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    OPINION: क्या राहुल गांधी बनाम कमलनाथ हो चला है अब "आइटम" का मामला

    MP By-election: कमलनाथ मंझे हुए और अनुभवी नेता हैं लेकिन इस चुनाव में ऐसा लगता है कि उनके सलाहकार या तो कमज़ोर हैं या फिर वे मुद्दों को लपक नहीं पा रहे हैं. इसलिए अब जब कमलनाथ ने एक दलित महिला को आइटम कह दिया तो मानो भाजपा की लॉटरी लग गई.

    Source: News18 Madhya Pradesh Last updated on: October 20, 2020, 7:31 PM IST
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    OPINION: क्या राहुल गांधी बनाम कमलनाथ हो चला है अब
    MP By-Polls: इमरती देवी पर कमलनाथ के बयान से एमपी की सियासत गर्माई हुई है.
    एमपी के डबरा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) के मुंह से महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) के लिए आइटम शब्द निकल गया. एमपी की भाजपा (BJP) जो मुद्दे की तलाश में बैठी ही थी, उसने फ़ौरन इसे एक बड़े इवेंट की तरह मैक्सिमाइज़ किया और मुद्दे को देशव्यापी बना दिया. दरअसल भाजपा का उत्साह लाज़िमी भी था क्यूंकि इससे पहले भाजपा एमपी में आक्रामक होने के बजाय रक्षात्मक थी. उसे पता था कि कांग्रेस नीचे तक ये बात पहुंचाने में सफल हुई थी कि ये चुनाव “बिकाऊ बनाम टिकाऊ” का है. लोग बातें करने लगे थे कि भाजपा के साथ सिंधिया समर्थक जो 22 विधायक सहित 26 विधायक आए हैं वे एक डील के तहत आए हैं. भाजपा ने इसलिए पहले कमलनाथ सरकार की किसान कर्ज़ माफ़ी को झूठ बताना शुरू किया. लेकिन विधानसभा में कृषि विभाग के एक आईएएस अधिकारी ने लिखित जवाब में ये कहकर कि पिछली सरकार में कर्ज़माफी हुई, इस मुद्दे का गुब्बारा फोड़ दिया.

    उसके बाद भाजपा ने नारियल साथ में लेकर चलने के कांग्रेस के आरोप को देश की संस्कृति से जोड़ना चाहा, जो उतना कारगर नहीं हुआ. उसके बाद किसान प्रकोष्ठ के कांग्रेसी नेता दिनेश गुर्जर के बयान जिसमें शिवराज को भूखा-नंगा कहा गया था, उसे भाजपा ने लपका. सारे नेताओं ने सोशल मीडिया में “मैं भी अन्ना” की तर्ज़ पर “मैं भी शिवराज” कैम्पेन चलाया. भाजपा इसे देशव्यापी बनाकर ये झलकाना चाहती थी कि कांग्रेस को गरीबों से नफ़रत है. ये मुद्दा कुछ थोड़ा तो उछला, लेकिन लोकल टॉकिंग पॉइंट भर बनकर रह गया. अब जब कमलनाथ ने एक दलित महिला को आइटम कह दिया तो मानो भाजपा की लॉटरी लग गई.

    भोपाल से लेकर दिल्ली तक कमलनाथ के इस बयान की जमकर आलोचना हुई. तस्वीरों में जब एक तरफ अभिजात्य सी अकड़ रखने वाले कमलनाथ और रोती बिलखती दलित इमरती देवी की तस्वीरें नुमाया होने लगीं, तो सहज सहानुभूति इमरती देवी की तरफ जाने लगीं. पहले तो कमलनाथ उस आईटम शब्द की गूगल वाली व्याख्या करके ठंडा करने की कोशिश करते रहे, लेकिन जब उन्हें दिखा कि ये मामला बड़ा हो रहा है, तो उन्होंने खेद जताया लेकिन बेहद संकेतों में. मंगलवार को जब राहुल गांधी ने इस बयान को आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया तो भाजपा और आक्रामक हो गई. वो अड़ गई कि सिर्फ निंदा से काम नहीं चलेगा. राहुल कमलनाथ के खिलाफ कोई एक्शन लें. उस पर कमलनाथ की प्रतिक्रिया तो और मारक आई. उन्होंने कहा कि राहुल जी को सन्दर्भ जो पता चला उसके मुताबिक उन्होंने राय दी, मैं बिलकुल इमरती देवी से माफ़ी नहीं मानूंगा. कमलनाथ के इस बयान को राहुल गांधी बनाम कमलनाथ बनाने की फ़िराक में भाजपा जुट गई है. इससे दो फायदे होंगे- एक तो कमलनाथ पर सीधा हमला ज़ारी रहेगा. दूसरा, अप्रत्यक्ष तरीके से राहुल को कांग्रेस में असहाय नेता स्थापित करने में भी मदद मिलेगी.

    कमलनाथ मंझे हुए और अनुभवी नेता हैं लेकिन इस चुनाव में ऐसा लगता है कि उनके सलाहकार या तो कमज़ोर हैं या फिर वे मुद्दों को लपक नहीं पा रहे हैं. इस चुनाव की सुगबुगाहट भी जब नहीं शुरू हुई थी, तब कांग्रेस अपर हैण्ड थी लेकिन उसके बाद वो मुद्दों को व्यापक करने की बजाय लगभग हर दिन भाजपा को ऐसी लूज़ बॉल देती रही, जिसे भाजपा के बल्लेबाज़ आसानी से बाउंड्री के बाहर पहुचाते रहे. एमपी में एक दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा में बैठे-बैठे एक किसान की मौत हो गई. दो मिनट के मौन के बाद सिंधिया की सभा फिर शुरू हो गई लेकिन कांग्रेस उसे एजेंडा बना ही नहीं पाई और वो मामला थोड़ा बहुत उछल कर ठंडा हो गया. कुल मिलाकर जिन मसलों को लेकर ये चुनाव शुरू हुआ था, वो तो कहीं पीछे हो गया. रोज़ एमपी में सिर्फ बयानों की सियासत हो रही है. हालांकि बयानों की सियासत वोट में तब्दील होगी या नहीं, इसके लिए हमें भोपाल लोकसभा के चुनाव का ध्यान रखना होगा. उस वक़्त साध्वी प्रज्ञा लगभग रोज़ ऐसा एक बयान देती थीं, जिसकी देशव्यापी निंदा होती थी. उस समय दिग्विजय सिंह सहित पूरी कांग्रेस खुश थी साध्वी जमकर डिफेम हो रही हैं लेकिन जब ईवीएम खुलीं तो लाखों वोटों से उन्होंने दिग्विजय सिंह को हराया. क्या कमलनाथ के सन्दर्भ में भी ऐसा हो सकता है, इसमें थोड़ा संशय है क्यूंकि हमारा देश और ख़ास तौर मध्य प्रदेश महिलाओं के लिए की जाने वाली सार्वजनिक आपत्तिजनक टिपण्णी को सहजता से पचा नहीं पाता. होगा क्या ये तय होगा 10 नवम्बर को, लेकिन तब तक दोनों तरफ से बयान और दोयम होंगे इसकी पूरी आशंका है. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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    First published: October 20, 2020, 7:31 PM IST
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