कोरोना नहीं, घोटालेबाज मार रहे हैं गरीबों और किसानों को

प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर और अन्य प्रेरक सूत्रों को जनता ने कितने अपनाए, यह तो नहीं मालूम. हां, नेताओं, अफसरों, माफिया ने आपदा को अवसर मान लिया है. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सामने आया 250 करोड़ का चावल घोटाला तो यही बयां करता है.प्रदेश में कोरोना महामारी (Coronavirus) में गरीबों के सामने ऐसा चावल परोसा गया, जिसे जानवर भी नहीं खा सकते. 

Source: News18Hindi Last updated on: September 10, 2020, 12:15 PM IST
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कोरोना नहीं, घोटालेबाज मार रहे हैं गरीबों और किसानों को
मध्य प्रदेश में 250 करोड़ रुपए का चावल घोटाला सामने आया है.
कोरोना काल में 12 मई को राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इतनी बड़ी आपदा भारत के लिए एक संकेत, एक संदेश, एक अवसर लेकर आई है. उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लिए कई सूत्र भी देश की जनता को दिए. उनके दिए सूत्र जनता ने कितने अपनाए, यह तो नहीं मालूम, लेकिन नेताओं, अफसरों, माफिया ने आपदा को अवसर की तरह मान लिया. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में महामारी में भूख से जूझ रहे गरीबों के सामने ऐसा चावल परोसा गया, जिसे जानवर भी नहीं खा सकते. ढाई सौ करोड़ का यह चावल घोटाला तो यही बयां करता है. सड़े चावलों की बदबू कुछ थमती, इससे पहले ही खबर आई कि सड़े, फंगस लगे गेहूं को गरीबों की थाली का निवाला बनाने की साजिश की जा रही है. महामारी के इसी दौर में हुआ आटा पैकेट घोटाला भी भ्रष्टों के लिए बड़ा अवसर बना. किसानों ने कोरोना के कहर के दौरान ही यूरिया घोटाले को भी सहा. हालिया खबर यह है कि अब मध्य प्रदेश के किसानों को चाइना मॉडल के घटिया कृषि यंत्र थमाकर ठग लिया गया है. प्रख्यात व्यंगकार हरिशंकर परसाई ने ‘अकाल उत्सव’ में ठीक ही लिखा था कि हर आपदा उन सारे नेताओं, अफसरों, व्यापारियों के लिए भ्रष्टाचार के नए अवसर लेकर आती है, जिन्हें वास्तव में जेल में होना चाहिए.

अब हम किसी व्यापमं घोटाले की बात नहीं करेंगे, जिसमें करीब तकरीबन 45 लोग खुदकुशी करके मर गए या उनकी संदिग्ध हालात में मौत हो गई. डंपर घोटाला तो हम भूल ही जाएं, तो ठीक है. तीन लाख करोड़ के ई-टेंडर घोटाले को भी छोड़ दीजिए, जिसे खुद एक प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस प्रमोद अग्रवाल सामने लेकर आए थे और जिसमें सत्ता के बेहद खास 5 आईएएस अफसर लिप्त पाए गए थे. उस 5 हजार करोड़ के टोल घोटाले और 3,800 करोड़ के बुंदेलखंड पैकेज घोटाले, या उस घोटाले की क्या बात करें, जिसमें 62.45 करोड़ की प्याज खरीदने के बाद 22 करोड़ रुपए तो उसकी ढुलाई में खर्च कर दिए गए थे. इन सभी घोटालों को सरकार की ही अलग-अलग एजेंसियों ने अपनी जांच में पकड़ा था. लेकिन नतीजा क्या हुआ, कितने लोग जेल भेजे गए, हमें नहीं मालूम, क्योंकि मप्र में घोटालों या घटनाओं की जांच ऐसे ही चला करती है, जिसमें जांच समितियां या आयोग बना दिए जाते हैं, उन जांच के नतीजे क्या होते हैं, कितने जिम्मेदारों को जेल में डाला जाता है, पता नहीं चलता.

महामारी ने मारा, घोटालों ने घसीटा
पूरी दुनिया में कोरोना (Coronavirus) की महामारी मौत का तांडव कर रही है. दुनिया में अमेरिका के बाद भारत में सबसे ज्यादा 44 लाख से अधिक लोग कोविड-19 संक्रमण के शिकार हैं, मौतों का आंकड़ा 75 हजार से ऊपर जा पहुंचा है. मप्र में संक्रमितों का आंकड़ा 80 हजार छूने को जा रहा है, 1600 से ज्यादा लोग मर चुके हैं. इससे भी भयावह हालात यह हैं कि लाखों लोगों को महामारी ने बेरोजगार कर दिया है. अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है, परिवारों का पेट पालना मुश्किल हो रहा है. ऐसे विकट दौर में घोटालों का होना यह बताता है कि हमारे राजनेता, नौकरशाही और कारोबारी धन्ना सेठ कितने संवेदनहीन और निर्मोही और क्रूर मानसिकता के हो चुके हैं, जो इस आपदा में भी गरीब जनता, किसानों को लूटने, उनकी जान से खिलवाड़ करने में कोई संकोच नहीं करते?
गरीबों की जान से खिलवाड़
चावल घोटाला इसका प्रमाण है कि भूख से जूझ रही जनता की जान से कैसे खिलवाड़ किया गया. यह घोटाला उस समय पकड़ में आया, जब एक महीने पहले केंद्रीय खाद्य विभाग के उपायुक्त विश्वजीत हलधर ने 30 जुलाई से 2 अगस्त 2020 के बीच बालाघाट जिले की गोदामों और राशन दुकानों में निरीक्षण के दौरान वहां रखे चावल को अमानक स्तर का पाया था, जो कि मनुष्यों के खाने योग्य नहीं था. चावल की लुगदियां बन चुकी थीं, कीड़े बिलबिला रहे थे और सड़ांध मार रहा था. इस रिपोर्ट के बाद पीएमओ ने पूरी जानकारी मांगी थी. दरअसल लाकडाउन के दौरान राज्यों में भुखमरी की स्थिति को देखने हुए राज्यों से गरीबों को राशन वितरण के आदेश दिए गए थे. इसी को लेकर प्रदेश के बालाघाट समेत सभी जिलों के गरीबों को चावल बांटे गए थे. बालाघाट और मंडला से सड़े चावल मिलने की शिकायत के बाद जांच में पाया गया, जो चावल बंटे, वो जानवरों को खिलाने या पोल्ट्री सप्लाई के लायक थे. बताया जाता है कि राजनेताओं की सरपरस्ती में अफसर-मिलर्स गठजोड़ ने घटिया चावल सरकारी गोदामों तक पहुंचाया और वहां बांटने के लिए दिया गया. इस पूरे मामले के बाद हरकत में आई राज्य सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने ईओड्ब्ल्यू से मामले की जांच कराने का ऐलान किया. अकेले बालाघाट के 18 राइस मिलर्स संचालकों और वेयर हाउस कारपोरेशन व नागरिक आपूर्ति निगम के 9 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर कराई गई. सूत्र बताते हैं कि पहले दौर में सामने आने के बाद एक हफ्ते के भीतर चावल घोटाला 250 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा है और अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की बजाय खराब चावल वापस मिलर्स को लौटाया जा रहा है.  ईओड्ब्ल्यू ने भी अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है. इस मामले में मप्र नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह लोधी का कहना है कि जो भी दोषी होगा, चाहे वह किसी भी स्तर का क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा. वैसे तो प्रदेश के सभी जिलों में जांच शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक 10 जिलों में जांच में करोड़ों का घटिया चावल मिला. इसमें मंडला में 43.24 करोड़, छतरपुर में 41.85, जबलपुर में 35.99, बालाघाट में 47.06, सीधी में 15.99, दमोह में 15.17, कटनी में 11.41, सतना में 9.15, नरसिंहपुर में 8.47 और छिंदवाड़ा में 6.83 करोड़ का घटिया चावल मिलना शामिल है.  अभी 10 जिलों में 100 टीमें जांच में जुटी हुई हैं.

