उज्‍जैन कुंभ में फिर शर्मसार कर गए नित्‍यानंद, किया ऐसा काम, कि दंग रह गया मध्‍य प्रदेश..!

उज्‍जैन कुंभ में फिर शर्मसार कर गए नित्‍यानंद, किया ऐसा काम, कि दंग रह गया मध्‍य प्रदेश..!
उज्जैन में सिंहस्थ का मेला 21 मई को सम्पन्न हो गया। इस मेले में अनेक साधु-महात्माओं ने आकर क्षिप्रा स्नान...

उज्जैन में सिंहस्थ का मेला 21 मई को सम्पन्न हो गया। इस मेले में अनेक साधु-महात्माओं ने आकर क्षिप्रा स्नान किया और धर्म-पताकाएं फहरार्इं। अधिकांश साधु-संत उज्जैन आकर बिना प्रचार के अपने अनुष्ठान सम्पन्न करके वापस अपने-अपने आश्रमों में जा चुके हैं। इस बार सिंहस्थ में कुछ ऐसे साधु भी आए, जिन्होंने अपने वैभव का अश्लील प्रदर्शन किया। इनमें से कई तो ऐसे थे, जो पहले ही तमाम स्कैंडल्स के कारण कुख्यात थे। इस सिंहस्थ में उन्होंने अपने कुख्याति का झंडा गाड़ा।

अब यह कहने में कैसी शर्म कि स्वामी नित्यानंद उनमें से एक है। इस बार सिंहस्थ की छठीं पेशवाई में नित्यानंद ने अपनी खूब मार्केटिंग और ब्रांडिंग की। सिंहस्थ का सबसे विशाल मंडप स्वामी नित्यानंद का ही था। बेहद विशाल आकर्षक और वैभवपूर्ण सोने से लदे हुए, सोने के सिंहासन पर विराजित, आनंदम-आनंदम का जयघोष करते और सर्वाधिक विदेशी शिष्यों और शिष्याओं की बारात निकालते हुए।

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नित्यानंद की पेशवाई में सबसे ज्यादा ढोल-नगाड़ों की आवाज थी। विदेशी भक्त ऐसे नाच-गा रहे थे, मानो नित्यानंद कोई स्वामी न होकर साक्षात भगवान हो। सिंहस्थ के दौरान करीब चार लाख वर्गफुट में बना नित्यानंद का सबसे विशाल मंडप पांच हजार भक्तों के ठिकाने के रूप में था। इनमें पचास देशों के करीब दो हजार भक्त बाहर से आए थे। भक्तों के भोजन-भंडारे के लिए नित्यानंद ने बेंगलुरू के अपने मुख्य आश्रम से खानसामे बुलवाए थे, ताकि दक्षिण भारतीय व्यंजन भक्तों को परोसे जा सके।

नित्यानंद के सिंहस्थ वाले अस्थायी आश्रम में दक्षिण भारत से लाई गई मूर्तियां और मूर्तियों की प्रतिकृतियां लगी थी। एयर कंडिशन्ड पंडाल सजे थे। खूबसूरत विदेशी शिष्याएं, खासकर श्वेत वर्णाएं, स्वामीजी की सेवा में नजर आई। जब स्वामीजी पेशवाई पर निकले, तब हेलीकॉप्टर से फूलों की बरसात की गई। नित्यानंद पूरे सिंहस्थ के दौरान अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लिए रहे। अतीत में उनके साथ क्या-क्या हुआ और उन्होंने क्या-क्या किया, इस बात की किसी को भी आशंका नहीं हुई।

