'लव' में 'जिहाद' के लिए कोई जगह नहीं

बीते शुक्रवार यानी 30 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक केस में नवविवाहित जोड़े की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस्लाम के बारे में बिना जाने और बिना आस्था और विश्वास के धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है. सिर्फ शादी करने के उद्देश्य से धर्म बदलना, इस्लाम के खिलाफ है.

Source: News18Hindi Last updated on: November 5, 2020, 2:34 PM IST
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'लव' में 'जिहाद' के लिए कोई जगह नहीं
एमपी सरकार  के लव जिहाद कानून के ड्राफ्ट पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है.. file Pic- News18
ये एक कटु सत्य है कि जब मुल्क या सूबे के रहनुमाओं से सत्ता संभलती नहीं, कानून व्यवस्था की डोर हाथ से फिसलती दिखती है, तब वह ऐसा शिगूफा छोड़ते हैं ताकि समाज का ध्यान उनकी नाकामियों से हटकर धार्मिक, सांप्रदायिक कट्टरता की तंग जेहन गलियों में भटक जाए. संप्रदाय के आधार पर ध्रुवीकृत (Polarized) लोग सत्ता से सवाल करने की बजाय आपस में ही एक-दूजे को अविश्वास और शक की नजर से देखने में लग जाएं. सवाल यह है कि ‘लवजिहाद’( Love Jihad) के नाम पर कानून बनाने को लेकर ताजा जुमलेबाजी कहीं इसी सियासी खेल का हिस्सा तो नहीं है? ‘महज शादी के लिए धर्म परिवर्तन (Religion Change) वैध नहीं,' इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, फिर हरियाणा के एक मंत्री अनिल विज और फिर बुधवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'लव जिहाद'  के खिलाफ कानून (Laws Against Love Jihad) बनाने का ऐलान कर दिया. बता दें कि आज की तारीख तक “लव जिहाद” शब्द की कोई कानूनी हैसियत (Legal Capacity) नहीं है और न ही अब तक कानून के तहत परिभाषित किया गया है. न ही केन्द्र या राज्य की किसी भी संस्था ने कभी किसी कानूनी धारा के तहत लवजिहाद के मामले में कोई केस दर्ज किया है.

वैसे “लवजिहाद” टर्म का इस्तेमाल केरल से शुरू हुआ था, जहां कुछ लड़कियों का शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन हुआ था, वहां कुछ ऐसे मामले सामने आए थे, लेकिन इस शब्द का लेकर ताजा गहमागहमी पिछले दिनों हरियाणा के वल्लभगढ़ में निकिता तोमर नामक एक छात्रा की कॉलेज से लौटते समय गोली मारकर हत्या (Nikita Murder Case) की घटना के बाद तेज हुई थी। निकिता के परिवार ने तौसीफ नामक युवक पर आरोप लगाया था कि वह निकिता पर शादी करने के लिए इस्लाम अपनाने का दबाव बना रहा था, लेकिन निकिता ने ऐसा करने से इंकार कर दिया. इस मामले को लव जिहाद से जोड़ते हुए हिंसा और प्रदर्शन की भी कई घटनाएं सामने आई थीं.

इसके अलावा यह शब्द राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) की अध्यक्ष रेखा शर्मा की कोरोना से कराहते महाराष्ट्र जाकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से विवादित मुलाकात के बाद भी सुर्खियों में आया था. उन्होंने महाराष्ट्र में लव जिहाद के कथित रूप से बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए लगाम कसने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था.

बीते शुक्रवार यानी 30 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक केस में नवविवाहित जोड़े की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस्लाम के बारे में बिना जाने और बिना आस्था और विश्वास के धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है. सिर्फ शादी करने के उद्देश्य से धर्म बदलना, इस्लाम के खिलाफ है.
ऐलान पर ऐलान
यूपी उपचुनाव वाले क्षेत्रों में चुनावी सभाओं के दौरान हाईकोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले लवजिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने का ऐलान करते हुए चेतावनी दी, 'जो लोग बहू-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करते हैं, वे अगर नहीं सुधरे तो “राम नाम सत्य है” की उनकी अंतिम यात्रा निकलने वाली है. इसीलिए हम यूपी में मिशन शक्ति चला रहे हैं.' सीएम योगी के ऐलान के बाद हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने फटाफट एक ट्वीट कर कहा कि हरियाणा में लवजिहाद के खिलाफ कानून बनाने पर विचार किया जा रहा है. सख्त कानून जल्द सामने आएगा. ऐसे माहौल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भला क्यों पीछे रहते. उन्होंने भी बुधवार याने 4 नवंबर को मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक बुलाई. इसके बाद उन्होंने भी ऐलान कर दिया कि “प्रदेश में लव जिहाद और शादी के लिए धर्म परिवर्तन किसी भी रूप में नहीं चलेगा. यह पूर्ण रूप से अवैध और गैर-कानूनी है, इसके खिलाफ मध्य प्रदेश में कानून बनाया जाएगा.' लव जिहाद पर बहस के बीच पूर्व मुख्‍यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने चुटकी लेते भाजपा से पूछा है कि केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन की पत्नियां भी हिंदू हैं। क्या उन्होंने भी लव जिहाद किया है?

क्या है संविधान मेंसंविधान में सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं, जिसमें अनुच्छेद 25 में धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार भी शामिल है. इसके तहत प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को मानने, पालन करने, प्रचार करने की स्वतंत्रता है. कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को कोई विशेष धर्म मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकता. वहीं विशेष विवाह कानून(Special Marriage Act) भी है, जिसके तहत अलग-अलग धर्म से आने वाले लड़के और लड़की बिना अपना धर्म बदले शादी कर सकते हैं. लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन अंतरजातीय विवाह को मान्यता नहीं है. गृह मंत्रालय के अनुसार जबरन अंतरजातीय विवाह को लवजिहाद कहा जा रहा है.

