बिग बैंग के बाद हुए सबसे बड़े विस्फोट का पता चला!

हमारा ब्रह्मांड रहस्यों से भरा पड़ा है. यह असीम है और इसकी विचित्र घटनाएँ तो हमारी कल्पना को भी चकरा...

Source: News18Hindi Last updated on: March 5, 2020, 12:22 PM IST
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बिग बैंग के बाद हुए सबसे बड़े विस्फोट का पता चला!
वैज्ञानिकों केलिए ब्लैक होल एक बहुत कठिन पहेली बना हुआ है. (प्रतीकात्मक फोटो)
हमारा ब्रह्मांड रहस्यों से भरा पड़ा है. यह असीम है और इसकी विचित्र घटनाएँ तो हमारी कल्पना को भी चकरा देने वाली होती हैं. यकीन मानिए ब्रह्मांड बेहद परिवर्तनशील जगह है. जैसा अब है वैसा न यह पहले था और न ही भविष्य में ऐसा बना रहने वाला है. ब्रह्मांड अनिश्चितताओं और जटिलताओं से भरा पड़ा है यहाँ सर्वत्र स्थिरता का अभाव है. ऐसा माना जाता है कि आज से तकरीबन 13.7 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड का सृजन ‘बिग बैंग’ (या महाविस्फोट) नामक घटना से हुआ. बिग बैंग सिद्धान्त के मुताबिक यह विराट ब्रह्मांड एक सूक्ष्म अणु ‘सिंगुलैरिटी’ से विस्फोटित होकर विकसित हुआ है. इससे पहले कुछ नहीं था- न स्पेस और न ही टाइम!

हमारी यह दुनिया बहुत ही कोलाहलपूर्ण है. लेकिन इससे अलग अंतरिक्ष और तारों की दुनिया को जब हम अंधेरी रात में देखते है, वह बेहद शांत, नीरव और नि:शब्द जान पड़ती है. असलियत में शांत नजर आने वाला यह ब्रह्मांड बेहद अशांत और उग्र है- प्रचंड हलचलों से भरपूर! ज़्यादातर तारों की जिंदगी का अंतिम मुकाम ‘सुपरनोवा’ नामक एक विराट विस्फोट के साथ पूरा होता है. सुपरनोवा का आमतौर पर मतलब होता है किसी तारे की महाविस्फोट में मौत। तारों का यह विस्फोट इतना प्रचंड होता है कि हम उसके बारे अंदाजा भी नहीं लगा सकते. यह सुपरनोवा विस्फोट की बात हुई, सोचिए बिग बैंग कितना बड़ा धमाका होगा? हम कल्पना भी नहीं सकते!

हाल ही में खगोलविदों ने ब्रह्मांड में बिग बैंग के बाद हुए अब तक के सबसे बड़े विस्फोट का पता लगाया है. यह विस्फोट अब तक देखे गए सबसे बड़े विस्फोट से तकरीबन पांच गुना ज्यादा बड़ा है. वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि यह विस्फोट 39 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित गैलेक्सियों के एक समूह में मौजूद एक सुपरमैसिव ब्लैक होल में हुआ. वैज्ञानिकों के मुताबिक विस्फोट इतना बड़ा था जिसकी वजह से गर्म गैसों के बीच एक ऐसा विशाल गड्ढा बना जिसमें करीब 15 गैलक्सीज समा सकती हैं.

