28 प्रतिशत बच्चे शिक्षा से वंचित तो ऑनलाइन शिक्षण विकल्प कैसा

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) ने ऑनलाइन शिक्षा पर एक सर्वे जारी किया है. यह सर्वे ऑनलाइन शिक्षण और शिक्षा की एक अलग तस्वीर पेश करता है. एनसीईआरटी ने यह सर्वे ऑनलाइन शिक्षण को प्रभावी बनाने के कदम के तौर पर किया था, लेकिन इसके नतीजे भारत में ऑनलाइन शिक्षा की दशा और दुर्दशा को स्पष्ट करते हैं. सर्वे केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सीबीएसई से जुड़े स्कूलों के छात्रों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और माता-पिता को मिलाकर 34598 लोगों पर किया गया है. भारत के स्कूलों में पढने और पढ़ाने वाले शिक्षकों के अनुपात में यह बहुत ही छोटा है. इस सर्वे रिपोर्ट के आरम्भ में ही एनसीईआरटी बताती है कि भारत में स्कूल में पढने वाले छात्रों की जो संख्या है वह कई यूरोपीय और अफ़्रीकी देशों से भी ज्यादा है.

Source: News18Hindi Last updated on: August 22, 2020, 7:13 PM IST
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28 प्रतिशत बच्चे शिक्षा से वंचित तो ऑनलाइन शिक्षण विकल्प कैसा
भारत में 15 लाख से अधिक स्कूल महामारी के कारण बंद हैं
पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी के दौर से गुजर रही है. धीरे-धीरे इसका असर कम भी हो रहा है, लेकिन इसके कारण जो व्यवस्थाएं चरमराई हैं वह कब तक व्यवस्थित होंगी कहना मुश्किल है. इस महामारी ने सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, पारस्परिक, शैक्षणिक और पारिवारिक व्यवस्थाओं को गहरे से प्रभावित किया है. इन व्यवस्थाओं और संस्थाओं में कई तरह के बदलाव हो रहे हैं. हर रोज नई-नई व्यवस्थाएं आ रही हैं. इन व्यवस्थाओं में मनुष्य को तकनीक के बल पर मशीन हो जाने की ट्रेंनिग दी जा रही है. इसी व्यवस्था का अंग अब शिक्षा और शिक्षण संस्थान भी बन गए हैं. शिक्षण की क्लास रूम पद्धति की जगह तकनीक पर आधारित ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प आ गया है. इसी के सहारे पिछले कुछ महीनों से शिक्षण हो रहा है. भारत जैसे देश में ऑनलाइन शिक्षा कितनी संभव है, इस पर कुछ हलकों में बात जरुर हुई लेकिन व्यापक चर्चा नहीं हुई. यह विकल्प कितना कारगर होगा, खासकर ग्रामीण भारत में, इस पर भी कम ही बात हुई. साथ ही बच्चों की मानसिक स्थिति पर पड़ने वाले दबाव और माता- पिता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को भी नजरअंदाज किया गया. अब जबकि स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई का यही माध्यम बन गया है तो कई सारी समस्याएँ आ रही हैं. भले ही सरकार और संस्थान इसे विकल्प के तौर पर देख रहे हों लेकिन प्रश्न उठता है कि क्या इस विकल्प से सबको शिक्षा मिल पा रही है?