एक सवाल यह भी
सवाल उठ रहा है कि जिस कानून को लाने की बात की जा रही है, वह लव जिहाद के खिलाफ होगा या धर्मांतरण की आड़ में महिला उत्पीड़न के खिलाफ होगा. यह सवाल इसलिए, क्योंकि योगी सरकार के सामने राज्य के विधि आयोग ने जो ड्राफ्ट पेश किया है, उसमें धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाने की सिफारिश की गई है. ड्राफ्ट में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी भी तरह से जबरदस्ती या ताकत का इस्तेमाल करता है तो वह धर्मांतरण के नए कानून के दायरे में आएगा. इसके साथ ही गलत नीयत से धर्म परिवर्तन या धर्म परिवर्तन के लिए की जा रही शादियां भी इसी कानून के दायरे में आएंगी. किसी को धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना देना भी कानून के दायरे में आएगा. विधि आयोग ने दोषी को एक साल से 5 साल तक की सजा की भी ड्राफ्ट में अनुशंसा की है.

8 राज्यों में पहले से हैं कानून
जानकारों की मानें तो योगी जिस लवजिहाद विरोधी कानून की बात कर रहे हैं, वह यही धर्मांतरण कानून है, जिसका ड्राफ्ट विधि आयोग ने तैयार किया है. अगर ऐसा है तो ऐसा कानून लागू करने वाला यूपी कोई पहला राज्य नहीं होगा. इस तरह का कानून बनाने वाला ओडिशा पहला राज्य था. अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से लागू हैं और यह किसी एक धर्म विशेष नहीं, बल्कि सभी धर्मों पर समान रूप से लागू हैं. यूपी में पेश ड्राफ्ट में भी यही प्रावधान हैं. इसमें अलग क्या है, आप लवजिहाद के नाम पर एक खौफ भर पैदा करेंगे. यूपी के साथ ही मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में कोई कानून सामने भी आता है, तो वह केवल धर्मांतरण कानून में लव जिहाद शब्द जोड़कर एक मुलम्मे की तरह ही पेश होगा. यूपी के सीएम कानून का मसौदा लेकर आएं, तब पता चलेगा कि वह वाकई लव जिहाद जैसी किसी समस्या से निपटने के लिए गंभीर हैं, या उनका इरादा सियासी रोटियां सेंकने का है?

लव जिहाद है क्या
अंग्रेजी का शब्द “लव यानि प्यार, मोहब्बत, इश्क” और अरबी का शब्द “जिहाद”, जिसका मतलब होता है कि जुल्म के खिलाफ या किसी मकसद को पूरा करने में अपनी पूरी ताकत लगा देना.

एक धर्म को मानने वाले दूसरे धर्म की लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उस लड़की का धर्म परिवर्तन करा देते हैं, तो उसे “लवजिहाद” कहा जाता है.


केरल में 2016 में अखिला अशोकन नामक हिन्दू लड़की के मुसलमान युवक शफीन से निकाह करने को केरल हाईकोर्ट ने लवजिहाद माना था. इस केस की जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपा गया था, जो आतंकवादी घटनाओं की जांच करती है. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी एक टिप्पणी में कहा था कि यह लव जिहाद होता है.

तनिष्क के विज्ञापन को याद कीजिए
आपको हाल ही में तनिष्क कंपनी का वो विज्ञापन याद है ना, जिसमें एक हिंदू महिला की शादी मुस्लिम घर में होना दिखाया गया था. लव जिहाद की प्रवृत्ति को बढ़ाने और विरोध की आवाजों से घिरने के बाद धंधे को देखते हुए कंपनी को यह विज्ञापन वापस लेना पड़ा था. हालांकि कंपनी ने तर्क दिया था कि उसका मकसद जात-पात विहीन समाज और साम्प्रदायिक सद्भाव को प्रदर्शित करना था.

सियासी खेल को समझिए
सामाजिक शोधकर्ता ममता मिश्रा कहती हैं कि अगर कोई हिन्दू-मुस्लिम युवक-युवती आपस में प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं तो शादी उनका निजी मामला है, उसमें किसी को भी दखल का अधिकार नहीं होना चाहिए. ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि कोई भी झंडा-डंडा लेकर शादी रुकवाने पहुंच जाए. हिन्दू-मुस्लिम रिश्ते न तो कोई नई बात है, ना ही नायाब बात. इसका इतिहास सदियों पुराना है. यह सही है कि सद्भाव पूर्ण समाज की संरचना, विविधता से भरी संस्कृति को सहेजने या विकसित करने के लिए अंतरजातीय शादियां हो, जबरन धर्म परिवर्तन की वकालत कोई भी नहीं कर सकता.

वास्तव में अगर प्यार है तो इसे लवजिहाद जैसे शब्दों से गंदा मत करिए, क्योंकि लव शब्द के अर्थ में सिर्फ प्यार है, यहां संघर्ष या जिहाद के लिए कोई जगह नहीं. लवजिहाद जैसे संवेदनशील हथकंडे अपनाकर कानून-व्यवस्था से ध्यान डायवर्ट करना सियासी रणनीति का एक हिस्सा रहता है. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
सुनील कुमार गुप्ता

सुनील कुमार गुप्तावरिष्ठ पत्रकार

सामाजिक, विकास परक, राजनीतिक विषयों पर तीन दशक से सक्रिय. मीडिया संस्थानों में संपादकीय दायित्व का निर्वाह करने के बाद इन दिनों स्वतंत्र लेखन. कविता, शायरी और जीवन में गहरी रुचि.

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First published: November 5, 2020, 2:32 PM IST
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