अब क के सबसे बड़े विस्फोट के रिकॉर्ड को तोड़ने वाला यह विस्फोट उससे पांच गुना बड़ा था. खगोलविदों ने बताया- विस्फोट से गैलक्सीज क्लस्टर एमएस0735+74 में हुए विस्फोट की तुलना में 5 गुना ज्यादा ऊर्जा निकली। ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी की मेलानी जॉनस्टन होलिट ने कहा- ‘हमने गैलक्सीज के बीच कई विस्फोट देखे हैं, लेकिन यह विस्फोट वाकई बहुत जबरदस्त है।’ इस विस्फोट का पता लगाने के लिए खगोलविदों ने नासा के चंद्रा एक्स-रे ऑब्जरवेटरी, यूरोपियन स्पेस एजेंसी के रेडियो टेलीस्कोप और पुणे स्थित भारत के विशाल मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया।
फिलहाल माना जा रहा है कि यह विस्फोट हजारों गैलेक्सी के एक क्लस्टर, ओफीयूकस में हुआ. इसके केंद्र में मौजूद एक विशाल गैलेक्सी में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है. ब्लैक होल केवल हर तरह के पदार्थ को अपने अंदर समाहित ही नहीं करते बल्कि वे फटते भी हैं और उस प्रक्रिया में तमाम पदार्थ और ऊर्जा बहुत ज्यादा शक्ति के साथ बाहर निकलते हैं. यहां ऐसे ही एक बड़े विस्फोट के संकेत सबसे पहले वर्ष 2016 में मिले थे. हालांकि वैज्ञानिकों ने पहले तो इसे किसी विस्फोट की श्रेणी में रखने से इन्कार कर दिया था क्योंकि उनका मानना था कि गैसों में इतना बड़ा गड्ढा बनाने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा चाहिए, लेकिन फिर दो अन्य स्पेस ऑब्जर्वेटरी से मिली जानकारी और ऑस्ट्रेलिया और भारत की दूरबीनों से मिले रेडियो डेटा को मिलाने से इसकी बात की पुष्टि हो गई कि वह उभार वास्तव में एक विशाल गड्ढे का ही सबूत है.

इस विस्फोट का खुलासा प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में किया गया है. ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी से इस अध्ययन की सह-लेखिका मेलानी जॉनस्टन होलिट ने कहा, ‘हमने गैलक्सीज के बीच कई विस्फोट होते देखे हैं, लेकिन यह विस्फोट सचमुच बहुत जबर्दस्त है।’ उन्होंने कहा कि लेकिन यह विस्फोट बहुत धीमी गति से हुआ। यह ठीक वैसा ही था जैसे हम स्लो मोशन में किसी विस्फोट को होते देखते हैं। खोज के बारे में लिखने वाले माक्सिम मारकेविच ने भी बताया, ‘रेडियो डेटा और एक्स-रे दोनों एक साथ ऐसे फिट हुए जैसे हाथों में दस्ताने. नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर से जुड़े मारकेविच ने कहा, ‘यही वह पक्की दलील थी जिससे हमें मानना पड़ा कि यहां अभूतपूर्व आकार का एक विस्फोट हुआ है.’

विस्फोट को हुए अब एक साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है. अब उस ब्लैक होल से ऊर्जा से ओत-प्रोत फुहारें छूटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं. शोध टीम अब वहां के पदार्थों के वेवलेंथ को माप कर और ज्यादा छानबीन से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विस्फोट में आखिर क्या हुआ होगा. बहरहाल, वैज्ञानिक इसे बिग बैंग के बाद का सबसे बड़ा विस्फोट मान रहें हैं. शोध और अध्ययन का सिलसिला बदस्तूर जारी है. देखना है कि ब्रह्मांड का यह अध्ययन आगे क्या नतीजे लाती है.(लेखक विज्ञान से जुड़े मामलों के जानकार हैं)
ब्लॉगर के बारे में
प्रदीप

प्रदीपतकनीक विशेषज्ञ

उत्तर प्रदेश के एक सुदूर गांव खलीलपट्टी, जिला-बस्ती में 19 फरवरी 1997 में जन्मे प्रदीप एक साइन्स ब्लॉगर और विज्ञान लेखक हैं. वे विगत लगभग 7 वर्षों से विज्ञान के विविध विषयों पर देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में लिख रहे हैं. इनके लगभग 100 लेख प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की है.

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First published: March 5, 2020, 12:22 PM IST
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