डायनासोर के खात्मे के बाद कैसे हुई पृथ्वी पर जीवन की वापसी?

धरती पर स्तनधारी जीवों की उत्पत्ति को जानने में लोगों की हमेशा ही दिलचस्पी रही है. ऐसी ही एक ताजा रिसर्च में अब नए दावे इस विषय को और दिलचस्प बना रहे हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: January 29, 2020, 3:04 PM IST
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डायनासोर के खात्मे के बाद कैसे हुई पृथ्वी पर जीवन की वापसी?
डायनासोर की एक प्रजाति के बारे पहले कहा गया था कि उनमें मादा नर से भारी होती हैं.
वैज्ञानिकों के मुताबिक आज से तकरीबन 6 करोड़ 60 लाख साल पहले 180 किलोमीटर व्यास (Diameter) का एक एस्टेरॉयड हमारी पृथ्वी से टकराया था. इस टक्कर से निकली ऊर्जा हिरोशिमा पर गिराए गए एटम बम से 10 अरब गुना ज़्यादा थी. एस्टेरॉयड के टकराने से सैकड़ों मील दूर तक आग का गोला फैल गया था. इस टक्कर से समुद्र में सुनामी की प्रलयकारी लहरें उठी थीं, जिन्होंने आधी दुनिया में तबाही मचा दी थी. ये कुछ-कुछ क़यामत (Apocalypse) के आने जैसा था. हमारे वायुमंडल तक में आग लग गई थी. 25 किलो से ज़्यादा वज़न का कोई जानवर इस प्रलय में ज़िंदा नहीं बच सका. क़यामत इसे ही तो कहते हैं कि एस्टेरॉयड की टक्कर से धरती पर जीवों की 75 प्रतिशत प्रजातियाँ (Species) हमेशा के लिए ख़त्म हो गईं. धरती से पौधों और जीव जातियों के विलुप्त होने की इस घटना को क्रेटेशियस-पेलोजीन एक्सटिंक्सन (केपीजीई) नाम दिया है.

जिस जगह ये टक्कर हुई उसे आज दक्षिणपूर्वी मेक्सिको का युकातान प्रायद्वीप (Yucatan Peninsula) कहा जाता है. इस टक्कर की वजह से बेहद गर्म तरंगें पैदा हुईं और उन्होंने आकाश को ठोस और तरल कणों वाली गैस के बादल से भर दिया. इसकी वजह से सूर्य के सामने कई महीनों के लिए एक काला धब्बा आ गया और नतीजन सूर्य की रोशनी पर निर्भर पौधे और जीव-जंतु मर गए. इसी प्रलय के चलते विशालकाय डायनासोर की तमाम प्रजातियाँ भी खत्म हो गई थी. हालांकि कुछ उड़ने वाले छोटे डायनासोर ही इस खात्मे से बच सके थे, मगर बाद में डायनासोर की ये प्रजातियाँ पक्षियों में तब्दील हो गईं.

हालांकि बाद में जीवन फिर वापस लौटा और धरती पर स्तनधारियों (Mammals) के आकार और उनकी संख्या में विस्तार होने लगा. छोटे-छोटे जीवों से ये जीव इतने बड़े हो गए जैसे आज नजर आते है, जिनमें हम इंसान भी शामिल हैं. डायनासोर के खात्मे के बाद पृथ्वी पर जीवन की दुबारा वापसी कैसे हुई इसके बारे हाल ही में साइंस जर्नल में एक रिपोर्ट छपी है, रिपोर्ट के लेखक टायलर लाइसन का कहना है कि इस नई खोज से “आधुनिक विश्व की उत्पत्ति” (Origin of modern world) की जानकारी मिलती है.