सिंहस्थ सम्पन्न होने के बाद नित्यानंद तो फुर्र हो गए, पर उज्जैन के वे सैकड़ों लोग जिन्होंने दिन-रात एक करके नित्यानंद की झांकी सजाई थी, अब खून के आंसू रो रहे हैं। नित्यानंद और उनके प्रबंधकों ने आश्रम के पंडाल में लगने वाली साज-सज्जा की सामग्री के ठेकेदार, बिजली के कॉन्‍ट्रेक्‍टर, टेंट के कारोबारी, लेबर कांट्रेक्टर और ऐसे ही कई लोगों को उनके मेहनत और सेवाओं का पैसा ही नहीं दिया। एक ठेकेदार ने बताया कि जब वे इस बारे में नित्यानंद से मिले, तो नित्यानंद ने उन्हें मां-बहन की गालियां दी और कहा कि उज्जैन आकर वे तबाह हो गए हैं, क्योंकि उन्हें तो दस हजार रुपये का भी दान नहीं मिला। जब मामला मेला प्रशासन तक पहुंचा, तब मेला प्रशासन ने कहा कि वे इसमें कुछ नहीं कर सकते। अगर किसी को भुगतान लेना है, तो वह पुलिस के पास जाकर शिकायत करें।

First Shahi Snaan At Ujjain Simhastha Kumbh

जब इन लोगों को नित्यानंद के आश्रम के तमाम कार्य करने के बाद भुगतान की अपेक्षा की, तब नित्यानंद के आश्रम प्रबंधकों ने कहा कि वे सारा हिसाब चेक से कर देंगे, इसके लिए दो-तीन रुक जाओ। जब लोग दो-तीन दिन बाद गए, तब उन्हें उनके काम की कीमत का दस या बीस प्रतिशत तक ही दिया गया और बहाना बनाया गया कि ऑडिट होने के बाद भुगतान किया जाएगा। फिर सम्पर्क करने पर कहा गया कि अरे, आप लोगों ने जो काम किया था, वह तो हमारे स्टैण्डर्ड का था ही नहीं। इसलिए हम आपको पेमेन्ट कैसे कर सकते हैं?

नित्यानंद के इस आर्थिक घोटाले के शिकार बने कई लोग दीवालिया होने की कगार पर पहुंच गए हैं। कई लोगों ने शुरूआत में अपने जेब से पैसा लगाकर काम शुरू कर दिया था। नित्यानंद आश्रम प्रबंधन कहता रहा कि हम सभी का भुगतान करेंगे, लेकिन सिंहस्थ समाप्त होते-होते उनके सुर बदल गए। सिंहस्थ में आने वाले लोगों के मन में भी यह धारणा बनी कि सोने का मुकुट पहनकर, सोने के रथ पर सवार होकर, स्वर्ण जड़ित सिंहासन पर बैठकर हवाबाजी करने वाला यह शख्स बोलता कुछ है और करता कुछ है। प्रशासन द्वारा नित्यानंद को इतना महत्व दिए जाने पर भी अनेक साधु-संतों को ऐतराज था।

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स्वामी नित्यानंद निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं। बेंगलुरू में उन्होंने नित्यानंद ध्यानपीठम् की स्थापना की थी। वे अपने भक्तों से कहते हैं- ‘‘मैं यहां यह कहने नहीं आया हूं कि मैं ईश्वर हूं, अहम् ब्रह्मास्मि। मैं यह साबित करने आया हूं कि आप ईश्वर हो।’’

नित्यानंद अपने बारे में शानदार तरीके से बातें बताते रहते हैं। जैसे कि वे दावा करते हैं कि वे इस पृथ्वी पर कैसे ‘अवतरित’ हुए। नित्यानंद का कहना है- ‘‘उस समय न अंधेरा था, न रोशनी थी। पृथ्वी गृह पर अचानक चमचमाती हुई रोशनी प्रकट हुई, जो केवल दक्षिण भारत में ही देखी गई। उस अद्भुत रोशनी में मैंने चमत्कारिक रूप से अपनी मां अरुणाचला के आंतरिक चक्षु के माध्यम से उनकी कोख में प्रवेश किया। मैं सम्पूर्ण जागृत अवस्था में रात्रि के पौने बारह बजे वहां पहुंचा था।’’