शाजापुर में सड़ा गेहूं बांटने की साजिशदो दिन पहले शाजापुर जिले से खबर मिली कि जिले के एक वेयरहाउस में 2 साल पुराना 10 हजार क्विंटल गेहूं रखा हुआ है. गेहूं इतना सड़ चुका है कि इंसान तो क्या जानवरों के खाने लायक भी नहीं रह गया है. इसे बांटने की तैयारी थी, लेकिन सड़े गेहूं को ले जाने से ट्रांसपोर्टर के इंकार के बाद मामले का खुलासा हुआ, तो अधिकारियों ने माना कि वास्तव में गेहूं खराब है, इसे ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता.

किसानों के नाम पर हेराफेरी
मध्य प्रदेश में चावल घोटाले के बाद अब एक और घोटाला सामने आ गया है. यह स्कैम प्रदेश के उद्यानिकी विभाग में हुआ है. किसानों को कृषि यंत्र देने के नाम पर निजी एजेंसियों के खाते में पैसे डाले गए. किसानों को चाइना मेड घटिया उपकरणों की सप्लाई की गई. इस संबंध में उज्जैन लोकायुक्त में शिकायत दर्ज होने के बाद प्रदेश सरकार में हड़कंप मच गया है. उद्यानिकी विभाग ने पूरे मामले में प्रदेश भर से जांच रिपोर्ट मंगाई है. प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री भरत सिंह कुशवाहा ने कहा है कि सभी जिलों से राज्य सरकार को रिपोर्ट मिल चुकी है. गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

घोटाले ही घोटाले
राशन घोटालाः 
यह राशन घोटाला उस कठिन दौर में सामने आया, जब लॉकडाउन की वजह से जब लोग भुखमरी की कगार पा जा पहुंचे थे. उस वक्त राज्य की शिवराज सिंह सरकार ने सभी गरीबों को 10 किलो आटा के पैकेट देने की घोषणा की थी, चाहे उनके पास राशन कार्ड हो या नहीं.  मप्र में ग्वालियर, शिवपुरी, सागर समेत तमाम जगहों पर यह तस्वीर सामने आई, राशन के पैकेट में कम से कम डेढ़ किलो आटा कम निकल रहा है. कहीं-कहीं तो साढ़े 6 किलो तक के आटे के पैकेट ही मिले. प्रदेश में ऐसे 70 लाख पैकेट बनने थे. विपक्ष ने इस घोटाले को निर्धन निवाला घोटाला नाम दिया.

यूरिया घोटालाः कोरोना संकट से जूझते मप्र में बड़ा यूरिया घोटाला उस समय पकड़ में आया, जब 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच 4 महीनों में यूरिया आवंटन की जांच की.  अकेले मप्र में 3 लाख मीट्रिक टन यूरिया की कालाबाजारी सामने आई है.  मप्र के कई जिलों में कलेक्टर्स ने संबंधित समिति प्रबंधन के खिलाफ जांच कर FIR दर्ज करने के निर्देश दे दिए.  मप्र के 10 जिलों में यूरिया में घोटाला होना पाया गया है. लगभग 30 जिले घोटाले की आशंका के घेरे में हैं. जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, मसलन सागर में समितियों ने चौकीदार, हम्मालों के नाम पर सैकड़ों क्विंटल यूरिया आवंटित कर दिया, जिनके पास कोई कृषि भूमि नहीं है, फिर भी कागजों पर सैकड़ों किवंटल यूरिया दिखाया गया. बैतूल में एक डीलर ने अपनी दुकान के 14 कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों के नाम पर 59 हजार 313 मीट्रिक टन यूरिया बांट दिया, जबकि करीबी सहकारी समिति ने अपने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के नाम पर 40 मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया बेच डाली. अधिकांश किसानों को यूरिया मिला नहीं, जिन्हें मिला, उनसे 280 रूपए के सब्सिडी वाले यूरिया की कीमत 500 रुपए तक वसूली गई.  घोटालेबाजों ने फर्जी किसानों के आधार कार्ड के नाम पर हजारों टन यूरिया की बोरियां बेच डाली. इसी तरह के घोटाले सागर, छतरपुर, मंडला, मंदासौर, गुना, पन्ना जिलों में पकड़ में आए. यह सब सरकार की नाक के नीचे हुए. किसान अपनी बारी का इंतजार ही करते रह गए.

