Corona: 43% स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा नहीं, क्लास शुरू हुई तो 82 करोड़ जिंदगी को खतरा

Coronavirus in India: भारत सरकार ने 30 सितंबर तक सभी स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है. यह अक्लमंदी भरा फैसला है, लेकिन इसकी सार्थकता तभी होगी, जब इस मिले हुए समय का फायदा उठाते हुए स्कूलों में हाथ धोने के लिए पानी, साबुन के साथ और सेफ डिस्टेंसिंग जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाएं.

Source: News18Hindi Last updated on: August 30, 2020, 11:15 am IST
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Corona: 43% स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा नहीं, 82 करोड़ जिंदगी खतरे में!
भारत सरकार ने 30 सितंबर तक सभी स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है.
अपने बच्चों की सेहत पर कोविड-19 के जोखिम को लेकर डरे हुए अभिभावक फिलहाल राहत की सांस ले सकते हैं. केंद्र सरकार ने 30 सितंबर तक देश के सभी स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है. तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह फैसला अक्लमंदी भरा कहा जा सकता है, लेकिन इसकी सार्थकता तभी होगी, जब इस मिले हुए समय का लाभ लेते हुए स्कूलों में हाथ धोने के लिए पानी, साबुन के साथ और सेफ डिस्टेंसिंग जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाएं. इन व्यवस्थाओं के बिना स्कूल खोलने की जल्दबाजी बच्चों के लिए खतरा-ए-जान साबित होगी. सवाल स्कूल खोलने के वक्त का नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं का है.



सरकार को संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ की उस चेतावनी को लगातार ध्यान में रखना होगा, जिसमें कहा गया है कि अगर हाथ धोने की व्यवस्था के बिना स्कूल खोले गए तो लाखों बच्चे कोविड-19 संक्रमण के शिकार हो सकते हैं. सरकार को अमेरिका, चीन, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन, द. कोरिया समेत तमाम उन विकसित यानी सुविधासंपन्न देशों से भी सबक लेते रहना होगा, जहां तमाम सावधानियों के साथ स्कूल तो खोले गए, लेकिन बच्चों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने के बाद तुरंत ही स्कूलों को बंद करना पड़ा. ये सबक हमारे लिए इसलिए भी जरूरी है कि देश के सरकारी स्कूलों की हालत से सब वाकिफ हैं, जहां अधिकांश में पानी और साबुन तो छोड़िए, बच्चों के बैठने तक के लिए जगह नहीं है. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बच्चों को बैठा पाना बड़ी चुनौती है.



स्कूल खोलने को लेकर क्या हैं नई गाइडलाइंस

केंद्र सरकार ने अनलॉक-4.0 के लिए शनिवार (29 अगस्त) को जारी नई गाइडलाइंस में स्कूल-कॉलेज और कोचिंग संस्थानों को 30 सितंबर तक बंद रखने का फैसला किया है. 21 सिंतबर से इसमें कुछ मामलों में छूट दी गई है. मसलन कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बच्चे टीचर्स से गाइडेंस लेने स्कूल जा सकेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने पैरेंट्स से लिखित मंजूरी लेनी होगी. स्कूल छात्रों को क्लास अटेंड करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते. यह छात्रों की मर्जी पर होगा, कि वह स्कूल जाना चाहते हैं या नहीं. इसके अलावा 50 फीसदी टीचिंग और नान टीचिंग स्टाफ को ऑनलाइन कोचिंग या टेली काउंसलिंग जैसे कामों के लिए स्कूल बुलाया जा सकता है.



दुनिया में 100 करोड़ बच्चों की शिक्षा पर असर

कोरोना की महामारी ने पूरी दुनिया को परेशानी में डाल रखा है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस महामारी के चलते स्कूल बंद होने से सौ करोड़ से ज्यादा बच्चे घरों में बैठे हैं. दुनिया के 160 देशों के बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है. बच्चों के पैरेंट्स, टीचर, सरकारें स्कूल खोलने को लेकर असंमजस में हैं और उनकी पढ़ाई व भविष्य को लेकर चिंतित हैं. स्कूल खोलने को लेकर सवाल भारत में ही नहीं उठ रहा है, बल्कि ब्रिटेन, जर्मनी, अमेरिका, चीन सब जगह पूछा जा रहा है. जर्मनी में स्कूल खोले भी गए, लेकिन 2 हफ्तों में संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद बंद करने पड़े. चीन, अमेरिका, इजरायल, स्पेन में भी स्कूल खोलने के बाद बंद करने पड़े.



