MP चुनाव के रोचक किस्सेः कहीं जनता तय करती है सरकार तो कहीं विधायक नहीं होता रिपीट

मध्‍य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (MP Assembly By-election)का बिगुल बज चुका है और सभी राजनीतिक दल पूरे जोरशोर से मैदान में हैं. यकीनन ये चुनाव व्यक्तिपरक होंगे और कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के मौजूदा सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) की प्रतिष्‍ठा दांव पर है.

Source: News18 Madhya Pradesh Last updated on: October 7, 2020, 5:29 PM IST
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MP चुनाव के रोचक किस्सेः कहीं जनता तय करती है सरकार तो कहीं विधायक नहीं होता रिपीट
भाजपा और कांग्रेस के लिए ये उपचुनाव बेहद अहम है.
मध्‍य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के चुनाव किसी छोटे राज्यों के आम चुनाव से कम नहीं हैं. यूं भी इतनी तादात में विधानसभा सीटों का उपचुनाव इतिहास में पहली बार होने जा रहा है. 22 विधायकों के साथ पाला बदल कर भाजपा में जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण मध्‍य प्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरी थी. अब कवायद दोनों तरफ से सत्ता पर बने रहने या उसे हर हाल में हासिल करने की है. चुनाव दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों यानी कांग्रेस और भाजपा के लिए चुनौतियों का अम्बार लिए खड़ा हुआ है. कमलनाथ को ये साबित करना है कि उनके 15 महीने का कार्यकाल शानदार था और उनके साथ धोखा हुआ है. वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूरी भाजपा को ये साबित करना है कि कांग्रेस सरकार कमलनाथ के रवैये के कारण गिरी थी, क्‍योंकि उनके अंदर नेताओं के बीच सामंजस्य का माद्दा ही नहीं था.

भाजपा ने 28 विधानसभा सीटों के अपने सभी उम्मीदवार घोषित कर दिए और कांग्रेस ने भी ब्यावरा छोड़कर सभी 27 सीटों पर अपने महारथी मैदान में उतार दिए हैं. ये चुनाव कई मायनों में दिलचस्प होंगे. अव्वल तो कोई एक ऐसा मुद्दा नहीं होगा जो सर्वव्यापी हो, लिहाजा सभी जगह स्थानीय मुद्दे ज्यादा असरकारक होंगे. ये चुनाव पार्टीपरक होने के बजाय व्यक्तिपरक होंगे. दांव पर तीन नेताओं की क्षमताएं सबसे अधिक होंगी, जिसमें कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंघिया और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं. प्रत्याशी पर सबसे अधिक दारोमदार होगा.

बहरहाल, राजनैतिक विश्लेषण और उठापटक तो हम आपको लगभग रोज़ ही सुनाते और बताते रहेंगे लेकिन आज आपको इन विधानसभा सीटों के कुछ बेहद रोचक किस्से सुनाते हैं जो शायद आपने कभी नहीं सुने होंगे.

1- एमपी में उज्जैन में होने वाला कुम्भ मेला जिसे सिंहस्थ कहा जाता है, वो जिस भी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में होता है वो अगला सीएम नहीं होता. शिवराज के कार्यकाल में भी 2016 में सिंहस्थ हुआ और उसके बाद वो विधानसभा चुनाव हार गए थे. हालांकि बाद में फिर वो मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन 15 महीने का सत्ता का वनवास उन्होंने भी भोगा.
2- एमपी में भाजपा सरकार सिर्फ 4337 वोटों के कारण चली गई थी. सूबे की 10 विधानसभा सीटें ऐसी थीं,जहां जीत और हार का अंतर महज एक हज़ार या उससे कम वोट ही रहे.

3- क्या इस बार भी नोटा कांग्रेस को मदद करेगा. ये सवाल भी बड़ा है क्‍योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नेपानगर, ब्यावरा और सुहासरा सीटें नोटा के कारण ही मिल पाई.

4- यूं तो विधानसभा चुनाव पांच साल में एक बार होते हैं लेकिन मुंगावली एक ऐसी विधानसभा सीट है,जहां बीते तीन सालों के दौरान हर साल विधानसभा चुनाव हुए हैं.5- ब्यावरा ऐसी विधानसभा सीट है जहां जनता हर बार अपना विधायक बदल देती है. 1993 से लेकर अब तक ये ट्रेंड ज़ारी है. यदि कोई पार्टी उम्मीदवार रिपीट भी करती है तो जनता उसे रवाना कर देती है.

6-  इस बार विधायक का चुनाव लड़ रहे फूल सिंह बरैया, हरिवल्लभ शुक्ला, एंदल सिंह कंसाना, अजब सिंह कुशवाहा और राम प्रकाश राजौरिया ये कुछ ऐसे नेता हैं, जिन्हें घोषित दल-बदलू कह सकते हैं. ये तीन या चार बार दल बदल करके चुनाव लड़ चुके हैं.

7- करैरा विधानसभा के एक दर्जन से अधिक ऐसे गांव हैं, जो रहते जिस जिले में हैं वहां वोट नहीं करते बल्कि दूसरे जिले के लोगों को वोट करते हैं. गांव दतिया जिले में आता है लेकिन उनकी विधानसभा करैरा शिवपुरी जिले के अंदर आती है.

8- अशोकनगर एकलौती ऐसी विधानसभा सीट है जहां कभी उपचुनाव नहीं हुए. पहली बार यहां पर उपचुनाव हो रहे हैं. इस विधानसभा सीट का भी मिथक है कि जो मुख्यमंत्री अशोकनगर आता है,उसकी कुर्सी चली जाती है. यही वजह है कोई मुख्यमंत्री अशोकनगर क़स्बे में कभी नहीं जाता. कुछ साल पहले शिवराज सिंह चौहान ने जब वहां के कलेक्ट्रेट का लोकार्पण किया था तो उस कस्बे की सीमा से बाहर से ही रिमोट के जरिए किया था.

9- ग्वालियर पूर्व और नेपानगर ये दोनों ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां जिस पार्टी का विधायक बनता है सूबे में उसी पार्टी की सरकार बनती है.

10- एक फिल्म का मशहूर गाना 'गाने बैठे गाना, सामने समधन हैं' इसका सियासी तर्जुमा इस बार के विधानसभा में कुछ यूं होगा. लड़ने उतरे चुनाव सामने समधन है. इस चुनाव में डबरा से भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राजे की समधन हैं.
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First published: October 7, 2020, 5:19 PM IST
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