विश्व क्रिकेट पर भारत की बादशाहत से ऐसे हुआ इस खेल का नुकसान, इसलिए फुटबॉल के सामने नहीं टिकता क्रिकेट!

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टीमों के लिहाज से पाकिस्तान ने 15 सदस्यीय टीम में 2 परिवर्तन किए हैं। यहां जानिए, टूर्नामेंट से संबंधित वो हर बात जो आपको जान लेनी चाहिए...

पिछले करीब 6 साल से ये सवाल मेरे जेहन में था कि क्या वाकई में क्रिकेट कभी फुटबॉल की जगह ले पाएगा? 2010 में जब मैंने ये सवाल आईपीएल की पुणे टीम (सहारा मालिक था तब) के 2 वरिष्ठ अधिकारियों से उनके लखनऊ वाले सहारा कॉम्पलेक्स में पूछा, तो उन्होंने इस सवाल को हंसी में उड़ा दिया, लेकिन अब 6 साल बाद भी सवाल वहीं का वहीं है। सवाल ये कि क्या कभी क्रिकेट फुटबॉल की तरह दुनिया के 200 देशों में खेला जाएगा? सवाल ये कि क्या कभी फुटबॉल का किंग ब्राजील क्रिकेट का किंग बन पाएगा? सवाल ये कि क्या कभी क्रिकेट का विश्व कप जापान में हो पाएगा? यानी एक सीधा सा सवाल क्या कभी क्रिकेट, फुटबॉल जैसा बना पाएगा?

भारत का राष्ट्रीय खेल जब अपने चरम पर था यानी जब भारत हर ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत रहा था, तब भारत में क्रिकेट धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा था। ये दौर था 60 और 70 का दशक। तभी भारत ने कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीतकर एकदम क्रिकेट को लाइम लाइट में ला दिया। जरा सोचिए अगर भारत ने विश्व कप 1983 नहीं जीता होता, तो क्या कभी भारत में किक्रेट का वो विकास होता, जो आज है। विश्व कप में किसी भी छोटे से देश की जीत, खेल को उस देश में लोकप्रिय बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। इस बात को दूसरे तरह से देखते हैं। जरा सोचिए कि अगर भारतीय फुटबॉल टीम फीफा विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर ले, तो क्या 125 करोड़ लोगों के देश में अचानक से फुटबॉल फीवर चढ़कर नहीं बोलेगा। क्या फिर देश में माराडोना, पेले, रोनाल्डो जैसे दिग्गज पैदा नहीं हो सकेंगे। इसी तरह अगर 1992 में पाकिस्तान और 1996 में श्रीलंका ने अगर विश्व कप नहीं जीता होता, तो क्या ये भारतीय उपमहाद्धीप में पॉपुलर होते।

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मेरे मुताबिक ये तब तक संभव नहीं जब कि आईसीसी अपने प्लान में बदलाव नहीं लाती। तथ्यों पर आधारित इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको भी पता चल जाएगा कि मैंने ऐसा क्यों कहा। क्रिकेट का भविष्य जानने से पहले इसके संक्षिप्त इतिहास और विकास की बेहद धीमी रफ्तार देख लीजिए।

विवरण क्रिकेट फुटबॉल
खेल की गवर्निंग बॉडी का गठन ­कब हुआ 1909 1904
कितने देश सदस्य हैं। 106 209
पूर्ण सदस्य (फुटबॉल में पूर्ण सदस्य और सहायक सदस्य जैसी कोई कैटेगिरी नहीं होती) 10 --
सहायक सदस्य (फुटबॉल में पूर्ण सदस्य और सहायक सदस्य जैसी कोई कैटेगिरी नहीं होती) 38 --
विश्व कप कितने देशों में हो चुका है (क्रिकेट-भारतीय उपमहाद्धीप, इंग्लैंड, ओशियाना द्धीप, वेस्टइंडीज) (फुटबॉल-पश्चिमी जर्मनी को गिनें, तो 19 देशों में।) 04 18
कितने देश खेल चुके हैं विश्व कप 20 77
कितने टूर्नामेंट हैं (इसमें अंडर 15, 17, 19 शामिल नहीं हैं।) 03 06
पहला विश्व कप 1975 1930
अभी तक कितने विश्व कप खेले गए 11 20
कितने देश अब तक विश्व विजेता बने 05 08
कितने देशों ने अब तक फाइनल मैच खेला 07 12

 

क्रिकेट और फुटबॉल, दोनों की गवर्निंग बॉडी लगभग एक साथ बनीं, लेकिन ऊपर दी हुई टेबल से काफी कुछ साफ हो गया कि फुटबॉल कितनी तेजी से वाकई में पूरी दुनिया में फैल गया, जबकि क्रिकेट अभी भी 50 साल पहले वाली रफ्तार से काम कर रहा है।

आईसीसी की धीमी रफ्तार

आईसीसी को बने 107 साल हो चुके हैं, लेकिन दुनिया के 20 प्रतिशत से भी कम (38) देश इसके एसोसिएट सदस्य हैं। ये हाल तब है जब आधी दुनिया पर ब्रिटिश राज रहा और क्रिकेट उन देशों में सबसे ज्यादा खेला गया जहां ब्रिटिश राज था। 1926 में आईसीसी के 6 फुल टाइम मैंबर थे। लेकिन 90 साल बाद भी इसमें सिर्फ 4 नए देश ही जुड़ पाए(श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे, बांग्लादेश)। अगर इस तर्क को माना जाए कि बाकी देश 5 दिन के टेस्ट मैच को खेलने की काबिलियत नहीं रखते, तो फिर बांग्लादेश को ये कैसे हासिल हुआ। बांग्लादेश को 2000 में फुल मैंबरशिप मिली और उसे अपनी पहली टेस्ट जीत के लिए करीब 5 साल तक इंतजार करना पड़ा। बांग्लादेश को अगर टेस्ट खेलने ही नहीं दिया जाता तो वो कैसे अपना पहला टेस्ट जीत पाता। इसी तरह अगर जर्मनी, फ्रांस, घाना, नाइजीरिया, अर्जेंटीना को खेलने ही नहीं दिया जाएगा, तो वो कैसे अपना पहला वन डे या टेस्ट मैच या टी-20 मैच जीत पाएंगे।

Pakistan players celebrate the wicket of New Zealand's Brendon McCullum during the third one-day international cricket match between New Zealand and Pakistan at Eden Park in Auckland on January 31, 2016.   AFP PHOTO / MICHAEL BRADLEY / AFP / MICHAEL BRADLEY (Photo credit should read MICHAEL BRADLEY/AFP/Getty Images)

पहले 6 विश्व कप में पांच देश विश्व विजेता बने, जिनमें से तीन भारतीय उपमहाद्वीप से भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका थे। नतीजा, क्रिकेट इन देशों में सबसे ज्यादा तेजी से लोकप्रिय हुआ, जिसका फायदा आईसीसी को कितना मिला ये आईसीसी की कमाई से पता चल जाता है। लेकिन पिछले 20 साल में क्रिकेट विश्व कप में दुनिया को कोई नया देश क्रिकेट चैंपियन नहीं मिला। पिछले 5 में से 4 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया ने और एक भारत ने जीता है। यानी क्रिकेट आगे बढ़ा ही नहीं।

एशिया क्रिकेट काउंसिल के एशिया तो 25 सदस्य हैं लेकिन एशिया कप में कभी 5 तो कभी 6 देश ही हिस्सा लेते हैं। चीन के पास दुनिया की करीब 20 प्रतिशत जनसंख्या है, लेकिन फिर भी चीन में क्रिकेट के विकास पर वो ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिसकी जरूरत है।

अगर विश्व कप बार-बार एक ही देश जीतता रहेगा तो खेल का विकास कैसे होगा। मजा तो तब आए, जब अफ्रीका से युगांडा जैसा देश विश्व कप जीत ले और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम विश्व कप के लिए क्वालिफाई भी ना कर पाए।

आत्महत्या जैसे कदम

अब सवाल ये कि फुटबॉल की तरह क्रिकेट दुनिया के बाकी देशों में लोकप्रिय क्यों नहीं हो रहा। आंकड़ों के जरिए ये पूरी कहानी भी समझ लीजिए।

Australia's Jackson Bird (C) celebrates with teammates Adam Voges (R) and David Warner (L) after Trent Boult of New Zealand was caught ending New Zealand's second innings during day four of the second cricket Test match between New Zealand and Australia at Hagley Park in Christchurch on February 23, 2016. AFP PHOTO / MARTY MELVILLE / AFP / Marty Melville (Photo credit should read MARTY MELVILLE/AFP/Getty Images)

आईसीसी ने 2019 के विश्व कप के लिए आत्महत्या करने जैसा कदम उठाने का फैसला कर लिया है। 2011 और 2015 में विश्व कप में 14 टीमों ने हिस्सा लिया जिनमें 10 फुल मैंबर थे और बाकी चार एसोसिएट। लेकिन अब 2019 में 14 के बजाय सिर्फ 10 टीमें ही हिस्सा लेंगी। इनमें से 8 तो फुल मैंबर होंगे और बाकी दो एसोसिएट। यानी 2 एसोसिएट देशों की छुट्टी हो गई। समझ नहीं आता कि आईसीसी आखिर चाहती क्या है? 2013 में टी-20 विश्व कप क्वालिफाइंग राउंड में 16 देशों ने हिस्सा लिया लेकिन 2015 में इसे घटाकर 14 कर दिया गया।

हर टूर्नामेंट में बार-बार वही पुरानी टीमों के खेलने और बार-बार वही 2-3 टीमों के टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचने के कारण आईसीसी के कई टूर्नामेंट 1 या 2 बार कराने के बाद ही बंद हो जाते हैं। जैसे ICC Champions Trophy और ICC Super Series के साथ हुआ। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की जगह आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप करवाने की घोषणा की गई, लेकिन जनवरी 2014 में उस फैसले को बदलते हुए, फिर से 2017 में इसे करवाने की घोषणा की गई। यानी खुद आईसीसी को ही नहीं पता है कि क्या करें और क्या ना करें। आईसीसी शायद दुनिया की एकमात्र खेल संस्था होगी जो अपने खेल को ज्यादा देशों में ले जाने के बजाय देशों की संख्या कम कर रहा है।

क्या वाकई में ये विश्व कप है?

टी-20 विश्व कप के क्वालिफाइंड राउंड में भी आईसीसी बड़ी मुश्किल से 38 में से 18 एसोसिएट सदस्यों को ही खिला पाती है। जबकि फुल मैंबरों को तो सीधे क्वालिफाई करवा दिया जाता है। यानी दुनिया के 10 प्रतिशत से भी कम देश क्वालिफाइंग राउंड में हिस्सा लेते हैं। क्या इसे वाकई में विश्व कप कहा जाएगा।

दुनिया में 200 से ज्यादा देश हैं जिनमें से सिर्फ 14-16 देश ही क्रिकेट विश्व कप में खेल पाते हैं। इनमें से भी 8-10 तो क्वालिफाइंग राउंड से गुजरे बिना सीधे ही एंट्री पा लेते हैं। यानी पूरी दुनिया के सिर्फ 5 प्रतिशत से भी कम देश विश्व कप में रेगुलर हिस्सा लेते हैं। क्या वाकई में ये विश्व कप है। जबकि फुटबॉल में 30-32 देश हिस्सा लेते हैं और सिर्फ दो देशों को छोड़ (मेजबान और मौजूदा विश्व कप विजेता) बाकी सभी 200 से ज्यादा देशों को हर बार क्वालिफाइंड से गुजरना पड़ता है।

Bangladesh's players celebrate after winning the Asia Cup T20 cricket tournament match against Sri Lanka at the Sher-e-Bangla National Cricket Stadium in Dhaka on February 28, 2016. / AFP / MUNIR UZ ZAMAN (Photo credit should read MUNIR UZ ZAMAN/AFP/Getty Images)

