विद्यार्थियों के लिए परीक्षा सिर्फ एक नोटिस नहीं है!

महामारी के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय ने शिक्षण से लेकर परीक्षा तक में कई ऐसे फैसले लिए जो जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हैं.

Source: News18Hindi Last updated on: July 13, 2020, 8:55 PM IST
शेयर करें: Facebook Twitter Linked IN
विद्यार्थियों के लिए परीक्षा सिर्फ एक नोटिस नहीं है!
आज भी तमाम स्टूडेंट्स के पास इंटरनेट जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है.
नई दिल्ली. महामारी के इस दौर में बहुत कुछ ध्वस्त हुआ है. इस ध्वस्त होने में जीवन का पूरा ताना-बाना ही बदल गया है. इसके कारण हम सब विलोम में जीवन जीने को मजबूर हो गए हैं. अब दूरियां ही सुरक्षा की शर्त है. यह जीवन का विलोम ही तो है. इससे पहले यह बातें कल्पना में भी नहीं थीं. सामाजिक जीवन के साथ अन्य क्षेत्रों में भी इस महामारी का गहरा असर हुआ है. इस महामारी के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय ने शिक्षण से लेकर परीक्षा तक में कई ऐसे फैसले लिए जो जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हैं. साथ ही समय- समय पर परीक्षा को लेकर जारी नोटिस की अस्पष्टता ने विद्यार्थियों के बीच में संशय को बनाए रखा. कोविड-19 के प्रकोप के बीच विद्यार्थियों में पहले तो ऑनलाइन क्लास की बाध्यता और फिर ऑनलाइन परीक्षा के फरमान ने भय और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी थी.

दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के कोने-कोने से बच्चे पढ़ने आते हैं. इनमें बड़ी संख्या मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों की होती है जो दूर-दराज के गांवों से पढ़ने का सपना लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में पहुंचते हैं. इनमें बहुत से बच्चे ऐसे हैं जिनके पास कंप्यूटर या लैपटॉप तो दूर की बात एक मल्टीमीडिया फोन तक नहीं है. उनके गांव में इंटरनेट की स्थिति टेलीविजन के एंटीना सरीखे हैं. ऐसे में ऑनलाइन परीक्षा लेना विद्यार्थियों के भविष्य से खेलने जैसा ही है. विद्यार्थियों के लिए परीक्षा सिर्फ एक नोटिस नहीं है. वह उनके भविष्य का सवाल है. इस सवाल की गंभीरता को दिल्ली विश्वविद्यालय लगातार तारीख पर तारीख से उलझाता जा रहा है. इस उलझन का असर विद्यार्थियों की तैयारी पर भी पड़ रहा है . साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिस की जानकारी के लिए भी उनकी निर्भरता महानगरों के दोस्तों पर या शिक्षकों पर है. इन हालत में वो क्या परीक्षा की तैयारी पर फॉक्स कर पाएंगे! शासन- प्रशासन को जमीन की तरफ देखकर सोचना चाहिए.

12 जून, 2020 को जब विश्वविद्यालय का अकादमिक सत्र खत्म हुआ तो 1 जुलाई से ऑनलाइन परीक्षा की तारीख घोषित हो गई थी. उसमें अंतिम वर्ष के ही विद्यार्थियों की परीक्षा का जिक्र था. वह भी ओपन बुक सिस्टम के जरिए. स्वाभाविक है कि जो विद्यार्थी इंटरनेट की पहुँच से दूर हैं या किसी अन्य परेशनी में हैं, उनके लिए यह खबर मानसिक रूप से परेशान करने वाली थी. उनके बीच एक उहापोह की स्थिति बन गई थी. अभी वह इसी के बारे सोच और तैयारी करने लगे थे कि कुछ दिनों बाद ही एक और नोटिस आता है जिसमें 1 जुलाई से नहीं बल्कि 10 जुलाई से ऑनलाइन परीक्षा की सूचना होती है. इससे विद्यार्थियों के बीच एक तनाव स्थिति पैदा हुई. इसलिए वह हर स्तर पर इसको लेकर जानकारी और अपनी परेशानियां साझा करने लगे-

मेरा एक विद्यार्थी जो उड़ीसा का रहने वाला है उसका 7 जुलाई, 2020 को एक मैसेज आता है-
सर नमस्कार. मैं, उड़ीसा में अपने गांव में हूं. मेरे यहां इंटरनेट की स्थिति बहुत ख़राब है. कभी आता है कभी नहीं और जब आता है तो स्पीड 2जी से भी कम की होती है. बारिश में तो आता ही नहीं है. ऐसे में, मैं परीक्षा कैसे दूंगा. सर क्या हो सकता है? मेरा साल बर्बाद हो जाएगा. मैंने विश्वविद्यालय द्वारा जो हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं, उनसे सम्पर्क किया लेकिन कोई ठीक से जवाब ही नहीं देता है. प्लीज सर, आप बता दो...