नित्यानंद का जन्म का नाम राजशेखरन हैं। वह अपनी मां की दूसरी संतान हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1978 को हुआ था, लेकिन अमेरिकी वीजा के अनुसार उनकी पैदाइश 13 मार्च 1977 को हुई थी। नौ साल की उम्र में ही नित्यानंद ने यह कहना शुरू कर दिया था कि भगवान शिव के एक रूप अरुणगिरि योगेश्वरा से उनकी नियमित बातचीत होती है। वे कहते हैं कि तुम और मैं एक ही हैं। 12 साल की उम्र में नित्यानंद ने दावा किया कि अन्नामलाई स्वामी ने उन्हें ध्यान की वे विधियां सिखाई है, जिनसे कुंडलिनी जागृत हो जाती हैं।

नित्यानंद दावा करते हैं कि वे जो भी योग सिखाते हैं, वह अद्वैत वेदांत, भक्ति, योग, ध्यान और क्रियाओं पर आधारित हैं। शिव सूत्र, जैन सूत्र, ब्राह्मण सूत्र, पतंजलि के योग सूत्र, भागवतगीता और उपनिषेद के अनुसार वे अपने भक्तों को ज्ञान देते हैं।

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नित्यानंद ने टीवी पर अनेक कार्यक्रम पेश किए हैं। कुछ चुनिंदा चैनलों पर उनके पेड कार्यक्रम भी दिखाए जाते रहे हैं। उन्होंने नित्यानंद गुरूकुल भी खोल रखा था, जो बिना अनुमति के संचालित किया जा रहा था। उस पर कानूनी कार्रवाई हुई।

नित्यानंद आश्रम समाजसेवा के कई काम करने का भी दावा करता है। 2010 में हुई एक जांच में पता चला कि नित्यानंद आश्रम ने करीब 140 करोड़ की संपत्ति इकट्ठा कर रखी हैं। नित्यानंद का आश्रम अनेक व्यावसायिक गतिविधियों में भी लिप्त है। ये गतिविधियां बीस विदेशी ट्रस्टों के माध्यम से चल रही हैं और ये कोई टैक्स अदा नहीं कर रहे।

सन् टीवी में 2010 में एक टीवी कार्यक्रम दिखाया गया, जिसमें तमिल फिल्मों की अभिनेत्री नित्यानंद आश्रम में अनैतिक यौन गतिविधियों में लिप्त दिखाई गई थी। नित्यानंद के भक्त कहते हैं कि वह वीडियो फर्जी था, लेकिन उस टीवी प्रसारण का असर यह हुआ कि लोगों ने नित्यानंद आश्रम में आग लगा दी। उधर सन् टीवी अपने प्रसारण पर अडिग रहा और उसने कहा कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। इसके बाद वे नित्यानंद समाधि में चले गए।

बेंगलुरू की पुलिस ने नित्यानंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक सेक्स), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 506 (मारने की धमकी) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया। 21 अप्रैल 2010 को नित्यानंद को गिरफ्तार किया गया। 11 जून 2010 को नित्यानंद बेल पर छूटा। नित्यानंद के भक्त मानते हैं कि नित्यानंद असली साधु हैं और उन्हें फंसाया जा रहा है।

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नित्यानंद की एक पुरानी शिष्या आरती राव ने भी नित्यानंद पर कई आरोप लगाए हैं। आरती पांच साल तक नित्यानंद की सहयोगी रही। उनका आरोप है कि नित्यानंद ने पांच की अवधि में उनके साथ कई बार बलात्कार किया। आरती का दावा है कि नित्यानंद और फिल्म अभिनेत्री के सेक्स वीडियो बनाने में उनकी ही भूमिका थी। नित्यानंद अनेक मामलों में उलझते रहे। हालात यहां तक पहुंचे कि पुलिस को उनकी मर्दांनगी का मेडिकल परीक्षण भी कराना पड़ा। 27 नवंबर 2014 को यह रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई। रिपोर्ट के अनुसार नित्यानंद की सेहत ठीक है और ऐसी कोई निशानी नहीं है कि वे सेक्स करने के काबिल न हो।

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