अभी हाल में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) ने ऑनलाइन शिक्षा पर एक सर्वे जारी किया है. यह सर्वे ऑनलाइन शिक्षण और शिक्षा की एक अलग तस्वीर पेश करता है. एनसीईआरटी ने यह सर्वे ऑनलाइन शिक्षण को प्रभावी बनाने के कदम के तौर पर किया था, लेकिन इसके नतीजे भारत में ऑनलाइन शिक्षा की दशा और दुर्दशा को स्पष्ट करते हैं. सर्वे केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सीबीएसई से जुड़े स्कूलों के छात्रों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और माता-पिता को मिलाकर 34598 लोगों पर किया गया है. भारत के स्कूलों में पढने और पढ़ाने वाले शिक्षकों के अनुपात में यह बहुत ही छोटा है. इस सर्वे रिपोर्ट के आरम्भ में ही एनसीईआरटी बताती है कि भारत में स्कूल में पढने वाले छात्रों की जो संख्या है वह कई यूरोपीय और अफ़्रीकी देशों से भी ज्यादा है. इस रिपोर्ट के अनुसार 240 मिलियन स्टूडेंट्स और 8.5 मिलियन टीचर प्राथमिक से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हैं. ऐसे में यह सैम्पल छोटा ही कहा जाएगा लेकिन इसके जो परिणाम आए हैं वह कुछ हद तक ऑनलाइन टीचिंग को आईना दिखाने वाले हैं. भारत में ऑनलाइन शिक्षा और शिक्षण को लेकर जो सवाल खड़े किए जा रहे थे उनको यह सर्वे पुख्ता करता है. इस सर्वे के अनुसार 3 में से केवल एक विद्यार्थी ही ऑनलाइन कक्षा से संतुष्ट है. साथ ही गणित, विज्ञान और भाषा, साहित्य के विषयों को समझने में अधिकांश बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से कठिनाई हो रही है. सर्वे में केंद्रीय विद्यालय के 39.5% बच्चों को गणित, 14.5 % बच्चों को भाषा और 25% बच्चों को विज्ञान के विषय समझने में परेशानी हो रही है. इस तरह के ही आंकडे सीबीएसई और नवोदय स्कूलों के भी हैं. बच्चे ऑनलाइन कक्षा में इन विषयों को ठीक से नहीं समझ पा रहे हैं. इन विषयों को लैपटॉप या फोन की स्क्रीन के माध्यम से एकालाप के जरिए समझा पाना भी मुश्किल है . यह बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए मुश्किल है. ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा की गंभीरता और परिणाम पर विचार करना होगा. अगर बच्चे समझ ही नहीं पा रहे हैं तो सिर्फ पढ़ा देना या कोर्स खत्म कर देना ही शिक्षा और शिक्षण नहीं है.

ऑनलाइन शिक्षा की पहुँच और संसाधनों की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है. भारत में एक बड़ी आबादी जो गांवों में रहती है उनके पास स्मार्ट फोन नहीं है. अगर किसी के पास स्मार्ट फोन है भी तो इन्टरनेट की पहुँच और स्पीड एक बड़ी समस्या है. शहरों में रहने वाले मध्यवर्गीय परिवारों में भी सबके पास स्मार्ट फोन नहीं होता है. ऐसे में अगर परिवार के दो बच्चों को एक ही समय पर ऑनलाइन क्लास लेना हो तो क्या करेंगे. हाल में बहुत सारी ऐसी ख़बरें भी आई जहाँ माता-पिता ने बहुत कुछ दाँव पर लगाकर बच्चों की पढाई के लिए स्मार्ट फोन ख़रीदा. इसके बावजूद भी यह सर्वे बताता है कि तक़रीबन 28%  बच्चों के पास स्मार्ट फोन और लैपटॉप की सुविधा नहीं है. इसका सीधा अर्थ हुआ कि 28 % विद्यार्थी इस सिस्टम में शिक्षा से वंचित रह गए और जिनके पास स्मार्ट फोन है भी तो उनको भी कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. इसमें इन्टरनेट की पहुँच और स्पीड से लेकर बिजली की कटौती तक शामिल है. सर्वे में 28 प्रतिशत बच्चे और माता-पिता बिजली कटौती से परेशान है. वह मानते हैं कि इस कारण पठन- पाठन में बाधा पहुँचती है. बच्चा पढाई पर फोकस भी नहीं कर पाता है. इसके साथ ही डेटा रिचार्ज का आर्थिक बोझ और एक घर में अगर 2-3 बच्चे पढने वाले हैं तो क्या सबको स्मार्ट फोन दिया जा सकता है? यह भी विचारणीय प्रश्न है. इस कोविड-19 के दौर में जहाँ लोगों की नौकरियां जा रही हैं और मध्यवर्गीय परिवारों का बजट गड़बड़ा चुका है. ऐसे में क्या वह इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ को उठाने में सक्षम हैं. इस तरह के कई सवाल हैं जो इस सर्वे का हिस्सा नहीं है. साथ ही सर्वे यह भी नहीं बताता है कि जो संख्या उन्होंने ली है उसमें कितने प्रतिशत ग्रामीण इलाकों के बच्चों, शिक्षकों और माता-पिता को शामिल किया है क्योंकि इस तकनीक आधारित शिक्षा का सबसे ज्यादा असर उन्हीं पर पड़ रहा है. उनकी समस्याओं का जिक्र तो सर्वे में दिखाई ही नहीं देता है.

यह सर्वे ऑनलाइन शिक्षा की सफलता और विफलता का भी मूल्यांकन करने की कोशिश करता है. सीबीएसई स्कूलों  के 4857 बच्चों से ऑनलाइन पठन-पाठन के बारे में जाना जाता है तो 26.90% बच्चों को इस माध्यम से दिक्कत है. वहीं 39.70% बच्चे इस माध्यम को संतोषजनक मानते हैं. इस संतोषजनक में वही हैं जिनके पास सारी सुविधाएँ हैं और जिनको इस माध्यम से समझ नहीं आ रहा है, उनके लिए क्या! क्या इसका भी कोई विकल्प है? बच्चों की एक बड़ी आबादी को जब इस माध्यम के जरिए समझने में ही दिक्कत हो रही और दूसरी ओर बड़ी संख्या में बच्चों के पास संसाधन नहीं है . ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि ऑनलाइन शिक्षा क्या सिर्फ खानापूर्ति भर तो नहीं है.
अगर यह सर्वे और गहराई से किया जाता तो कई और संदर्भ भी निकल कर आते. जैसे लड़कों के मुकाबले लड़कियों के लिए परेशानियाँ ज्यादा हैं. दिव्यांग बच्चों को इस माध्यम के जरिए शिक्षा ग्रहण करने में खासी दिक्कत हो रही है. ऐसे में यह सर्वे बहुत सारे बुनियादों सवालों को छोड़ देता है और एक ऑनलाइन शिक्षा के पक्ष में आँकड़ों के जरिए तर्क गढ़ता हुआ प्रतीत होता है. ऐसे में इस सर्वे पर भी सवाल उठने लाज़मी हैं. साथ ही सवाल यह भी है कि संसाधनों की कमी और पहुँच के साथ ऑनलाइन शिक्षा क्या सब तक संभव है? आँकड़ों की कलाबाजी में इस बुनियादी सवाल से भागा नहीं जा सकता है.

इस तरह से सर्वे आँकडों के जरिए ऑनलाइन शिक्षा की एक तस्वीर पेश करता है लेकिन यह असल तस्वीर नहीं है. इसके इतर बहुत कुछ है जिसको यह रिपोर्ट सायास छोड़ देती है. ऑनलाइन शिक्षा और शिक्षण की तमाम दिक्कते हैं जो आए दिन विद्यार्थी, शिक्षक और माता-पिता झेलते हैं. इन आँकड़ों से उन परेशानियों को नहीं समझा जा सकता है. भारत में ऑनलाइन शिक्षा का ठीक-ठीक आंकलन किया जाए तो यह विकल्प भी नहीं हो सकती है. यह छोटा सर्वे ही कहता है कि इस माध्यम के जरिए 28 प्रतिशत बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, तो यह विकल्प कैसा! साथ ही ऑनलाइन क्लास के लिए फोन या कंप्यूटर की स्क्रीन पर आँखें गड़ाए बच्चों की मानसिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव को कैसे आँका जाएगा. इन आँकडों में इसका कहीं उल्लेख नहीं हैं. इस तरह के और भी कई सवाल हैं जो ऑनलाइन पठन-पाठन की पद्धति के साथ खड़े होते हैं. आँकडों के जरिए यह सर्वे एक छोटी सी तस्वीर पेश करता है जो यक़ीनन मुकम्मल तस्वीर नहीं है. (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
ब्लॉगर के बारे में
प्रकाश उप्रेती

प्रकाश उप्रेती

उत्तराखंड के खोपड़ा गाँव में जन्म। पहाड़, दिल्ली होते हुए वर्धा से पढ़ाई-लिखाई। हिंदी की महत्वपूर्ण पत्रिकाओं व अखबारों में लेखन। पहाड़ों में विशेष रुचि। मिजाज़ से घुमक्कड़, पेशे से अध्यापक। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में तदर्थ अध्यापक के तौर पर अध्यापन कार्य।

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First published: August 22, 2020, 7:09 PM IST
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