किसान कर्जमाफी घोटालाः  पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सत्ता संभालते ही जनवरी 2019 में कहा था कि प्रदेश में किसानों की कर्जमाफी के नाम पर पिछली शिवराज सरकार के कार्यकाल में लगभग 2000 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ और वो सख्त कार्रवाई करने जा रहे हैं. यह घोटाला नेताओं और सहकारी बैंकों की मिलीभगत से हुआ. उन लोगों के भी कर्जमाफ कर दिए गए, जिन्होंने वास्तव में कर्ज लिया ही नहीं.  कई मृतकों के नाम के नाम कर्जमाफी की लिस्ट में सामने आए. शहडोल, उमरिया, आगर, कटनी सहित तमाम जिलों में किसानों के फर्जी कर्जमाफी के सामने आए. कमलनाथ ने सीएम बनने के बाद शपथ लेने के 2 घंटे के भीतर प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए थे. कर्जमाफी की इस प्रक्रिया में भी घोटाले की बात उठी. इस कारण कर्जमाफी में घोटाले का मुद्दा लगातार जिंदा है.  राज्य में विधानसभा की 27 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं. इन चुनावों की सरगर्मियों के बीच कमलनाथ, शिवराज सरकार से पूछ रहे हैं कि हमने दो चरण में 20 लाख 23 हजार किसानों के कर्जमाफ किए, आप कर्जमाफी के तीसरे चरण की शुरूआत कबसे कर रहे हैं. वे आरोप लगा रहे हैं कि किसानों की कर्जमाफी के नाम पर शिवराज सरकार झूठ परोस रही है. दूसरी ओर शिवराज अपनी वर्चुअल रैलियों के माध्यम में कमलनाथ पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए पूछ रहे हैं कि दो लाख से अधिक कर्ज वाले किसानों का दो लाख भी कर्ज माफ क्यों नहीं किया था.  क्या आपने दो लाख तक कर्ज माफ करने का वादा नहीं किया था.

किसान लोन घोटालाः बता दें कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में किसान कर्जमाफी के पहले चरण की प्रक्रिया के दौरान कर्जमाफी की सूची चस्पा होते ही 120 करोड़ का किसान लोन घोटाला भी खुल गया. उदाहरण ग्वालियर का लें, जहां 76 कृषि साख समितियों में उन किसानों के नाम पर 120 करोड़ का लोन दर्ज है, जिन्होंने लोन लिया ही नहीं.

इतने सारे एक के बाद एक घोटालों को देखकर कवि धूमिल की एक कविता याद आती है, जिसमें वह कहते हैं ....

एक आदमी रोटी बेलता है,

एक आदमी रोटी खाता है,

एक तीसरा आदमी भी है,

जो न रोटी बेलता है,

न रोटी खाता है,

वह सिर्फ रोटी से खेलता है,

मैं पूछता हूं-यह तीसरा आदमी कौन है?

मेरे देश की संसद मौन है.

 (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
सुनील कुमार गुप्ता

सुनील कुमार गुप्तावरिष्ठ पत्रकार

सामाजिक, विकास परक, राजनीतिक विषयों पर तीन दशक से सक्रिय. मीडिया संस्थानों में संपादकीय दायित्व का निर्वाह करने के बाद इन दिनों स्वतंत्र लेखन. कविता, शायरी और जीवन में गहरी रुचि.

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First published: September 10, 2020, 12:15 PM IST
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