World UFO Day: यूएफओ के होने-न होने की गुत्थी: सुलझी या और उलझी?
खगोल विज्ञानी भी मानते हैं कि ब्रह्मांड के सुदूर कोनों में पृथ्वी से हजारों-लाखों गुना विकसित बुद्धिमान सभ्यताओं की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. यह भी हो सकता है कि किसी ग्रह पर जीवन अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो, जहां अभी विकास की प्रक्रिया चल रही होगी.
Source: News18Hindi
Last updated on: July 2, 2021, 7:00 AM IST
तकरीबन 13.8 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड की उत्पत्ति ‘बिग बैंग’ से हुई थी. बिग बैंग के तुरंत बाद ब्रह्मांड का विस्तार शुरू हुआ और अनेक आकाशगंगाओं का सृजन हुआ. कालांतर में दुग्धमेखला (मिल्की-वे) मंदाकिनी (गैलेक्सी) में हमारे सौरमंडल का गठन हुआ और पृथ्वी की उत्पत्ति हुई. लगभग साढ़े चार सौ करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर जीवन की शुरुवात हुई. हमारी पृथ्वी पर जीवन के विविध रूप विद्यमान हैं. इंसानी कल्पना से परे किसी अन्य ग्रह पर जीवन की मौजूदगी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.
खगोल विज्ञानी भी मानते हैं कि ब्रह्मांड के सुदूर कोनों में पृथ्वी से हजारों-लाखों गुना विकसित बुद्धिमान सभ्यताओं की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. यह भी हो सकता है कि किसी ग्रह पर जीवन अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो, जहां अभी विकास की प्रक्रिया चल रही होगी. लब्बोलुबाब यह है कि वर्तमान विज्ञान के मुताबिक पृथ्वी से इतर किसी अन्य ग्रह या खगोलीय पिंड पर जीवन न पनपने का कोई कारण नही है.
आए दिन पूरे विश्व में यूएफओ (उड़नतश्तरी) के दिखाई देने के दावों के समाचार सामने आते रहते हैं. हॉलीवुड फिल्मों में भी एलियन एक प्रमुख कथानक के रूप में मिल ही जाते हैं, इन फिल्मों में अक्सर उन्हें ऐसे खलनायको के रूप मे पेश किया जाता है, जिनका उद्देश्य पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन/उपभोग करना या इंसान को अपनी गुलाम जाति के रूप में इस्तेमाल करना है.
विज्ञान फंतासी फिल्मों से अलग दुनियाभर में लाखों लोग यह मानते हैं कि एलियंस उड़नतश्तरियों से पृथ्वी पर आते रहते हैं. आकाश में उड़ती किसी अज्ञात वस्तु को यूएफओ (अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) या उड़नतश्तरी कहा जाता है. आज तक इस बात के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि यूएफओ के जरिए सच में एलियंस धरती पर आते हैं या नहीं. सामान्यत: वैज्ञानिक समुदाय यूएफओ के दिखाई देने के दावों पर यकीन नहीं करता और तारों के बीच की विशाल दूरी के मद्देनजर इसकी संभावना को ख़ारिज कर देता है.
खगोल विज्ञानियों की ऐसी ठंडी प्रतिक्रियाओं के बावजूद उड़नतश्तरियों के देखे जाने के दावों में कोई भी कमी नहीं आई है. साल 2017 में न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कई नौसेना पायलटों ने उड़ान के दौरान यूएफओ को देखा था. पेंटागन ने हाल ही में इस घटना के वीडियो को सार्वजनिक कर दिया है. इस वीडियो में साफतौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तेज रफ्तार वाली अज्ञात वस्तुएं नौसेना पायलटों के विमानों से आगे निकल रही हैं.
हालांकि अमेरिकी सेना और खुफिया विभाग को अपनी पड़ताल में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि सैन्य पायलटों द्वारा देखी गई चीजें यूएफओ ही थीं. अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, जापान, कनाडा, चीन आदि देशों सहित भारत में भी इनके देखे जाने के दावे किए जाते रहे हैं. हालांकि, वक्त के साथ इन दावों से भी पर्दा उठता गया. कई बार जब बाद में यूएफओ दिखने के दावों की पड़ताल की गई तो प्राकृतिक और मानव निर्मित वस्तु या घटना के तौर पर उनकी पहचान की गई.2001 में हुई यूएफओ दिवस की शुरूआत
सन् 2001 से प्रति वर्ष विश्व यूएफओ दिवस मनाया जाता रहा है. पहले यह 24 जून और 2 जुलाई दोनों ही तिथियों को मनाया जाता था. फिलहाल आधिकारिक रूप से 2 जुलाई को ही यूएफओ दिवस मनाया जाता है. इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य है कि सारी दुनिया में उड़नतश्तरी और एलियंस की मौजूदगी पर मुकम्मल बहस हो और वैज्ञानिकों द्वारा इस विषय पर शोध किया जाए.
यूएफओ के अस्तित्व को आधिकारिक तौर पर दुनिया में मान्यता नहीं दी गई है. ऐसा माना जाता है कि इन उड़ती वस्तुओं का ताल्लुक दूसरी दुनिया से है क्योंकि इनके संचालन की असाधारण और प्रभावशाली क्षमता मनुष्यों द्वारा प्रयुक्त किसी भी उपकरण से बिल्कुल मेल नहीं खाती, चाहे वह सैन्य उपकरण हो या नागरिक, वह बिल्कुल अलग दिखती है.
यूएफओ के दिखाई देने की घटनाएँ 1947 से ही मीडिया में लगातार आती रहीं हैं. इस बीच सात दशक बीत गए हैं मगर लगता है कि यूएफओ मामले में कुछ खास प्रगति नहीं हुई है, ये हैं या नहीं इसका विधिवत खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है. वैसे भी ज़्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि कुछ खास प्राकृतिक घटनाओं मसलन, उल्का पिंडों के टूटने, तड़ित युक्त तूफान, असाधारण वातावरण, सेन्टीलीनियल बादल बनने वगैरह के कारण यूएफओ दिखाई देने की घटनाएँ होती हैं.
कुछ मानव निर्मित कृत्रिम वस्तुएं भी यूएफओ का भ्रम पैदा करतीं हैं. जैसे- रेडार प्रतिध्वनि, व्यवसायिक और सैन्य विमान, मौसम और अन्य शोधों के लिए प्रयुक्त होने वाले गुब्बारे आदि. यहाँ तक यूएफओ के कुछ प्रसिद्ध चित्र भी अफवाह हैं. एक प्रसिद्ध उड़नतश्तरी का चित्र जिसमें खिड़कियाँ और लैण्ड करने के पाँव दिखाई दे रहे हैं, एक मुर्गी को दाना देने वाली मशीन का था! कम से कम 95 प्रतिशत यूएफओ दिखाई देने की घटनाओं उपरोक्त कारणों मे से किसी एक की वजह से खारिज किया जा सकता है.
लेकिन, 5 प्रतिशत घटनाएँ आज भी एक रहस्य बनी हुईं हैं जिनको सुलझाने की कोशिशें अभी जारी हैं. फिलहाल यह रहस्य अभी भी बरकरार है कि क्या सितारों के आगे जहां और भी हैं, जहां से एलियंस यूएफओ रूपी स्पेसशिप से पृथ्वी पर आते हैं? अस्तु!
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
प्रदीपतकनीक विशेषज्ञ
उत्तर प्रदेश के एक सुदूर गांव खलीलपट्टी, जिला-बस्ती में 19 फरवरी 1997 में जन्मे प्रदीप एक साइन्स ब्लॉगर और विज्ञान लेखक हैं. वे विगत लगभग 7 वर्षों से विज्ञान के विविध विषयों पर देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में लिख रहे हैं. इनके लगभग 100 लेख प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की है.
First published: July 2, 2021, 7:00 AM IST