9 जुलाई, 2020 को बिहार से एक विद्यार्थी का मैसेज आता है-
सर, 10 तारीख से एग्जाम पक्का होंगे क्या, क्योंकि कोई ठीक-ठीक सूचना नहीं दे रहा है. इस चक्कर में एग्जाम की तैयारी भी नहीं हो पा रही है. सर, मेरे पास कंप्यूटर नहीं है, फोन से हो जाएगा क्या. यहाँ तीन दिन से बारिश हो रही है उस कारण इंटरनेट बहुत ही स्लो आ रहा है. अगर एग्जाम के दिन ऐसा हुआ तो क्या करूँगा सर, आप कुछ बता दीजिए...अभी हाल में मणिपुर से मेरी एक छात्रा का मैसेज आता है-
हैल्लो सर, मैं ऑनलाइन एग्जाम नहीं दे पाउंगी. हमारे यहाँ इंटरनेट की बहुत प्रॉब्लम है. मैं, इंटरनेट की स्पीड के कारण परीक्षा फॉर्म भी नहीं भर पाई थी. बहुत दिनों तक ट्राई करती रही वह खुला ही नहीं लेकिन वह तो लास्ट डेट पर दिल्ली में रहने वाली मेरी एक फ्रेंड ने भर दिया था. एग्जाम का कैसे होगा सर.. इस
सबके कारण मेरी तैयारी भी नहीं हो पा रही है. प्लीज हैल्प मी ...

इस तरह की आशंकाओं से भरे मैसेज और फोन कॉल लगातार आ रहे थे. इन सवालों के जवाब मेरे पास भी नहीं हैं. विद्यार्थियों के ये सवाल दिल्ली विश्वविद्यालय के हर शिक्षक के पास आ रहे होंगे लेकिन इनका समाधान किसी के पास नहीं है. दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ आरम्भ से ही ऑनलाइन परीक्षाओं का विरोध करता रहा है. उसके बावजूद भी नोटिस निकलते रहे और विद्यार्थियों के हित तथा जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया गया. बस नोटिस पर नोटिस आ रहे हैं जिससे समस्या का हल नहीं बल्कि समस्या उलझती जा रही है.

एमएचआरडी की ताजा घोषणा जिसमें सितम्बर के अंत तक परीक्षा लेना अनिवार्य कर दिया है, उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय पूर्व निर्धारित तारीख से कुछ घंटे पहले ही एक और नोटिस जारी करता है और 10 जुलाई से होने वाली परीक्षा भी टल जाती है. इस नोटिस में कहा जाता है कि अब परीक्षाएं 15 अगस्त के बाद होंगी. इस नोटिस के साथ ही विद्यार्थियों में फिर से वही तनाव और असमंजस की स्थिति बरकरार रहती है. ऐसे में विद्यार्थियों के हाल का अंदाजा लगाया जा सकता है. वह परीक्षा की तैयारी करें, इंटरनेट की व्यवस्था देखें, बारिश को रोकें या हर तीसरे दिन बदलने वाले नियम-कानूनों और परीक्षा की तारीखों पर टकटकी लगाए देखते रहें.

ऐसे में विश्वविद्यालय को सोचना चाहिए और अपने विद्यार्थियों की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने चाहिए. इस तरह के फैसले का परिणाम हम विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए ‘मॉक टेस्ट’ में देख चुके हैं. उसमें विद्यार्थियों को पोर्टल क्रैश होने से लेकर पेपर अपलोड न होने तक की परेशानियों का सामना करना पड़ा. बहुत से विद्यार्थी इस कारण ‘मॉक टेस्ट’ भी नहीं दे पाए. ऐसे में ऑनलाइन परीक्षा को अंतिम विकल्प के रूप में देखना ठीक नहीं है. साथ ही विद्यार्थियों की समस्याओं को अनदेखा करके आगे बढ़ना भी हितकर नहीं है.

कोविड-19 के भय और तनाव के साथ विश्वविद्यालय, यूजीसी और एमएचआरडी के इन नोटिस और बदलते फैसलों ने विद्यार्थियों को मानसिक तनाव तो दिया ही है. साथ ही एक अनिश्चितता का माहौल भी बना दिया है. ऐसे में विद्यार्थियों के लिए मानसिक रूप से परीक्षा की तैयारी करना भी मुश्किल है. इन सब नोटिस में कहीं भी ऑनलाइन परीक्षा से विद्यार्थियों को होने वाली परेशानी का जिक्र तक नहीं है. दिल्ली जैसे महानगर में इंटरनेट की स्पीड ‘मेरी आवाज आ रही है’ पर ही दम तोड़ देती है तो भारत के गाँव की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है. ऐसे में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की शंका, तनाव, डर और परिस्थितियों को अनदेखा करना कहां तक जायज़ है !
ब्लॉगर के बारे में
प्रकाश उप्रेती

प्रकाश उप्रेती

उत्तराखंड के खोपड़ा गाँव में जन्म। पहाड़, दिल्ली होते हुए वर्धा से पढ़ाई-लिखाई। हिंदी की महत्वपूर्ण पत्रिकाओं व अखबारों में लेखन। पहाड़ों में विशेष रुचि। मिजाज़ से घुमक्कड़, पेशे से अध्यापक। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में तदर्थ अध्यापक के तौर पर अध्यापन कार्य।

और भी पढ़ें

facebook Twitter whatsapp
First published: July 13, 2020, 8:55 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading