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कुंभकर्णी नींद से जागा आईसीसी, 100 साल बाद सुधारने जा रहा है अपनी ये बड़ी गलती!

कुंभकर्णी नींद से जागा आईसीसी, 100 साल बाद सुधारने जा रहा है अपनी ये बड़ी गलती!
आईसीसी कुंभकर्णी नींद से जाग गया है। अब अपनी 107 साल पुरानी गलती को सुधारने के लिए ये संस्था गंभीरता...

आईसीसी कुंभकर्णी नींद से जाग गया है। अब अपनी 107 साल पुरानी गलती को सुधारने के लिए ये संस्था गंभीरता से प्रयास कर रही है। 1909 में आईसीसी का गठन हुआ था। तब इसमें शामिल होने की पहली शर्त ये रखी गई थी कि सिर्फ कॉमनवेल्थ देश ही इसके सदस्य हो सकते हैं। इस बेकार के नियम की वजह से अमेरिका आईसीसी का सदस्य नहीं बन सका। फिर जब आईसीसी ने अपना नियम बदला, तो काफी वक्त गुजर चुका था।

आधिकारिक रूप से आईसीसी में यूएस क्रिकेट एसोसिशन की एंट्री 1961 में हुई यानी आधी सदी गुजर जाने के बाद। फुटबॉल के बाद क्रिकेट ही दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है लेकिन फिर भी दुनिया की महाशक्ति की सरजमी पर इसकी नाममात्र की मौजूदगी है। लेकिन अब पूरी एक सदी गुजर जाने के बाद आईसीसी ने अमेरिका में क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने के लिए जोर-शोर से काम शुरू कर दिया है।

Roughly 36,000 were in attendance for a cricket match at Citi Field in New York.

आईसीसी की कोशिशें

क्रिकेट का संपूर्ण विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक कि वो दुनिया के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश चीन और दुनिया की आर्थिक महाशक्ति अमेरिका में मजबूती के साथ कदम ना रख ले। इसी बात को समझते हुए, आईसीसी के लोकल एडवाइडरी ग्रुप ने अमेरिका में क्रिकेट को भारत की तरह लोकप्रिय करने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। इस मास्टर प्लान के मुताबिक आईसीसी की कोशिश, 2019 वर्ल्ड कप (वनडे) और 2020 में होने वाले टी-20 विश्व कप के लिए अमेरिका को क्वालिफाई करवाना है। साथ ही 2024 का टी-20 विश्व कप भी अमेरिकी सरजमीं पर करवाने की योजना पर आईसीसी बेहद ही गंभीरता से काम कर रहा है।

एडवाइजरी के मुताबिक अमेरिका में क्रिकेट के विकास के लिए तीन खास बातें हैं। पहला–खिलाड़ियों की भागीदारी, दूसरा–फैन और क्रिकेट का बाजार और तीसरा – टीम का प्रदर्शन। पहली दो चीजें तो मौजूद हैं, लेकिन तीसरे यानी टीम के प्रदर्शन पर आईसीसी को अभी बहुत मेहनत करनी है।

इन कोशिशों को सफलता के पंख लग जाएंगे, अगर 2024 में होने वाले ओलंपिक की मेजबानी अमेरिका के शहर लॉस एंजलिस को मिल जाए। एडवाइजरी के मुताबिक अगर ऐसा हुआ, तो वहां 2024 का टी-20 विश्व कप करवाने की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी। अमेरिका की तरफ रुख करने के आईसीसी के पास एक नहीं दर्जनों कारण हैं। इन कारणों को आगे विस्तार से बताया गया है।

USA Cricket Ground

अमेरिका में क्रिकेट का इतिहास

अमेरिका में क्रिकेट का वर्तमान और भविष्य जानने से पहले जरा जान लीजिए कि क्रिकेट का अमेरिका में भूतकाल यानी इतिहास क्या और कैसा है। कुछ इतिहासकार तो क्रिकेट को बेसबॉल की जननी यानी मां कहते हैं क्योंकि क्रिकेट को बदलकर ही बेसबॉल की शुरुआत हुई थी, जो आज अमेरिका का नंबर 1 खेल है।

1850 में अमेरिका में क्रिकेट, बेसबॉल के मुकाबले बहुत ज्यादा लोकप्रिय था। न्यूयॉर्क और फिलाडेल्फिया में तो उस समय वहां के अखबारों में क्रिकेट पर उसी तरह से रिपोर्टिंग होती थी, जैसे आज भारत और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में होती है, जबकि बेसबॉल पर रिपोर्टिंग का हाल वैसा ही था जैसा आज भारत में शतरंज का होता है।

लेकिन 1861 में शुरू हुए अमेरिकी गृह युद्ध की वजह से उस समय तेजी से आगे बढ़ रहे क्रिकेट पर विराम लग गया। जो खिलाड़ी क्रिकेट खेलते थे, वो युद्ध में कूद पड़े। युद्ध के दौरान और युद्ध के बाद क्रिकेट का सामान आसानी से हर जगह नहीं मिलने की वजह से, अमेरिकियों ने बेसबॉल का हाथ थाम लिया और इस तरह क्रिकेट गुमनामी में खो गया और बेसबॉल ऊभरकर अमेरिकियों का सबसे पसंदीदा खेल बन गया। बेसबॉल के शुरुआती दौर में जो भी खिलाड़ी हुए, वो सभी पहले क्रिकेटर ही थे। एक दौर तो ऐसा भी था जब इंग्लैंड के बाहर किसी दूसरे देश में क्रिकेट पर आधारित पत्रिका सिर्फ अमेरिका में ही छपती और बिकती थी। 1877 में  द अमेरिकन क्रिकेटर नाम की ये पत्रिका करीब 50 साल तक (अप्रैल 1929 तक) लगातार छपती और खूब बिकती रही। आज भी इसकी कॉपी अमेरिकन लाइब्रेरी में मौजूद है। ये भी हैरत में डालने वाली बात है कि अमेरिका में 1958 में ही एक मैच का प्रसारण टीवी पर हो चुका था। जिसके बाद महीनों तक टीवी स्टेशन को लोगों के तारीफ से भरे पत्र और फोन आते रहे।

Students playing cricket at Dartmouth College in 1793

अमेरिका में क्रिकेट का वर्तमान

फरवरी 2015 में हुए वन डे क्रिकेट विश्व कप को अमेरिका में टीवी पर 10 करोड़ लोगों ने देखा। ध्यान रहे कि अमेरिका की कुल जनसंख्या करीब 32 करोड़ है यानी अमेरिका की एक तिहाई जनता ने टीवी पर विश्व कप देखा। जबकि भारत में ये संख्या 50 करोड़ थी यानी 125 करोड़ में से 40 % लोगों ने टीवी पर वर्ल्ड कप देखा। यानी अमेरिका के मुकाबले करीब 7 प्रतिशत ज्यादा भारतीयों ने ही इसे टीवी पर देखा।

अभी 4 महीने पहले नवंबर 2016 में सचिन तेंदुलकर और शेन वॉर्न ने अमेरिकी सरजमीं पर ऑल स्टार क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत की है। इसमें अगले तीन साल तक 3 मैच हर साल खेले जाएंगे। पहले सीजन में तीन मैच खेले गए, जिनमें कुल 65 हजार 116 दर्शकों ने स्टेडियम में आकर मैच देखा। 45 हजार दर्शकों की क्षमता वाले न्यूयॉर्क के सिटी फील्ड ग्राउंड पर तो 27 हजार 916 दर्शक थे यानी 62% स्टेडियम भरा हुआ था।

2016 में भारत में पुरुषों के साथ साथ महिला टी-20 विश्व कप भी हो रहा है। इनकी हालत तो कुछ ज्यादा ही खराब है। भारत-पाक महिला मैच में कुल 9 हजार दर्शक आए, जिनमें से करीब 5 हजार दर्शकों के रूप में स्कूल के बच्चे थे जिनको डीडीसीए ने फ्री पास दिए थे। ऐसे में अमेरिका में प्रदर्शनी मैचों में आने वाले 25-30 हजार लोग ईडन ग्रार्डन के हाउस फुल होने से कम नहीं हैं।

साल 2010 में अमेरिका में न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच एक प्रदर्शनी मैच हुआ जिसमें 16 हजार दर्शक स्टेडियम पहुंचे। 16 हजार दर्शकों की संख्या अमेरिका में क्यों बहुत बड़ी है ये बात इस तरह समझी जा सकती है कि अभी चल रहे टी-20 विश्व कप 2016 के 4 मैच चेन्नई के मशहूर चिदंबरम स्टेडियम में खेले जाने हैं, जिसकी क्षमता 38 हजार सीटों की है और जो अभी तक विश्व कप होने के बावजूद पूरी तरह भरा नहीं है। यानी इसके आधे दर्शक अमेरिका में न्यूजीलैंड बनाम श्रीलंका का मैच देखने पहुंचे। जरा सोचिए कि अगर यही मैच भारत-पाकिस्तान के बीच अमेरिकी ग्राउंड पर होता तो क्या ये स्टेडियम फुल नहीं होता।

अमेरिका में क्रिकेट का भविष्य

अगर अमेरिका में क्रिकेट विश्व कप हुआ, तो कौन देखेगा स्टेडियम में मैच? दर्जनों अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट मैंने विदेशी धरती पर कवर किए हैं, लेकिन जैसा जुनून दक्षिण अफ्रीका में 2009 में हुए आईपीएल सीजन-2 में देखने को मिला, वैसा कभी नहीं देखा। ऐसा क्यों हुआ इसके पीछे कारण हैं वहां मौजूद भारतीय जनसंख्या। दरअसल, दक्षिण अफ्रीका में 12 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जिसकी ताकत की वजह से ही आईपीएल का सीजन 2 दक्षिण अफ्रीका में सफल रहा। हर स्टेडियम लगभग हाउसफुल था।

इसी तरह कनाडा के टोरंटो में 1996 से 1998 के बीच हुए सहारा कप की सफलता इस बात का सबूत है कि जहां भारतीय बड़ी तादाद में मौजूद हैं वहां क्रिकेट को सफल बनाया जा सकता है। लेकिन कारगिल युद्ध की वजह से सहारा ने पाकिस्तान के विरोध के तौर पर सीरीज से हाथ खींच लिए। शारजाह कप भी एक और शानदार उदाहरण है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फिर ये सफलता अमेरिका में भी दोहराई जा सकती है। आईसीसी चाहे तो ट्रायल के तौर पर आईपीएल का एक सीजन ही अमेरिका में करवाकर देख सकती है। हालांकि इसके लिए उसे बीसीसीआई को राजी करना पड़ेगा। क्रिकेट खेलने वाले बड़े देशों की बड़ी जनसंख्या की वजह से अमेरिका में क्रिकेट के सफल होने के बहुत अच्छे आसार हैं।

अमेरिका की क्रिकेटप्रेमी आबादी

अमेरिका की कुल जनसंख्या का करीब 15% (साढ़े चार करोड़ लोग) दूसरे देशों से हैं। इसका बड़ा हिस्सा भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से हैं जहां क्रिकेट सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। यूएसए में सबसे ज्यादा विदेशी के रूप में भारतीयों की जनसंख्या नंबर-3 पर है। अमेरिका में क्रिकेट खेलने वाले देशों की जनसंख्या नीचे दी गई है। इसे देखकर कहा जा सकता है कि आईसीसी को विश्व कप या फिर किसी भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट या सीरीज के लिए दर्शकों की कमी नहीं पड़ने वाली।

देश जनसंख्या
भारत 31 लाख
पाकिस्तान 4 लाख
वेस्टइंडीज 35 लाख
दक्षिण अफ्रीका 1 लाख
यूके / इंग्लैंड 7 लाख
बांग्लादेश 5 लाख
ऑस्ट्रेलिया 80 हजार
श्रीलंका 55 हजार

 

अमेरिका में मौजूदा क्रिकेट ग्राउंड

यूएसए क्रिकेट एसोसिएशन के मुताबिक अभी 32 हजार 66 खिलाड़ी एसोसिएशन के साथ रजिस्टर्ड हैं और अलग-अलग स्तर पर प्रोफेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं। फिलहाल अमेरिका में करीब आधा दर्जन क्रिकेट ग्राउंड हैं। लेकिन फ्लोरिडा का सेंट्रल ब्रोबर्ड रीजनल पार्क ही आईसीसी की तरफ से अमेरिका में अभी तक एक मात्र मान्यता प्राप्त स्टेडियम है।

कोशिश के पीछे डर छिपा है

आईसीसी को डर है कि कहीं ऐसा ना हो कि आज जैसे ओलंपिक कमेटी को ओलंपिक की मेजबानी के लिए देश ढूंढने पड़ रहे हैं, वैसे ही आईसीसी को भी ढूंढे से भी मेजबान ना मिले। क्योंकि ओलंपिक के खेल तो लगभग 200 देशों में खेले जाते हैं लेकिन क्रिकेट तो कायदे से 8-9 देशों में ही खेला जाता है। अगर अमेरिका में क्रिकेट ने अपनी जड़ें जमा लीं, तो फिर बाकी देशों में भी वो पकड़ बना सकता है क्योंकि अमेरिका की तरह इन देशों में भी बेसबॉल सबसे ज्यादा खेला जाता है।

 

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