की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोत्तरी को देखते हुए जमाखोरी भी शुरू हो गई.

प्याज की मांग में तेजी
लॉकडाउन के दौरान, देशभर में होटल, ढाबे और रेस्त्रां बंद थे, जिसकी वजह से प्याज की मांग संतुलित थी और कीमतें भी संतुलित थीं. अनलॉक 5 में होटल, रेस्त्रां, ढाबे खुल गये हैं, जिससे पूरे देश में प्याज की मांग अचानक से बढ़ गई है.

भारी बारिश और बाढ़ की वजह से न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ है बल्कि सप्लाई भी प्रभावित हुई है. वहीं बाजार में मांग पहले से ज्यादा है. जिसकी वजह से कीमतों में भारी उछाल दिख रहा है.

प्याज की कीमतें कहां तक बढ़ सकती हैं 
जानकारों के मुताबिक प्याज की कीमत 120 रुपये किलो तक बढ़ सकती है क्योंकि प्याज का उत्पादन करने वाले बड़े राज्यों में बाढ़ और बारिश की वजह से फसल बर्बाद हो गई है. नया प्याज मार्केट में फरवरी तक ही आएगा. अभी देश की सबसे बड़ी मंडी में 7000 रुपये क्विंटल के आस पास बिक्री हो रही है, देश के अलग-अलग हिस्सों में खुदरा बाजार में आते-आते इस कीमत में 30-40 रुपये का और इजाफा हो सकता है. इसलिए जानकारों का मानना है कि त्योहारों के दौरान प्याज की कीमत 120 रुपये तक पहुंच सकती है.

अब आइये समझते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में प्याज का हाल क्या है -

केरल
केरल में एक हफ्ते पहले तक 20-25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज मिल रहा था लेकिन अब 75 रुपये से 90 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है. वहीं छोटे प्याज जिन्हें Shallots कहते हैं उसकी कीमत पहले 70-85 रुपये किलो थी जो अब 100 रुपये किलो है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना 
भारी बारिश और बाढ़ की वजह से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसकी वजह से प्याज व्यापारियों ने दाम बढ़ा दिये हैं. दोनों राज्यों में प्याज की खुदरा कीमतें 100 रुपये प्रति किलो हां जबकि थोक भाव 70 से 85 रुपये प्रति किलो है.

आंध्र प्रदेश सरकार Raitu Bazars के जरिये कम कीमत पर 1000 टन प्याज बेचने की तैयारी कर रही है. मानसून सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश के 15 हजार एकड़ और तेलंगाना के 5500 एकड़ में प्याज की बुआई हुई थी लेकिन पैदावार अच्छी नहीं हुई

तमिलनाडु
तमिलनाडु में खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 100 रुपये प्रति किलो है. तमिलनाडु सरकार अम्मा फार्म फ्रेश के जरिये कम कीमत पर प्याज बेच रही है. अम्मा फार्म फ्रेश में 45 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज मिल रही है. प्याज की पर्याप्त उपलब्धता के लिए सरकार मिस्र और ईरान से प्याज मंगा रही है. ये लगातार दूसरा साल है जब प्याज मिस्र से आयात किया जा रहा है.

महाराष्ट्र
नासिक के अलावा धुले, पुणे, सातारा, सोलापुर इलाके में भी प्याज की पैदावार होती है. राज्य के इन तमाम इलाकों में इस बार अतिवृष्टि की वजह से प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा है.

नासिक जिले के लासलगांव में देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी है. वहां इस सप्ताह की शुरुआत में प्याज के दाम 7100 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए है. यह दाम पिछले एक साल में सबसे ज्यादा है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगले कुछ सप्ताह में प्याज के दाम 100 रुपए को आसानी से पार कर जाएंगे. अभी महाराष्ट्र में खुदरा बाजार में 80 रुपये किलो तक प्याज बिक रही है.

जानकार बताते है कि इस बार प्याज की कीमतें ज्यादा वक्त तक और रिकॉर्ड दाम तक आम लोगों की आंखों में आंसू लाएंगी. इसकी वजह प्याज की पैदावार करने वाले अधिकांश इलाकों में बारिश की मार को बताया जा रहा है. अंदाज लगाया जा रहा है कि फरवरी में नयी फसल आने तक प्याज के दाम में रिवर्स गियर नहीं लगेगा.

कर्नाटक
महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक देश का दूसरा राज्य है जहां प्याज की पैदावार ज्यादा होती है. भारी बारिश की वजह से उत्तर कर्नाटक में प्याज की पूरी फसल बर्बाद हो गई है. सिर्फ बगलकोट में ही 90 हजार हेक्टेयर प्याज की फसल बर्बाद हो गई है. अधिकारियों के मुताबिक पूरे कर्नाटक में करीब 2 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है. राज्य के खुदरा बाजार में प्याज 80 से 100 रुपये किलो बिक रही है.

बिहार और झारखंड
बिहार और झारखंड में प्याज मध्य प्रदेश से आता है. मध्य प्रदेश की मंडी में प्याज 5500-6000 रुपये क्विंटल बिक रहा है. जिस वजह से इन दोनों राज्यों में प्याज की खुदरा कीमत फिलहाल 60-70 रुपये किलो है. हालांकि आने वाले दिनों में ये और बढ़ सकती है. चूंकि बिहार में अभी विधानसभा चुनाव हो रहे हैं इसलिए कीमतें और बढ़ने पर ये चुनावी मुद्दा बन सकती हैं. पिछले चुनाव में जब लालू यादव जेल से बाहर थे तब उन्होंने दाल और प्याज की बढ़ती कीमत तो चुनावी मुद्दा बनाया था.

देश के अन्य हिस्सों का हाल
ओडिशा में सितंबर में प्याज का भाव 30-35 रुपये प्रति किलो था जो अब बढ़कर 70-75 रुपये प्रति किलो हो गया है. ओडिशा ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुधाकर पांडा के मुताबिक मंडी में बाजार भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल है. वहीं असम में फिलहाल प्याज 60-70 रुपये किलो की दर से बिक रहा है.
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First published: October 21, 2020, 8:25 PM IST
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