भारत में 15 लाख स्कूलों में ताले

भारत में करीब 15 लाख स्कूल कोरोना महामारी के चलते बंद कर दिए गए हैं. देश में पहले अगस्त में स्कूल खोलने की तैयारी थी, लेकिन संक्रमण बढ़ने से योजना टालनी पड़ी. फिर खबर आई कि 1 सितंबर से स्कूलों को खोला जा सकता है, जो गलत साबित हुई. हकीकत यह है कि स्कूल का पूरा सिस्टम इसके लिए लिए तैयार नहीं है. कई राज्यों के अलावा पैरेंट्स भी विरोध कर रहे थे. फलस्वरूप शनिवार को जारी गाइडलाइंस में 30 सितंबर तक शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का फैसला किया गया.



टीचर्स और विशेषज्ञों का मत

भोपाल की शिक्षिका जाहिदा कुरैशी ने 30 सिंतबर तक स्कूल बंद रखने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पढ़ाई भले पीछे छूट जाए, लेकिन जिंदगी सुरक्षित रहना चाहिए. जान है तो जहान है. शिक्षा मामलों की विशेषज्ञ अनीता राजपाल की एक न्यूज चैनल में टिप्पणी सुनने को मिली, जिसमें वह कह रही थीं कि स्कूल खोलने की समस्या का जो भी हल निकले, वह बहुत ही विकेन्द्रित होना चाहिए. वह जिला स्तर, छोटी इकाई के स्तर पर वहां संक्रमण की स्थिति के अनुसार होना चाहिए. दरअसल हमारे यहां के स्कूलों में हालात ठीक नहीं हैं. न पानी है, न उतनी जगह है, जहां बच्चे सेफ डिस्टेंसिंग से बैठ सकें, इसलिए जल्दबाजी करने से बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है.



यूनिसेफ ने चेताया

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ ने भारत समेत पूरे पूरे विश्व के संदर्भ में एक रिपोर्ट जारी करके कहा है दुनिया के करीब 43 फीसदी स्कूलों में बच्चों के लिए साबुन से हाथ धोने की सुविधा नहीं है. अगर इस व्यवस्था के बिना स्कूल खोले गए तो दुनिया भर में इससे 82 करोड़ बच्चों के संक्रमित होने का खतरा है. दुनिया के 24 फीसदी स्कूलों में हाथ धोने के लिए न पानी, उपलब्ध है न साबुन, जबकि 19 फीसदी स्कूलों में पानी तो है, लेकिन साबुन की सुविधा उपलब्ध नहीं है. यानी दुनिया के हर 5 में से दो स्कूलों में साबुन से हाथ धोने की व्यवस्था नहीं है, जो कोरोना से बचाव के लिए बेहद जरूरी है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया के 42 फीसदी सेकेंडरी और 56 फीसदी प्राइमरी स्कूलों में हाथ धोने की उचित सुविधा नहीं है. ग्रामीण इलाकों में तो हालत और भी ज्यादा खराब है, जहां तीन में से दो स्कूलों में साबुन से हाथ धोने की व्यवस्था नहीं है.



कई राज्य सितंबर में स्कूल खोलने के लिए थे तैयार

केंद्र की नई गाइडलाइंस के बाद उन 8 राज्यों में भी स्कूल-कॉलेज का खुलना टल गया है, जिन्होंने सितंबर में स्कूल खोलने की तैयारी कर रखी थी. तेलंगाना में तो 27 अगस्त को 30 हजार सरकारी स्कूल खुल गए थे और करीब 1 लाख से अधिक शिक्षक ड्यूटी पर आ गए थे. त्रिपुरा में तो स्कूलों में कक्षाएं भी शुरू हो गई थी. 21 अगस्त को यहां सवा लाख के करीब छात्र स्कूलों में पहुंचे थे. इसके अलावा प. बंगाल में ममता बनर्जी ने 20 सितंबर के बाद हालातों को देखते हुए स्कूल खोलने की घोषणा की थी. आंध्र प्रदेश, सिक्किम और असम भी 1 सितंबर से अपने राज्यों में स्कूल खोलने के लिए तैयार थे. अलबत्ता ओडिशा में सीएम नवीन पटनायक ने 26 अक्टूबर तक स्कूल बंद रखने का ऐलान पहले ही कर दिया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा है जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता, स्कूल नहीं खोले जाएंगे. (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)
ब्लॉगर के बारे में
सुनील कुमार गुप्ता

सुनील कुमार गुप्तावरिष्ठ पत्रकार

सामाजिक, विकास परक, राजनीतिक विषयों पर तीन दशक से सक्रिय. मीडिया संस्थानों में संपादकीय दायित्व का निर्वाह करने के बाद इन दिनों स्वतंत्र लेखन. कविता, शायरी और जीवन में गहरी रुचि.

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First published: August 30, 2020, 11:15 am IST
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