अमेरिका के डेनवर म्यूजियम ऑफ नेचर एंड साइन्स के शोधकर्ताओं सहित अन्य ने स्थलीय पौधों और जानवरों के अत्यंत दुर्लभ जीवाश्म (Rare fossils) हासिल किए हैं. ये जीवाश्म सेंट्रल कोलोराडो के कोरल ब्ल्फ़्स में क्रेटेशियस-पेलोजीन एक्सटिंक्सन के बाद पृथ्वी को विरासत में मिले थे. साइंस जर्नल में छपी रिपोर्ट में एक्सटिंक्सन के बाद के पहले दस लाख सालों में प्रजातियों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की वापसी का सिलसिलेवार ब्योरा पेश किया गया है.
वैज्ञानिकों को पहले भी एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने और उसके बाद हुई तबाही के छोटे-मोटे सबूत मिले हैं, लेकिन धरती पर इतने बड़े पैमाने पर जानकारी देने वाले प्रमाण कभी नहीं मिले. इस  हालिया रिसर्च रिपोर्ट में सैकड़ों जीवाश्मों की बात की गई है जो कम से कम 16 जीवों और 600 से ज्यादा पौधों के हैं.  रिसर्चरों ने हजारों पराग कणों (Pollen grains) का भी विश्लेषण किया है ताकि यह देख सकें कि अलग-अलग वक्त में कौन से पौधे जीवित थे. इनके विश्लेषण से पता चलता है कि उस दौर में कई सारे गर्म दौर गुजरे थे.

एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने के तुरंत बाद वातावरण काली चादर से ढंक गया और उसके बाद सबसे बड़े जो स्तनधारी थे उनका आकार चूहों के बराबर था.  दुनिया बेहद गर्म थी जिसका जिक्र पहले के स्टडीज में भी किया गया है.  एस्टेरॉयड के टकराने के करीब एक लाख साल बाद जंगलों में ताड़ के पेड़ों का विस्तार हो गया था और स्तनधारियों का वजन मध्य और उत्तर अमेरिका में पाए जाने वाले रकून के बराबर हो गया था.  करीब 3 लाख साल के बाद अखरोट के पेड़ों में विविधता शुरू हुई और तब सबसे बड़े स्तनधारी शाकाहारी और बड़े बीवर के आकार के हो गए थे.  इस नए स्टडी के मुताबिक ये स्तनधारी इन पेड़ों के साथ ही विकसित हो रहे थे.

जीवाश्मों का रिकॉर्ड दिखाता है कि सात लाख साल के बाद फलीदार पौधों की उत्पत्ति हुई.  इस परिवार में बीन्स और मटर के पौधे आते हैं.  इसके साथ ही दो सबसे विशाल स्तनधारी (Mammal) भी इसी दौर में नजर आने शुरु हुए.  इनका वजन करीब 50 किलो और आकार भेड़िये के बराबर था. ये उन जीवों से करीब 100 गुना भारी थे जो आपदा के बाद जिंदा बचे थे. देखा जाए तो यह बहुत तेज विकास था.
आखिर स्तनधारी बड़े क्यों हो रहे थे?  रिसर्च रिपोर्ट के लेखक लाइजन का कहना है कि और भी वजहें रहीं होंगी लेकिन जिस तरह का भोजन उपलब्ध था उसने भी बड़ी भूमिका निभाई होगी. उसी वक्त में फलीदार पौधे (Legume plants) भी विकसित हो रहे थे. इसका एक मतलब यह है कि इन पौधों से स्तनधारियों को प्रोटीन मिल रहा था और इससे उनका आकार बढ़ने में मदद मिल रही थी. स्तनधारी ऐसे जीव हैं जिनका विकास उन जीवों से हुआ जो विलुप्त होने से बच गए या फिर कहीं और से आए. कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि यह हालिया शोध इस रहस्य से पर्दा उठाने की बड़ी कोशिश करती है कि  डायनासोर जैसे विशालकाय जंतुओं के खात्मे के बाद पृथ्वी पर जीवन कैसे वापस आया!

लेखक के बारे में: प्रदीप एक साइंस ब्लॉगर एवं विज्ञान संचारक हैं. ब्रह्मांड विज्ञान, विज्ञान के इतिहास और विज्ञान की सामाजिक भूमिका पर लिखने में आपकी रूचि है. तक़रीबन पांच वर्षों से आप हिंदी विज्ञान लेखन में सक्रिय हैं. 
ब्लॉगर के बारे में
प्रदीप

प्रदीपतकनीक विशेषज्ञ

उत्तर प्रदेश के एक सुदूर गांव खलीलपट्टी, जिला-बस्ती में 19 फरवरी 1997 में जन्मे प्रदीप एक साइन्स ब्लॉगर और विज्ञान लेखक हैं. वे विगत लगभग 7 वर्षों से विज्ञान के विविध विषयों पर देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में लिख रहे हैं. इनके लगभग 100 लेख प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की है.

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First published: January 29, 2020, 3:04 PM IST
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