फुटबॉल में ऐसा क्या है जो क्रिकेट में नहीं है।

क्रिकेट की समस्या ये है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड जैसे फुल मैंबरों को कभी भी क्वालिफाइंग राउंड से गुजरना ही नहीं पड़ता। सिर्फ एसोसिएट देशों को ही हर बार क्वालिफाइ करना पड़ता है। जबकि फुटबॉल में मेजबान देश और मौजूदा विश्व विजेता को छोड़ बाकी सभी देशों को हर बार क्वालिफाइंग राउंड खेलकर ही विश्व कप में खेलने का हक पाना होता है। नतीजा कई बार अर्जेंटीना, फ्रांस, इंग्लैंड, इटली जैसी ताकतवर टीमें भी क्वालिफाई नहीं कर पातीं और लोगों की खेल में रुचि बढ़ जाती है।

नीचे दी गई लिस्ट उन बड़े देशों की है जिन्होंने कम से कम 1 बार फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी की है और इतिहास में कम से कम एक बार विश्व कप के लिए क्वालिफाई तक नहीं कर पाए हैं।

देश कब क्वालिफाई नहीं कर पाए
अर्जेंटीना 1970
चिली 1954, 1958, 1970, 1978, 1986, 2002, 2006
इंग्लैंड 1974, 1978, 1994
फ्रांस 1962, 1970, 1974, 1990, 1994
इटली 1958
मैक्सिको 1934, 1974, 1982
रूस 1978, 1998, 2006, 2010
दक्षिण अफ्रीका 1994, 2006, 2014
जापान 1954, 1962, 1970 से लेकर 1994 तक
दक्षिण कोरिया 1970 से लेकर 1982 तक
स्पेन 1954, 1958, 1970, 1974
स्वीडन 1954, 1962, 1966, 1982, 1986, 1998, 2010, 2014
अमेरिका 1954 से लेकर 1986 तक
उरूग्वे 1958, 1978, 1982, 1994, 1998, 2006

 

कम समय के अंतराल में विश्व कप करवाना आईसीसी की मजबूरी भी है, क्योंकि आईसीसी के पास पैसा कमाने के लिए ज्यादा मौके नहीं हैं। लेकिन इसका सीधा सा समाधान है कि वो क्रिकेट को ज्यादा से ज्यादा देशों में फैला दे। अगर आईसीसी दुनिया के हर महाद्वीप में क्रिकेट को फैलाता है तो विश्व कप के अलावा कम से कम 5 नए टूर्नामेंट तैयार किए जा सकते हैं जिनसे आईसीसी को अकूत कमाई हो सकती है। (अफ्रीका कप, लैटिन अमेरिका कप, अमेरिका कप, यूरोप कप, एशिया कप, विश्व कप)

cricket 1

क्रिकेट की हालत ये है कि अगर आज क्रिकेट जगत से भारत हट जाए, तो शायद आईसीसी दिवालिया हो जाए। भारत के बिना आईसीसी दुनिया में शायद ही कोई टूर्नामेंट करवाकर पैसा कमा पाए। जबकि फीफा के साथ ऐसा नहीं है। मेरे 16 साल के अभी तक के करियर में मैंने दर्जनों बार अधिकारियों को ये दुआ करते हुए सुना है कि विश्व कप में भारत फाइनल तक बना रहे, ताकि टूर्नामेंट सफल हो जाए और अगर सेमीफाइनल या फाइनल में भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत हो जाए, तो फिर सोने पर सुहागा। आईसीसी ऐसा क्यों नहीं सोचती कि क्रिकेट आगे बढ़े और जो मजा और मुनाफा भारत-पाकिस्तान मैच से होता है वैसा ही रोमांच उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया, चीन-अमेरिका, अमेरिका-रूस, अमेरिका-कनाडा, सूडान-साउथ सूडान, इस्रायल-फिलिस्तीन, इथोपिया-एरिट्रिया के बीच मैच से हो।

अब तो आईसीसी के पास 90 मिनट के खेल फुटबॉल से मुकाबला करने वाला टी-20 क्रिकेट फॉर्मूला भी है। वन डे क्रिकेट ना सही, टी-20 ही सही। कुछ तो आगे ले जाया जा सकता है। अगर क्रिकेट दुनिया के आधे देशों में खेला जाने लगे, तो टी-20 क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती।

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