शिव रामकाज करिबे को आतुर

2018 के विधानसभा चुनाव में राम वन गमन पथ के निर्माण का मुद्दा चुनावी मुद्दा भी बना. अपनी सॉफ्ट हिन्दुत्व की छवि को उभारने कांग्रेस ने अपने चुनावी वचन पत्र में इस मुद्दे को शामिल किया और इस पथ पर चुनावी यात्रा निकालने का एलान भी कर दिया. जाहिर है राम, राम पथ, गौशाला जैसे तमाम मुद्दे, जो भाजपा के रहे हैं, उन्हें छीनने की कांग्रेस की कोशिश पर भाजपा बिलबिला गई और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोपों के सियासी तीर भी खूब चले.

Source: News18Hindi Last updated on: July 15, 2020, 4:42 PM IST
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शिव रामकाज करिबे को आतुर
चित्रकूट से अमरकंटक तक सरकार करीब 200 किमी का रामायण सर्किट रूट बनाएगी.
-राम जैसा बीता एक घोषणा का वनवास

-फिर शुरू होगा राम वन गमन पथ निर्माण का काम

हजारों साल पहले त्रेता युग में भगवान राम ने 14 वर्ष का वनवास भोगा था. अपने वनवास के दौरान भगवान राम मध्यप्रदेश में चित्रकूट से अमरकंटक तक अपने 200 किलोमीटर के पैदल सफर में जिन रास्तों से होकर गुजरे थे, उस मार्ग को राम वन गमन पथ के रूप में विकसित करने की गई घोषणा का भी 14 साल तक का वनवास पूरा होने को है. राज्य मंत्रालय में धूल खाती इस योजना की फाइलें अब बाहर निकल चुकी हैं.

अपने शासन के पिछले 3 बार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिस काम को पूरा नहीं कर पाए, उसे इस बार पूरा करने के रास्ते पर एक बार फिर चल पड़े हैं. राम वन गमन पथ के रूप में विकसित करने के लिए ट्रस्ट के गठन की अधिसूचना प्रकाशित कर दी है. अपनी सॉफ्ट हिन्दुत्व की छवि को उभारने के इरादे से इस प्रोजेक्ट को गुजरी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने भी अमलीजामा पहनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह ट्रस्ट गठन के प्रस्ताव को  मंजूरी के 14 दिन बाद यानी 20 मार्च 2020 को ही गिर गई थी. रामवन वन पथ गमन मार्ग का प्रोजेक्ट लगभग डेढ़ दशक पुराना है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल के दौरान तैयार किया गया था. योजना के तहत उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में राज्यों के स्तर पर पयर्टन और धार्मिक स्थल के रामायण सर्किट रोड के रूप में यह मार्ग विकसित किया जाना है. उत्तर प्रदेश में तो अयोध्या से चित्रकूट तक 262 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाने की 2020 करोड़ रुपये की योजना का फरवरी 2019 में शिलान्यास होकर काम शुरू हो भी चुका है. छत्तीसगढ़ 16 जिलों में 8 स्थलों को विकसित करने के साथ ही शेष 43 स्थलों के विकास का प्लान पर काम पिछले एक साल से चल रहा है, लेकिन मप्र में राम वन पथ गमन को लेकर घोषणाएं दर घोषणाएं होती रहीं, करोड़ों के बजट भी आंवटित किए गए, लेकिन जमीन पर निर्माण का काम धेले भर का नहीं हुआ.
प्रोजेक्ट की तथा-कथा
बता दें कि सबसे पहले अक्टूबर 2007 में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते हुए चित्रकूट में राम वन पथ गमन मार्ग के निर्माण की घोषणा करते हुए कहा था कि अपने वनवास के दौरान भगवान राम चित्रकूट से अमरकंटक तक जिन-जिन रास्तों से होकर गुजरे, उन्हें राम पथ के रूप में उकेरा जाएगा. रास्ते में पड़ने वाले धार्मिक स्थल विकसित किए जाएंगे. पयर्टन सूचना केन्द्र, गुरुकुल, रामलीला केन्द्र, ध्यान केन्द्र, एक्जीबीशन पार्क, स्मृर्ति संग्रहालय बनाए जाएंगे. इसके बाद रीवा के अवधेश प्रसाद पाण्डेय के संयोजन में सदस्यीय समिति भी बनाई गई, जिसे राम वन गमन पथ की खोज और राम के पड़ाव स्थलों का पता लगाने के लिए शोध का दायित्व सौंपा गया. इस पूरे काम में तीन करोड़ खर्च किए गए. 2010 में समिति ने रिपोर्ट भी पेश कर दी, लेकिन बाद में शोध और उसके निष्कर्षों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2011 में इस प्रोजेक्ट पर अमल के लिए 33 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी सरकार को सौंपा गया था, लेकिन उस समय कोई अमल नहीं हुआ. इसके बाद के 8 वषों तक इस प्रोजेक्ट की फाइलें धूल खाती रहीं, कोई काम हुआ हो, इसकी कोई खबर सामने नहीं आई. उल्टे राम वन गमन पथ क्षेत्र में उत्खनन के ठेके भी दे दिए गए, मामला कोर्ट की चौखट तक जा पहुंचा. सरकारी कारिंदों ने कोर्ट में सरकार का ही केस कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. राम पथ का काम क्यों लटका, इसे कोई भी आसानी से समझ सकता है.

चुनावी मुद्दा भी बना राम पथ2018 के विधानसभा चुनाव में राम वन गमन पथ के निर्माण का मुद्दा चुनावी मुद्दा भी बना. अपनी सॉफ्ट हिन्दुत्व की छवि को उभारने कांग्रेस ने अपने चुनावी वचन पत्र में इस मुद्दे को शामिल किया और इस पथ पर चुनावी यात्रा निकालने का एलान भी कर दिया. जाहिर है राम, राम पथ, गौशाला जैसे तमाम मुद्दे, जो भाजपा के रहे हैं, उन्हें छीनने की कांग्रेस की कोशिश पर भाजपा बिलबिला गई और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोपों के सियासी तीर भी खूब चले. तब कांग्रेस की प्रवक्ता रही शोभा ओझा ने कहा था  कि राम वन गमन पथ बनाने की घोषणा 2007 में शिवराज सिंह ने की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ पूरी योजना कागज पर रह गई. इसे अब हम पूरा करेंगे.

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भारतीय जनता पार्टी हमेशा लोगों की धार्मिक आस्थाओं का राजनीतिकरण करती है


भारतीय जनता पार्टी हमेशा लोगों की धार्मिक आस्थाओं का राजनीतिकरण करती है और उन्हें वोट कबाड़ने का माध्यम बना रखा है. इस पर भाजपा की वरिष्ठ नेता साध्वी उमा भारती ने कहा था कि कांग्रेसी सरकार बनाने के लिए वोट की खातिर राम का नाम लेकर माथे पर तिलक लगा रहे हैं, जबकि इतिहास गवाह है कि भाजपा ने राम के नाम सरकारें तक गंवाई हैं. भाजपा नेता विश्वास सारंग ने पलटवार करते हुए कहा था कि कांग्रेस हमेशा मुंह में राम, बगल में छुरी वाली नीति पर चलती है. यहां बता दें कि भाजपा ने
सन् 2018 के सालाना बजट में राम वन गमन पथ के नाम पर केवल एक हजार रुपए का प्रावधान किया था. इस चुनाव में  शिवराज सिंह चौहान तीसरी सरकार बनाने से चूक गए और राज्य में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बन गई. इस सरकार की भी चुप्पी पूरे एक साल के बाद 2019 में तब टूटी, जब अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया. सरकार तत्काल हरकत में आई और तत्कालीन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री पीसी शर्मा ने विभाग द्वारा तैयार 600 करोड़ के राम वन गमन पथ के प्रोजेक्ट को सार्वजनिक किया.
22 करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में पहले ही किया जा चुका था. मार्च 2020 में जब मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक मंत्री और विधायक बगावत पर आमादा थे और कांग्रेस टूटने और सरकार खतरे में थी, तभी 6 मार्च को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आनन-फानन में राम वन गमन पथ के लिए ट्रस्ट बनाने का प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में पारित कर दिया. अब उसी प्रस्ताव को मंजूर करते हुए मौजूदा शिवराज सिंह सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.

क्या है मान्यताएं?
पौराणिक, धार्मिक मान्यताओं और पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम ने सीताजी और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या छोड़ने के बाद पहले सरयू, फिर तमसा नदी पार की, फिर शृगवेरपुर, कौशांबी के कुरई, प्रयाग से होते हुए चित्रकूट से मध्यप्रदेश में प्रवेश किया था. मप्र संस्कृति विभाग का मानना है भगवान राम ने अपने वनवास के 11 बरस से भी ज्यादा का समय चित्रकूट में व्यतीत किया. यहां से वह सतना, पन्ना, शहडोल, जबलपुर, विदिशा के वनक्षेत्रों से होते हुए दंडकारण्य चले गए थे. मप्र में अमरकंटक उनका अंतिम पड़ाव रहा.

क्या है सरकार का प्लान?
चित्रकूट से अमरकंटक तक सरकार करीब 200 किमी का रामायण सर्किट रूट बनाएगी. दो चरणों में राम वन पथ गमन का कार्य पूरा होना है, जिसके बारे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में ट्रस्ट बनेगा, वह लागत और निर्माण के बारे में अंतिम निर्षय लेगा. पहले चरण में चौरासी कोस के पथ का निर्माण पूरा होगा. यह सरकार खुद करेगी या पीपीपी मोड पर करवाएगी, यह तय होना बाकी है.

क्या-क्या सुविधाएं होंगी?
धर्मस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भगवान राम के पड़ाव स्थलों पर पर्यटन सूचना केन्द्र, रास्तों पर वाई-फाई की सुविधा, डाॅरमेट्री, ध्यान, प्रार्थना हाल, हेल्थ सेंटर, एग्जीबीशन सेंटर, रिटेल शाप्स, रेस्तरां, बोर्डिंग जैसी सुविधाएं होंगी.

-जिन रास्तों पर राम वन गमन पथ बनाया जाना है, वहां हाथ से बनी वस्तुएं, स्थानीय कारीगरों के सामान की बिक्री को बढ़ावा देने की व्यवस्था की जाएगी और बांस के काटेज बनाए जाएंगे. स्थलों को पूरी तरह से धार्मिक तीर्थ स्थलों की तरह विकसित किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक राज्य में राम पथ पर आएं. रास्तों पर साइकिल ट्रेक बनाने की भी योजना है.

-इसके अलावा राम वन गमन पथ और पड़ाव स्थलों पर रामचरित मानस में बाल कांड से लेकर उत्तरकांड तक के प्रसंगों को झांकियों के माध्यम से चित्रित किया जाएगा, ताकि लोग राम कथा के बारे में जान सकें. इसके लिए आडियो-बीडियो विजुअल्स के माध्यमों और लोक कलाकारों का भी उपयोग किया जाएगा.
ब्लॉगर के बारे में
सुनील कुमार गुप्ता

सुनील कुमार गुप्तावरिष्ठ पत्रकार

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे हैं और कई संस्थानों के साथ जुड़ाव रहा है.

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First published: July 15, 2020, 4:34 PM IST
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